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मेरी पडोसन सिमरन

मेरा नाम विनोद है मेरी उमर २८साल है। दोस्तों अब मैं तुम्हे अपनी सच्ची कहानी बता रहा हूं। मेरा दोस्त रवि और राज है उसमें से रवि तो बहुत ही हरामी है। पिछले साल हमारे पड़ोस में एक मुस्लिम औरत और उसका पति रहने आया। औरत का नाम शबनम था, वो क़रीब 30 साल की थी। हम दोनों में काफ़ी अच्छी बोलचाल थी। वो मुझे अपना फ़्रेंड मानती थी। एक दिन मैं शबनम के घर गया, वो अपने घर के कपड़े धो रही थी पर उसका आधा स्तन सामने से बाहर निकला हुआ नजर आ रहा था। मेरा लंड एक दम फ़ूल गया। शबनम ने मुझे देखा और अपने मम्मे छुपा लिया। मैंने उसे ऐसी नजर से नहीं देखा था। शाम को मैं और रवि घर के बाहर खड़े हुए थे।शबनम झाड़ू मार रही थी और मुझे फिर उसका ब्लाऊज़ में से उसके उरोज दिखे। रवि उसे देख कर बोला कि इतना बढ़िया माल हमारे पास है और हमारी उस पर नजर ही नहीं है। वो एक दिन शबनम और हम तीनों को घुमाने ले गया। सारिका का पति उस समय बाहर गया हुआ था। उस दिन काफ़ी रात हो गयी थी। हम सब अपनी वैन में ही थे। शबनम तो कार पर ही बैठे बैठे सो गयी थी। उसका पल्लू नीचा हो गया और डीप गला होना के कारण शाबनम का आधा मोमा नज़र आने लगा। स्पीड ब्रेकर

मेरी हॉट मोम और दादाजी

  एक मेरी माँ और दूसरा एक इन्सान मेरे दादाजी जिसकी उमर साठ साल की है। यह कहानी वैसे तो कुछ पुरानी है लेकिन मेरे सामने जब भी वो दिन याद आता है तो मुझे ऐसा लगता है कि यह कल की ही बात है। मेरा नाम विनोद है हमांरे परिवार में मैं, माँ और पापा हैं। मेरे पापा ड्रायवर हैं, वो कई कई दिनो तक बाहर रहते हैं…। वैसे भी हमांरे सारे सम्बन्धी गांव में रहते हैं, हम साल में दो या तीन बार जाते हैं। वहाँ हमांरे दादाजी रहते हैं, उनकि पत्नी की मौत के बाद वो अकेले ही रहते हैं। हम रमजान में गाँव जाने वाले थे। पापा भी आने वाले थे लेकिन उनको कुछ काम आ गया तब उन्होंने हम दोनों को गांव जाने के लिये कहा। माँ ने कहा- ठीक है। तब मैंने देखा कि माँ खुश थी और पैकिंग करने लगी। हम लोग सुबह की ट्रेन से गाँव पहुँच गये। वहाँ दादाजी हमें लेने के लिये आये हुये थे। माँ उनको देख कर खुश हो गई और दादाजी भी खुश हुए, उन्होंने पूछा असलम नहीं आया? माँ ने कहा- उनको कुछ काम आ पड़ा है, वो दो तीन दिन बाद आयेंगे। और दादाजी माँ को देखते रहे और माँ भी उनको देखते रही। मुझे कुछ दाल में काला नजर आया… हम लोग बैलगाड़ी में बैठे और दादाजी ने मुझे क

मेरी पड़ोसन सलमा

  मै नागपुर में जब झोपड़ पट्टी के इलाके में रहेगा था. मेरे घर के सामने ही एक लड़की रहती थी जिसका नाम था सलमा। उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को देखकर अक्सर मेरा लण्ड पैन्ट में अकड़ने लगते था और मैं सोचता था कि कब चोदूंगा ? उपर वाले ने मौका दे ही दिया उसकी चुदाई का ! मैं आफिस से आ रहा था। अँधेरा हो गया था। अचानक पीछे से किसी के बुलाने की कोशिश कर रही थी, मेरे पीछे सलमा डार्लिंग खड़ी थी। वो मेरे पास आके बोली कि असलम मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ। मैंने कहा- हाँ बोलो ! तो उसने कहा- तुम मुझे पसंद हो ! मैं तो पागल हो गया। मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे जोर से अपने सीने से लगा कर उसके होठों को चूस लिया, उसकी चुचियाँ मेरे सीने में घुसी जा रही थी। मगर मुझे डर लग रहा था कि कोई हमें देख न ले। तो मैंने उसका हाथ पकड़ा और झाड़ी की तरफ़ ख़ींचा और झाड़ी में जाते ही मैंने उसके होठों को अपने होठो में दबा कर चूसना शुरू कर दिया। अब वो भी गरम हो रही थी, सलमा मेरे बदन से जोर से लिपट गई और मेरे लंड उसकी गान्ड को उपरसे ही चोदने के लिए फड़फ़ड़ाने लगा। मैंने अपना एक हाथ सलमा की कुर्ती में डाला और उसके चुचियों को पकड़ना चाहा, मगर म

बस में दोनो के बीच में

  हैलो दोस्तो में विनोद कुमार आपके लिए एक बड़ी आच्छी कहानी लेकर आया हूं आप लोगो को मालूम है की मुझे ज्यादातर बड़ी उमर कि औरत में दिल चस्पी है। २५ साल का एक साधारण लड़का हूँ। मेरी दिलचस्पी ४० साल या उससे ज्यादा उम्र की औरतों में है, इसके दो कारण हैं, एक तो इन औरतों की गांड काफी मोटी और चूची काफी बड़ी होती है, दूसरे अगर कभी इनकी ब्रा दिख रही हो या सलवार का नाड़ा ढीला हो तो ये १०० लड़कों के बीच में उसे ठीक करने में नहीं शर्माती। अगर कभी इनकी गांड में ऊँगली डाल दी जाये या हाथ फेर लिया जाये या चूची दबा दी जाये तो इन्हें महसूस नहीं होता और अगर होता भी है तो नज़र-अंदाज़ कर देती हैं क्योंकि इनकी चूत तो पहले से ही फटी होती है। अगर आपकी दिलचस्पी इनमें नहीं भी है तो भी मेरी कहानी पढ़ो और फिर आपका लोड़ा भी मेरी तरह हर वक़्त इनकी मोटी गांड देख कर खडा हो जायेगा माल उगलने के लिए। दोस्तों ये घटना तब घटी जब मैं बस से सफ़र कर रहा था और बस में बिलकुल भी जगह नहीं थी। अचानक से बस एक स्टाप पर रुकी और आप विश्वास नहीं करेंगे पूरी की पूरी बस खाली हो गयी पर मुझे अभी भी सीट नहीं मिली थी। मैं सोच रहा था आज किस्मत ख़राब

मै कॉलेज की लड़की बस का सफर

  मेरा गांव एक चोटासा था।हमारे गाँव में बहुत से कच्चे मकानों के बीच हमारा मकान पक्का है जिसमें मेरा, मेरे भाई का, मम्मी पापा का सबका अलग अलग कमरा है। एक रात की बात है, मैं लगभग 12 बजे बाथरूम जाने के लिए उठी। बाथरूम मम्मी के कमरे को पार करने के बाद पड़ता है। जब मैं उस कमरे के सामने से गुज़री तो मुझे मम्मी के कराहने और ज़ोर ज़ोर से सांसें लेने जैसी आवाज़ें सुनाई पड़ी। मैं एक बार को तो डर गई, पर मैंने हिम्मत रखते हुए चाबी के छेद से झांका तो मैं दंग रह गई। कमरे में पापा मम्मी बिल्कुल नंगे खड़े थे। पापा मम्मी की चूचियाँ दबा रहे थे और बार बार उनके चूतड़ों पर जोर से चपत सी मारते जा रहे थे। पहले तो मेरी समझ में कुछ भी नहीं आया पर फ़िर मैंने ध्यान से देखा कि पापा मम्मी से चिपटे हुए हिल भी रहे थे। तभी वे थोड़ा सा घूमे तो मेरी बुद्धि घूम गई। पापा ने अपना लण्ड शायद मम्मी की चूत में डाल रखा था और वहीं धक्के मार रहे थे। मेरी समझ में कुछ कुछ आने लगा था। मेरी कोलेज़ की सहेली ने एक बार मुझे अपनी चुदाई की कहानी सुनाई थी। आज़ अचानक वही चुदाई मुझे अपने घर में होती दिखाई दी। पता नहीं क्यों, पर वो नज़ारा देख कर मेरी चूत

बस में सलमा

मैं एक बार मुम्बई से नागपुर जा रहा था। मैं बस में दो वाली सीट पर जा कर बैठ गया। सर्दियों के दिन थे, बस खाली पड़ी थी। अचानक एक बड़ा सारा परिवार बस में चढ़ गया, वो कोई 14/15 जन थे। मेरे बगल वाली सीट पर एक 21/22 साल की लड़की बुर्के में आ कर बैठ गई। जब बस चली तो मैं उसके मम्मों पर हाथ लगाने की जुगाड़ बना रहा था कि मैंने महसूस किया कि मेरी टांग पर वो अपनी टांग मार रही है। उसने शॉल ओढ़ी हुई थी। मैंने डरते डरते अपनी कोहनी उसकी चूची पर दबाई वो हंस पड़ी। मेरी हिम्मत और बढ़ी, मैं कुछ देर कोहनी से ही उसके चूचे दबाता रहा। फिर मैंने धीरे से अपना हाथ शॉल के अन्दर बढ़ाया। अब मैं उसकी चूची को मसलने लगा। मेरा लण्ड भी अब तैयार हो चुका था। बस नाशिक पहुँच चुकी थी। मैंने अपना बैग टांग पर रख लिया। उसका हाथ अब मेरा लण्ड सहला रहा था। हम दोनों बहुत देर तक ऐसे ही मज़े करते रहे मगर अब तो उसे चोदने की इच्छा थी मगर कोई जुगाड़ नहीं बन रहा था। तभी बस कोसी में एक ढाबे पर रुकी। मैं टॉयलेट गया। तभी मेरा दिमाग चला कि बस तो करीब 60 मिनट रुकेगी। मैं झट मूत कर बाहर आया और उसे इशारा करने लगा। वो चाय लेने के बहाने अपने भाई के

ठंड में सफर

  मेरा नाम विनोद है, मैं मुंबई में रहता हूँ और मार्केटिंग का काम होने की वजह से मैं हमेशा घूमता रहता हूँ। सर्दियों के दिन थे, मैं काम से दिल्ली गया था और वहाँ काम पूरा होते ही मुझे तुंरत आगरा जाना पड़ा। दोस्तो, कहानी अब शुरु होती है। मैं दिल्ली के सराय काले खां बस स्टैंड पहुँचा, रात के करीब साढ़े दस का समय था। सर्दियों की वजह से सन्नाटा छाया था। दिल्ली से आगरा जाने वाली बस में मैं बीच वाली सीट पर जाकर बैठ गया। बस पूरी खाली पड़ी थी। थोड़ी देर में दो चार लोग आगे आकर बैठ गए। थोड़ी देर में बस निकली, तभी एक महिला बस में चढ़ी, उसने बस में नज़र दौड़ाई और वो भी बीच वाली सीट में आकर बैठ गई। मेरा ध्यान उस पर ही था, उसने काले रंग की साड़ी पहनी थी, साड़ी में वो क़यामत लग रही थी। उसने सिर्फ एक नज़र मेरी ओर देखा और फिर नज़र हटा ली। एक तो सर्दी का मौसम, बस में अँधेरा और एकांत! मैंने सोचा कि जो अगर यह मौका दे तो बस में ही इसे जमकर चोद डालूँ। थोड़ी देर में टिकट देकर कंडक्टर चला गया, आगे वाले जो दो चार लोग थे वो सो चुके थे। अब बस की सारी बत्तियाँ बुझ चुकी थी। मेरा ध्यान उस पर ही था। वो थोड़ी झुककर बैठी थी तो उस