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दोस्त की शादी में मिली लड़की कहानी

  उस वक्त  की कहानी है जब मैं अपने दोस्त की शादी में यु पी  गया था, शहर ही था एक तरह से वो। मेरे दोस्त के बाजु वाले घर में एक लड़की रहती थी, उसका नाम सरिता था, 18 साल की उमर होगी, छोटे-छोटे चूचे, मस्त पीछ  वाडा  गोरा शरीर ! जब से मैं गया था वो मुझे देखती रहती थी। दो दिन से ऐसा ही होता रहा। तीसरे दिन मैंने उसको इशारा कर दिया. रात का अन्धेरा छाने लगा था, सब लोग काम में लगे हुए थे, मैंने उसे उपर आने का इशारा किया। वो आ गई। वो आई तो मैंने पूछा- तुम मुझे देखती क्यों रहती हो? उसने कहा- तुम मुझे अच्छे लगते हो! मैंने भी कहा- मैं भी तुझे पसंद करता हूँ। मैंने तभी अचानक से उसे दबाकर कर चूमा लिया। उसने भी बदले में मुझे चूमा और नीचे भाग गई। शादी से एक दिन पहले की कहानी है, रात के 10बजे  थे, सब सो गए थे, मैं और मेरा दोस्त जगह न होने के कारण गच्छीके उपर सोने चले गए। छतके  उपर भी लोग सोने लगे थे, छतभी  पूरी  भरी हुई थी। दोस्त को तो जगह मिल गई, मुझे जगह नहीं मिली तो बाजु वाली छतसे    ध्वनि सुनाई दिया, जगह नहीं है तो हमारी छतके  उपर आ जाओ। वो ध्वनि सरिता के पापा की थी। तो मैं बिछाना लेकर उनकी छतपे

मुझे ट्रेन की सीट चाहिए

  मैं नागपुर का रहने वाला हूँ, मुुंबई में नौकरी करता हूँ। अभी डिसेंबर के महीने में मैं विदर्भ एक्सप्रेस से नागपुर जा रहा था। मेरा साइड लोअर बर्थ था। ट्रेन निर्धारित समय से थी। मैं अपना सामान लेकर अपनी सीट पर जाकर बैठ गया। थोड़ी देर में एक 24/25 साल की लड़की मेरे सामने आकर बैठी। उसका साइड अपर बर्थ था। बला की खूबसूरत थी वो । उसकी चूचियाँ बड़ी मस्त थी। बार-बार मैं उसकी चूचियाँ देख रहा था, नजर नहीं हट रही थी। ट्रेन लगभग 9 बजे चली। तब तक हमने एक दूसरे से बात करना शुरू कर दिया था। वो ऍम सी ए करने के बाद मुम्बई में किसी सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब कर रही थी। हमने कम्बल से अपना पैर ढक लिए क्योंकि सर्दी बहुत थी। रात को आठ बजे हमने खाना खाया। खाना खाने के बाद वो बोली- क्या आप उपर के बर्थ पर सो जायेंगे? मैं तैयार हो गया और सोने जाने लगा। तो वो बोली- अभी से क्या सोना, थोड़ी देर बात करो। हमने कम्बल अपने पैरों पर फ़ैला कर बात करना शुरू किया। मेरा ध्यान बार बार उसकी चूचियों पर जा रहा था, जो उसके स्वेटर पर से भी काफी बड़ी लग रही थी। जब मैं उसकी चूचियों को देखता तो वो मुस्कुरा देती, इससे मेरा हौसला और बढ़

मेरी मोटी अम्मी नहा रही थी

  मेरा एक दोस्त इरफान जब मेरे को मिला और मुझे पूछा कि तुम स्टोरी काफी अच्छी लिखते हो। एक मेरे साथ घटना हुई थी। उसके ऊपर एक स्टोरी लिखो। मेने बोला ठीक है।बोलो; रात मैंने अपनी अम्मी को अब्बू से चुदती देखा। अम्मी को पूरा मजा नहीं मिला था। तो मैंने अम्मी की ख़ुशी के लिए क्या किया? अब की माँ सेक्स स्टोरी हिंदी मेरे दोस्त इरफान की है। उसी के शब्दों में सुनें! दोस्तो, अब मैं एक सेक्स कहानी लेकर आया हूँ। मैंने अपनी अम्मी के साथ चुदाई की थी ये वही माँ सेक्स स्टोरी है। मेरा नाम इरफान है। मेरे घर पर मेरी अम्मी अब्बू, मैं, मेरी बहन ही रहते हैं. बाकी परिवार के चाचा ताऊ वगैरह सब गांव में रहते है। मेरे पिताजी के पास बहुत प्रोपर्टी है, हम बहुत पैसे वाले हैं। मैं आपको सीधे उस तरफ ले चलता हूँ जहां चुदाई का रस बिखरा पड़ा है। एक बार जब मेरी अम्मी सलमा योगा कर रही थीं, तो मैंने उन्हें ध्यान से देख रहा था । मैं बस अम्मी को देखता ही रह गया। सच में क्या फिगर है मेरी अम्मी का … बहुत बड़े बड़े चूचे. वैसे ही बड़े बड़े चू तड। सच में मेरी अम्मी की गांड भी बड़ी है। मेरे सारे पड़ोसी बस उन्हें इसीलि

मालकिनके साथ उनकी बेटी मुफ्त मिली

मेरा नाम विनोद कुमार मैं नागपुर के गंगा जमुना के पास सर्णा नगर मे अकेला रहता हूँ। मेने घर रेंट पे लिया है। मकान मलिक की मृत्यु हो गई थी। और घर मे बस आंटी और उनकी लड़की(रज्जो) जिन्हे मैं दीदी कहता था रहते थे। ह्म दोनो की फॅमिली मे अच्छी बनने लगी। पर मैं बहुत शर्माता का था तो उनलोगो से बात नहीं करता था। एक बार मेरी माम्म घर आई कूच दिनों के लिए। एक बार की बात है बार दीदी कही शादी मे गई थी तो सुबह आने वाली थी तो आंटी ने कहा की मैं उनके यहा सोने आ जाऊं क्यों की आंटी को डर लगता था अकेले सोने में। मम्मी ने मुझे भेज दिया। आंटी की उम्र 45 साल थी। और चुचे बड़े थे पर उतने टाइट नहीं थे। पर मुझे फ़र्क नि पड़ता क्यूकी कैसे व हों चोदने मे हमेशा मूठ मरने से ज़्यादा ही मज़ा आता है। मैं गया तो उनलोगो क पास एक ही बेडरूम था। तो हम और आंटी दोनो बेड के एक कोने पर सो गये। आंटी ने नाईटी पहनी थी। शायद वो शर्मा रही पर डर लग रहा था इसलिए मुझे बुला लिया था। और एकदम किनारे पर सोई थी बेड के। की तभी फिसल क बेड से नीचे गिर गई। मैं तुरंत उनके पासा गया और तुरंत उनके कमर मे हाथ डाल के उठाने लगा मैने सोचा इसी बहाने छूने

मकान मालकिन की दो बेटियां

  मेरा नाम विनोद कुमार है। नागपुर में रहता हूँ। पढाई करता हूँ। मैं एक किराये के मकान में रहता हूँ। एक छोटे से मकान के ऊपर सेकंड फ्लोर पर रहता हूँ। फर्स्ट फ्लोर और ग्राउंड फ्लोर पर मकान मालकिन और उनकी दो बेटियां रहती है। मकान मालिक का चक्कर था किसी से वो उसके साथ भाग गया है । वो आता भी नहीं है। मेरी मकान मालकिन का अपना चोतिसी किराना दुकान है । वही चलाती है उसकी दो बेटियां उनकी उम्र एक की 22/23  है। दोनों जवानी की रस में सराबोर है हुस्न के जलवे हमेशा बिखेरती रहती है। दोनों एक से बढ़कर एक सेक्सी है। मैं तीनो को देखकर सोचकर मूठ मारता था । पर समय ने करवट बदला और एक एक कर के मेरे से चुदवाने लगी। और मैं आजकल धरती पर ही आकाश कि  सैर कर रहा हूँ। तो सोचा अब क्यों ना आपको भी अपनी ये कहानी सूना दूँ एक दिन की बात है। मकान मालकिन रात के करीब 11 बज रहे थे। उस समय  आकर और बोली की विनोद जी, आप तो इंजीनियरिंग कर रहे हो आप मेरे दोनों बेटियों को कुछ रास्ता लगा दो ताकि वो आगे जा सके। मैंने उनको कुछ कोर्स बताये की ये कर लेने पर आगे काफी स्कोप है। पर उसके लिए कोचिंग की जरुरत थी और उनके पास इतने पैसे नहीं थे।

चाची का रेशमी सलवार

  नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम विनोद कुमार है। मैं महाराष्ट्र का रहने वाला हूँ। यह कहानी मेरी और मेरी चाची के बिच के नाजायज सेक्स संबंध की है। यह बात 7 साल पहले की है, जब मेरे चाचा की शादी हुई थी। मैं उस वक्त 18 साल का था।हमारा परिवार था। घर में मैं अकेला लड़का था, बड़ी बहन की शादी हो चुकी थी। इसके अलावा मेरे पापा माँ और चाचा चाची थे। जब चाची घर आईं तो मैं उनकी बड़ी इज्जत करता था। पर कुछ साल बाद मेरा नजरिया बदल गया। जब वो घर में नलकूप के पास कपड़े धोती थीं, तो उनके चुचे बाहर की तरफ निकल कर दिखते थे। मैं चाची के उन मम्मों को छिपी निगाहों से देखता रहता था, पर चाची को इस बात का पता नहीं लगता था। कुछ दिनों बाद मेरे दिल में आया इनको कैसे बताया जाए कि मैं इनको चोदना चाहता हूं। मुझे डर भी लगता था कि कहीं किसी को पता लग गया तो मैं तो गया। मैं सारा दिन स्कूल से आ कर उनके पास ही बैठा रहता था और उनके बिस्तर पर सीधा लेट जाता ताकि वो मेरे पेंट में से मेरे लंड का तनाव देख सकें। पर मेरी चाची मेरे लंड को फूलता देख कर अनदेखा कर दिया करती थीं। अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। मैंने मुठ हीला हीला कर क

५५ साल का मदनलाल

  यह स्टोरी काल्पनिक हैं।आप लोगो को जरूर पसंद आएंगी।में जब नागपुर में रहता था । हमारे मोहले में मदनलाल जी रहते थे। बाहर उनका बंगला था।३००० स्केयर फुट में बनाया था । उसमे १२ रूम बनाए होंगे। मदनलाल की औरत की मौत १ साल पहले ही गई थी।तब से ओ अकेले ही रहा करते थे।मदनलाल ने सोचा कि इतने बड़े मकान में अकेले रहने से अच्छा की कोई भाड़ेकरू मिल जाए तो अच्छा रहेगा। मदन लाल जीने पेपर में इशतीहर डे दिया। फिर क्या था इतना अच्छा मकान कोई छोड़ सकता भला।मदनलाल जी उमर ५५लेकिन दिल बचपन का था।कोई कमरा देखा ने को आता तो मदनलाल औरत रही तो ही अच्छे से बात करता था।नहीं तो भगां देता था। एक दिन रानी नाम की लड़की कमरा देखने को आई मदनलाल जी बस देखते ही रह गए।उसके बूब्स काफ़ी मोटे थे ।दिखने में कोई अप्सरा लग रही थी।रानी को मकान पसंद आगेया रानी ने मदनलाल से बोलकी भाड़ा क्या है। मदनलाल बोले ५००० रानी बोली में २००० दे सकती हूं। म द नलाल बोले कि नागपुर शहर के बीच में आप को २००० रूम मिल सकती है। ओ बोली मेरे को कोई भी दे सकता है।मदनलाल का दिल रानी पे अागया फिर रानी को तो फ्री में भी दे सकता था।नीचे उपर देख