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दोस्त की मां

  दोस्त की हॉट मॉम - नवंबर 05, 2020 मैंने ज्यादा लड़कियों के साथ तो सेक्स नहीं किया है, लेकिन जिनके साथ भी किया है, बहुत ही अच्छे से उन्हें चोदा है. मुझे आंटियों को चोदने का बड़ा शौक है. उनके बड़े बड़े मम्मों और बड़े बड़े चूतड़ मुझे अपनी तरफ खींचते हैं. इस वजह से मैं सिर्फ अब आंटियों की चूत लेने की ही फिराक में रहता हूं, लेकिन अभी तक मैंने किसी आंटी की चूत नहीं ली है. क्योंकि मुझे कभी ऐसा मौका नहीं मिल पाया. अब जरा दूसरी तरफ की बात कर लेते हैं. मेरी मां बड़ी ही सीधी हैं, वह सिर्फ अपने काम से मतलब रखती हैं और कॉलोनी में ज्यादा इधर उधर नहीं जाती हैं. जबकि हमारी कॉलोनी की जितनी भी औरतें हैं, सब किटी पार्टी और कहीं इधर उधर जाती हैं, लेकिन मेरी मां को कहीं भी जाना पसंद नहीं है. वह सिर्फ घर में रहना ही पसंद करती हैं और वह काफी शांत स्वभाव की हैं. मेरे पिताजी भी इसी तरीके के हैं. वह भी अपने काम में बिजी रहते हैं और सिर्फ अपने काम से ही मतलब रखते हैं, बाकी उन्हें भी कहीं आने जाने का कुछ ज्यादा शौक नहीं है. कॉलेज में मेरे बहुत सारे दोस्त थे लेकिन सिर्फ कॉलेज तक ही सीमित रहे, सब लोग अपने घर

दोस्त की अम्मी जुबेदा

  मेरा एक दोस्त है राशिद। कॉलेज के जमाने में मेरा उसके घर आना जाना बहुत ज्यादा हुआ करता था। उसके घर में वह उसकी एक छोटी बहन उसकी अम्मी और उसके अब्बू रहते थे। उसकी अम्मी तो कमाल की चीज थी यार चलती थी तो गजब ढाती थी। वह मुझे पहले से ही बहुत पसंद थी क्योंकि वह शरारती बहुत थी। वह मुझे गले भी लगा लेती थी उनके यहां ऐसा करना सामान्य है। मैंने जबसे होश संभाला है तबसे राशिद की अम्मी आबिदा के बदन को देखकर मुठ मारी है। वो लोग बहुत अमीर है। राशिद मेरे साथ फार्मेसी कॉलेज में भी आ गया था जूनियर कॉलेज के बाद… लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर था और बाप के पैसों पर ऐश करते घूमता था। मैं उसके घर जाता था साथ में पढ़ाई करने। वैसे मैं भी घर से अच्छा हूँ लेकिन मुझे कोई फालतू शौक नहीं है मैं उसूलों के आधार पर अपनी जिंदगी जीता हूँ। खैर बात कुछ 3 साल पहले की है जब हमारे रिजल्ट आये थे। राशिद इस बार भी फेल हुआ था, मेरा रिजल्ट बहुत अच्छा था। मैं उसके घर मिठाई लेकर गया था। मई महीना था, उसकी बहन और उसके अब्बू आऊट ऑफ़ टाऊन उसके दादी के घर गए थे। घर में बस उसकी अम्मी आबिदा थी। राशिद सुबह से घर नहीं आया था उसे फोन करने पर

दोस्त की बड़े बडे़ बूब्स वाली अम्मी

  बात तब की है जब मैं पढ़ता था. हमारे ही अपार्टमेन्ट में हमारे फ्लैट के ऊपर मेरा दोस्त रहता था जिसका नाम रोहित था. हम साथ साथ एक ही क्लास में पढ़ते थे और एग्जाम टाइम में उसके घर ही पूरी रात रहता था. उसकी माँ का नाम भावना है जो दिखने में एकदम सेक्सी थी उनके बूब्स की तो क्या बात.. खरबूजे जैसे बड़े थे. वो रात को हमेशा नाईटी में रहती थी और वो ब्रा पहनती नहीं तो उनके बूब्स साफ़ दिखाई देते थे. एक बार की बात है जब मैं और रोहित उसके घर पर स्टडी कर रहे थे तब वो पौंछा लगाने आई, वो झुक कर पौंछा लगाने लगी, उनके पूरे बूब्स नंगे दिख रहे थे, मेरा तो लंड पूरा खड़ा हो गया. मैं छुप कर देख रहा था, तभी भावना ने मुझे और मेरे खड़े लंड को देख लिया और तुरंत वहां से चली गयी. अगले दिन जब मैं उसके घर गया तो वो घर पर अकेली थी और सो रही थी. मैंने देखा रोहित घर पर नहीं था, मैंने उसे फ़ोन किया तो उसने कहा कि वो और उसके पापा आउट ऑफ़ स्टेशन हैं और रात को घर आयेंगे. मेरी तो लॉटरी निकल गयी मानो… मैं भावना के पास गया और देखा तो वो गहरी नींद सो रही थी, मैंने हिम्मत करके उनके बूब्स को टच किया, उन्होंने कुछ किया नहीं. तो मैंने

बहू चुध गई ससुर से

  अब यह नयी कहानी मेरे एक दोस्त ने मुझे बतायी थी अपना ख़ास दोस्त मान कर … उसी से इजाजत लेकर उसकी सच्ची कहानी पेश कर रहा हूँ उसी के शब्दों में… सभी पात्रों के नाम बदले हुए हैं. मेरा नाम अहमद है और मैं मेरठ के पास एक गाँव का हूँ लेकिन अभी मेरठ सिटी में रहता हूँ। अभी मेरी उमर 29 साल की है. मेरा निकाह छह साल पहले हो गया था. मेरी जोरू कौसर बेगम की उमर 26 साल है. मेरी बीवी बहुत ज्यादा खूबसूरत है, हुस्न परी है और उसको देख कर सठियाये हुए बूढ़ों के लटके हुए लंड भी खड़े हो जाते हैं। कौसर जहाँ कहीं से भी निकलती है, सारे मर्दों की निगाहें उसकी तरफ ही रह जाती हैं और कोई ना कोई उससे छेड़खानी भी कर देता है। दोस्तो, मैं आपको अपनी जिन्दगी का एक सच्चा वाकया सुनाने जा रहा हूँ. यह शर्मनाक वाकया होने के बाद भी मैंने कुछ भी नहीं किया क्योंकि मेरे खानदान की इज्जत का सवाल था. इस वाकये ने मेरी पूरी जिन्दगी में उथल पुथल करके रख दी। मेरे अब्बू के घर में मेरी अम्मी के साथ ही मैं और मेरी बीवी रहते हैं। मेरे अब्बू की उमर 50 साल है. मैं और मेरे अब्बू दिखने में एक जैसे ही हैं। बात करीब चार माह पहले की है जब मैं, मेर

च चे री बहेन

  शुरू से ही जूही और मेरी बहुत अच्छी बनती थी, चाची हर छुट्टियों में कुछ दिन के लिए जूही को शहर में हमारे घर भेज देती थी कि वो शहर में रह कर शहर के तौर तरीके सीखे लेकिन अब तो उसकी छुट्टियाँ ही छुट्टियाँ थी क्योंकि गाँव में बारहवीं तक के स्कूल के कारण वो 12वीं तक ही पढ़ी, चाची ने उसकी पढ़ाई रुकवा दी। जूही अब घर में ही रहती थी इसलिये वो शायद इतनी गोरी भी हो गई थी। जूही और मेरी पक्की वाली दोस्ती थी, उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था और मेरी भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी। इस बार भी जूही हमारे घर आई तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि मुझे अकेले रहना नापसन्द था। पर इस साल जूही कुछ ख़ास ही दिख रही थी, उसके चूचे और चूतड़ काफ़ी उभर आए थे, उसके हाव भाव भी बदले हुए थे, वो बहुत कामुक अदाएँ दिखा रही थी। यह सब देख कर मेरे दिमाग की बत्ती जलने बुझने लगी, मेरे दिल में उसके बुर चोदन का ख्याल उठने लगा। जूही दिन भर घर के काम में मेरी मॉम की मदद करती थी और मैं उसे अपनी वासना भरी निगाहों से देखता रहता था। जब वह मॉम के साथ कपड़े धुलवाती तो उसके कपड़े गीले हो जाते और उसकी शर्ट उसकी गांड की दरार में घुस जाती तो मेरा

आंटी का कमर दर्द

  वो ऐसा हुआ कि मैं रोज मॉर्निंग वाक पर जाता हूँ. वहीं पर मेरी इस कहानी की नायिका भी मुझे मिली. वो भी रोज वहां वाक पर आती थीं. चूंकि मुझे ज्यादा उम्र की या आंटी टाइप की महिलाएं बहुत पसंद आती हैं. एक तो वो अनुभवी होती हैं, दूसरी बात ये कि वो किसी तरह की कोई नखरा नहीं करती हैं … और भरपूर प्यार भी देती हैं. आपको तो मालूम ही है कि मुझे लड़की की चूत चाटना बहुत अच्छा लगता है और बड़े बड़े चूचों को चूसना भी मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसीलिए मैं कोशिश करता हूँ कि अपने से बड़ी उम्र की औरतों के साथ चुदाई की मस्ती करूं. उन आंटी की नाम आशा था. उनकी उम्र ब्यालीस साल की थी. उनकी चुचियां 38 D साइज की थीं और यही मुख्य वजह थी कि मैं उन आंटी की ओर आकर्षित हुआ. मैं जिस समय वाक पर जाता था, वो आंटी भी उसी टाइम वाक पर आती थीं. मैं जानबूझ कर उनके विपरीत दिशा में घूमता था ताकि मुझे उनके और उनके मस्त चुचों के दर्शन हो सकें. पार्क में छोटा राउंड होता था और जल्दी जल्दी ही मुझे उनको देखने का अवसर मिलता था. जब भी वो मेरे सामने आतीं, मैं बड़े गौर से उन्हें और उनके मम्मों को घूरता था. उनके पास से गुजरते समय मैं एक स्माइ

शायजॉ कि जवानी

  मेरी उम्र 23 साल की है. मैं एक जिम में जॉब करता हूँ. मैं देखने में सांवला हूँ पर हट्टा-कट्टा लड़का हूँ और एकदम फिट हूँ. ये सेक्स कहानी मेरी और एक शादीशुदा औरत शाजिया की है, जो मुझसे उम्र में 3 साल बड़ी है. शाजिया जिम के ठीक सामने ही अपने घर में रहती थी. एक बार मैंने उसको बुर्के में देखा था. उसकी आंखें देखकर ही मैं उस पर फिदा हो गया था. पर कुछ करने की मेरी हिम्मत नहीं होती थी … क्योंकि वो अलग समुदाय से थी. फिर मेरा एक दोस्त है शरद. मैंने उसे शाजिया के बारे में बताया. तो उसने भी साजिया के मदमस्त यौवन को बुर्के के ऊपर से ही निहारा और मुझसे कहा- हां यार, माल तो कंटाप है. हम इसे पटाने की कोशिश कर सकते है. अगर पट गई तभी इसके साथ मजा लेना ठीक रहेगा. वरना लफड़ा हो सकता है. उसकी बात से मैं सहमत था. क्योंकि मुझको उसकी रजामंदी से ही उसकी चुदाई करने का मन था. मैंने मालूम करना शुरू किया, तो पता चला कि शाजिया की शादी को लगभग 4 साल पहले हुई थी. अब तक उसके बच्चे भी नहीं हुए थे. जबकि इस समुदाय में तो बच्चे पैदा करने में देरी ही नहीं होती है. ये जानकारी हुई तो लगा कि इसके पति में कुछ कमी होगी. बस इसी