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मेरी no 2 बुवा

  एक रात हमारे यहाँ मेरी छोटी बुआ आई। मुझे अगले दिन उसको लेकर एक गाँव की शादी में जाना था। वो मुझसे बहुत बड़ी थी पर लगती एक दम सोलह साल की जवान थी। जिसे देखकर किसी का भी मन डोल जाए। मेरी बुआ के लंबे बाल थे और रंग एक दम गोरा था। चूची भी बहुत बड़ी थी। वो अक्सर मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती थी। उस दिन उसने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। वो टाइम गर्मी का था। घरवाले सभी शादी में जा चुके थे। मैं घर पर अकेला ही था। वो जैसे ही घर पर आई तो बोली- आज गॅप गर्मी बहुत है जा तू घर का गेट बंद करदे और अपने कमरे का एसी चला दे। मैं गया और गेट बंद करके आया। मैंने अपने कमरे का एसी चला दिया। मेरी बुआ कमरे में आई और उसने एक दम अपना साडी का पल्लू हटा दिया। और कुर्सी पर बैठ गयी फिर उसने पूछा के मम्मी पापा कब गये? पर मैं तो उसके ब्लाउज से उसकी चूची को देख रहा था। ब्लाउज इतना टाइट और हल्का था की उसकी सफेद ब्रा ब्लाउज के अंदर साफ दिख रही थी और चूची एक दम कसी हुई थी। मानो चूची ब्रा और ब्लाउज को फाड़ना चाहती हो। बुआ रात को भी ब्रा ही पहनकर सोती थी। बुआ मुझसे बोली तेरा ध्यान किधर है एक दम मैंने उनकी आँखो की तरफ देखा व

मेरी no १ बुवा१

  जब हम शादी में से वापस आए तो मैंने सोचा कि अब मैंने बुआ के साथ ऊपर का मजा ले लिया। फ़िर मुझे लगा कि यार ये सब ग़लत हो रहा है। रानी मेरी बहन लगती है उसके साथ किया। गौरी मेरी बहन लगती है उसको भी चोदा। और ये भी मेरी बुआ लगती है इसको भी ऊपर से चोद दिया। इसीलिए मैंने सोचा के अब मैं रानी, गौरी और बुआ के साथ नहीं करूँगा। और मैंने इनके बारे में ग़लत सोचना छोड़ दिया। लेकिन, कुछ दिनों के बाद बुआ का फोन मम्मी के पास आया। मम्मी ने मुझे बताया के मुझको रात में बुआ के घर जाना है क्योंकि फूफा जी और उनका लड़का एक शादी में गये हैं। मैं फिर बुआ के घर चला गया। मैं जब बुआ के घर में घुसा तो बुआ सामने ही बैठी थी। उस ‍‍दिन उसने काली साड़ी और काला ब्लाउज पहन रखा था। मैं सामान्य था क्योंकि बुआ, गौरी और रानी का ख्याल मन से निकाल चुका था। बुआ उठी और मेरे लिए खाना लेकर आई। हम खाना खाने बैठ गये। खाना खाते वक्त बुआ ने अपनी साड़ी को उपर किया और बुआ इस तरह से बैठ गई कि मुझे उसकी चूत दिखाई दे। पर मैंने ध्यान नहीं दिया। ख़ाने के बाद बुआ बोली- रात के दस बज गये हैं, अब सो जाते हैं। मैं बेड पर लेट गया और बुआ भी मेरे बराबर म

दीदी ने मुझे चुदाया

मैं उन दिनों अपने चाचा के यहाँ आई हुई थी। मैं एम ए की छात्रा थी। चाचा बिजनेस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिये दिल्ली गये हुए थे। चाची घर पर ट्यूशन पढ़ाती थी। चाची का नाम सुमन था। उनकी उम्र 35 वर्ष की थी। उसके पास कोलेज दो के छात्र पढ़ने आते थे। रवि और सोनू नाम था उनका। दोनों ही 20- 21 वर्ष के थे। मुझे पहले दिन से ही वो हाय हेल्लो करने लगे थे। उन दोनों से मेरी जल्दी ही दोस्ती हो गयी थी। ऊपर का कमरा खाली था सो सुमन उन्हे वहीं पढ़ाया करती थी। एक बार जब सुमन ट्यूशन पढ़ा रही थी तब मैं किसी काम से ऊपर कमरे में गयी। जैसे ही मैं कमरे के पास पहुचीं तो मुझे सिसकारी की आवाज सुनायी पडी। मैं सावधान हो गयी। तभी मुझे फिर से हाऽऽय की आवाज सुनायी पडी। मैंने धीरे से खिडकी से झांक कर देखा। वो लडके सुमन की चूचियाँ दबा रहे थे। सुमन ने पेन्ट के ऊपर से ही एक का लण्ड पकड रखा था। सुमन बार बार आनन्द से सिसकारियाँ भर रही थी। मैं दबे पांव पीछे हट गयी और नीचे उतर आई। मेरे सारे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी थी। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी। मेरी सांसे तेज चल रही थी। मेरे मन में उत्तेजना भरने लगी थी। मुझसे रहा

ऑफिस की कामवाली

  मेरे दफ़्तर में एक मधु नाम की लड़की थी। वो सच में बला की खूबसूरत थी। जब से वो मेरे दफ़्तर में काम करने के लिए आई, मैं तो बस उसको ही देखता रहता था। उसकी फ़ीगर कमाल की थी और लम्बे लम्बे बाल थे। उसके बड़े बड़े बूब्स देख कर तो मैं पागल ही हो जाता था और हर वक्त सोचता रहता था कि कब मैं इन बूब्स को चूस पाऊंगा। मैं अपने केबिन से छिप छिप कर उसको देखता रहता और उसके साथ सेक्स करने के सपने देखता रहता था। उसने भी मेरी यह बात पकड़ ली थी मैं उसको देखता रहता हूँ लेकिन उसने कभी कुछ नहीं कहा। शायद वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित थी। लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे सारे सपने सच हो गए। हुआ यूं कि एक दिन मधु मेरे केबिन में आई और उसने मुझे कहा कि उसे वेतन के अलावा कुछ और पैसों की जरूरत है और वो ये पैसे धीरे धीरे वापिस कर देगी। लेकिन मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता था इसलिए मैंने उसे कहा कि अगर वो मुझ पर विश्वास करती है तो मैं उससे अकेले में मिलना चाहता हूं। वो मान गई। मैंने उसे घर आने को कहा और कहा कि पैसे मैं घर पर ही दे दूंगा। अगले तीन दिन के लिए दफ़्तर बंद था और मेरे घर वाले भी बाहर गए हुए थे इसलिए मैंने उसे अगले दिन सुब

मेरी मकान मालकिन

  सर्दियों के दिन थे, मैं घर में अकेला था, जब मुझे सेक्स के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। मैं बहुत शरमीला था खासकर कि लड़कियों और औरतो से। सुबह का खाना तो आंटी दे गई थी। रात को उन्होंने अपने पास बुलाया खाना खाने के लिए। रात का खाना खा कर आंटी सो गई। आन्टी भी घर में अकेली थी। अंकल रात में खेत पर गए थे। मैं अपने कमरे में था। पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं आंटी के कमरे में गया तो मैंने देखा कि आंटी लहंगा और ब्लाऊज़ में सो रही थी। उन्हें देख कर मेरे शरीर में कम्पन से होने लगी। मेरा धीरे धीरे आंटी की तरफ बढ़ने लगा। मैं अपने आप को आंटी की तरफ़ जाने से रोक नहीं पा रहा था। आंटी देखने में बिल्कुल मस्त थी। मेरा लण्ड आंटी को देखते ही खड़ा हो गया था। मेरा एक हाथ आंटी की टांग पर गया और धीरे धीरे आंटी के चूतड़ों तक पहुच गया। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया. इतने में ही आंटी जाग गई। जैसी ही आंटी जगी मैं वहाँ से भाग लिया और अपने कमरे में आ गया। थोड़ी देर बाद आंटी मेरे कमरे में आई और आते ही मुझ पर चिल्लाई- तुम क्या कर रहे थे? मैं एकदम डर गया, मेरा चेहरा लाल हो गया। मैं चुप रहा, आंटी मन ही मन खुश हो रही थी! मै

पड़ोस की आंटी

  मैं शाम को अपने दोस्त के यहाँ से आ रहा था. घर पे आकर देखा तो घर पे ताला लगा था. मैं अपनी पड़ोस वाली आंटी के यहाँ चाबी के लिए पूछने गया तो पता चला कि चाबी उसका बेटा कहीं रख के चला गया है और वो घर में अकेली है. आंटी ने मुझे ड्राइंग रूम मैं बैठने को कहा और ख़ुद बाथरूम में कपड़े धोने चली गई. मैं ड्राइंग रूम में बैठा बोर हो रहा था इसलिये मैं भी बाथरूम के पास जा के खड़ा हो गया और आंटी से बातें करने लगा. बातों बातों मैं आंटी मुझ से मेरी गर्लफ्रेंड के बारे मैं पूछने लगी. मजाक में मैंने कह दिया कि आंटी मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है और मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शर्म आती है. ये सुन कर आंटी ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी और गलती से पानी कपड़ों पे डालने की जगह अपने ऊपर डाल लिया जिस कारण उनका ब्लाऊज़ गीला हो गया और उनकी चूची दिखने लगी. शायद उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी. मैं उनके मस्त चूचों को घूरने लगा. मुझे घूरता हुआ देख कर आंटी बोली- तुम लड़कियों से बातें करने मैं शरमाते हो पर उनके चुचे देखने में नहीं शरमाते? यह सुन कर मैं हंसने लगा और फिर से उनके चूचों को घूरने लगा. मुझे घूरता देख कर आंटी ने कहा-

पड़ोसन ने मुझे नंगा देख कर

  एक बार मैं अकेले घर पर था, उस दिन मेरे घर पर कोई नहीं था। मैं सेक्सी बुक देख रहा था, मेरा लंड खड़ा था मेरे घर का दरवाजा खुला था। तभी पड़ोस में रहने वाली भाभी जी अन्दर आ गयीं और मुझे लगा कि कोई आ रहा है। मैंने शीशे में देख लिया कि भाभी खड़ी मुझे देख रही थी। मैने अपना मोटा लाल और चिकना लंड अपने हाथ में पकड़ रखा था। मैने कुछ नहीं पहना था, एक दम नंगा था। भाभी बहुत ध्यान से देख रही थी। मैंने लंड को और ऊपर कर दिया अब भाभी को मेरा लम्बा लंड साफ़ दिख रहा था, वो मस्त हो रही थी। बहुत देर देखने के बाद भाभी ने आगे आकर मुझे पीछे से पकड़ लिया। मैं खड़ा हो गया। मेरा लंड भाभी के पेट में गड़ने लगा। तभी वो देख कर बोली कि कितना सेक्सी है तुम्हारा लण्ड! और झट से पकड़ लिया। वो बोली तुम्हारा तो तुम्हारे भाई से भी मोटा है! तुम भी प्यासे हो और मैं भी, चलो दोनो की प्यास बुझ जायेगी. तुम्हारे भाई का तो ठीक से खड़ा भी नही होता, और खड़ा भी होता है तो जल्दी ही झड़ जाता है। इतना सुनते ही मैंने भाभी को पकड़ लिया और उन्हें बेड पे लिटा दिया. तभी भाभी ने कहा अभी दिन में कोई आ जाएगा, मैं रात में आ जाऊंगी तब जी भर के एक दूसरे