पोस्ट

अक्तूबर 31, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

No १ जमुनालालजी का बेटा १

  दूसरे दिन दोनों माँ बेटे होटल से घूमने निकले तो राहुल ने पूछा- माँ क्या आज भी बस का मजा लेना है? कमला ने आज स्कर्ट-ब्लाउज पहना था, बिना पैंटी के, उसने कहा- क्यों नहीं ? कुछ घट थोड़े ही जाता है ! और यहाँ हम लोगों को कौन जानता है ? तब उसने राहुल को उस लड़के की बात बताई और कहा कि उसे पता नहीं कि आजकल के पढ़ने वाले भी चुदाई के बारे में सब कुछ जानते हैं। राहुल ने माँ को चिढ़ाते हुए कहा कि आज वो लड़का मिल जाए तो आप चाहो तो उसे ले आते हैं यहाँ? कमला ने भी करारा जवाब दिया- मैंने कहा ना, कोई घटने वाली चीज़ तो है नहीं ! क्या फरक पड़ेगा ? कम से कम वो तुम्हारे जैसा मादरचोद तो नहीं कहाएगा ! राहुल को अपनी माँ का इस तरह खुल कर बात करना बड़ा अच्छा लगा। वो दोनों दिन भर बस से दिल्ली घूमे। बस में लोगों ने कमला का बड़ा आनंद लिया। एक हरामी ने तो जब हाथ लगा कर देखा कि कमला कि पैंटी नहीं है तो वो अपनी बीच वाली उंगली को थूक लगा कर कमला की गांड में घुसाने लगा। तब कमला वहाँ से हट कर बस के दूसरी ओर उस आदमी से दूर हो गई। इस घटना के अलावा आज कमला को बस में अच्छा मजा आया और उसके पहले दिन का डर और उसकी झिझक दूर

No १ सोनल ११११

  मैं आगरा में नौकरी करता हूँ. मैंने ऑफ़िस के पास ही एक कमरा किराये पर ले रखा है. मेरा कमरा ऊपर वाली मंजिल पर था. इस घर में नीचे बस एक परिवार रहता था. उसमें एक 18 साल की लड़की सोनल, उसकी मम्मी तनूजा और पापा कमल रहते थे. सोनल बहुत शरारती थी… कभी कभी वो सेक्स सम्बंधी सवाल भी कर देती थी. आज भी सवेरे सोनल चाय ले कर आई और मुझसे पूछने लगी- ‘अंकल… मम्मी पापा हमेशा साथ सोते है पर रात को वो लड़ते भी है…’ ‘अरे नहीं… लड़ेगे क्यूँ… क्या वो एक दूसरे को बुरा भला कहते है…?’ ‘नहीं, पापा मम्मी के ऊपर चढ़ कर…उनकी छातियों पर हाथ से मारते हैं…मम्मी नीचे हाय-हाय करके रोती हैं!’ ‘अरे…अरे… चुप… ऐसे नहीं कहते…वो तो खेलते हैं, तुमने और क्या देखा?’ मेरी उत्सुकता बढ़ गई. ‘और बताऊँ… पापा मम्मी का पेटीकोट उतार देते है और खुद भी पायजामा उतार देते है, फिर और भी लड़ते हैं…मम्मी बहुत रोती है और हाय-हाय करती है!’ मैं ये सुन कर उत्तेजित होने लगा. कि ये इतनी बड़ी लड़की हो कर भी अन्जान है या जान करके मुझे छेड़ रही है. ‘अरे तुम्हारी मम्मी रोती नहीं है सोनल… वो एक खेल है जिसमें मजा आता है… तुम नहीं समझोगी…!’ ‘अच्छा अंकल इसमें मजा आता

कंप्यूटर रीपीयरीग

  मैं शैल जोधपुर का रहने वाला हूँ। दिखने में मैं बहुत सुन्दर और प्यारा हूँ। मेरा कद ६’२” है और मेरा लण्ड करीब ६.५ इन्च लम्बा और ३.५ इन्च मोटा है। कोलेज में मेरी बहुत सी लड़कियों से दोस्ती रही है और शारीरिक सम्बंध भी रह चुके हैं। यह घटना पिछले साल नवम्बर की है उस वक्त मैं एक टेलिकॉम कंपनी में काम करता था। एक दिन मेरे बॉस ने मुझे एक मोबाइल नम्बर देते हुए कहा कि ये उनके किसी दोस्त का नम्बर है और मुझे उनके यहाँ इन्टरनेट कनेक्शन लगाने जाना होगा। मैंने उस नम्बर पे फोन किया तो किसी महिला ने उठाया मैंने पूछा क्या मैं मिस्टर विशाल से बात कर सकता हूँ तो उन्होंने कहा कि वो तो ऑफिस गए हैं कहिये क्या काम है? मैंने सारी बात बताई तो उन्होंने कहा कि कनेक्शन करने अभी आ सकते हैं। मैंने कहा मैं अभी एक घंटे में आ जाता हूँ। मैं दिए हुए पते पे पहुँचा और घंटी बजाई, एक महिला ने आकर दरवाज़ा खोला, उसकी उम्र करीब २५-२६ साल की रही होगी और उसकी फिगर ३६-२८-३८ रही होगी, उसने गहरे हरे रंग की साड़ी पहनी थी, रंग दूध जैसा सफ़ेद! दोस्तों मैं क्या कहूँ! उसके जैसी खूबसूरत औरत मैंने अपनी जिन्दगी में कभी नहीं देखी थी, मेरी आ

पार्क में मजा

एक दिन जब मैं कॉलेज पंहुचा तो एक लड़की कॉलेज के बाहर खड़ी थी। मस्त माल थी ! उसके गजब के बूब्स थे जो उसकी ब्रा से निकले जा रहे थे। लेकिन उसका रंग काला था पर वो गजब की सेक्सी लग रही थी। मैंने उससे उसका नाम पूछा। वो बोली- जी पूनम ! मैं अपनी दोस्त से मिलने आई थी। लगता है कि वो आज नहीं आई है। उसने मुझसे कहा- क्या आप मुझे बस-स्टैंड तक छोड़ देंगे? मैं तो मौके की तलाश में था, जो मुझे मिल गया। मैं उसे अपनी बाइक पर लेकर निकल गया, उसके बूब्स मेरे पीठ पर लग रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो जाता, उसके नुकीले निप्पल मुझे पागल कर रहे थे। स्टैंड पहुँच कर पता चला कि बस निकल गई है और अगली बस शाम को ६ बजे है। अभी तो सिर्फ़ १ बजा है, तो उसने कहा कि चलो घूम आते हैं, समय भी निकल जाएगा और पता भी नहीं चलेगा। मैं उसे लेकर एक पार्क में गया। गर्मी के दिनों में वैसे भी कम लोग ही दिन को पार्क में होते हैं। एक पेड़ की नीचे हम दोनों बैठ गए। घास चारों तरफ थी, इसलिए हमें कोई दूसरा नहीं देख पा रहा था, और मेरी नज़र तो सिर्फ़ उसके बूब्स पर थी, बातों का सिलसिला चल रहा था, वो अपने बारे में बता रही थी और मैं अपने बारे में। अचा

मेरी काली बहेंन

मेरी बाहेन बहुत ही काले रंग की थी। इसलिए उसके साथ कोई भी दोस्ती नहीं करता था। ओ बहोत मायूस हो गई थी।दीदी मुझसे दो साल बड़ी है लेकिन उनका रंग काला है। पर फ़िगर के मामले में करीना कपूर है- ज़ीरो फ़िगर ! लेकिन उनके काले रंग के कारण कोई कभी उनकी तरफ़ देखता ही नहीं है। इसी कारण वे हमेशा उदास रहती और ज्यादातर घर में ही रहती हैं और पढ़ती रहती हैं। मेरा रंग साफ़ है और शरीर भी गठीला है। मैं इन्ज़िनीयरिंग के दूसरे साल में हूँ। मेरे कॉलेज़ में कई लड़कियाँ पढ़ती हैं। मैंने कई लड़कियों से मित्रता की पेशकश की पर कोई भी घास नहीं डालती और मैं सेक्स का भूखा लड़का हूँ। मेरे घर में मैं, दीदी और और मम्मी-पापा हैं। पापा एक दवाई की कंपनी में एरिया मेनेजर हैं जो हमेशा टूर पर ही रहते हैं। मम्मी हमेशा घर और बाहर के कामों में ही लगी रहती हैं। दीदी मुझे अपना एक अच्छ दोस्त समझती हैं और हर छोटी बड़ी बात, समस्या के बारे में मुझसे बात करती हैं। उनके रंग के कारण उनका कोई दोस्त नहीं है तो वो मुझे ही अपना बॉयफ़्रेंड समझती हैं। मैं उनको शुरू शुरू में तो दीदी के रूप में ही देखा लेकिन कुछ दिनों में मेरे अन्दर कुछ बदलाव आ गया था। मैं

चोटिसी दुकान पर मिली ट्रेनिंग देने वाली आंटी

 मै विनोद कुमार आपकी सेवा में प्रस्तुत करता हूं एक ऐसी स्टोरी जो आप को कभी भी नहीं मिल सकती थी। मैं आप को अपनी एक ऐसी हक़ीकत से वाक़िफ कराना चाहता हूँ जो मेरे साथ पहले कभी नहीं हुई। ये होने के बाद मैं मन ही मन बड़ा खुश होता रहता था क्योंकि जो मैं इतनी कोशिश करने के बाद भी नहीं कर पाया वो अचानक हो गया। हुआ ये कि मेरे घर के सामने एक घर है जिसमें एक परिवार रहता है जो बिहार से है, उस परिवार में 4 सदस्य हैं जिनमें से 2 बच्चे और दो बड़े हैं जून 2004 की बात है जब मेरा परिवार स्कूल की छुट्टियों की वज़ह से गाँव गई हुई थी तो बस मैं ही घर पर अकेला था। शनिवार की बात है उस दिन मेरे ऑफिस में छुट्टी होती है तो थोड़ा देर से सोया और देर से जागा। उसके बाद मैं फ्रेश हुआ और बिस्किट खरीदने के लिए दुकान पर गया। वह दुकान बहुत ही छोटी थी और वहाँ भीड़ बहुत ज्यादा रहती थी। जहाँ मैं खड़ा था उसके एकदम आगे मेरे सामने वाली आंटी खड़ी थी वो भी कुछ सामान ले रही थी और भीड़भाड़ होने की वज़ह से हम एक-दूसरे से बिल्कुल चिपके हुए थे। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया फिर मैंने महसूस किया कि मेरा लण्ड आंटी की गाँड पर लग रहा ह

पड़ोसन आंटी के साथ मज़ा आने लगा पहेली बार

  बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ता था। मैं हमेशा लड़कों से ज्यादा लड़कियों में रहता था ! मैं पढ़ने में भी तेज था ! मुझे गाँव में दोस्तों से सेक्स के बारे में पता चला तो मैंने बहुत बार स्कूल में लड़कियो से छेड़खानी करनी शुरू की। एक लड़की थी जिसके बूब्स बहुत बड़े थे। मैं उसको कई बार मजाक में दबा चुका था। मेरे अन्दर सेक्स जगने लगा। मेरे परिवार में मैं, मेरा भाई और दो बहनें हैं ! मेरे पड़ोस में मेरे अंकल रहते हैं, मेरी आंटी गोरी, चिकनी और बहुत ही मस्त थी। मेरा मन उन्हें चोदने को हुआ। बहुत बार मैं उनके पास जाता था, छेड़ता था पर वो मुझसे दूर हो जाती थी ! मेरी आंटी बहुत बदमाश भी थी। मेरे और उनके परिवार में बनती नहीं थी। आंटी का गांव के एक आदमी से चक्कर चल रहा था इसीलिए मैं उन पर ट्राई मारना चाह रहा था पर वो हाथ ही नहीं रखने देती थी। एक दिन उनकी दाढ़ में दर्द हुआ और वो शहर गई तो वापस नहीं आई। उनके मरने की ख़बर आई। कुछ दिनों बाद मेरे अंकल ने दूसरी शादी कर ली। मेरे अंकल के दो बेटे और दो बेटियाँ थी। नई आंटी दिखने में सुंदर थी पर रँग थोड़ा साँवला था ! उसके बूब्स बड़े बड़े थे ! कहानी की शुरुआत शाद

शबनम की बेटी मेरी जान

मेरी कहानी की पात्र शबनम की दो बेटियाँ हैं, बड़ी बेटी शमीम और छोटी बानो। शमीम के साथ मेरी चुदाई का सिनेमा हॉल का किस्सा आपको बता चुका हूँ, उस दिन के बाद मेरा नज़रिया उस परिवार के प्रति बदल चुका था। मैं अब बानो जो छोटी लड़की थी, की चुदाई के बारे में सोचा करता था, क्योंकि उसे बूब्स बहुत बड़े-बड़े थे। मैं अब भी उस परिवार में कभी-कभी ही जाया करता था। इस बीच मैं शमीम की २-३ बार उसके घर में ही चुदाई कर चुका था, जब वह घर पर अकेली थी। पर इस चुदाई में ज्यादा मज़ा नहीं आता था क्योंकि ये डर लगा रहता था कि कहीं कोई आ न जाये। ख़ैर अब आपको छोटी लड़की बानो की चुदाई के बारे में बताता हूँ। एक बार मैं गर्मी की दोपहर में उनके घर गया, दरवाजा बानो ने खोला, वो उस दिन कुछ ज़्यादा ही सेक्सी लग रही थी, उसको शायद यह भी मालूम हो गया था कि मैं उसकी बड़ी बहन के साथ कुछ कर चुका हूँ। मैं घर में अन्दर गया, उसने दरवाज़ा बन्द कर दिया। मैंने उससे पूछा कि बड़ी बहन कहाँ पर हैं तो उसने कहा कि सब लोग पास के गाँव में गये हुए हैं और करीब ९ बजे तक लौटेंगे। मेरी नीयत उसके ऊपर बिगड़ी त