जवान चाची उनकी बहेने




B
 दोस्तो, नमस्कार. मैं 3 साल से अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ. यहां की सब कहानियां बड़ी मस्त हैं. इन कहानियों को कई दिनों तक पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी अपनी कहानी आप सबको बता दूँ. पहले यहां सब आंटियों और भाभियों को मेरे लंड की तरफ से भरपूर प्रणाम. मेरा नाम ज़ीशान (नाम बदला हुआ) है. मैं अभी बैंगलोर में रहता हूं. मेरा गांव बैंगलोर के करीब ही है. मैं अपने बारे में बता देता हूं, मेरा कद 5 फुट 8 इंच है. मैं देखने में बहुत हैंडसम दिखता हूँ, ऐसा सब लोग बोलते हैं. मैं अपने लंड के बारे में बताऊं, तो ये करीब 7 इंच का है … लेकिन काफी मोटा है … मतलब 3 इंच तक की गोलाई का होगा. ये कहानी मेरी और मेरी चाची और उनकी दो बहनों के बीच गुज़री हुई एक सच्ची घटना है. ये घटना 5 साल पहले की है. अभी मेरी उम्र 23 साल है. मेरी चाची का नाम रेशमा (नाम बदला हुआ) है. जब चाचा की शादी हुई थी, तब मैं एक छोटा था. चाची जब पहली बार अपने घर आईं, तो उनको देख कर मैं बहुत खुश था. चाची मुझे रोज़ खाना अपने हाथों से खिलाती थीं. कोई 3 साल बाद चाचा और चाची पास वाले टाउन में रहने चले गए थे. मैं उनके चले जाने से बहुत दुखी था. क्योंकि मेरी प्यारी चाची मुझसे दूर जा रही थीं. फिर कुछ दिनों के बाद मुझे भी पढ़ाई के कारण पास वाले टाउन में रहने जाना पड़ा. मेरी हायर स्कूलिंग की पढ़ाई थी. मैं पढ़ाई के चलते कभी कभी ही चाची के घर जा पाता था. मेरी 12वीं क्लास की पढ़ाई शुरू होने वाली थी. पढ़ाई के चलते मैं एक्स्ट्रा ट्यूशन के लिए जाना हुआ. एक्स्ट्रा ट्यूशन की स्पेशल क्लासेज की वजह से रोज शहर तक आना जाना मुश्किल था. इसलिए मैंने पापा से वहीं चाची के घर रहने की पूछा. पापा बोले- ठीक है, तुम चाचा के घर में रह कर पढ़ाई कर लेना. मैं वहां शिफ्ट हो गया. मुझे देख कर मेरी चाची भी बहुत खुश थीं. चाची के अब एक बेटा और एक बेटी हो गई थी. वो दोनों भी मुझसे बहुत प्यार करते थे. मैं पढ़ाई में टॉपर था, तो सब लोग मुझे पसंद करते थे. मेरी चाची तो मुझे बहुत ही ज़्यादा पसंद करती थीं. अभी तक मेरे मन में चाची के लिए कोई बुरे ख्याल नहीं थे. एक दिन सुबह जब मैं हॉल में सोफे पे बैठ कर पढ़ाई कर रहा था. तब चाची पौंछा लगाने आईं. उस वक्त चाची नाइटी में थीं. जब चाची पौंछा लगाने के लिए मेरे सामने झुकीं, तो मेरी नजर उनके मम्मों पर चली गई. क्या मस्त नजारा था दोस्तो … चाची के भरे हुए मम्मे देख कर मेरे तो होश ही उड़ गए थे. मैंने पहली बार चाची के मम्मे देखे थे. उनके बड़े बड़े स्तन उनकी गहरे गले वाली नाइटी से बाहर झांक रहे थे. मैं चाची के दूधिया आमों को हिलते हुए देखने लगा. अचानक चाची ने मुझे अपने दूध ताड़ते हुए देख लिया. इस पर उन्होंने पास रखी एक ओढ़नी को ऊपर से ओढ़ लिया. मुझे जैसे ही यह बात समझ आई कि चाची ने मेरी इस हरकत को समझ लिया है, मुझे बहुत लज्जा आई. मैं पश्चाताप करने लगा. अब मैं चाची से आंखें मिला नहीं पा रहा था. लेकिन चाची ने ये सब नजरअंदाज करते हुए मुझसे ठीक से बात की … तो मेरी टेंशन थोड़ी कम हुई. चाची के दूध देखते हुए पकड़े जाने के बाद मुझे खुद पर कोफ़्त तो हो रही थी लेकिन अभी भी वो मदमस्त नजारा मेरी आंखों के सामने चल रहा था. उनके वो बड़े बड़े स्तन मुझे बार बार उत्तेजित कर रहे थे. दोस्तो, अब मैं आपको अपनी चाची के बारे में बता देता हूं. मेरी चाची का रंग एकदम गोरा है. उनकी कद थोड़ा कम है … शायद 5 फुट 2 इंच ही होगा. चाची की उम्र मुझसे 10-11 साल बड़ी है. उनके बड़े बड़े स्तन 34 इंच के हैं, कमर 28 इंच की और गांड का उठाव 36 इंच का है. चाची इतनी कामुक और चिकनी दिखती हैं कि जो भी उनको पहली बार देखेगा, उसका लंड खड़ा हो जाएगा. मेरी चाची बहुत ही सेक्सी माल हैं. लेकिन वो स्वभाव में बहुत अच्छी हैं. उस दिन से मेरे दिल में चाची के लिए वासना जागने लगी थी. जब भी वो पानी लेने या नहाने जाती थीं, मैं छुप कर देखने की कोशिश करता रहता था. चाची के नहाकर आने के बाद, मैं बाथरूम में जाकर उनकी ब्रा और पैंटी सूंघता था. उनकी पेंटी और ब्रा को हाथ में पकड़ कर मैं मुठ मारता था. हालांकि ये सब चाची को पता नहीं था. ऐसे ही दिन गुज़र रहे थे. मेरी बारहवीं की पढ़ाई खत्म हो गई. मैं 95 परसेंटेज नम्बर लेकर अपने स्कूल में फर्स्ट आया था. मेरी इस सफलता से सब बहुत खुश थे. मैं स्कूल में सबको मिठाई खिला रहा था. बाद में मैं घर भी मिठाई का डिब्बा लेकर पहुंचा. चाची मेरी इस सफलता से सबसे ज़्यादा खुश लग रही थीं. वे मुझे देखते ही झट से मेरे गले से लग गईं. चाची खुश होते हुए बोली- बधाई. पहली बार चाची ने मुझे गले से लगाया था. बल्कि यूं कहूँ कि आज पहली बार किसी औरत ने मुझे गले से लगाया था. चाची- मैं तुम्हारी कामयाबी से बहुत खुश हूं … मेरे घर में रहकर इतने अच्छे अंक लाए हो. बताओ मेरी मिठाई कहां है … मेरे लिए लाया भी या नहीं? मैं- चाची आपको मिठाई कैसे न दूँ. आपके लिए तो पूरा डिब्बा लेकर आया हूँ. मैंने मिठाई का डिब्बा खोल कर चाची को अपने हाथों से मिठाई खिलाई. चाची ने भी मुझे मिठाई खिलाई और मेरे गाल पर किस कर लिया. मैं चाची के इस किस से एकदम चौंक गया. लेकिन मैं कुछ कर नहीं पाया, क्योंकि मैं अभी उन्हें किस का जबाव देने लायक स्थिति में नहीं था. चाची- आगे क्या प्लान बनाया है? मैं- अब तो आगे की पढ़ाई के लिए बैंगलोर जाने का सोचा है. चाची- यदि तुम वहां चले जाओगे, तो तुम्हारी चाची तो बोर हो जाएगी. मैं- लेकिन अब उधर तो जाना ही पड़ेगा, यहां अच्छे कॉलेज नहीं है. चाची- ठीक है, अच्छे से पढ़ लेना … लेकिन कभी कभी यहां भी आ जाया करो. मैंने उनसे हामी भर दी. मुझे चाची के घर से जाना बहुत कठिन लग रहा था, मेरा मन काफी उदास था. फिर मेरा बैंगलोर जाने का हुआ, वो पल मेरे लिए बहुत कठिन था. मैं चाची का साथ छोड़ कर बैंगलोर जा रहा था. खैर … मैं बैंगलोर चला गया. उधर 2 साल मैंने बहुत एन्जॉय किया, लेकिन अभी भी मुझे चाची की बहुत याद आती थी. कुछ दिनों बाद मैं छुट्टियों में अपने घर आ रहा था. मैं घर गया और सबसे मिल कर खूब बात की. इसके बाद मैं पास वाले टाउन में चाची के घर के लिए निकल गया. उनसे मिले बिना मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मैं चाची के घर पहुंचा और दरवाजे की घंटी बजाई. चाची की आवाज आई- कौन है? मैं समझ गया कि ये आवाज बाथरूम से आ रही थी. मैं- मैं जीशान हूँ चाची. चाची- अरे जीशान बेटा कब आए … रुको आ रही हूँ. चाची नहाने के बीच में से ही उठ कर दरवाजा खोलने आईं, वे पेटीकोट को अपने स्तनों तक चढ़ा कर आई थीं. उन्होंने थोड़ा सा दरवाजा खोला और मुझे जल्दी से अन्दर आने को कहा. मैं- अरे चाची आप नहा रही थीं. मैं बोल देतीं. मैं इन्तजार कर लेता, इतनी भी जल्दी नहीं थी. चाची- अरे कोई बात नहीं … तुम बैठो, मैं अभी नहा कर आती हूँ. चाची ये बोल कर बाथरूम में चली गईं और जाते वक्त जल्दबाज़ी में या पता नहीं जानबूझ कर उन्होंने बाथरूम के दरवाजे को बंद नहीं किया. चाची को इस तरह एक पेटीकोट में देख कर वैसे ही मेरा मन खराब हो गया था. मैं जानबूझ कर बाथरूम के सामने ही बैठ गया. और चाची से बात करने लगा. मैं- और चाची … बच्चे कहां हैं और चाचा कहाँ हैं? चाची- छुट्टियां हैं ना, बच्चे अपने मामा के घर गए हैं … और तुम्हारे चाचा अपने काम से निकले हुए हैं. मैं- आपसे बात किए हुए करीब एक साल हो गया चाची … मुझे आपकी बहुत याद आती रही. आई मिस यू चाची. चाची- क्या बात है … तू तो चाची को मिस करने लगा. कोई गर्लफ्रेंड नहीं मिली बैंगलोर में? मैं- गर्लफ्रेंड की अपनी जगह … चाची की जगह कोई नहीं ले सकता. चाची- अरे वाह … तू तो शायर भी बन गया … पूरा जवान हो गया है तू. अचानक चाची चिल्ला दीं. बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं था, तो मैं अन्दर घुस गया. मैंने पूछा- क्या हुआ? चाची कॉकरोच की तरफ अपनी उंगली को दिखाने लगीं. मैं- अरे चाची इतनी सी छोटी चीज़ के लिए इतना घबरा गईं. मैंने उस कॉकरोच को मार दिया और वहीं खिड़की से बाहर फेंक दिया. तभी मेरी नज़र चाची पर गयी. चाची सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं. आह … क्या बताऊं, चाची बिल्कुल बदल गयी थीं … उनके मम्मे और बड़े हो गए थे. चाची और बड़ी मस्त माल बन गई थीं. उनके मम्मे 36 इंच के हो गए थे, कमर 32 और गांड 38 इंच की हो गयी थी. मुझसे रहा नहीं गया … मैं बस उनकी जवानी को देखते ही रह गया. चाची ने मेरी वासना भरी आँखों को पढ़ लिया था. जब उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैंने आगे बढ़ कर चाची को हग कर लिया. चाची के मम्मों को मैं उनकी ब्रा के ऊपर से छू रहा था. चाची मुझ पर गुस्सा करने लगीं- अरे ये क्या कर रहे हो जीशान? छोड़ो मुझे. मैं- आप बहुत खूबसूरत हो चाची, मैं आपको बहुत पसंद करता हूँ. ये बोलते बोलते मैं उनको किस करने लगा और एक हाथ से उनके मम्मे दबाने लगा. चाची- ये सब गलत है बेटा … छोड़ दो मुझे. अपनी चाची के साथ कोई भला ऐसे करता है. प्लीज मुझे छोड़ दो न. मैं- प्यार और सेक्स के बीच कोई रिश्ते नहीं होते हैं चाची … आई लव यू. मैंने ये कहते हुए धीरे से चाची की ब्रा को खोल कर निकाल दिया. चाची एक नाकाम कोशिश के बाद चुप हो गईं. कुछ देर बाद चाची- अरे कोई देख लेगा … किसी को पता चल गया, तो क्या होगा. मैं उनके मम्मे सहलाने लगा और चूसने लगा. अब चाची भी थोड़ा सहयोग करने लगी. मैं- कोई नहीं देखेगा. … किसको पता नहीं चलेगा … आई प्रॉमिस. चाची ने मादक सिसकारियां लेना शुरू कर दी थीं. चाची- धीरे धीरे … आआह … ऊऊह … ये सब गलत है जीशान … अपनी चाची के साथ ऐसे नहीं करते. मैं- चाची कुछ गलत नहीं. मैं आपको बहुत चाहता हूँ. चाची- चाचा आ जाएंगे … प्लीज छोड़ दो. मैं- चाचा को आने में बहुत समय लगेगा … आप चिंता ना करो. कुछ पलों बाद चाची को भी मज़ा आने लगा था. मैं ज़ोर ज़ोर से उनके मम्मे चूस रहा था. दीवानों की तरह चुचे चूम रहा था. मैंने दोनों बांहों से चाची को दबा लिया था. मैं कभी उनके गाल चूमता, तो कभी उनके होंठ. चाची गर्म होने लगीं. हम दोनों अभी तक बाथरूम में ही ये सब कर रहे थे. मैं धीरे धीरे चाची के नीचे आने लगा. अपने हाथ ऊपर किए हुए मैं चाची के स्तन दबा रहा था और चूम रहा था. मैं उनके पेट पर आ गया और उनकी गहरी नाभि को चूमने लगा. चाची कुछ नहीं बोल रही थीं. मैंने उन्हें घुमा दिया और उनकी पीठ पर किस करने लगा. चाची अब तक बहुत गर्म हो गयी थीं. मेरी चाची अब बिल्कुल मेरे काबू में थीं. आज मेरा पहला सेक्स होने वाला था. आखिर मेरी चाची मुझे मिलने वाली थीं. मैं पूरी तरह मज़े लेना चाहता था. मैं एक कुत्ते की तरह चाची का जिस्म पूरा चाट रहा था. चाची मज़ा भी कर रही थीं और थोड़ा नानुकुर भी कर रही थीं. चुम्बनों की आवाज से बाथरूम गूंज रहा था. ब्रा उतर जाने के बाद चाची के जिस्म पर सिर्फ पैंटी रह गई थी. मैं अभी पैंटी को छूना नहीं चाहता था. मैं उनकी जांघों को चूमने लगा. चाची का जिस्म एकदम बेदाग़, दूध के जैसे गोरा चमक रहा था. उनके मम्मों के ऊपर पिंक निप्पल और भी मज़ेदार थे. चाची की शादी को 10 साल हो चुके थे. लेकिन अभी भी चाची एकदम सेक्सी माल थीं. उनके मम्मे अभी भी एकदम खड़े थे. उनके 36 इंच चूचे बड़े मस्त लग रहे थे. उनके मम्मे मेरे दोनों हाथों में समा ही नहीं पा रहे थे. मैं चाची के जिस्म के मज़े लेने लगा. चाची का जिस्म भारी था. उनका कद थोड़ा कम था. इसकी वजह से मुझे और भी मज़ा आने लगा. चाची की नीले रंग की पैंटी की अन्दर क्या है, ये देखने का समय आ गया था. मैंने उनकी नीले रंग की पैंटी के ऊपर हाथ डाला और धीरे धीरे पैंटी के ऊपर से चूत को सहलाने लगा. चाची वासना से लाल होने लगीं. मैं उनकी पैंटी के अन्दर हाथ डालने लग चाची भी मुझसे सहयोग करने लगीं. मैं पूरी मदहोशी से चाची को चूम रहा था. वो भी जोश में मेरे बाल ज़ोर से पकड़ रही थीं. मुझे मजा आने लगा. मैंने उनके होंठों को अपने होंठों से दबाते हुए ज़ोर से काट लिया … वो चिल्लाने लगीं. उनकी सीत्कार भरी आवाज निकल गई- आआहह … कमीने अब चाची को रुलाएगा क्या? मैं- अरे सॉरी चाची गलती से हो गया. चाची- तू मुझे प्रॉमिस कर, ये बात हमारे बीच ही रहेगी. मैं- आई प्रॉमिस यू चाची … ये बात हमारे बीच में ही रहेगी चाची- अच्छा … चल बेडरूम में चल. मैं चाची की बात सुनकर खुश हो गया और उनको एक ज़ोर से किस कर दिया. चाची- जो भी करना है … जल्दी से कर ले … फिर कोई आ जाएगा. मैं- ठीक है चाची. मैंने तुरंत कमर से पकड़ कर ऊपर उठा लिया. चाची चौंक गईं. चाची- जीशान … ये क्या कर रहे हो. मुझे नीचे उतारो. मैं- आपको बेडरूम में लेकर जा रहा हूँ. चाची ने ये सुनते ही अपने पैरों से मुझे पकड़ लिया और मेरी गोद में लटक गईं. मैं उन्हें किस करने लगा और उनकी गांड को सहलाने लगा. मैं उन्हें चूमता हुआ बेडरूम में ले आया और उन्हें बेड पे गिरा दिया चाची- बदमाश … मुझे कहीं चोट लग जाती तो? मैं- मैं लगने नहीं दूंगा. मैं बेड के ऊपर आ गया और चाची के ऊपर चढ़ कर उन पर आक्रमण करने लगा. चाची की मादक सिसकारियां मुझे और उत्तेजित कर रही थीं. मुझे उनके चूचे बहुत पसंद थे. मैं उन्हें ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था. चाची- आआह … आम्म्म … आआह धीरे करो न. मैं और ज़ोर से दबा रहा था … और ज़ोर से चूसने लगा था. मेरे होंठों से चाची के मम्मे चुस कर लाल हो गए थे. मैं यूं ही उन्हें चूमता हुआ नीचे नाभि पर पहुंच गया. लाल रंग और गोल आकार में चाची की नाभि बड़ी मस्त दिख रही थी. मैंने अपनी जीभ को चाची की नाभि पे रख दिया और चाटने लगा. मेरी जीभ के स्पर्श से चाची मचल उठीं. उन्होंने मेरे सर के बालों में अपने नाखून गड़ा दिए. चाची- उम्म्ह… अहह… हय… याह… और कितना तड़पाएगा, डाल दे रे जीशान, अब रहा नहीं जा रहा है. यह बात सुनते ही मैं और नीचे पैंटी पे आ गया. नीले रंग वाली पैंटी को अपने हाथों से निकाल दिया. अब चाची भी मुझे सहयोग करने लगीं. क्या मस्त और हसीन नजारा था दोस्तो. चाची की चूत पर काले घने बाल थे. उन काले घने बालों के बीच में चाची की लाल चूत साफ दिख रही थी. उनकी चूत में से पानी निकल रहा था. मैंने देर न करते हुए अपने कपड़े निकाल दिए. चाची भी मेरी शर्ट के बटन्स खोल रही थीं. मैंने जल्दी से अपने कपड़े निकाल दिए. अब मैं अंडरवियर में था. चाची- क्या मस्त बॉडी बना ली है जीशान … जिम जाता है क्या? मैं- हां चाची! चाची अब मुझे अपने नीचे करके चूमने लगीं. वे मेरा पूरा जिस्म पागलों की तरह चाट रही थीं. चाची ने मेरा लंड अंडरवियर के ऊपर से ही हाथ में पकड़ लिया और बोलने लगीं- ये क्या है … मेरा बेटा इतना बड़ा और जवान पट्ठा हो गया है.मैं- आपने मुझे दो साल पहले देखा था. अब मैं पूरा जवान हो गया हूँ. चाची- हां … तुम पर कुछ ज़्यादा ही जवानी चढ़ आई है. यह कहते हुए चाची ने मेरे अंडरवियर को निकाल दिया और वे मेरे कड़क लंड को देखकर चौंक गईं- अरे जीशान. … ये इतना बड़ा कैसे है? मैं- इतना भी बड़ा नहीं है … पोर्न स्टार्स का तो 10 इंच होता है. चाची- मैंने तो इतना बड़ा ही नहीं देखा है. मैंने तो तेरे चाचा के अलावा किसी और का देखा ही नहीं है. साले तू बदमाश आज मुझे इतने बड़े लंड से चोद कर रंडी बना रहा है. चाची की इन कामुकता भरी बातों से मैं उत्तेजित हो गया. मैं चाची को अपने पास खींच कर बोलने लगा. मैं- रंडी नहीं रानी. चाची- हाँ वही … तेरे लिए रानी लेकिन अगर किसी को पता चल गया, तो सबको रंडी ही दिखूंगी. मैं- ये किसी को पता नहीं चलेगा. मैं ये कहते हुए उनकी चूत में उंगली डालने लगा. चाची मचल उठीं और सिसकारने लगीं- आआह … डाल दे जल्दी से अन्दर. मैंने चाची को नीचे खींचा और उनकी चूत चाटने लगा. अब तो मेरी जीभ का कमाल दिखने लगा. चाची की आहें बढ़ने लगीं. चाची- अरे ये तू क्या करने लगा है … उठ ऊपर. मैं- मैं चूत को चाट रहा हूँ … मजा आएगा. चाची- उसको भी कोई चाटता है क्या? कैसी अजीब अजीब हरकतें करने लगा है तू ? पहले तो तूने नाभि को चाटा और अब चूत? बिल्कुल पागल हो गया है. मैं- क्या चाचा ने आपकी चूत और नाभि को कभी नहीं चाटा चाची? चाची- नहीं … वहां भी कोई चाटता है क्या? मैं- अरे चाची जान, आपने अभी तक ज़िन्दगी की असली मज़ा नहीं लिया है. ये सब करने से ही असली मज़ा आता है. ये कह कर मैं और ज़ोर से जीभ अन्दर डालने लगा. मेरी जीभ चाची की चूत की दीवारों को चीरती हुई अन्दर आ जा रही थी. चाची- उम्म्ह… अहह… हय… याह… अपनी चाची को नए नए मज़े दे रहा है और चाची को अपना बना रहा है … शाबाश बेटा. अपने हाथों से चाची मुझे और ज़ोर से पकड़ने लगीं. मैं और ज़ोर से चाची की चूत को चाट रहा था और चाची गांड उछाल कर चूत चुसाई के मज़े ले रही थीं. उनकी चूत काफी गीली हो चुकी थी. एक घंटा से रोमांस जो हो रहा था, लग रहा था कि चाची एक बार झड़ चुकी थीं. चाची- अब लंड भी तो डाल दे साले … और कितना तड़पाएगा … जल्दी डाल. अब मैं ऊपर उठ गया और अपना लंड चाची के मुँह के पास लेकर गया. चाची- क्या कर रहा है? चुत में डाल दे. मैं- पता है … तुम लंड को चूसो ना चाची, मेरा लंड गीला हो जाएगा और आसानी से अन्दर घुस जाएगा. चाची- ये सब मुझसे नहीं होगा … तुम्हारे चाचा भी एक बार कहा था, मैंने मना कर दिया था. अब तू चुपचाप अन्दर डाल दे. मैं ये सब सुनने को तैयार नहीं था. चाची बात कर रही थीं और तभी मैंने लंड उनके मुँह में डाल दिया और उनका मुँह चोदने लगा. चाची निकालने की कोशिश करने लगीं, पर मैंने लंड निकलने ही नहीं दिया. इससे उनकी सिसकारियां अन्दर ही रह गईं और उनके मुँह से ‘ऊऊंऊह. … गूं गुयं … की आवाज निकलने लगी. चाची ने मुझे ज़ोर से धक्का दे दिया और मेरे लंड को बाहर निकाल दिया. चाची- मादरचोद … साले बोला न … मुझसे नहीं होगा ये सब … अब तू लंड हिला कर झाड़ ले, मैं जा रही हूँ. यह कह कर चाची उठने लगीं. मैंने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें बेड पर गिरा दिया और उनके ऊपर आक्रमण करते हुए अपना लंड उनके चुत के ऊपर रगड़ने लगा. चाची अपनी चूत पर लंड की रगड़ से मीठी मीठी सीत्कार निकालने लगीं. मैं- अब चाची आपका गुस्सा कहां गया. … गायब हो गया न? चाची- साले अब डाल भी दे अन्दर. अब मुझे तेरा मोटा लंड अन्दर लेना है. ये सुनते ही मैं लंड को एक ज़ोर के धक्के से अन्दर डालने लगा. मेरा लंड मोटा होने के कारण सिर्फ टोपा ही चाची की चूत के अन्दर जा पाया. लंड से हुए दर्द से चाची की चीख रूम में गूंजने लगी. उनकी लंबी चीख निकल गई- आआआआह … साले भोसड़ी के मार देगा मुझे … निकाल इस मूसल को … मेरी चुत फट रही है. मैं- इसीलिए बोला था, थोड़ा लंड चूस लो, आसानी से अन्दर चला जाएगा. चाची- तू धीरे से अन्दर डाल. मुझे उनकी बात से गुस्सा आ गया कि अब चाची को दिखाना ही पड़ेगा. इस बार मैंने फिर से ज़ोर का झटका दे मारा. मेरा आधा लंड अन्दर चला गया और चाची की चीख तेज़ हो गयी- आआआहह … माँ … मर गई … आह … ऊऊह. मैंने उनकी चीख पर कोई ध्यान नहीं दिया. “साले आज तू मुझे जान से मारने वाला है … मादरचोद मेरी चुत को फाड़ देगा तू!” उनकी चीखें सुनकर मैं और जोर से अन्दर पेलने लगा. मैंने एक और ज़ोर से झटका से मारा. अब पूरा लंड अन्दर जा चुका था. चुत काफी टाइट हो गयी थी. चाची अब और ज़ोर से चीखने वाली हो गई थीं. तभी मैंने अपने हाथ से उनका मुँह बन्द कर दिया. ताकि चाची की आवाज कहीं बाहर सुनाई न दे जाए. उनकी ‘आआआह …’ गले में ही रुक गयी. अब मैं भी मज़े लेने लगा. चाची ने मेरे हाथ को मुँह से हटा दिया- आह साले … तेरा लंड कितना बड़ा है … और इतना मोटा … मैं तो मर गई … तेरे चाचा का तो इसके सामने बेकार है … उई … फट गई रे मेरी चुत … चुद गयी रे मैं … आआह ऊऊह … कमीने धीरे धीरे चोद. चाची अब लाइन पर आ गयी थीं. अब उनका दर्द मज़े में बदल गया था. मैं- ये लो … और ये लो … आह कैसा है बेटे का लंड चाची जान … आपकी चुत पर अब मेरा कब्जा है.. चाची- हां रे चोद दे जीशान … मेरे हाथ से खाना खाता था … आह और अब मेरी चुत मार रहा है. … आह बड़ा मज़ा दे रहा है … मेरी जान ये चुत अब तेरी है … तू जब चाहेगा, तुझे तब मिल जाएगी … आह और ज़ोर से चोद अपनी चाची को … आह मादरचोद. मैं एक हाथ से उनके मम्मों को दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनके मुँह में उंगली कर रहा था- चाची तू मेरी है … और तेरी चुत भी मेरी है. लंड के ज़ोर ज़ोर के धक्कों से ‘पच पच..’ की गूंज और हम दोनों की चुदास भरी सिसकारियों से कमरा गूंज रहा था. मेरा लंड पहले ही एक बार बाथरूम में पानी छोड़ चुका था, इसलिए काफी देर तक चुदाई चलने वाली थी. हम दोनों के धकापेल चुदाई करीब 10 मिनट तक चली. फिर चाची ने मुझे ज़ोर से जकड़ लिया और एक लंबी चीख मारते हुए झड़ गईं- आआहह … आआह … मैं गई. “मजा आया चाची?” चाची- हां … ये मेरी ज़िंदगी की सबसे यादगार चुदाई थी और सबसे मजेदार … तेरी बीवी लकी होगी जीशान … उसे हर दिन जन्नत दिखाएगा तू. चाची के झड़ने के बाद मेरा भी होने वाला था. मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के देना शुरू कर दिए और चाची की चुत के अन्दर ही झड़ गया. झड़ने के बाद मैं उनके ऊपर ही लेट गया. मैं- चाची कैसे लगा? चाची- बहुत मस्त लगा जीशान … मुझे इतना मज़ा कभी नहीं मिला. ये बोलकर चाची ने मेरे माथे पे किस किया. मैं- चाची … चाचा ने आपकी चुत कभी नहीं चाटी क्या? चाची- नहीं … वे इतना समय कहां देते हैं मुझे. बस 5 मिनट लंड अन्दर डाल कर चोदते हैं … और अन्दर झाड़ कर सो जाते हैं. मैं- इसीलिए ही तो आपको मज़े नहीं मिले हैं. आपको अब मैं सब मज़े दूंगा. आपको पता है … ये सब क्यों करते हैं? चाची- नहीं … क्यों? मैं- औरत ज़्यादा देर तक झड़ती नहीं है. लेकिन मर्द दस मिनट में ही झड़ जाते हैं. जबकि औरत बीस मिनट तक नहीं झड़ती है. इसकी वजह से पूर्ण संतुष्ट करने के लिए पहले ज़्यादा टाइम रोमांस और चुत चाटना, नाभि चाटना, मम्मों को दबाना … ये सब करते हैं ताकि फिर चुदाई में दोनों एक बार में ही झड़ जाएं. चाची- वाह रे मेरे बेटे, इतना सब कुछ जानता है … किसने बताया ये सब? सच बता, तू पहले भी सेक्स किया है ना? मैंने थोड़ी शर्म से हां कह कर सर हिलाया. मैं अपनी पहली बार की चुदाई की कहानी आपको इस सीरीज खत्म होने के बाद बता दूंगा. चाची- कौन है वो? कोई गर्लफ्रेंड? मैं- लगभग ऐसे ही … लेकिन अब उससे मेरा कोई सम्पर्क नहीं है. चाची- उसको ये सब पता था? मैं- हां मतलब … उसकी माँ को पता था. चाची- उसकी माँ को भी? मैं- वो विदेशी थी … उनके यहां ये सब कॉमन होता है. चाची- अच्छा … और क्या क्या सिखाया तुझे, उस विदेशी गर्लफ्रेंड और उसकी माँ ने? ये कह कर चाची हँसने लगीं. मैं- चाची, बस करो. अभी बहुत कुछ सीखा हुआ हूँ. औरत को कैसे संतुष्ट करते हैं … ये सब मुझे मालूम है. चाची- मुझे भी संतुष्ट कर दो न. मैं- अभी किया नहीं क्या? चाची- हां अभी तो पूर्ण संतुष्ट हूँ. लेकिन तेरी कला को अच्छे से देखना चाहती हूँ. मैं- हां ज़रूर क्यों नहीं … आप थोड़ा पीछे मुड़ कर लेट जाओ. चाची पीछे मुड़ कर लेट गईं. मैं- चाची तुम्हारी गांड बहुत मस्त है और मोटी भी है. उनके चूतड़ दबाने लगा मैं और गांड के छेद में उंगली डालने लगा. इस पर चाची मुझे रोकने लगीं- ये क्या कर रहा है? वो गंदी जगह है. मैं- मुझे वो चाहिए. चाची- मतलब? मैं- मतलब गांड मारना चाहता हूँ. चाची- कैसी कैसी अजीब अजीब बातें करने लगा है तू? मैं- प्लीज चाची … आपको और भी मज़ा आएगा. चाची- ओके बाद में देखेंगे. अचानक दरवाजे की घंटी बजने लग. चाचा को तो आने में देर थी … ये अभी कौन आ गया है? चाची- कौन है? बाहर से आवाज आने लगी- मैं परवीन और हिना आई हैं. (नाम बदले हैं) ये दोनों चाची की बहनें हैं. चाची के परिवार के बारे में बता देता हूं. चाची के 3 बहनें हैं. चाची को मिलाकर कुल 4 बहनें हुईं. पहली परवीन आंटी, दूसरी हिना आंटी और तीसरी चाची रेशमा और चौथी जस्मीन. परवीन आंटी के बारे में बताता हूं. परवीन आंटी का कद चाची से कम है. उनका कद 5 फुट ही होगा. उनका उभरा हुए शरीर है. उनके चूचे 40 के होंगे, कमर 38 की होगी और गांड 42 की होगी. देखने में वो मस्त माल दिखती हैं … काफी सुंदर भी है. वे स्कूल में टीचर का जॉब करती हैं. उनकी उम्र लगभग 42 साल की होगी. दूसरी बहन हिना आंटी हैं. वो भी एक गदराया हुआ माल थीं. उनका शरीर काफी फिट था. उनके चूचे 38 के, कमर 34 की और गांड 40 की थी. उम्र लगभग 40 साल होगी. उनके बाद जस्मीन आंटी थीं, वे काफी लंबी थीं … कोई 5 फुट 10 इंच की होंगी. वे मेरे से भी लंबी थीं. उनका फिगर मैं मुझे पसंद नहीं था. ये तीनों बहनों उसी टाउन में रहती थीं. उनका हमेशा ही चाची के यहां आना जाना लगा रहता है. जब मैं चाची के घर में पढ़ रहा था, तब भी मैं उन्हें चाची के घर में बहुत बार देख चुका था. वो मुझसे बहुत अच्छे से बात करती थीं. देखने की बात की जाए … तो वो तीनों बहनें सेक्स बॉम्ब थीं. जब मैं बारहवीं में था, तभी से मेरी उनके ऊपर निगाह थी. लेकिन क्या करता, चाची ही नहीं मिली थीं, तो उनकी बहनें कहां से मिल जातीं. खैर अब तो चाची मेरी हैं. अब उनकी बहनों पे ट्राय करना था. अपनी बहनों की आवाज सुनी, तो चाची ने जल्दी से ब्रा और पैंटी पहनी और नाइटी पहन कर दरवाजा खोलने चली गईं. मैं भी अंडरवियर और सब कपड़े पहन कर हॉल में आ गया. परवीन- अरे जीशान बेटा … कब आए तुम? काफी बड़े हो गए हो … कैसे हो? हिना- और पढ़ाई कैसी चल रही है? मैं- सब ठीक चल रही है आंटी … और आप सब कैसे हैं? परवीन- हां हम सब ठीक हैं. हिना- तुम आगे क्या करने वाले हो? मैं- अभी सोचा नहीं … एंट्रेंस एग्जाम देकर आया हूँ … रैंक पर डिपेंड करता है. हिना- इस साल आलिया (उनकी बड़ी बेटी का नाम) का भी डेंटल खत्म हो गया. उसकी शादी भी तय हो गयी है. मैं- अरे इतनी जल्दी? परवीन- अंजू (उनकी बड़ी बेटी) की तो 22 में शादी कर दी थी मैंने. चाची- मैं सबके लिए चाय बना कर लाती हूं. चाची किचन में चली गईं. मैं भी पानी पीने के बहाने से उनके पीछे चला गया. चाची का किचन छोटा सा था. अगर कोई एक खड़ा होता था, तो दूसरे को पास करना मुश्किल पड़ता था. चाची चाय बना रही थीं. मैं उनको पकड़ कर पास होने लगा. मेरा लंड उनकी गांड को छू रहा था. चाची- साले, तेरा लंड तो अभी भी खड़ा है. मैं- अभी तो ये आपको दोनों बहनों को देख कर खड़ा हो गया है. चाची- साले और कितनी चुत चाहिए तुझे मादरचोद. मैं चाची के पास जाकर बोलने लगा- मुझे वो दोनों चाहिए … आप ही कुछ करो … नहीं तो यहीं चोद दूंगा. यह बोल कर मैंने उनके चूचे दबा दिए. चाची- ये इतना आसान नहीं है. तू मेरी नाक कटवाएगा कमीने. मैं- आप बस कुछ भी कर लो … मुझे उनके साथ अकेले में रहने का इंतज़ाम करो. बाकी सब मैं संभाल लूंगा. चाची- मैं कोशिश करती हूं … लेकिन तू मुझे पहले चोदेगा, फिर उनको. तेरी पहली पसंद मैं ही रहूंगी. मैं- वो तो आप हमेशा रहोगी … मेरी जान … चाची जान.चाची चाय बनाकर ले आईं. सब लोग मिलकर पीने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे. परवीन- जीशान, सुना है आपके पापा ने वो रोड साइड वाली ज़मीन में फर्म हाउस बनवा लिया है. मैं- हां आंटी … वो तो कब का बना हुआ है. दो साल पहले बना लिया था. अब वहां आम का बगीचा और दूसरे फलों का बगीचा है. आम के पेड़ तो बड़े हो गए हैं. इस साल वहां अंगूर का बगीचा डालने का प्लान कर रहे हैं. इसलिए छोटा पूल जैसा बनाया है. उसको हमेशा पानी चाहिए होता है. हिना- अरे वाह … ये तो हमारे लिए पिकनिक स्पॉट हो जाएगा. दो साल से इतना कुछ किया, हमें क्यों नहीं बताया. हम भी वहां घूम कर आते. चाची- मैंने बताया था … आपने ध्यान नहीं दिया होगा. परवीन- तो फिर अभी तक हमें क्यों नहीं लेकर गयी? चाची- अरे मैं खुद नहीं गयी हूँ दीदी. मैं- क्यों चाची? आपने भी नहीं देखा है? चाची- तुम ये बात अपने चाचा से बोलो. वो कहीं नहीं लेके जाते. इतने में दरवाजे की घंटी बजी. इस बार चाचा आए थे. वे सबको घर में देख कर चौंक गए. चाचा- अरे जीशान! कब आया तू बैंगलोर से … कैसे हुए एग्जाम? परवीन- उसको पूछने की ज़रूरत भी क्या है? वो तो हमेशा टॉप करता है. चाचा- हां परवीन जी … सही कहा. वैसे आप दोनों कब आईं? हिना- दीदी की आज हाफ-डे क्लास थी … और मैं स्कूल के पास ही कुछ सामान खरीदने वाली थी. तो दीदी बोलीं कि चल रेशमा के घर चलते हैं … बहुत गर्मी भी थी … सो बस हम दोनों आ गए. चाचा- हां गर्मी तो बेजा है. अब तो 40 डिग्री हो गयी है. मैं- इतनी धूप जो है, तो आप सब लोग क्यों न हमारे फार्म हाउस आ जाते. वहां पेड़ों की ठंडी हवा में अच्छा लगेगा. चाची- लो … अब तुम्हारे चाचा भी यहीं पे हैं. तुम ही बोलो चाचा को? चाचा- अरे यहां पे इतना काम है. … कैसे लेकर जाऊं हिना. मैं- मैं कल जा रहा हूँ. मुझे भी बहुत दिन हो गए हैं, मैं वहां गया ही नहीं. चाची- मैं भी चलूंगी. मैं- परवीन आंटी और हिना आंटी तुम दोनों भी आ जाओ न. परवीन- नहीं बेटा … तुम लोग जाओ. हम सब मिलकर फिर कभी जाएंगे. मेरी वैल्यूएशन में ड्यूटी लगी है. हिना- अगले महीने और ज़्यादा होने वाली है धूप … उस समय वहां जाकर कुछ मजा नहीं आने वाला! चाचा- हिना तू अभी जाएगी? चाची- हां, मैं जीशान के साथ जाउंगी. चाचा- वहाँ पे खाने के लिए कुछ लेकर जाओ. वहां रात को कोई नहीं रहेगा. मैं- चिकन लेकर जाएंगे और वहां पापा ने ग्रिल बनाई है … हम ग्रिल चिकन बना कर खाएंगे. चाची- ओके. चाचा- अब तो शाम हो गयी है. तुम लोग कल सुबह चले जाना. हिना, जीशान को अच्छे से खाना बना कर देना रात को. बहुत दिन बाद घर आया है. परवीन- हमें भी जाना है. हम निकलती हैं. हिना- जीशान, रेशम, देवर जी खुदा हाफिज. वो दोनों बहनें निकल गईं. चाची ने चाचा से कुछ सामान लाने के लिए कहा … तो चाचा भी निकल गए. मैं मन में सोच रहा था. इन दोनों आंटियां को कैसे चोदूं. उन दोनों के जाते वक्त उनकी मटकती गांड मुझे बेचैन कर रही थी. तभी चाची आईं- कहां खो गए हो बेटे? मैं- आपकी दोनों दीदियों की गांड की दरार में खो गया हूं चाची. चाची- ये सब इतना जल्दी नहीं हो पाएगा. टाइम लगेगा … तब तक तेरे लिए मेरी चुत जो है. यह कहकर वे मुझे किस करने लगीं. मैं भी होंठ चूसने लगा और मम्मों को दबाने लगा. अब मुझे कल का प्लान बनाना था. मैं- चाची आप बैग में कुछ अच्छे से सेक्सी ड्रेस रख लो. मेरी पसंद वाली रेड ब्रा जरूर ले लेना और रेड पैंटी भी. तेल की बोतल भी ले लो … कुछ हनी और चॉकलेट भी रख लो. चाची- ये सब क्यों? मैं- आप कभी हनीमून पर गई हो? चाची- नहीं? मैं- कल हमारा हनीमून होगा. रात को चाचा के साथ सेक्स मत करना. कल हम पूरा एन्जॉय करेंगे. चाची- पता नहीं कल मेरा बेटा क्या क्या मज़े देने वाला है. मैं- अच्छे से सो जाना, कल तो सोने का टाइम ही नहीं मिलेगा. चाची मुस्कुराकर चली गईं … और मैं भी जल्दी ही सो गया … मैं बहुत थक गया था. चाची के जाने के बाद मैं रात को 8 बजे तक सोता ही रहा. चाची ने आकर मुझे खाना खाने के लिए उठाया. चाचा भी मेरा इन्तजार कर रहे थे. मैं जल्दी से उठ कर हाथ मुँह धोकर खाना खाने आ गया. खाना सच में बहुत स्वादिष्ट बना था. मैंने पेट भर के खा लिया और फिर जाकर सो गया. मुझे इतनी मस्त नींद आई कि होश ही नहीं रहा. कब सुबह हुई, कुछ पता ही नहीं चला. चाची ने मुझे 9 बजे सुबह उठाया था. मैंने देखा कि चाची नहा धोकर तैयार खड़ी थीं- जीशान उठो यार … देखो 9 बज गए हैं. बहुत सारी मस्ती करना है ना … जल्दी उठो. मैं उठ गया और कुछ ही देर में मैं नहा लिया. फिर हम दोनों ने ब्रेड बटर का ब्रेकफास्ट किया और वहां से निकल गए. चाची अपना एक छोटा सा बैग रेडी कर चुकी थीं. लंच के लिए उन्होंने एक बड़ा टिफिन भी रेडी कर लिया था. मैं- इतना सब लेकर हम बाइक में कैसे जाएंगे. इतने सामान की जरूरत क्या है? चाची मेरा कान पकड़ कर बोलीं- इतनी बड़ी लिस्ट किसने बताया था बेटू. मैं- अच्छा चलो … अभी देर हो गई है. हम दोनों बाइक से निकल गए. मेरा फार्म हाउस नज़दीक ही था … कोई 10 किलोमीटर दूर … हम दोनों आधा घंटे में वहां पहुंच गए. वहां पर एक कामवाली थी. उसका नाम मुझे मालूम नहीं था. मैंने उससे चाबी ले ली और बोला कि तुम जा सकती हो, कल आ जाना. वो चली गयी. अब तो 20 एकड़ के बगीचे और फार्म हाउस में हम दोनों के अलावा कोई और नहीं था. जब हम दोनों फार्म हाउस के अन्दर गए, तो चाची बुर्क़ा निकालने लगीं. तब मैंने देखा कि आज चाची कितनी मस्त सजी धजी हुई हैं. वाइट और ग्रीन साड़ी पहने हुई थीं. चाची को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने पीछे से जाकर उनको ज़ोर से पकड़ लिया और उनके पेट को चूमने लगा. साथ ही उनके मम्मों को भी दबाने लगा. चाची- इतना जल्दी शुरू हो गया … रुको थोड़ा. मैं- अब रुकने का कोई काम ही नहीं है. जल्दी साड़ी निकालो … पूल में चलते हैं. चाची- तुम्हें साड़ी पसंद आई, तो तुम ही निकाल दो. मैं उन्हें ज़ोर ज़ोर से चूमने लगा. उनका पल्लू नीचे गिर जाने दिया. ग्रीन कलर ब्लाउज में उनके 36 इंच के चूचे मस्त दिख रहे थे. मैं नीचे बैठ गया और उनके पेट को चूमने लगा और उनके मम्मों को सहलाने लगा. नाभि के ऊपर जीभ से मसलने लगा. चाची की कामुक सिसकारियां शुरू हो गईं. इस बार चाची बिना किसी डर के बहुत जोर से मचल रही थीं- आआह … मेरी जान मजा आ गया. मैं बिना समय गंवाते हुए चाची का ब्लाउज निकालने लगा. चाची भी साथ देने लगीं. मुझसे ज्यादा जल्दी चाची को दिखने लगी थी. उनका ब्लाउज निकलते ही मुझे मेरी मन पसंद लाल रंग की ब्रा दिख गई. उनकी रेशमी लाल रंग की छोटी से ब्रा देखकर मैं एकदम से उत्तेजित हो गया. मुझे रुका ही नहीं गया. मैं ब्रा के ऊपर से चाची के मम्मों को सहलाने लगा और ब्रा के ऊपर से ही मम्मों को काटने लगा. चाची ज़ोर से चीखने लगीं. “आआह … काट मत साले!” मैंने उनकी सुनी ही नहीं. चाची- इतना भी जल्दी क्या है यार … धीरे धीरे करो न. मैं- ओके चाची आप दरी ले लो और जो जो सामान मैंने बोला था, वो सब ले लो … हम लोग पूल के पास चलते हैं. चाची सब सामान लेने जा रही थीं. तभी मैंने चाची की साड़ी को पकड़ कर खींच दिया. चाची हंसते हुए घूमने लगीं, जिससे उन्होंने खुद ही अपने जिस्म से साड़ी को खुल जाने दिया. अब चाची सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थीं. चाची ने सब सामान इकट्ठा करके नीचे रख दिया. मैं दरी बिछा कर नीचे बैठ गया और उनका पेटीकोट ऊपर करने लगा. चाची ने भी पैर फैला दिए. मैं उनके गोरे गोरे पैरों को चाटने लगा और गांड को सहलाने लगा. चाची की आह निकलने लगी. तभी मैंने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया. अब चाची सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं. चाची- मेरे कपड़े निकाल दिए, लेकिन तू अभी भी पूरे कपड़ों में है. मैं- तो रोका किसने है जान … आप ही निकाल दो न. चाची मेरे बटनों को खोलने लगीं. चाची ने मेरी शर्ट पैंट निकाल दी. फिर वो मेरी बनियान भी निकालने लगीं. मैं अब सिर्फ अंडरवियर में रह गया था. चाची मुझे चूमने लगीं और मैं उनकी गांड सहलाने लगा. वे मेरे लंड पर अंडरवियर के ऊपर से ही हाथ रखने लगीं. मैं- अभी नहीं. … उधर चलो पूल के पास, इधर बहुत गर्मी है. मैंने बाथरूम में जाकर रेजर, साबुन, फोम, तौलिया आदि ले लिया और चाची के सामान में रख दिया. मैं और चाची सब सामान लेकर पूल की तरफ जाने लगे. पहले आम का बगीचा था, फिर पूल और उसके पीछे अंगूर का बगीचा था. एक बड़े से आम के पेड़ के नीचे दरी को बिछा दिया और सब सामान वहां रख कर हम दोनों पूल की तरफ बढ़ गए. पूल 7 फुट गहरा था … उसमें पानी आधा भरा था. मैंने जाकर पंप ऑन कर दिया और चाची को पूल में ले जाने लगा. कुछ ही पलों में हम दोनों पूल के बीच में खड़े थे. मैं उन्हें चूमने लगा और पूरा बदन सहलाने लगा. चाची एक चुदासी औरत की तरह ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां ले रही थीं. पूल आधा भरा होने के कारण मजा आने लगा. मैं धीरे उनकी ब्रा का हुक निकाल दिया … और ब्रा को ऊपर फेंक दिया. जहां पम्प से पानी पूल में आ रहा था. मैं चाची को पानी गिरने की जगह लेकर आ गया. अब उनके मोटे मोटे मम्मों के ऊपर पानी गिरते हुए बड़ा मस्त लग रहा था. वो नजारा बहुत मस्त था. मैं भी चाची के साथ पम्प की नीचे खड़ा हो गया और हम दोनों एक दूसरे के बांहों में आ गए. इस मदमस्त वक़्त का भरपूर मज़े लेने लगे. मैंने और चाची साथ में पानी में नहाने का प्लान बनाया था. हम एक दूसरे को साबुन लगा रहे थे. एक दूसरे को मसलते हुए मसाज जैसा कर रहे थे. उस वक्त का हर एक पल बहुत मस्त था. हम दोनों का पानी से नहाना खत्म होने वाला था. मैंने चाची की पैंटी को निकाल दिया और उनकी चुत को सहलाने लगा. चाची ‘आआह..’ करने लगीं. मैंने चाची की चुत के ऊपर फोम लगाया. चाची- ये क्या कर रहा है? मैं- आपकी चूत को चिकनी कर रहा हूँ. चाची- कैसे? मैंने रेजर दिखाया. चाची- मैं अभी तक रेजर यूज़ नहीं किया है. सिर्फ ट्रिम करती हूं. मैं- मुझे आज करने दो … मैं चूत साफ कर दूंगा. चाची- ठीक है … लेकिन ध्यान से. मैंने चाची को पूल की सीढ़ियों पर लिटा दिया और उनकी दोनों टांगों को खोल कर चूत को अच्छे से फोम से गीला कर दिया. फिर रेजर से चाची की चूत पर उगी हुई काली झांटों के बाल धीरे धीरे निकालने लगा. उस समय मैं जानबूझ कर अपनी उंगलियां चाची की चुत में डाल रहा था. चाची इस सबके मज़े ले रही थीं. चाची के बाल नीचे उनकी गांड तक उगे हुए थे. मैंने सब बाल रेजर से शेव कर दिए. अब चुत एकदम साफ थी और चिकनी भी हो गयी थी. मैं- अब देखो कितनी मस्त दिख रही है. चाची- हां रे जीशान … बहुत मस्त दिख रही है … ठंडी हवा भी लग रही है … मेरे बेटू को सब पता है. हम दोनों नंगे ही अपने कपड़े हाथ में पकड़ कर अपनी जगह आम के पेड़ के नीचे चलने लगे. चाची पेड़ के नीचे दरी को ठीक करने लगीं. इसके बाद वे सब सामान बाहर निकाल कर रखने लगीं. हनी, चॉकलेट, तेल सब निकाल कर चाची लेट गईं और मैं भी उनके ऊपर आ गया. हम दोनों चुदास से एकदम गर्म थे. चाची- ये सब सामान किस लिए लाया है? मैं- सस्पेंस है. मैंने हनी की बोतल ली और हनी उनके उपर डालने लगा. मैंने चाची के मम्मों के ऊपर, पेट के ऊपर और खास करके चुत के ऊपर और चुत के अन्दर भी खूब सारा शहद टपका दिया. चाची- ये क्या कर रहा है … खाने की चीज़ को ऐसे बर्बाद मत कर. मैं- कौन वेस्ट कर रहा है … इसको मैं चाट लूँगा. यह कहते हुए मैंने चाटना शुरू कर दिया. मैं अपनी मस्त चाची का पूरा बदन कुत्ते की तरह चाटने लगा. चाची के मम्मों के ऊपर चाटने के बहाने में उनके मम्मों को काट रहा था. जब भी मैं दांत गड़ाता, चाची ज़ोर से चीखने लगतीं- आआह … काट मत हरामी. सुनसान जगह होने के कारण चाची की आवाज़ गूंज रही थी. मैं पेट के ऊपर भी जोर जोर से चाटने लगा. मैंने एक भी बूंद हनी को वेस्ट नहीं किया. अब मैं चुत पर आ गया. चाची- कैसे नए नए तरीके ढूंढ कर लाया है मादरचोद … और कितने मज़े देगा. इतने मज़े देने के बाद तू बैंगलोर चला जाएगा, तब मैं क्या करूँगी. मैं- मैं हर हफ्ते आ जाऊँगा तुम्हें चोदने … अब अभी के मज़े तो ले लो मेरी चाची जान. मैं चाची की चुत को दीवानों की तरह चाट रहा था. उनकी चुत पर पानी आ जाने के कारण चूत नमकीन थी, उसके ऊपर मीठा शहद का मजा था. मुझे नमकीन और मिठाई का मज़ा एक साथ आ रहा था. चाची- आह … ऊऊह … भोसड़ी के … चाट ले … मादरचोद. चाची ज़ोर ज़ोर से चीखने लगीं. उनकी आवाज से मैं और उत्तेजित हो रहा था. मैं और ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा. चाची- क्या कमाल कर दिया रे तूने … आह बहुत मज़ा आने लगा है. … वो तेरा बूढ़ा खूसट चाचा … आह उसके मरियल लंड से मज़ा नहीं आने वाला था … आह तेरा ये बड़ा लंड मेरे सहारे के लिए आ गया. लव यू सो मच जीशान बेटा … बन गई रे मैं तेरी रंडी … आआह … मैं उन्हें चूमते हुए बोला- अभी और मज़ा आने वाला है. थोड़ा प्यार बचा कर रखना मेरी चाची जान … उम्माह …चाची- कैसे नए नए तरीके ढूंढ कर लाया है मादरचोद … और कितने मज़े देगा. चाची ज़ोर ज़ोर से चीखने लगीं. उनकी आवाज से मैं और उत्तेजित हो रहा था. मैं और ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा. अब तक चाची सब मज़े ले रही थीं. अब मेरी बारी थी. मैं लंड लेकर चाची के मुँह के पास चला गया. चाची- मैंने साफ मना कर दिया था. ये मुझसे नहीं होगा. मैं- इसी लिए तो चॉकलेट और हनी है. चाची- मुझसे नहीं होगा. मैं- अभी तक तो इतने मज़े ले लिए, लेकिन मुझे मज़े नहीं दोगी? चाची- तुझे जो मज़े लेना है ले ले, लेकिन ये नहीं होगा मुझसे. मैं- मुझे ये ही चाहिए. एक बार ट्राय तो कीजिये … अगर आपको पसंद नहीं आएगा, तो नहीं करेंगे. चाची- सिर्फ एक बार करूँगी, मुझे अच्छा नहीं लगा, तो नहीं करूंगी. मैं लंड उनके मुँह के ऊपर रखने लगा. चाची मेरे लंड को झट से हटा दिया और चॉकलेट सीरप को लंड के ऊपर डालने लगीं … फिर धीरे से लंड को एक बार मुँह में ले लिया. चाची- मुझसे नहीं होगा जीशान, छोड़ दे. ये बात सुनते ही मुझे थोड़ा गुस्सा आया. मैं चाची के मुँह को जोर से चोदने लगा. उनकी चीख मुँह में लंड होने के कारण अन्दर ही रुक गयी ‘आआंमम्म..’ मैं रुका ही नहीं और ज़ोर से लंड को अन्दर तक डालने लगा. करीब दो मिनट उनके मुँह को चोदने के बाद मैं लंड बाहर निकालने लगा. चाची अब ऊपर उठ गईं और मुझे मारने लगीं- साले चूतिये … तुझे मैंने अपनी चुत दी, मेरा सब कुछ दिया, फिर भी तू मुझे रंडी की तरह मेरा मुँह चोदने लगा … रानी बोल रहा था. आखिर रंडी ही बनाया मुझे. मेरे पति ने मुझे आज तक सेक्स के लिए फ़ोर्स नहीं किया और तू मुझसे ये सब करवा रहा है. मैं- आपने तो अपने मज़े ले लिए … बदले में मुझे मज़े नहीं दोगी? तुम मेरी जान हो, मुझे जो चाहिए वो मैं करूँगा. मैं चाची पर आक्रमण करने लगा और उन्हें नीचे गिरा कर अपना लंड उनकी चुत के ऊपर रख दिया. चाची अभी भी गुस्सा थीं. मैं- लंड नहीं चाहिए? ये सब ज़िन्दगी के मज़े हैं … मज़े लेने दो और मज़े ले लो. चाची तना हुआ लंड देख कर मान गईं. मैं लंड चुत के ऊपर रगड़ने लगा. चाची- अब अन्दर भी डाल भोसड़ी के, तेरे लंड की आरती उतारूं क्या? मैंने बिना देर किए लंड को एक झटके में अन्दर डाल दिया. इस तेज झटके में मेरा पूरा लंड अन्दर घुस गया था, चाची कांप उठीं और दर्द से चिल्लाने लगीं- आआआह मैं मर गयी … ये गधे का लंड मेरी चुत फाड़ कर ही दम लेगा. मैं हंसते हुए ज़ोर ज़ोर से चूत धक्के मारने लगा. चाची मस्ती से चीखने लगीं, चुदाई के मज़े लेने लगीं. चाची आज इस सुनसान जगह में बेखौफ होकर अजीब अजीब तरह की तेज आवाज में सिसकारियां लेने लगीं- आआह … यस … मररर गईई … ऊम्म … तेरा बहुत बड़ा लंड है … मादरचोद … बच्चेदानी तक ठोकर मार रहा है उम्म्ह… अहह… हय… याह… कोई 5 मिनट की चुदाई के बाद मैंने लंड बाहर निकाल दिया. चाची- अरे क्या हुआ? मैं- एक ही पोजीशन में कितनी देर तक चोदूं … अब ऊपर उठो. मैंने चाची को ऊपर उठाया और उन्हें पेड़ के सहारे खड़े होने का बोला. चाची पेड़ को पकड़ कर खड़ी होने लगीं. मैं धीरे से पीछे से अपना लंड चाची के भोसड़े में डालने लगा. मैंने निशाना लगाकर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. ज़ोर के धक्के की वजह से चाची नीचे गिर गईं. लंड जो अन्दर गया था, वो भी बाहर निकल गया. चाची- मार ही देगा मुझे? क्या खाता है, इतनी ताकत है तेरे में … साले सांड. मैं- तुम पेड़ को ज़ोर से पकड़ो. मैंने फिर से कोशिश की, एक और ज़ोर का धक्का दे मारा. इस बार मेरा पूरा लंड अन्दर घुस गया, चाची की चुत को चीरते हुए लंड अन्दर चला गया. चाची चीखते हुए चुदाई के मज़े ले रही थीं- आआह ऊऊम्म … और ज़ोर से कर, मुझे पूरी तरह से शांत कर दे … आह. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था. इस वक्त मैंने उनका एक पैर ऊपर करके अपने एक हाथ में पकड़ लिया था. इसकी वजह से लंड और अन्दर जाने लगा. चाची- मुझे तो खिलौना बना लिया तूने, आह चोद दे … जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल कर ले … मेरा … आआआह ऊऊम्म मेरी चुत को भोसड़ा बना दिया … साले मादरचोद. मैं- साली रंडी कितना चीखेगी, गला फट जाएगा मादरचोदी. ये बात सुनते ही चाची हैरान हो गईं, मैं पहली बार उनको गाली दे रहा था. मैं और उत्तेजित होकर उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मारने लगा. चाची- थप्पड़ क्यों मार रहा है … और साले अपनी चाची को गाली दे रहा है … भैन के लौड़े शर्म नहीं आती तुझे. मैं- साली कुतिया … लंड खा … मुझे कोई शर्म-वर्म नहीं आती है. मैं और जोर से चुदाई करते हुए चाची के चूतड़ों पर थप्पड़ मारने लगा, उनके चूतड़ एकदम लाल हो गए थे. ज़ोरदार 10 मिनट चुदाई के बाद मैं उनकी चुत में ही झड़ गया और मैं उनके ऊपर गिर गया. चाची भी नीचे गिर गईं और उन्होंने मुझे धक्का मार कर अलग कर दिया. चाची- चल हट मादरचोद … इतना बड़ा लंड है, इतना दर्द होता है … उसके ऊपर तू मुझे मार भी रहा है. मैं- जितना ज्यादा दर्द, उतना ज्यादा मज़ा. चाची- तुझे तो दर्द नहीं हो रहा न … तू तो कुछ भी बोलेगा … यहां मेरी जान जा रही है. मैं- सॉरी चाची … इस बार तुम मुझे दर्द दे देना. चाची- नहीं रहने दे, तू तो मेरा आशिक़ है … तुझे जैसा मन करता है, वैसे कर ले, मैं तो तेरी हूँ. … और तू मेरी चुत की आग को ठंडा कर रहा है. हम दोनों किस करने लगे. चाची- और ये तेल किस लिए मंगवाया है. मैं- ये मैं रात को बताऊंगा. चाची- रात का रात को देखेंगे, पहले खाना तो खा ले … भूख लगी है मुझे. दिन के 3 बज चुके थे. टिफिन में जो खाना लाये थे हम दोनों खाने लगे, मस्त बिरयानी बनी थी. हम दोनों एक दूसरे को प्यार से खिलाने लगे. मैं वो दिन याद करने लगा, जब मैं हर दिन चाची के हाथ से खाना खाता था. चाची- मेरे हाथ से खाना खा रहा था … और अब मेरी चुत मार रहा है. वाह बेटा वाह … अगर ये बात किसी को पता चलेगी, तो मेरी और तुम्हारी कितनी बदनामी होगी. मैं- किसी को पता नहीं चलेगा. हम दोनों खाना खाने के बाद, एक दूसरे के बांहों में सोने लगे. हम दोनों एकदम नंगे पड़े थे. करीब 4 घंटे तक हम दोनों खूब चैन की नींद सोये. बाद में चाची मुझे चूमते हुए उठाने लगीं- चलो अन्दर कमरे में चलते हैं. मैं- ठीक है. हम दोनों सब सामान लेकर फार्म हाउस के कमरे में चले गए. मैंने फ़ोन चैक किया, तो चाचा के कई फ़ोन आए हुए थे. मैंने चाचा को फ़ोन लगाया, तो चाचा पूछने लगे कि अभी तक घर क्यों नहीं आए. मैं बोला- गाड़ी पंक्चर हो गई है और काम वाले नहीं आए हैं. चाचा बोले- वहीं पे सो जाओ, सुबह मैं गाड़ी भेजता हूँ. फिर वो चाची से बात करने लगे. जीशान के लिए खाने के लिए कुछ बना दो. भूखे मत सोने देना. चाची बोलीं- हम चिकन लाए हुए हैं. जीशान ग्रिल चिकन बनाने को बोल रहा है. हम वही बना कर खाएंगे. चाचा से बात खत्म हुई. रात को ग्रिल चिकन बना कर खाया. इसके बाद मैंने ऊपर छत पर सोने के लिए बोला. चाची और मैंने ऊपर छत पर बिस्तर लगा दिए. इस वक्त चाची ब्रा और पैंटी में थीं और मैंने अंडरवियर पहना हुआ था. छत पर बड़ी ठंडी हवा चल रही थी और चांद का उजाला था. चाची शहद, चॉकलेट और तेल ऊपर लेकर आयी थीं. हम दोनों सेक्स की बातें करने लगे. मैं- चाची आप अपनी दोनों बहनों से मुझे कब चुदाई का मजा दिलवाओगी. चाची- ये सब मुझसे नहीं होगा बाबा. तू उनको भूल जा. मैंने कुछ जवाब नहीं दिया. जवाब तो मैं चुदाई में दूंगा. रात के दस बज गए थे. अब कामक्रीड़ा शुरू होने वाली थी. मैंने चाची को नंगी कर दिया, उनकी ब्रा और पैंटी को निकाल दिया. चाची भी मेरे अंडरवियर को निकाल कर लंड सहलाने लगीं. मैंने ढेर सारा तेल उनकी बॉडी पे डाल दिया. अपने हाथों चाची के शरीर पर हर जगह मम्मों पर, गांड के छेद पर, चूतड़ों पर, पेट पर पीठ पे, जांघों पर मतलब सब जगह तेल मल दिया. चाची- इतना तेल क्यों? मैं- आपकी मसाज करने के लिए … आप भी मुझे तेल लगा कर मालिश कर देना. चाची मेरे पूरे बदन पर तेल लगाने लगीं. वे लंड पर भी तेल डाल कर मुठ मारने लगीं, तो मैं मना कर दिया. हम दोनों एक दूसरे के शरीर को करीब आधा घंटे तक मसाज करते रहे. चांदनी रात छत के ऊपर चाची का बदन तेल में चमक रहा था और मेरा लंड भी चमक रहा था. मैं- चाची आपके बदन में मुझे सबसे पसंद आने वाली जगह कौन सी है? पता है आपको? चाची- नहीं..! तू ही बता दे! मैं- ये मोटे मोटे चूचे और बड़ी सी गांड. चाची- अरे यार इतनी भी बड़ी नहीं है. मेरी दीदियों की गांड मेरी गांड से भी बड़ी हैं और उनके मम्मे भी बड़े हैं. मैं- इसीलिए तो मैं उन्हें चोदना चाह रहा हूँ. आप चिंता न करो आपकी गांड भी बड़ी हो जाएगी. चाची- वो कैसे? मैंने चाची की पूरी गांड को तेल से भर दिया. इससे चाची समझ गईं कि गांड का फीता काटने वाला है. चाची- इधर दर्द नहीं होगा ना? मैं- थोड़ा होगा … फिर मज़ा आएगा. चाची- ध्यान से मारना, कहीं मेरी गांड फट न जाए. मैंने चाची को डॉगी पोजीशन में बैठाया और मैं पीछे से लंड को गांड के निशाने पर रख कर धक्का मारा. लेकिन लंड अन्दर नहीं गया, फिसल गया. मैंने 3-4 बार कोशिश की, मगर खेल नहीं हुआ. फिर मैंने चाची से अपने दोनों हाथों से गांड को फाड़ कर पकड़ने को बोला. चाची ने दोनों चूतड़ों को अपने हाथों से फैलाया जिससे चाची की गांड का छेद थोड़ा दिखने लगा था. मैंने लंड का सुपारा छेद पर टिकाया और इस बार एक ज़ोर का धक्का मार दिया. लंड का टोपा अन्दर घुस गया. चाची दर्द से तड़पने लगीं. उन्होंने अपने दोनों हाथों को दर्द के चलते आगे कर दिए और दूर होने लगीं. मैंने तुरंत अपने हाथों से उन्हें पकड़ लिया. चाची इतना ज़ोर से चीखीं कि पूरा फार्म हाउस गूंजने लगा. चाची- प्लीज बाहर निकाल दे लंड, मैं मर जाऊँगी प्लीज … मैं तेरा लंड भी चूस लूँगी लेकिन ये गांड चुदाई … आह नहीं होगी मुझसे … निकाल प्लीज. अगर मैंने अभी लंड निकाल दिया, तो चाची की गांड जीवन में कभी नहीं मिलने वाली थी. मैंने उनके मम्मों को सहलाते हुए एक और धक्का दे दिया, मेरा आधा लंड अन्दर चला गया. चाची ऊपर उठने की कोशिश कर रही थीं. लेकिन मैंने उन्हें पकड़ा हुआ था. चाची की आंखों में आंसू आने लगे. चाची- छोड़ दे बेटा मुझे प्लीज. मैं मर जाउंगी. मुझसे नहीं होगा ये. आआआह … ऊफ … कोई बचाओ मुझे इस गधे के लंड से … मादरचोद छोड़ दे! मैंने एक और धक्का दे दिया, अब मेरा पूरा लंड गांड के अन्दर था. चाची की गांड फट गई थी. चाची- आह मेरी गांड फट गई … हरामी … छोड़ दे सुअर के चोदे … ऊह … आआआह. मेरे पर तुझे रहम भी नहीं आई साले … भड़वे … मादरचोद … तेरी माँ को चोदूं हरामी … विदेशियों के साथ रह कर ये सब सीख कर आया भैनचोद … तेरी पत्नी तो तेरे को हाथ मारेगी … आआह ऊऊह.. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. मुझे चाची की चीखों से मजा आ रहा था- अब बोल चाची भैन की लौड़ी … अपनी दोनों बहनों की चूत मुझको कब दिलाओगी. चाची- मेरी गांड का ये हाल कर दिया. भोसड़ी के, अब उनकी चूत और गांड का भी ऐसा ही हाल करेगा, मैं होने नहीं दूंगी. मैंने ज़ोर से धक्का मारा और लंड कप गांड की जड़ तक पहुंचा दिया. चाची- अच्छा मदद करूँगी … दोनों की चुत गांड दिलाऊंगी … तू धीरे कर प्लीज. आखिर चाची मान गईं. मैं धीरे धीरे उनकी गांड मारने लगा. अभी मैं चाची की गांड में लंड पेले हुए उनकी चुत को भी सहला रहा था, इसकी वजह से उन्हें दर्द कम हो गया. चाची गांड मरवाने का थोड़ा मजा लेने लगीं. कोई 15 मिनट गांड चुदाई के बाद मैं चाची की गांड में ही झड़ गया. मेरी ‘आआआह..’ निकल गई और लंड को बाहर निकाल दिया. चाची- आह मैं आज एक गधे के लंड से चुदी … तेरे को सौ सलाम … मगर अगली बार मैं तुझे मिलूंगी ही नहीं. मैं- ऐसे कैसे जाने दूंगा मैं … और तुम भी मुझे छोड़कर जा नहीं सकती, अब तो आपको भी मेरे लंड की सख्त ज़रूरत है. चाची- वो तो है … लेकिन ऐसे कुतिया बन कर चुदना … मुझसे नहीं होगा. मैं उंगली करके शांत हो जाउंगी, लेकिन ऐसे नहीं. मैं उनको समझाने लगा. कुछ देर में सब नार्मल हो गया. हम दोनों थक गए थे, इसलिए जल्दी सो गए. अचानक मेरी नींद में खलल हो गयी. उस वक्त सुबह के करीब 4 बजे होंगे. मैंने देखा कि चाची मेरा बदन चूम रही थीं और मेरे ऊपर चढ़ी जा रही थीं. मैं- इतनी शानदार चुदाई के बाद भी आप मूड में आ गईं चाची … कैसे? चाची- तुमने तो गांड मारी है … चुत कैसे ठंडी होगी … आग लगी है अन्दर. मैं- लेकिन अब मुझसे नहीं होगा. मैं पूरा थक गया हूं. चाची- तुम सो जाओ, मैं ही खुद कर लूंगी. चाची ने काफी सारा शहद मेरे ऊपर डाल दिया और मुझे चाटने लगीं. मुझे मज़ा आने लगा. इस बार चाची की हरकतें देख कर मैं हैरान हो गया. चाची खुद चॉकलेट डाल कर मेरा लंड चूसने लगीं. मैं- चाची ये क्या कर रही हो? आपको तो लंड चूसना पसंद नहीं है. चाची- कभी कभी कुछ पाने के लिए करना पड़ता है. वैसे अब आदत हो गयी है तेरे लंड की. मैं भी मज़े ले रही हूँ. मैं- वाह रे चाची. चाची के लंड चूसने की वजह से लंड खड़ा हो गया और चाची लंड के ऊपर बैठ गईं. एक दो पल के बाद चाची लंड पर नीचे ऊपर बैठने लगीं. मुझको मज़ा आ रहा था. पहली बार चाची मुझे चोद रही थीं. मैं- और ज़ोर से करो चाची … वाओ कितने मस्त झटके दे रही हो … आआआआह! चाची- अब तू चुपचाप मज़े ले मादरचोद, चाचीचोद. दस मिनट चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था. मैंने चाची को पकड़ कर अपने नीचे लिया और मैं ऊपर चढ़ के ज़ोर ज़ोर से चाची को चोदने लगा. चाची- आह अब आया मजा … मैं कितना भी चुद लूँ … मगर अभी जो तू चोद रहा है … उसके बराबर कोई मजा नहीं है. कोई 5 मिनट तक और ज़ोर ज़ोर के धक्कों के बाद चाची एक ज़ोर चीख मारते हुए झड़ गईं. चाची- वाओ हर एक चुदाई से दूसरी चुदाई में और ज़्यादा मज़ा आने लगा है. इसके बाद मैं भी झड़ गया. चाची- अगले हफ्ते बड़ी दीदी परवीन को अकेली घर बुलाऊंगी, तू आ जाना. मैं- थैंक्यू सो मच चाची … आप दुनिया में सबसे बेस्ट चाची हो. चाची- मैं मेरी बात निभा रही हूँ. तू अपनी निभा, हर हफ्ते मुझे आकर चोदना. फिर चाची रेडी हो गईं, कुछ देर बाद चाचा को आना था. उनका फोन आ गया था. वे आए और चाची को घर ले गए. मैं अगले हफ्ते का इंतज़ार करने लगा और प्लान बनाने लगा.चाची के निकलने के बाद मैं उदास हो गया. मुझे चाची की बहन, परवीन आंटी को चोदने के लिए एक हफ्ते रुकना पड़ रहा था. मैं उनके नाम से मुठ मार रहा था. इस हफ्ते के बीच में मैंने उनके घर जाकर दो बार चाची को चोदा. मुझे परवीन आंटी की याद आ रही थी. मैं उनके फोटोज देखने लगा. परवीन आंटी सेक्सी माल थीं. उनकी 42 इंच की गांड थी. चाची के तीनों बहनों में सबसे बड़ी गांड और सबसे बड़े चुचे थे. मैं आपको उनके परिवार के बारे में बताऊं, तो परवीन का पति शराबी है. उस कमीने ने बेटे के चाह में 4 बेटियां पैदा कर दी हैं. आंटी के बेटा नहीं देने के कारण वो उनसे ठीक से पेश नहीं आता था और शराबी बन गया था. आंटी की दो बेटियों की शादी हो गयी थी. तीसरी और चौथी अभी हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थीं. परवीन आंटी की पहली बेटी बहुत मस्त है. उसका नाम आशना है. एकदम दूध जैसी गोरी है. उसका आकार बहुत मस्त है. उसके 30 के मम्मे, 24 की कमर और 32 की गांड है. उसकी अलग कहानी है. आशना की शादी आंटी के रिश्तेदार से ही हुई है. उसका पति एक नंबर का चूतिया है, अंकल के जैसा ही दिखता है. खैर उसका जिक्र अभी छोड़िये. अभी तो परवीन आंटी की बात हो रही है. आखिर वो दिन आ ही गया, जब चाची परवीन आंटी के आने का बोली थीं. मैं सुबह खूब सज धज कर चाची के घर पहुंचा. दरवाजे की घंटी बजाई, चाची ने दरवाजा खोला. मैं अन्दर जाकर पूछने लगा- कहां हैं आंटी? चाची- रुक जा ठरकी … इतनी भी जल्दी क्यों? मैं- आपको पता नहीं … मैं कब से आंटी का इन्तजार कर रहा हूं. चाची- देख देख … साले को … कैसे दीदी को चाह रहा है. … अब तू मुझे पक्का भूल जाएगा. मैं- कभी नहीं चाची, तुम मेरी पहली ख्वाहिश हो. मैं चाची को किस करने लगा. इतने में दरवाजे की घंटी बजने लगी. मैं चुपचाप सोफे पर बैठ गया. चाची जाकर दरवाजा खोलने लगीं. मेरी बांछें खिल गईं, जिसका इंतज़ार था … वो परवीन आंटी आ गयी थीं. चाची- तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी दीदी. परवीन- सॉरी थोडा लेट हो गई. तुम्हारे जीजू के लिए खाना बनाकर आने में देर हो गयी. इतने में आंटी मुझे देखकर हाथ हिलाने लगीं- जीशान, तुम कब आए? मैं- अभी अभी आया आंटी. हम सब सोफे पे बैठ गए. इधर उधर की बातें करने लगे. मैं- अंकल कैसे हैं आंटी. परवीन- तेरा अंकल तो हमेशा नशे में रहता है. पता नहीं मैंने क्या गलती की, जो अल्लाह ने मुझे ऐसा पति दिया. चाची उनको संभालने लगीं. चाची- सब लोग टीवी देखोगे. सबने हां बोला, चाची टीवी में हिना खान की मूवी लगा दी. आंटी हिना खान की बड़ी फैन हैं. चाची को मैं जाने का इशारा करने लगा. मूवी चालू हो चुकी थी. चाची- मैं थोड़ी देर में आती हूँ. कुछ सामान लेने जा रही हूँ. परवीन- कहां जा रही है? कब आएगी? मुझे बुला कर अब अकेली छोड़कर जा रही है. चाची- आधा घण्टे में आ जाउंगी दीदी. अकेली थोड़ी छोड़ कर जा रही हूँ, जीशान है ना. ये बोल कर चाची एक ताला हाथ में लेकर गईं, मैं पीछे से दरवाजा बंद करने चला गया, लेकिन मैंने कुंडी नहीं लगाई. चाची बाहर से लॉक करके गई थीं. मैंने बोला- मिस कॉल दूंगा, तब आ जाना. चाची बोलीं- ठीक है. उधर टीवी में बॉडीगार्ड मूवी चल रही थी. आंटी को फिल्म्स बहुत पसंद हैं … और सांग्स डांस भी बहुत पसंद है. वो थोड़ा फ़िल्मी टाइप की हैं. परवीन- आई लव हिना खान, ये मूवी बहुत पसंद है. वो ‘तेरी मेरी …’ वाला गाना बहुत पसंद है. मैं- हां आंटी, वो गाना मुझे भी बहुत पसंद है. इतने में वो गाना आने लगा. मैं आंटी का हाथ पकड़कर बोला- आओ आंटी, चलो डांस करते हैं. आंटी इधर उधर देख कर डांस के लिए उठ गईं. मैंने उनकी कमर में हाथ डाल दिया और दूसरे हाथ से उनका हाथ पकड़ कर सालसा जैसा डांस करने लगा. मैं- आप अभी भी मस्त डांस करती हो आंटी. परवीन- थैंक्यू बेटा … और तुम भी बहुत मस्त कर रहे हो. मैं- आप अभी भी इतनी सुंदर हैं. शादी की उम्र में तो अंकल का होश उड़ गया होगा. परवीन- तुम तो काफी चालू हो गए हो और जवान भी. मैं उनको और करीब करने लगा. आंटी थोड़ा असहज महसूस करने लगीं. फिर भी उन्होंने कुछ नहीं बोला. मैंने अपना हाथ कमर से हटा कर उनके बड़े चूतड़ों के ऊपर रख दिया और उन्हें सहलाने लगा. आंटी की तरफ से कुछ प्रतिक्रिया नहीं थी. मैंने हिम्मत करते हुए अपना दूसरा हाथ उनके मम्मों पे रख दिया. आंटी अब विरोध करने लगीं. मैंने ज़ोर से दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया. परवीन- ज़ीशान ये तुम क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे. मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनको चूमने के लिए आगे हुआ. आंटी ने पीछे सरकती गईं. मैं उनके साथ आगे होता गया. आंटी अब दीवार से टकरा गईं … उनके पीछे दीवार थी, आगे मैं था. मैं अपने दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़कर उन्हें चूमने लगा. वो बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही थीं. मैं- मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ आंटी, प्लीज किस मी. परवीन- हो क्या गया है तुमको जीशान? इतने अच्छे बच्चे थे तुम … मैं तुम्हारी अम्मी की उम्र की हूँ. मैं- प्यार में उम्र बाधा नहीं होती है. ये कहते हुए मैं उनको ज़ोर से चूमने लगा. दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़ कर मुँह में मुँह लगा दिया और उनकी जीभ को चूसने लगा. मुझे बड़ा मजा आ रहा था. आंटी ने मुझसे छूटने की नाकाम कोशिशें की. मैं और ज़ोर से चूमने लगा. करीब 5 मिनट तक मैं ऐसे ही चूमता रहा. मैं एक बात पर ध्यान दिया. चाची अब विरोध नहीं कर रही थी. इससे मैं थोड़ा ढीला पड़ गया लेकिन तभी अचानक से एक ज़ोर से धक्का देकर आंटी ने मुझे गिरा दिया. परवीन- मेरी सांस रुक गयी … इतनी भी देर कोई लिप टू लिप करता है … आआह.. आंटी हांफने लगीं. दो मिनट सांस लेने के बाद मैं आंटी के पास फिर आ गया और उनके मम्मों को छूने लगा और साड़ी के अन्दर हाथ डालकर पेट को सहलाने लगा. परवीन- ये सब गलत है … तुम जाओ … मुझसे दूर जाओ, नहीं तो तुम्हारी चाची को बोलूंगी. मैं- नहीं आंटी ऐसा मत कीजिये. प्लीज़ आंटी, प्लीज आंटी. मैं कब से आपको अपने सपनों में देखता चला आ रहा हूँ. आई लव यू आंटी. ये कहते कहते मैं फिर से उनको चूमने लगा. अब आंटी सहयोग करने लगीं. अब वे धीरे धीरे सिसकारियां भरने लगीं ‘ऊऊऊह ऊऊम्म..’ परवीन- कोई देख लेगा, रेशमा आ जाएगी. मैं- अगर चाची आ जाएंगी, तो पहले दरवाजे की घंटी बजेगी … उन्हें देख लेंगे. ये कहते हुए मैंने उन्हें चूमते चूमते उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया. आंटी लाल रंग के ब्लाउज में मस्त दिख रही थीं. मैं उनके पेट को सहलाने लगा और नीचे बैठकर उनका पेट चूमने लगा. आंटी की कामुक सिसकारियां बढ़ने लगीं ‘ऊऊऊम्म्म्म … आआह..’ तभी मैंने ज़ोर से साड़ी को खींच दिया. परवीन- ये क्या कर रहा है … रेशमा आ जाएगी. मैं- आने पर मालूम हो जाएगा. अब आंटी ब्लाउज और पेटीकोट में थीं. मैं आंटी को चूमते चूमते बेडरूम ले जाने लगा. बेडरूम में ले जाकर मैंने उन्हें धक्का देकर बेड पे गिरा दिया और मैं उनके ऊपर चढ़ गया. उनका ब्लाउज खोलने लगा. परवीन- किसी को पता चलेगा, तो क्या होगा? खास करके तेरी चाची को. वो मुझसे कभी बात नहीं करेगी. मैं- किसी को पता नहीं चलेगा आंटी. यह सुनकर आंटी ब्लाउज खोलने में मदद करने लगीं. मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. अब सिर्फ आंटी ब्रा और पैंटी में रह गई थीं. आंटी तो कयामत लग रही थीं. मैं देखते रह गया. इतने बड़े बड़े बूब्स, इतनी मोटी मोटी जांघें. परवीन- क्या देख रहा है? मैं- आपका जिस्म … आप बहुत ही सेक्सी हो आंटी. परवीन- देखो हम जो कर रहे हैं, ये एक बड़ी गलती है, इससे हमें बहुत प्रॉब्लम आएगी. तुम प्लीज़ किसी को बताना मत. तुझे जो भी करना है, जल्दी कर ले. फिर रेशमा आ जाएगी. तो हम शायद नहीं कर पाएंगे. मैं- ऐसा मत बोलो आंटी … आई लव यू. मैं आपको मिलने हर हफ्ते आऊंगा. इतना कहते हुए मैं उनके मम्मों को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा और पैंटी के ऊपर से चुत को सहलाने लगा. आंटी गरमागरम सिसकारियां लेने लगीं- आह … ऊऊह … वो मेरे शर्ट के बटनों को खोल रही थीं. मैंने भी अपना पैंट निकाल दिया और बनियान भी. अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था. आंटी मेरे लंड का उभार देख कर चौंक गईं. परवीन- रुको … मुझे जरा इसे देखने दो. ये कहते हुए आंटी ने लंड को अंडरवियर के ऊपर से पकड़ लिया और फट से अंडरवियर को नीचे खींच दिया. लंड देखते ही आंटी हैरान हो गईं. परवीन- जीशान, तू इतना जवान कब हो गया. मैंने तो सोचा था कि तेरी 4 इंच की लुल्ली होगी … ये तो उसका दोगुना है. बाप रे. और इतना मोटा … याल्लाह. आंटी मेरा लंड आगे पीछे करने लगीं … मैंने उसी वक्त चाची को मिस कॉल कर दिया. इधर परवीन आंटी मेरे लंड को प्यार से मुठ मारने लगीं. मैं आंटी के बूब्स का दीवाना था. मैंने भी तुरंत आंटी की ब्रा को खोल दिया. आंटी के चूचे इतने बड़े थे कि मेरे दो हाथों की पकड़ में ही नहीं आ रहे थे. मैं खुशी के मारे एक को दबाने में लग गया और दूसरे को चूसने लगा. आंटी की ‘ऊऊह आआह …’ की सिसकारियां तेज़ होने लगीं. परवीन- जीशान इस सभी के लिए अभी समय नहीं है … जो भी करना है, जल्दी से कर दे. इतने में रेशमा चाची डायरेक्ट हमारे सामने आ गईं. उन्होंने इतने दबे पांव आने की कोशिश की थी कि दरवाजा खुलने की आवाज भी नहीं आयी. जब रेशमा चाची सामने आईं, उस वक्त मेरे मुँह में आंटी की एक चुची दबी थी और दूसरी मेरे हाथ में थी. चाची ये सब देख कर ड्रामा करने लगीं. चाची- ज़ीशान ये क्या कर रहा है तू? मैंने तुमको कितना मासूम समझा था और तुम दीदी … ये सब क्या है? इसके साथ ऐसा करने में आपको जरा भी शर्म नहीं आई. अगर ये सब बाहर वालों को पता चलेगा, तो क्या होगा? चाची की एक्टिंग देख कर मैं भी ड्रामा करने लगा. मैं- चाची प्लीज़ … ये बात तुम किसी से मत कहना प्लीज. उधर परवीन आंटी तो एकदम से डर ही गई थीं. उनको काटो तो खून नहीं था- रेशमा … प्लीज़ ये बात किसी को मत बताना. ये सब कुछ मुझसे अनजाने में गलती हो गयी है … प्लीज़ माफ कर दे, इसमें जीशान की गलती नहीं है. चाची- अब फटाफट उठो और जल्दी कपड़े पहनो. मैं- दस मिनट रुक जाओ चाची … अभी कुछ नहीं हुआ है. परवीन- तू चुप रह ना. चाची- वाह रे बदमाश इतना बड़ा हो गया तू? चाची मेरा कान पकड़कर खींचने लगीं. मैंने चाची को खींच कर बेड पे लेटा दिया. मैं- बस कर रंडी … खत्म कर अपना ये ड्रामा. तेरे को भी मेरे लंड से चुदना है, तो जल्दी आ जा. ये देख कर परवीन आंटी चौंक गईं. आंटी को पता नहीं चल रहा था कि ये सब क्या हो रहा है. तभी चाची मुस्कुराते हुए आंटी को जाकर लिप टू लिप किस करने लगीं. परवीन- ये क्या कर रही है? और हो क्या रहा है ये? चाची- कुछ नहीं … तुम अच्छे से मज़े लो. परवीन- नहीं मुझे अभी बात बताओ. मैं- आपके से पहले ही मैं चाची को चोद चुका था. अब चाची की मदद से मैंने आपको पटाया. आंटी गुस्सा होकर मुझे और चाची को गाली देने लगीं- साले मादरचोद, साली रंडी. अब समझ में आ रहा है कि तू मुझे और हिना को भी क्यों फार्म हाउस बुला रहा था. मैं और चाची हँसने लगे. परवीन- मतलब हिना को भी? मैं- अभी तक नहीं, प्लान बना रहा हूँ. चाची मेरा लंड पकड़कर बोलने लगीं- कोई पता नहीं, इस मादरचोद के लंड के नसीब में कितनी चुत चुदना बाकी हैं. परवीन- रेशमा, कभी सोचा था कि ये जीशान इतना बदमाश बनेगा. चाची- इसकी बदमाशी अभी तक तुमने नहीं देखी है. मैंने तो बहुत सह लिया है और बहुत मज़े भी ले चुकी हूँ. अब तुम्हारी बारी है. परवीन- वो क्या सह लिया तूने … और कौन से मजे ले लिए? चाची- तुम्हें सब पता चल जाएगा. हमारे पास एक घंटे का समय है. जल्दी करो. चाची मुझे चूमने लगीं और मैं उनके कपड़े उतारने लगा. आंटी चाची को नंगी करने में मदद करने लगीं. कुछ ही पलों में हम तीनों नंगे थे. आंटी अभी भी पैंटी पहनी हुई थी. मैंने झट से उनकी पैंटी को भी खींच दिया. आंटी की चुत एकदम साफ थी. छोटे छोटे से थोड़े बाल थे. मैं आंटी की चुत में उंगली करने लगा. परवीन- आआआह ऊऊऊह ऊऊम्म्म्म. चाची और आंटी दोनों अपने मम्मों को अपने ही हाथों से सहला रही थीं. मैं देर न करते हुए आंटी की चुत चाटने लगा. जीभ को अन्दर तक डालने लगा. आंटी- ऊऊऊफ आआआह … ये तो कमाल कर रहा है रेशमा … आआआह चाची- और बहुत कुछ है इसके पास … थोड़ा मुझे भी तो मज़े ले लेने दो. चाची आंटी के मुँह के ऊपर बैठ गईं. आंटी चाची की चुत चाटने लगीं. पोजीशन ऐसी बन गई थी कि नीचे आंटी. आंटी के ऊपर चाची 69 में लेटी थीं. चाची का मुँह मेरे तरफ था और उनकी चुत आंटी के मुँह के ऊपर. मैंने 5 मिनट आंटी की चुत को चाटा. हम तीनों लोगों के कामुक और गरमागरम कामुक सिसकारियों से कमरा एक पॉर्न मूवी के सैट जैसा लग रहा था. परवीन- अब लंड भी डाल दे बेटा. आंटी की चुत चाची से बड़ी थी. मैं लंड चुत के ऊपर रगड़ने लगा. परवीन- किसका इंतज़ार कर रहा है. पेल दे मुझे. मैंने एक ज़ोरदार धक्का दे दिया, मेरा पूरा लंड उनके अन्दर घुसता चला गया. परवीन- आई मैं मर गई. … तेरा अंकल पहले ऐसा ही मर्द था … पर अब तो वो शराब के नशे में नामर्द हो गया. उसका लंड लुल्ली हो गया है. अब मुझे तेरे लंड का ही सहारा चाहिए … आह जल्दी से पेल दे मुझे. मैं जोरदार धक्के मारने लगा, आंटी मेरे सब धक्कों का जवाब अपनी गांड उछाल कर दे रही थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… और ज़ोर से चोद … कितना मज़ा देने लगा. चाची बीच में आकर मुझे किस करने लगीं. मैं उनकी चुत में उंगलियां करने लगा. मानो जन्नत जैसे लग रहा था. दो दो हूरें मुझे नसीब हो गई थीं. लेकिन असली जन्नत तो हिना आंटी के पास थी. मैं- मुझे अब हिना आंटी की चुत कौन दिलवाएगा? परवीन- हिना को पाना इतना आसान नहीं है. मैं- इसीलिए तो आप दोनों से मदद मांग रहा हूँ. परवीन और चाची सहमति दे दी. मैं मस्त हो कर आंटी का जी भर के चोदने लगा. मैं- आंटी, मेरा लंड आपकी गांड देख कर खड़ा हो जाता था. आज मुझे आपकी गांड मारनी है … पहले कभी गांड मरवाई है? परवीन- इतनी बड़ी गांड है … तुम्हें क्या लगता है … बिना मरवाए हो गई. तेरे अंकल पहले बहुत कुछ करते थे, लेकिन अब कुछ नहीं करते. मैं- लेकिन आंटी आपकी गांड मारने के लिए अभी समय नहीं है. परवीन- कल मेरे घर आ जाना, मैं सब इंतज़ाम करती हूं … आआआह.. कोई पांच मिनट में ही आंटी एक बार झड़ चुकी थीं. मैं लगा रहा और आंटी भी जल्दी ही दुबारा गरम हो गईं. इस बार मैं और आंटी दोनों एक साथ एक दूसरे के बांहों में झड़ गए. हम दोनों एक बार चीख उठे- आआह ऊऊह … बहुत मज़ा आया … परवीन- कैसा मस्त लंड पकड़ा है तूने रेशमा … थैंक्यू जीशान. आंटी मुझे किस करने लगीं. मैंने जोश में आकर उनका एक होंठ काट लिया. आंटी की चीख निकल गई. मैं- आंटी अभी बहुत कुछ बाकी है. चाची उदास थीं. क्योंकि हम दोनों ने उनको नज़रअंदाज़ कर दिया था. मैं- चाची रात यहीं पे रुकूँगा, तुम चिंता न करो. चाची- थैंक्यू … लव यू बेटा. इतने में दरवाजे की घंटी बजी, चाचा आ गए थे. हम सभी ने जल्दी जल्दी कपड़े पहने. मैं कपड़े पहनते वक्त भी सोच रहा था कि कल तो परवीन आंटी की मोटी गांड मिलने वाली है ही.मैंने चाची का दुःख समझ लिया और उनसे कहा- चाची, आज रात मैं यहीं पर रुकूँगा, आप चिंता न करो. चाची- थैंक्यू … लव यू बेटा. इतने में दरवाजे की घंटी बजी, चाचा आ गए थे. अब आगे: उस रात मैं रेशमा चाची के घर ही रुका था. रात को मैं छत पर सो रहा था. चाचा चाची अन्दर सो रहे थे. आधी रात में चाची छत पर आईं. मैं आज दिन की चुदाई से कुछ ज्यादा ही थक गया था … इसलिए मुझे गहरी नींद आ गई थी. चाची मुझे बिना जगाए ही मेरे लंड को चूसने लगीं और लंड खड़ा होते ही मेरे लंड पर चूत फंसा कर चढ़ गईं. चाची मुझे चोदने लगीं. मैं जाग चुका था. हम दोनों छत पर ही सेक्स कर रहे थे, जिस वजह से ज़ोर से आवाज भी नहीं कर पा रहे थे. चाची का दिल खुश था, क्योंकि उनकी चूत को भी मेरे लंड से चुदने का मौका मिल गया था. फिर चाची चुदने के बाद नीचे चली गईं. सुबह हुई, मैंने एक्सरसाइज की और दूध पिया. अभी तक मुझे आदत थी, हर दिन दो बार झड़ने तक स्ट्रांग रहने की. अगर मैं 2 बार झड़ जाता हूँ, तो तीसरी बार के लिए मुश्किल हो जाता था. मैं अपने आपको उस दिन के लिए तैयार करने लगा … जिस दिन मैं इन तीनों बहनों को मिलकर एक साथ चोदूंगा. उस दिन तो शायद मुझे 4 या 5 बार झड़ना होगा. मेरे को अभी और मजबूत बनना था. इसके लिए मैं रोज ज्यादा एक्सरसाइज करने लगा. सुबह चाचा काम पर निकल गए. मैं घर में तैयार हो रहा था. चाची रसोई में काम कर रही थीं. चाची को चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी. मैं- चाची … क्या हुआ? आपको चलने में तकलीफ क्यों हो रही है? चाची- एक हफ्ते से मैं ऐसे ही चल रही हूँ … और तुझे अब दिखी चाची की तकलीफ! मैं- मैंने तो ध्यान नहीं दिया. बताओ क्या हुआ? चाची- तुझे चुत और गांड के अलावा कुछ और ध्यान ही कहां रहता है. हमेशा नई चुत और गांड की तलाश में रहता है. मैं- चाची … यार अब बता भी तो दो, क्या हुआ? चाची- ये तेरी बेरहमी से गांड मारने का नतीजा है. देख मेरी गांड अब कैसे मटक रही है. मैं- सॉरी चाची … अब तो आपकी गांड भी परवीन आंटी के जैसी बड़ी हो गयी है. मैंने चाची के चूतड़ों पे एक ज़ोर से चपत मार दी. चाची दर्द से आह भरने लगीं. चाची- अब जा तू … वहां तेरी लिए दीदी की गांड तैयार होगी. चाची की जलन मुझे अच्छी लगने लगी. मैं चाची को झट से पीछे से पकड़ने लगा और उनके गले पे चूमने लगा, उनके मम्मों को दबाने लगा. मैं- चिंता न करो चाची … मैंने प्लान बना लिया है. हिना आंटी की चुत जल्दी दिला दो. फिर हम चारों लोग मिलकर मजे करेंगे. मैं आपको एक और मज़ा देने वाला हूँ. चाची- मैं भी उसी के इंतज़ार में हूँ. तू दीदी से बात कर लेना, वो दोनों ज्यादा क्लोज हैं … और जल्दी प्लान बना. मैं भी तैयार रहूंगी. इतने में परवीन आंटी का फ़ोन आ गया. मैं- हैलो. परवीन- हैलो ज़ीशान, मैंने सब सैट कर लिया है … अभी घर पर कोई नहीं है, तू आ जा. अगर रेशमा फ्री है, तो उसको भी लेकर आ जा. यही बात मैंने चाची को बताई. लेकिन चाची मना करने लगीं. चाची- अगर अभी आऊँगी, तो तेरे प्लान में शामिल नहीं हो पाऊंगी. चाचा को डाउट होने मत दो. तुम जाओ मज़े करो और जल्दी प्लान बनाओ, सब मिल के मज़े करेंगे. मैं चाची को किस करके वहां से निकलने लगा. आंटी का घर उसी टाउन में था और बाइक से सिर्फ 10 मिनट का रास्ता था. मैं दस मिनट में वहां पहुंच गया. मैंने दरवाजे की घंटी बजायी. दरवाजा खुला था, लेकिन कोई दिख नहीं रहा था. मैं धीरे धीरे अन्दर जाने लगा. मैं- आंटी … कहां हो? तभी फट से दरवाजा बंद होने लगा. मैं पीछे मुड़ कर देखा, तो आंटी दरवाजे के पीछे छुपी थीं. वो तुरंत मेरे पास आकर मुझे किस करने लगीं. उनकी इस तेजी से मैं नीचे गिर गया. आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं और बहुत अन्दर तक जीभ डालने लगीं. आज वो कल का बदला ले रही थीं. मैं मज़े ले नहीं पा रहा था. वो 75 किलो की औरत थीं और वो मेरे ऊपर लदी हुई थीं. मुझे सांस लेने के लिए तकलीफ हो रही थी. मैं झट से उन्हें अपने ऊपर से हटा दिया और हांफने लगा. मैं- मार दोगी क्या मुझे … मेरी जान चली जा रही थी. परवीन- हा हा हा … कल मुझे यही हो रहा था. वैसे ये सब मज़े हैं … तू मज़े लेते रहना. आंटी आज नाइटी में थीं. मैं आंटी को कभी नाइटी में देखा नहीं था. उनको देखते ही लंड खड़ा हो गया था. आंटी की वो मोटी गांड मुझे पागल कर रही थी. मैं सिर्फ गांड को सहला रहा था और उनके मोटे मम्मों को मुँह से मसल रहा था. आंटी आज सेक्स की परी जैसी लग रही थीं. परवीन- तू मेरी गांड को इतना पसंद क्यों करता है? मैं- सिर्फ मैं नहीं … हर कोई जो आपको देखेगा, वो पहले आपकी गांड मारने का ही सोचेगा. आपकी गांड इतनी मस्त है … और आपके ये चुचे … आह जितने बड़े, उतना अधिक मज़ा आता है. ये अभी भी तने हुए हैं आंटी … आप गजब की माल हो. परवीन मुस्कुरा दीं- लेकिन इसको इस्तेमाल करने वाला कौन है. तू मुझे अब मिला है. पिछले दो साल में मैं सिर्फ 10 बार चुदी हूँ मैं. तू ही समझ ले मेरी प्यास. तेरी चाची को रोज़ लंड मिलता है, फिर भी तेरा लेती हैं … और जलन भी दिखाने लगती है. मैं- चाची चुदती तो हैं, लेकिन उनको सैटिस्फैक्शन नहीं होता है. चाचा का सिर्फ 4 इंच का लंड है … और वे 5 मिनट में झड़ जाते हैं. चाची उंगली करके सोती हैं. परवीन- बेचारी … च्चच … अब हम दोनों का सहारा सिर्फ तू ही है. लगता है हिना को अच्छी खासी खुशी मिलती होगी. मैं- उनको और खुश करना है … मुझे हिना आंटी की चुत दिला दो. परवीन- मैं कोशिश तो करूँगी ज़ीशान. तुझे वो इतनी अच्छी लगती है? मैं- मुझे तो तुम तीनों बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुम तीनों को एक साथ एक ही बिस्तर पर चोदना चाहता हूँ. परवीन- क्या तेरे में इतना दम है, जो तीनों को खुश कर सकेगा? मैं- सच कहूं … तो मैं दो बार अच्छे से चुदाई कर लेता हूँ. तीसरी बार तो अभी मुश्किल है. परवीन- तो कैसे कर पाएगा? मैं- इसीलिए दवाई मंगवाई है. ये दवा इम्पोर्टेड है … इससे 6 से 7 बार कर तक चुदाई सकते हैं … और बहुत देर देर तक … वो दवा जल्द ही आने वाली है. परवीन- वाह रे … तू तो सब तैयार कर चुका है. मैं- बस 15 दिन में मेरी एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट आने वाला है, उसके बाद तो हम शायद एक महीने में सिर्फ एक बार ही मिल पाएंगे. परवीन- यही तो चिंता हो रही है … तू यहीं पे नज़दीक वाले कॉलेज में एडमिशन ले ले और रोज आने जाने का तय कर ले. मैं- ऐसा नहीं होगा, क्योंकि मैं अच्छे कॉलेज में पढ़ना चाहता हूँ. परवीन- हां पता है … और वहां की लड़कियों को भी चोदना चाहता है. मैं सर हिलाते हुए उनकी बात से हामी भर दी. फिर मैं उनको चूमते हुए बेडरूम में ले गया. आज मैं आंटी की गांड मारने वाला था. दोस्तो, अगर मैं आपको एक सच बात बता दूँ … तो ये कि औरत को गांड मरवाने से कुछ भी संतृप्ति नहीं होती है. असली आग तो चुत में लगी होती है. गांड मारना तो सिर्फ मर्द की चाहत होती है, क्योंकि गांड टाइट होती है और इससे औरत को ज़्यादा दर्द भी होता है, वो ज़ोर ज़ोर से चीखती है. इससे उत्तेजित होकर मर्द और ज़ोर से चुदाई का सुख महसूस करते हैं और अपने आपको खुश करते हैं. अगर आप किसी की गांड मारने वाले हैं, तो पहले औरत को खुश कीजिएगा, फिर ही उसकी गांड मारना. मतलब उसकी चुत चाट कर और थोड़ी चूत की चुदाई भी करके पहले उसको झड़ने दो. फिर आराम से गांड मार लो. मैं भी आंटी को खुश करना चाहता था. इसलिए पहले मैं उन्हें अच्छे से चूमने लगा. आंटी की मादक सिसकारियां निकलने लगीं. फिर मैंने उनकी नाइटी को निकाला. आंटी अब मेरे सामने ब्रा और पैंटी में रह गयी थीं. मैंने बिना समय गंवाए, उनकी ब्लू कलर की रेशमी जालीदार ब्रा को भी निकाल दिया. आंटी के मोटे मोटे मम्मों से बिना खेले भला मैं कैसे छोड़ सकता था. मैं आंटी के मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. परवीन- आआह ऊऊऊह … धीरे.. मैं- इतने बड़े मम्मों को, आंटी, कोई कैसे छोड़ सकता है. मैं दीवानों की तरह आंटी के मम्मों को चूसने लगा. आंटी के दोनों चुचे एकदम लाल हो गए थे. फिर मैं उनका पूरा बदन चूमने लगा और चूसने लगा. उनके कड़क निप्पलों को काटने लगा. परवीन- आआह … साले इतना ज़ोर से कोई काटता है कमीने … धीरे चूस ऊऊऊफ्फ … जालिम.. अब तक आंटी पूरी गर्म हो चुकी थीं. मैंने बिना देर किए उनकी पैंटी उतार दी और उनकी चुत को मसलने लगा. आंटी की सिसकारियां बढ़ने लगीं. उनकी चुत में आग लगी थी. मैं नीचे बैठ गया और उनकी चुत को चूमने लगा. आंटी मचल उठीं- मेरे मर्द ने कभी मेरी चुत को चाटा ही नहीं है. … आह मेरी ख्वाइश तू अब पूरी कर दे. मैं आंटी की मखमली चुत चाट रहा था. चुत काफी नमकीन थी. अब शहद ढूंढने का समय भी नहीं था. परवीन- आआह ऊह … ऊम्म … आंटी मेरे बाल खींचने लगीं और तरह तरह की हरकतें करने लगीं. उनका बदन पूरा मचल उठा था. औरत को जितना लंड मजा देता है, उससे कहीं ज़्यादा मज़ा आपकी जीभ देता है. परवीन- वाओ … क्या चूस रहा है. मेरे लाल … दाने तक चला गया … शाबाश.. मैं और अन्दर जीभ को धकेलने लग. करीब 5 मिनट चूत चाटने के बाद आंटी झड़ने वाली थीं. परवीन- आह … मैं झड़ने वाली हूँ … आआह ऊम्म्म.. उन्होंने मेरे सर को चुत के और करीब दबा दिया और चुत ने पानी छोड़ दिया. मेरे मुँह में उनका पानी आ गया था. मैं बाथरूम जाकर मुँह धोकर आया. आंटी खुश थीं. लेकिन मेरी खुशी अभी बाकी थी. परवीन- अब तू जो बोलेगा, मैं वो करूँगी. मैं- पहले मेरा लंड को चूस लो. आंटी लंड चूसने को एकदम रेडी थीं. मैं बेड पर बैठ गया और वो नीचे बैठ कर लंड को हिलाने लगीं. फिर आंटी ने एकदम से पूरा लंड अन्दर ले लिया. मैं- बाप रे … आपने तो पूरा अन्दर ले लिया. उनकी लंड चुसाई देख कर मेरे तो होश उड़ गए. आंटी एक पोर्न स्टार के जैसे लंड चूस रही थीं. लंड को खाए जा रही थीं. मेरी सिसकारियां और आंटी की चूसने का साउंड मिलकर मज़ा आने लगा. आआआह ऊऊम्म पप्पपच … मैं झड़ने वाला था. मैंने आंटी को तुरंत हटा दिया. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था. परवीन- क्यों हटा दिया? मैं- मैं झड़ने वाला हूँ. परवीन- कोई बात, नहीं मैं रस पी लूंगी. मैं- मैं पूरा माल आपके मुँह में दूंगा … लेकिन इतना जल्दी मैं झड़ना नहीं चाहता हूँ. मुझे मालूम था कि ज़्यादा देर तक करने की ये एक कला है. परवीन- तुम तो बहुत कुछ सीख गए हो … बदमाश. मैं आंटी को ज़ोर से हग किया और उन्हें पेट के बल लेटा दिया. फिर मैं उनकी कोमल गांड को सहलाने लगा. मैं- आंटी तेल कहां है. परवीन- मैं लेकर आती हूँ. मैं- आप कहीं नहीं जाओगी … मैं लेकर आऊंगा … आप बस बता दो. परवीन- ड्रेसिंग टेबल के पास कोकोनट आयल रखा है. मैं तेल लेकर आया. आंटी बिल्कुल वैसे ही लेटी थीं. मैं एकदम से उनके ऊपर लेट गया. मेरा लंड उनकी गांड के छेद में लग रहा था. मैं तेल से गांड को मसाज करने लगा. आंटी तो मज़े ले रही थीं. मैंने आंटी को कुतिया बनाया और मैं शुरू हो गया. परवीन- धीरे करना बेटा … गांड की चुदाई करे 5 साल हो गए हैं. मुझे यही चाहिए था. मैंने ये बात सुनते ही एक ज़ोर का झटका दे मारा. आधा लंड गांड में घुस गया था. आंटी की चीख इतनी तेज थी कि क्या बोलूँ … यूं समझो कि कोई औरत बच्चे को जन्म देने के वक़्त चीखती है … वैसी चीख निकली थी. मुझे डर था कि कहीं बगल वाले घर के लोग ना आ जाएं. परवीन- मुझे इतना दर्द कभी नहीं हुआ था. साले अपने मूसल को बाहर निकाल मादरचोद … मुझसे नहीं होगा. तुझे जितना चाहिए, तू उतनी मेरी चुत मार ले .. उसके अलावा भी तू जो बोलेगा, वो करूँगी. मुझे बक्श दे. लेकिन एक बार लंड जो अन्दर घुस गया, मैं कहां रुकने वाला था. मैं- कुछ भी करोगी … सोच लो? परवीन- कुछ भी करूँगी. मैं- हिना आंटी की चुत दिलाओगी? परवीन- हां मंज़ूर है. मैं- तेरी बड़ी बेटी आशना की चुत दिलवाएगी? परवीन- साले मादरचोद, मेरी बेटी के ऊपर भी नज़र डाल रखी है. तेरे मूसल से जो मैं दर्द सह रही हूँ, वो काफी है. मैं अपनी बेटी को भी इतना दर्द नहीं दे सकती. ये सुनते ही मैंने एक और ज़ोर से धक्का मारा. मेरा पूरा लंड आंटी की गांड में चला गया था. आंटी तो मुझसे दूर जाने की नाकाम कोशिश करती रहीं और चीखती रहीं. परवीन- आआह … ऊऊऊफ्फ … मर गयी मैं … पहले वो रंडी रेशमा को मारूँगी, फिर तेरी माँ को ये सब बोलूंगी. मैं- क्या बोलेगी रंडी … यही कि तुमने मुझे अपने घर बुलाया था चुदाई के लिए. मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. परवीन- अब निकाल भी दो … मैं किसी को कुछ नहीं कहूंगी. मेरी बेटी को भी कनविंस करूँगी. मैं- ज़रूरत नहीं है … तेरी बेटी तो आलरेडी सैट है … मैं उसे खुद पटा लूँगा. मैं ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. आंटी आगे पीछे कर रही थीं. इसके कारण थोड़ा तकलीफ होने लगी. इसलिए उनके बाल मैंने हाथ में पकड़ लिए और खींचने लगा. साथ ही उनके चूतड़ों को बजाने लगा. परवीन- मादरचोद, मार क्यों रहा है … साले मुझे छोड़ दे प्लीज. एक और विनती है, तू तो मेरी बेटी को लेकर ही रहेगा. लेकिन उसे ऐसा बेरहमी से चोदना मत. मैं- जहां दर्द आता है, वही तो मज़ा आता है. परवीन- अब बस भी कर दे … और कितनी देर पेलेगा मुझे … आह.. मैं- अपना माल तेरे मुँह में छोड़ दूँ? परवीन- हां … तू प्लीज जल्दी लंड निकाल दे. मैंने गांड से लंड निकाला और तुरंत आंटी के मुँह में लगा दिया. आंटी लंड चूस नहीं रही थीं. इसीलिए मैं ही उनका मुँह चोदने लगा. दो मिनट तक मैं उनके मुँह में लंड आगे पीछे करता रहा. फिर उनके मुँह में ही झड़ गया. परवीन- क्या तूने रेशमा की गांड भी ऐसे ही मारी है? मैं- फार्म हाउस में तो रेशमा चाची की गांड इसे भी बहुत बुरी तरह से मारी है. परवीन- उसने कुछ नहीं कहा? मैं- पहले तो चीखती रहीं, फिर सहयोग करने लगीं. आपकी तो 42 की गांड है, फिर भी आप इतना क्यों मचल रही थीं. परवीन- सच कहूं … तो मुझे इतना दर्द नहीं हुआ. लेकिन ऐसा चीखने से तुझे और मज़ा आएगा ना … इसलिए ऐसे किया. तेरा लंड तो मूसल है. मैं- इतनी फिक्र करती हो मेरी खुशी की? परवीन- तू बाकी के सब मर्दों जैसा नहीं है … मैंने तुझे गांड मारने बुलाया, लेकिन तूने मुझे पहले खुशी देकर खुश किया, फिर मेरी गांड मारी. तू औरत की प्यास को समझता है. तुझे जो मदद चाहिए, वो मैं करूँगी. तू मेरी लाइफ में मिला हुआ सबसे बेहतर मर्द है. तेरे बीवी बहुत खुश नसीब है. तुझे हिना चाहिए, आशना चाहिए, मैं तेरी हेल्प करूँगी. मैं आंटी को इमोशनल किस किया. मैं- फिलहाल तो मुझे हिना आंटी चाहिए. परवीन- तू प्लान बना ले, मैं उसे फ़ोन करती हूं>गांड मरवाने के बाद आंटी कहने लगीं- क्या तूने रेशमा की गांड भी ऐसे ही मारी है? मैं- फार्म हाउस में तो रेशमा चाची की गांड इसे भी बहुत बुरी तरह से मारी है. परवीन- उसने कुछ नहीं कहा. मैं- पहले तो चीखती रहीं, फिर सहयोग करने लगीं. आपकी तो 42 की गांड है, फिर भी आप इतना क्यों मचल रही थीं. परवीन- सच कहूं … तो मुझे इतना दर्द नहीं हुआ. लेकिन ऐसा चीखने से तुझे और मज़ा आएगा ना … इसलिए ऐसे किया. तेरा लंड तो मूसल है. मैं- इतनी फिक्र करती हो मेरी खुशी की? परवीन- तू बाकी के सब मर्दों जैसा नहीं है … मैंने तुझे गांड मारने बुलाया, लेकिन तूने मुझे पहले खुशी देकर खुश किया, फिर मेरी गांड मारी. तू औरत की प्यास को समझता है. तुझे जो मदद चाहिए, वो मैं करूँगी. तू मेरी लाइफ में मिला हुआ सबसे बेहतर मर्द है. तेरे बीवी बहुत खुश नसीब है. तुझे हिना चाहिए, आशना चाहिए, मैं तेरी हेल्प करूँगी.< मैं आंटी को इमोशनल किस किया. मैं- फिलहाल तो मुझे हिना आंटी चाहिए. परवीन- तू प्लान बना ले, मैं उसे फ़ोन करती हूं.< अब आगे: आंटी की गांड की चुदाई और आंटी की खुशी से मैं भी खुश हो गया. उस दिन तो मैं एक ही बार झड़ा था. थोड़ा समय हम रेस्ट लेने लगे, फिर आंटी ने मुझे दुबारा चोदने का ऑफ़र दे दिया- आज मैं पहली बार खुल कर चुद रही हूं ... मुझे फिर से मजा दे दे. हम दोनों तो वैसे नंगे थे. आंटी ने मेरा लंड तुरंत अपनी चुत में ले लिया और ऊपर नीचे होने लगीं. उनके मोटे मोटे चूचे बेहद तेजी से उछल रहे थे. मैं- आपके चूचे इतने मोटे कैसे हुए? परवीन- एक तो तेरा अंकल पहले बहुत चूसता था. दूसरा मैं अच्छे से खाती पीती हूँ ... और तीसरा मेरे 4 बच्चे हैं. उन सबको दूध पिलाने की वजह से ये इतने मोटे हो गए हैं. मैं- अब मेरी वजह से ये और मोटे हो जाएंगे. आंटी मेरे लंड पर कूदती रहीं और दस मिनट की चुदाई के बाद झड़ गईं. वे झड़ने के बाद मेरे ऊपर ही ढेर हो गईं. लेकिन मैं अभी झड़ा नहीं था. मैं उनको थोड़ा ऊपर उठा कर ज़ोर ज़ोर से नीचे से चुत मारने लगा. अगर हम नीचे से ऊपर की ओर चुत चोदते हैं, तो अन्दर बच्चेदानी को ज़ोर ज़ोर से छूता है. इसके कारण आंटी और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगीं- आआह ... उम्म्ह… अहह… हय… याह… फिर मैं उनके अन्दर ही झड़ गया. अपना लंड उनकी चुत के अन्दर ही डाल कर मैं सो गया. अभी तक हम दोनों ने लंच नहीं किया था. शाम के 4 बज गए थे. आंटी ने बहुत ही मस्त बिरयानी बनाई थी. मैंने पेट भर के खा ली और वहां से निकल गया. मैं अब दिन रात बस हिना आंटी के बारे में सोच रहा था कि मैं उनकी चुत कैसे चोदूं. हिना आंटी काफी लंबी हैं. मुझसे भी लंबी. उनका और जस्मीन आंटी कद 5 फुट 10 इंच का है. हिना आंटी के 36 के चूचे ... कमर 32 की और गांड 40 की थी. वो बहुत ही सेक्सी थीं. दूध जैसा गोरा बदन था. थोड़ी मासूम सी दिखती थीं. मैं सोच रहा था कि उनको किस कैसे करूँगा, वो मेरे से लंबी थीं. शायद उनको झुकना होगा. मैंने प्लान बनाया कि उनको पोर्न वीडियो दिखाकर पटा लेता हूँ. मैंने बहुत इंतज़ार कर लिया था. मुझे 5 दिन हो गए थे. आखिर परवीन आंटी का कॉल आया- हैलो ज़ीशान. मैं- हां बोलो आंटी. परवीन- मैंने हिना को घर बुलाया है. वो कल सुबह आएगी ... तुम भी आ जाना. मैं- ओके आंटी और सुनो, आप भी साथ ही रहना. आंटी ने हामी भर दी. इसके बाद मैंने एक बी ग्रेड मूवी की डीवीडी खरीद ली. मूवी का नाम हवस था. दूसरे दिन मैं परवीन आंटी के घर निकल गया. मैंने अच्छे से परफ्यूम वगैरह सब लगा कर खुद को तैयार किया ... और अच्छे से बन संवर कर निकल पड़ा. मैं आंटी के घर के आगे पहुंच गया. मैंने देखा कि घर के बाहर दो लेडीज के सैंडल्स थे. मैं समझ गया कि हिना आंटी भी आ चुकी हैं. मैंने दरवाजे की घंटी बजा दी. परवीन आंटी दरवाजा खोलने आईं. परवीन- तुम लेट हो गए हो. हिना आ चुकी है. मैं- ओके आंटी, आप कैसे भी करके ये डीवीडी प्लेयर में लगा देना. मैंने डीवीडी को उनके हाथ दे दिया और मैं अन्दर जाने लगा. हिना- अरे जीशान ... तुम यहां कैसे! मैं- ऐसे ही दोस्त से मिलने आया था, आंटी का घर यहीं पर था, तो आ गया. हिना- मेरा घर भी यहीं पर है. मैं- हां, मैं जानता हूं. हिना- जब तुम छोटे थे, तब तुम किसी के घर नहीं आते थे. सिर्फ अपनी रेशमा चाची के घर ही रहता था. अब तो तू बड़ा हो गया है, सबके घर आया करो. मैं- हां ... तब तो मैं छोटा था. लेकिन अब काफी मैच्योरिटी आ गयी है. परवीन- मैं सबके लिए चाय बनाकर लाती हूँ. मैं हिना आंटी की बगल में बैठ गया. टीवी का रिमोट आंटी के उस साइड था. मैं बिना आंटी से पूछे उनके ऊपर से हाथ डाल कर रिमोट लेने लगा. मेरा हाथ उनके चुचे को टच करने लग. मैंने टीवी ऑन किया. पहले मैं यूँ ही बेकार में चैनल बदलता रहा. मैं- आंटी इसमें तो कुछ ढंग का प्रोग्राम नहीं आ रहा है. कोई डीवीडी है. परवीन- एक ही है ... उसपे कोई मूवी का नाम नहीं है. मैं- कोई भी हो ... ये बोरिंग टीवी प्रोग्राम से तो उसमें कुछ अच्छा ही तो होगा. मैं डीवीडी को ऑन किया और वो डिस्क लगाने लगा. मूवी शुरू होने लगीं ... पहले शुरुआत में वो फिल्म इतनी सेक्सी नहीं दिख रही थी. तभी आंटी चाय लेकर आ गईं. हम सबने मिलकर चाय पी और इधर उधर की बातें करने लगे. अब तक टीवी में थोड़े हॉट सीन आने लगे थे. मैं हिना आंटी का हाथ पकड़ने लगा. ये सब परवीन आंटी देख रही थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा. हिना आंटी ने भी कुछ नहीं कहा ... वो बस टीवी की ओर देख रही थीं. तभी मूवी में एक सीन ऐसा आया, जिसमें पति के सन्तुष्ट नहीं करने के वजह से पत्नी ने किसी दूसरे लड़के से अफेयर रखा हुआ था. वो फिल्म की नायिका उस लड़के के साथ रोमांस करने लगी थी. उसी समय परवीन आंटी को कोई बाहर से बुला रहा था ... तो आंटी बाहर जाकर उससे बात करने लगीं. मैं बोला- अगर पति संतुष्ट नहीं करता है, तो ऐसे ही करना पड़ता है. इस मूवी में इस औरत की कोई गलती नहीं है. हिना- तू इतना बड़ा हो गया. संतुष्ट करने की बात भी करने लगा. तुझे इतना सब पता है? मैं- आंटी, अब मैं जवान भी तो हो गया हूँ. हिना- अच्छा ... तो तू मुझे बता कैसे संतुष्ट करते हैं. मैंने उनको अपने मोबाइल में पॉर्न वीडियो दिखाने लगा और बोलने लगा. मैं- औरत ज़्यादा टाइम तक हॉट रहती है, झड़ती नहीं है. इसकी वजह से पहले चूमना चूसना और चाटना करना चाहिए. हिना- तुझे इतना सब पता है. मैं- हां थोड़ा बहुत जानने लगा हूँ. हिना- लेकिन औरत को इन सब से भी संतुष्टि नहीं होती है. मैं- तो फिर क्या करना पड़ता है? हिना- तू अभी छोटा है. मैं- मैंने भी तो बहुत औरतों को खुश किया है. लेकिन जो आप बोल रही हो, वैसी औरत मुझे अब तक कोई नहीं मिली है. हिना- मिलेंगी ऐसी भी ... तब क्या करेगा? मैं- मुझे पता नहीं, इसीलिए तो आपसे पूछ रहा हूँ. मैं एक हाथ से हिना आंटी की गांड सहलाने लगा. धीरे धीरे उनके पेट के ऊपर करने लगा. हिना- मुझे गर्म मत कर, फिर पछताएगा. इतना आसान नहीं है. मैं- मैं आपको भी संतुष्ट कर सकता हूँ. आप बस मुझे मौका तो दो. तभी हिना आंटी ने मेरे लंड को पकड़ लिया. हिना- तेरा तो काफी बड़ा है. बेशक तू अब जवान है. मैं- इसीलिए तो बोल रहा हूँ, मौका तो दो, तब पता चलेगा. हिना- मुझे इस सबसे तू खुश नहीं कर पाएगा. मेरी हसरत तो कुछ और है. मैं- वो क्या है? मैं जानना चाहता हूँ ... प्लीज मुझे भी बता दो. हिना- बड़े बड़े मर्द मुझे सन्तुष्ट कर नहीं पाए हैं ... तू कहां से करेगा. तू इन सबके लिए अभी बहुत छोटा है. इतने में परवीन आंटी आ गईं. मैं यही सोच रहा था कि हिना आंटी किसके बारे में बात कर रही थीं. मेरा प्लान कुछ और था. यहां कुछ और होने लगा है. मुझे किसी हाल में हिना आंटी चाहिए थी. उनकी वो क्या हसरत है, मैं ये जानना चाहता था. परवीन आंटी ने मुझे उदास देख लिया और पूछने लगीं. परवीन- अरे तुझे क्या हुआ? ऐसे कैसे बैठा है? मैं- कुछ नहीं है. मेरा हिना आंटी से सवाल करने मन कर रहा था. मैंने परवीन आंटी को बाहर जाने के लिए इशारा किया. परवीन- मैं अभी आती हूँ. हिना तू जीशान को कंपनी दे. परवीन आंटी ये कहकर चली गईं. फिर हिना आंटी ने जाकर दरवाजा बंद कर दिया. मैं पीछे से गया और उन्हें पीछे से हग कर लिया और चूमने लगा. एक हाथ से उनके मम्मों को दबाने लाग. वे कुछ समझ पाती कि मैंने झट से उनकी साड़ी को खींच दिया. हिना- ये क्या कर रहा है? तुझे बोला न मैंने, तुझसे नहीं हो पाएगा. मुझे और गुस्सा आने लगा और मैं लिप टू लिप देने लगा. अन्दर तक उनकी जीभ चूसने लगा. वो मुझे धकेल रही थीं. मैं उनको ज़ोर से पकड़ने लगा और दबाने लगा. आंटी ने मुझे ज़ोर से धकेल दिया और बाहर जाने की कोशिश करने लगीं. हिना आंटी अपनी साड़ी नीचे से लेने लगीं. मैंने उन्हें और ज़ोर से खींच कर नीचे गिरा लिया और उनका ब्लाउज निकालने लगा. ब्लाउज जल्दी से निकल नहीं रहा था. मैंने ज़ोर से खींच दिया, तो हिना आंटी का ब्लाउज फट गया. आंटी बोलने लगीं- मुझे छोड़ दे प्लीज ... मुझे इन सबमें कोई इंटरेस्ट नहीं है ... प्लीज छोड़ दे. हिना- मादरचोद छोड़ मुझे ... मैं तेरी रंडी नहीं हूँ. मैंने बिना सुने झट से आंटी की ब्रा को खींच दिया और उनके मस्त मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. उनके निप्पलों को ज़ोर ज़ोर से खींचने लगा. वो जोर से चीखने लगीं- आआआह ... मुझे छोड़ दे ... प्लीज. मैं कुछ नहीं कह रहा था. मुझे तो जवाब लंड से देना था. अब मैं उनके मम्मों को चूसने लगा और निप्पलों को काटने लगा. हिना- आआआह मैं मर गयी ... ऊऊऊउफ ... छोड़ दे. मैंने उनके पेटीकोट को ज़ोर से खींचते हुए निकाल कर दूर फेंक दिया. अब आंटी सिर्फ पैंटी में थीं. तभी हिना आंटी अपनी ब्रा और पेटीकोट को हाथ में लिए हुए बेडरूम में जाने लगी. आंटी बेड पर बैठी तो मैंने झट से उनकी पेंटी को निकाल कर फेंक दिया. मैं भी जल्दी करते हुए अपने कपड़ों को निकाल रहा था. हिना- मुझे अभी छोड़ दे, नहीं तो बहुत पछताएगा ... आआआह. मेरे पास आंटी की चुत को चाटने के लिए टाइम नहीं था. मैंने अपनी दो उंगलियां एक बार में आंटी की चूत के अन्दर डाल दीं. आंटी की चीख निकल गयी- निकाल बहनचोद निकाल बाहर. मैंने उनकी इन सब बातों को अंदाज़ नहीं करते हुए, झट से अपना लंड उनकी चुत के अन्दर पेल दिया. पूरा लंड एकदम अन्दर चला गया. वो चिल्लाने लगीं- आह मादरचोद ... आआह. ... मुझे चोद दिया. मैं और उत्तेजित हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. हिना- तू मुझे क्या संतुष्ट करेगा बहनचोद. ऐसा ही तो सब मर्द करते है. अब पानी छोड़कर निकल जा साले, इतना ही तो तू कर सकता है, मादरचोद. इस रंडी की ये अकड़ काम नहीं हो रही थी. मुझे मारने के लिए और प्रेरित कर रही थी. मैं और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. इस बार मैं उनके पैर ऊपर उठा कर ज़ोर ज़ोर से पेलने लगा. हिना- मत कर ऐसे. लंड की ताकतवर चोटें पड़ने से उनकी आवाज धीमी हो गयी थी. हिना आंटी की अकड़ अब दिख नहीं रही थी. कोई पांच मिनट में ही वो झड़ने वाली हो गई थीं. आंटी ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और प्यार से सीत्कारने लगीं. हिना- आह मर गयी रे मैं ... आआआह उफ्फ ... ऊऊऊह.. ये कहते हुए वे निकल गईं. मेरा भी दो मिनट में होने ही वाला था. मैं भी आंटी की चुत में ही झड़ गया. मैं- अब बात रंडी ... सन्तुष्ट किया कि नहीं. हिना आंटी ने कराहते हुए कहा- हां ... कुछ ऐसी ही थी मेरी हसरत. मैं आंटी के बदले हुए रुख को समझ नहीं सका. तभी आंटी मेरे ऊपर आने लगीं और प्यार से ज़ोर ज़ोर से चूमने लगीं. जहां उनके काटने के वजह मुझे खून आ रहा था, वहां आंटी चूसने लगीं और बोलने लगी- तूने तो दीदी को भी चोदा है ना? मैं- आपको कैसे पता? हिना- अगर मैं घर आती हूँ, तो दीदी कहीं नहीं जाती हैं. पहली बार आज मुझे अकेला तेरे साथ छोड़ कर गयी हैं. तू जो इशारे कर रहा था, वो भी मैंने देख लिया था. मैं- आप बहुत ही स्मार्ट हो. हिना- दीदी को चोदा है, तो तूने पहले रेशमा को पटाया होगा ... नहीं तो तुझे दीदी कहां से मिलती. उस दिन तू फार्म हाउस के लिए जो बुला रहा था, उसी दिन मुझे सब पता चल गया था. मैं- रंडी आंटी ... तू तो मेरे से भी स्मार्ट है. इतने में दरवाजे की घंटी बजी. मैंने आंटी से जल्दी से कपड़े पहनने को कहा. हिना- दीदी ही होगी ... टेंशन मत ले. मैं जाती हूँ. वो ऐसे ही नंगी दरवाजा खोलने चली गईं. खोलने के पहले वो की-होल में से देखने लगीं. बाहर परवीन आंटी को देख कर कन्फर्म करके दरवाजा खोलने लगीं. जैसे परवीन आंटी अन्दर आईं, हिना आंटी ने डोर बंद कर दिया. परवीन- हिना ... ये क्या कर रही थी तू? मैं- ड्रामा की कोई ज़रूरत नहीं, उनको सब पता है. परवीन- मैं सब वहां विंडो से देख रही थी. हिना तेरे अन्दर ऐसी नई नई हसरतें कब से शुरू हो गईं? हिना- और भी बहुत सारी हसरतें हैं दीदी. कभी मेरे घर आओ, सब बताती हूँ. मैं- कोई नहीं आएगा ... सिर्फ मैं आऊंगा. मुझे सब सिखाना. मुझे जहां जहां नाखून के निशान बन गए थे, परवीन आंटी वहां क्रीम लगाने लगीं. हिना आंटी के गाल तो लाल हो गए थे. मैंने उन्हें काफी जोर से मारा था. उस दिन की इस चुदाई के बाद हम तीनों सामान्य होकर बैठ गए. कुछ देर बाद हिना आंटी ने मुझे दूसरे दिन घर आने को कहाहिना आंटी के इस बर्ताव से मेरे होश उड़ गए थे. पता नहीं और क्या क्या है उनके दिल में … दिखने में बड़ी मासूम सी दिखती थीं. ऐसा तो कोई सोच भी नहीं सकता था कि हिना आंटी इतनी अधिक कामुक निकलेंगी. परवीन आंटी के घर इतना सब होने के बाद मैं दूसरे राउंड के लिए तैयार नहीं था. मैं थक गया था. इस नए एक्सपीरियंस से मेरे होश उड़ गए थे. हिना- मुझे माफ कर देना जीशान. ये तो सिर्फ एक बार होता है. पहली बार ही सबसे अच्छा होता है. सब प्लान करके करने से ये उतना अच्छा नहीं होता है. ये अपने आप होना चाहिए. इसलिए हम इतने मज़े कर पाए. मैं- और क्या क्या है मन में. मेरा तो गला सूख गया था यहां. आप चाहती हो, तो यहीं हम दूसरी बार भी कर सकते हैं. हिना- नहीं … अभी तो बहुत कुछ बाकी है. हम दोनों मिलकर नहा लिये. हिना आंटी परवीन आंटी के कपड़े पहनकर वहां से निकल गईं. मैं भी निकल गया. मैं देर रात को घर पहुंचा और यूँ ही सोचने लगा कि औरत की भी बहुत हसरतें होती हैं … जिसका हमें ख्याल रखना पड़ता है. जितना मर्द की हसरतें होती हैं, उतनी औरत की भी रहती हैं. सिर्फ लंड चूत में डाल कर हिलाने से उन्हें खुशी नहीं मिलती है. हमें उनकी हसरतों को जानना होगा और उन्हें खुश करना होगा. खुश करने के लिए किसी लंबे मोटे लंड की ज़रूरत नहीं होती है … सामान्य 6 इंच का लंड भी खुशी दे सकता है. मैं हमेशा चाहता था कि मेरा लंड 10 इंच जितना बड़ा हो जाए. लेकिन अब मैं जानने लगा कि मेरा 7 इंच का लंड भी औरतों को खुश कर सकता है. आज मैं अपने लंड पे घमंड महसूस कर रहा था. इन तीन बहनों ने मेरी सेक्स लाइफ को कहीं और ला दी थी. यह कहानी 5 साल पुरानी थी. मतलब जब मैं 18 साल का था, तब की थी. अब मैं 23 साल का हो गया हूँ. चार साल इंजीनियरिंग लाइफ की तमाम कहानियां आप सबसे शेयर करने का मन कर रहा है. अब तक जितनी भी औरतों और लड़कियों को मैंने चोदा है, उन सबमें से ये तीनों बहनों ने मुझसे सबसे ज़्यादा सुख दिया है. अभी मैं ये सब सोच ही रहा था कि तभी चाची का फोन आया- हैलो जीशान, आई मिस यू बेटा … कैसा है तू? मैं- मेरी तो गांड फटी पड़ी है. चाची ने हंसते हुए पूछा- क्यों क्या हुआ? मैं- हिना ने.. चाची- हिना..? मतलब तू दीदी से मिला? मैं- हां … परवीन आंटी ने घर बुलाया था. चाची- अरे वाह तूने मुझे कुछ नहीं बताया … एक हफ्ते से तेरा कोई कॉल नहीं मैसेज नहीं, हो क्या रहा है? बता अब मुझे क्या हुआ है? मैं- हिना आंटी की हसरत सेक्स से बढ़कर कुछ और ही है. चाची- मतलब? मैं- मैंने उनकी चुदाई कर दी. उन्होंने चुदाई के वक्त मुझे बहुत मारा भी … मगर खुश भी बहुत हुईं उनके साथ बहुत कुछ हुआ है. आप शुरुआत तो ऐसी मान लो … जैसे *** हुआ था. चाची- याल्लाह!!! तूने ऐसा क्यों किया … अब मैं क्या करूँ? मैं- तुम कुछ मत करो … उन्होंने ये सब अपने आप मुझे इसके लिए प्रेरित करके किया था … और वही उनको अच्छा लगता है. चाची- ऐसे अजीब अजीब ख्वाहिश? अच्छा तू ये बता कि घर कब आने वाला है? मैं- अब घर आने के लिए अभी टाइम नहीं है. इस संडे के दिन सब मिलकर फार्म हाउस जा रहे हैं. आप तैयार रहना. जो जो सामान मैंने पहले बोला था, वो सब ले लेना … और इसके अलावा आपको और जो भी चाहिए हो, ले लेना. चाची- वाह … मतलब चारों एक साथ … अब तो मज़ा आ जाएगा … मैं सब तैयार करूँगी. सबके लिए लंच भी रेडी करूँगी … बाय. चाची ने फ़ोन काट दिया. मुझे कब नींद आ गयी, इसका पता ही नहीं चला. मैं खूब घोड़े बेचकर सो रहा था. इतनी गहरी नींद आई थी कि मैं सुबह एक्सरसाइज के लिए भी नहीं उठा. मैं 8 बजे उठा और फ्रेशअप होकर नाश्ता करने लगा. तभी हिना आंटी का फ़ोन आया- हैलो मेरे हीरो. मैं- बोलिए हेरोइन? हिना- कुछ नये एक्सपीरियंस के लिए तैयार हो? मैं- हां … बिल्कुल तैयार हूँ. हिना- सोच लेना? मुझे थोड़ा डर भी लगने लगा. फिर भी आंटी की सेक्सी बॉडी की चाह में मैंने हां कह दिया- सोच लिया … मैं तैयार हूँ. हिना- ठीक 10 बजे घर के पास आ जाना. लेट नहीं करने का. मैं- ठीक है … बाय! मैंने नाश्ता खत्म किया. मैं अपने आपको हिम्मत दे रहा था, नए एक्सपीरियंस के लिए. मैं 9:00 बजे घर से निकला और ठीक 9:45 पर आंटी के घर के पास आ गया. कोई 15 मिनट बाद यानि ठीक 10 बजे मैंने उन्हें कॉल लगाया. मैं- आ जाऊं अन्दर? हिना- हां दरवाजा खुला है, आ जा. मैं सीधा अन्दर चला गया और दरवाजा बंद करने लगा. आंटी तो मेरे लिए बेडरूम में इन्तजार कर रही थीं. उन्होंने बेडरूम सजाया हुआ था. नया चादर, कूलर आदि सब लगाया हुआ था. आंटी को देखा, तो वो मस्त सेक्सी शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहने हुए थीं. मैंने अभी तक हिना आंटी को साड़ी के अलावा किसी और ड्रेस में नहीं देखा था. मैं- आप टी-शर्ट शॉर्ट्स भी पहनती हो? हिना- ये मेरे नहीं, आलिया के हैं. तुझे कुछ नया एक्सपीरियंस देने के लिए पहने हैं. आंटी ने मेरा हाथ पकड़ कर बेड पे खींच लिया. मैं बेड पर बैठ गया. बगल में टेबल के ऊपर एक ट्रे रखी थी, उसको एक कपड़े के अन्दर छिपाया हुआ था. मेरी नज़र उसपे जाने लगी. आंटी ने भी मेरी नज़र देख ली. हिना- वो सब तेरे लिए ही है. इतना कह कर आंटी ट्रे उठाने लगीं और उन्होंने उसके ऊपर से कपड़ा हटा दिया. उसमें जो सामान थे, उन्हें देखकर मैं चौंक गया. क्या क्या बताऊं यार. उसमें एक 10 इंच का डिल्डो था, वाइब्रेटर था, एक हंटर था. हैंडकैप्स थे, जो हाथों में बेड़ियां जैसे लगते हैं. साथ ही आंखें बंद करने वाला ब्लाइंड फोल्ड भी था. मैं ये सब देख कर परेशान हो गया. मैं- आंटी आपको ये सब सामान कहां से मिला? हिना- ऑनलाइन से मंगवाया है … मैं किसी न किसी दिन इन सबको इस्तेमाल करने का मौका ढूंढ रही थी. मैं- अब क्या करने वाली हो? हिना- स्लेव सेक्स. मैं- वो क्या होता है? मैंने वैसे दो पोर्न वीडियोज में देखा था कि ये स्लेव सेक्स क्या होता है. फिर भी मैं उनसे पूछ लिया. हिना- देख मैं जानती हूँ, दोनों को मौका मिलना चाहिए. मैं ये सिक्का उछालूँगी … चित आया तो पहले मैं, पट आया तो तुम. मेरे कुछ बोलने से पहले ही आंटी ने सिक्का उछाल दिया. चित आया था, मतलब आंटी पहले करेंगी … लेकिन होगा क्या, ये मुझे पता नहीं था. हिना- ये देख मैं कुछ भी करूँगी, तुझे सहना होगा. फिर तुझे मौका आएगा, तू जो करना है वो कर लेना. मेरी गांड फटने लगी. पता नहीं ये रंडी अब क्या क्या करेगी. आंटी ने मेरे हाथों में बेड़ियां डाल दीं. मैं अब एक कैदी सा बन गया था. मेरे दोनों हाथों को हिना आंटी ने बेड के कोनों से बाँध दिया था. आंटी धीरे धीरे मेरे ऊपर आने लगीं. मुझे चूमने लगीं. मेरे होंठ काटने लगीं. आंटी ने इतने ज़ोर काट दिया कि मेरे होंठ पे खून आने लगा. मैं ऊपर उठने की कोशिश कर रहा था. लेकिन मुझे बाँध देने के कारण मैं कुछ नहीं कर पा रहा था. हिना- बस इतने से डर गए … और बहुत कुछ होने वाला है. मुझे डर होने लग था. आंटी ने अपनी टी-शर्ट को निकाल दिया और उनके रसीले बूब्स मेरे सामने थे, उन्हें ब्रा में कैद करके रखा हुआ था. आंटी अब मेरे भी कपड़े निकालने लगीं. मैं भी सहयोग करने लगा. मैं अब सिर्फ अंडरवियर में था और आंटी ब्रा और पैंटी में थीं. वो मेरे ऊपर चढ़ गईं. हिना- मेरे चूचे चाहिए तुझे … आ ले ले … इनको पी जा भोसड़ी के. मैं जैसे थोड़ा ऊपर उठने लगता, वो पीछे हो जाती थीं. आंटी को मुझे ऐसे तड़पाना अच्छा लगता था. फिर आंटी ने अपने आप ब्रा खोल दी. मेरा लंड खड़ा हो रहा था. हिना आंटी मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर ज़ोर से खींचने लगीं. मुझे दर्द होने लगा- छोड़ दो उसको … मुझे दर्द हो रहा है. हिना- जितना ज्यादा दर्द, उतना ज्यादा मजा. फिर मुझे बहुत तड़पाने के बाद, आंटी ने अपने चुचे मेरे मुँह के पास रख दिए. मैं खूब चूसने लगा. अब मुझे ये खेल अच्छा लगने लगा. फिर आंटी ने अपनी पैंटी निकाल दी और सीधे मेरे मुँह पे बैठ गईं. मैंने कुछ नहीं कहा, मैं उनकी चुत चाटने लगा था. वो मेरे सर को और अन्दर घुसा रही थीं. वे कामुक सिसकारियां लेने लगीं- आआआह उउहह. … बड़ा मस्त चूसता है मादरचोद … मेरी दो बहनों की गांड मारी है तूने, चुत भी चोदी है. अब यहां मुझे चोदने आया है. मैं चुपचाप आंटी की चूत चाट रहा था. कोई 5 मिनट चूत खूब चाटने के बाद, वो झड़ने वाली हो उठी थीं. उन्होंने मेरे सर को ज़ोर से पकड़ लिया और अपनी चूत पर दाबते हुए जोरदार चीख मारकर झड़ गईं- आआह … ऊऊऊउफ मज़ा आ गया. मैं पीछे की ओर खिसकने लगा … लेकिन आंटी मेरा सर और अन्दर ले रही थीं. मैं- अब हो गया ना … निकालो मुझे, यहां सांस ले नहीं पा रहा हूँ. हिना- उस रस को पी जा. मैं- नहीं … मैंने अभी तक नहीं पिया है, नहीं होगा मुझसे. हिना ने मुझे एक थप्पड़ मारा और चुपचाप चुत साफ करने को बोलीं. मैं कुछ नहीं कर पा रहा था. मैंने बिना चाहते हुए उनकी चूत का पानी पी लिया. मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आया. आंटी- साले तुम मर्द लोग तो अपना माल हमारे मुँह में छोड़ते हो और तुम हमारा माल नहीं लोगे. अब पी जा मादरचोद … पूरी चुत साफ कर. हिना आंटी जैसे जैसे बोलीं, मैं वैसे करने लगा. मैं अपनी बारी का इंतज़ार करने लगा. मुझे लगा कि अब उनका हो गया और मैं आज़ाद हो जाऊंगा. लेकिन ऐसा नहीं था. रंडी आंटी अभी भी कुछ कर रही थी. एक हाथ में चाबुक ले लिया … मतलब वही जो जानवर को मारने के लिए इस्तेमाल करते हैं. हिना- मादरचोद … इतना जल्दी तेरा लंड ढीला हो गया. यह कहते हुए एक ज़ोर चाबुक मारते हुए मुझे गाली बकने लगीं. मुझे अब बहुत दर्द हो रहा था. मुझे आज तक मेरे पापा ने भी नहीं मारा था, लेकिन ये रंडी मार रही थी. मैं चीखने लगा- आआआह. ये कैसी चुदाई है … मुझे नहीं चाहिए, मुझे छोड़ दे रंडी. हिना- इतने में क्या हुआ मादरचोद … अभी तो और भी बहुत कुछ बाकी है. वो ज़ोर से मुझे मारने लगीं. मैं रो रहा था. उन्हें इतना भी रहम नहीं आया. मैं अपनी बारी का इंतज़ार करने लगा. फिर वाइब्रेटर लेकर आंटी मेरे लंड पे रखने लगीं. मैं मचल उठा. मैं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… हिना- मादरचोद मज़े कर रहा है? वो मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारने लगीं. मेरी चीख बाहर निकलने से पहले वो मुझे चूमने लगीं और हर जगह मुझे काटने लगीं. मैं बड़ी बेसब्री से मौके का इंतज़ार करने लगा. मैंने दिल में सोच लिया कि इसके बाद आंटी का वो हाल करूंगा कि आगे से ये स्लेव सेक्स का नाम नहीं लेंगी. तभी आंटी ने मेरा लंड अपने हाथ में लेकर अपनी चुत के अन्दर डाल दिया और ऊपर नीचे बैठने लगीं. वो खुद को चुदवाते हुए कामुक सिसकारियां लेने लगीं. मैं चुपचाप पड़ा था. आंटी ने तभी मुझे एक और ज़ोर से थप्पड़ मारा और बोलने लगीं- मादरचोद चीख … जब तू चोदता है तो मैं चीखती हूँ न … अब तू चीख मादरचोद. मैं- आआआह ऊऊम्म्म … और ज़ोर से करो. हिना- ये ले मादरचोद.. … ये ले. … और ये ले. वो बहुत ज़ोर ज़ोर से लंड के ऊपर नीचे बैठने लगीं. वो बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गयी थीं. मुझे भी इतना सब होने के बाद मज़ा आने लगा था. वो मुझे अब ज़ोर से पकड़ कर मेरे सीने पर काटने लगीं और ज़ोर से चीख कर झड़ने लगीं. हिना- बहुत मस्त था … जीशान … अब तेरी बारी … तुझे जो करना है कर ले, अब मैं तेरी हूँ. आंटी मेरी हथकड़ियां खोलने लगीं. जैसे ही उन्होंने खोला … मैंने अपनी पूरी ताकत से एक चांटा दे मारा. मेरे झापड़ से आंटी नीचे गिर गईं. मैंने उन्हें ऊपर उठाया और एक और ज़ोर से चांटा दे मारा. मैं- साली रंडी, अब तुझे देखता हूँ. अब मैंने हिना आंटी को हथकड़ियां पहना कर लॉक कर दिया. मैं बहुत थक गया था, इसकी वजह से पहले मैं फ्रिज के पास पानी पीने गया. वहां जूस पिया और एक बोतल पानी आंटी के लिए ले गया. मैं- हिना डार्लिंग … पानी चाहिए? हिना- हां जान … दे दे.आंटी को प्यास लग रही थी. मैं पानी उन्हें देने जा रहा था, लेकिन मैंने उन्हें पानी नहीं पिलाया बल्कि पानी उनके ऊपर गिरा दिया. हिना- नीचे क्यों गिराया, मुझे तो प्यास लग रही है. मैं- रंडी, तुझे प्यास लग रही है … मैं बुझाऊंगा तेरी प्यास. मैंने अपना पूरा लंड उनके मुँह में डाल दिया और अपनी पेशाब उनके मुँह में छोड़ने लगा. आंटी लंड को बाहर निकाल नहीं पा रही थीं. वो कुछ कर ही नहीं पाईं, बल्कि आंटी ने मेरी पूरी पेशाब पी ली. हिना- ये क्या कर दिया तूने? कोई कितना भी बेरहम हो, पेशाब थोड़े ही पिलाता है. मैं- चुप रह रंडी, अब मैं जैसा कहता हूं, तू वैसे करना. मैंने वहां रखा 10 इंच का डिल्डो हाथ में ले लिया. वो काफी मोटा भी था. मैं ज़ोर से उनकी चुत में घुसेड़ दिया. एक बार में ही करीब 8 इंच तक डिल्डो आंटी की चूत के अन्दर चला गया. आंटी दर्द से चीखने लगीं- आआआह … मैं तो मर गई … धीरे. फिर मैं वाइब्रेटर लेकर उनकी गांड में रखने लगा और डिल्डो को आगे पीछे करने लगा. आंटी तो मचल गईं- आआआह ऊऊऊउफ … उमम्म … मैं ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से डिल्डो को आगे पीछे कर रहा था. मैंने वाइब्रेटर उनकी गांड में डाल दिया था. करीब 5 मिनट ऐसे करने से आंटी थक गईं और झड़ने वाली थीं. तभी मैंने तुरंत दोनों को निकाल लिया. हिना- निकाला क्यों? दो मिनट और कर दे ऐसे ही प्लीज … मैं झड़ने वाली हूँ. प्लीज. मैं- तू इतने जल्दी झड़ जाएगी, तो मुझे कौन मजे देगा रंडी. मैं लॉक को खोलने लगा और उन्हें ऊपर उठा कर हग कर लिया, मैं आंटी को चूमता रहा. फिर मैं उन्हें विंडो के पास ले गया और उन्हें वहां खड़ा करके खिड़की से लॉक कर दिया. हिना- ये तू क्या कर रहा है? यहां क्यों लॉक किया? मैं- बस ऐसे ही, तुम मज़े लेना रंडी. मैंने चाबुक लिया और एक ज़ोर से चिपका दिया. उनके गोरी जांघें लाल हो गईं. मैं ज़ोर ज़ोर से चिपका रहा था, उनका बदन लाल हो गया था. हिना- आह छोड़ दे मुझे … आज मेरी सब हसरतें पूरी हो गईं, अब मुझे छोड़ दे … कोई बचाओ ये मुझे मार ही देगा. उनकी आवाजें ज़ोर से होने लगीं. मैं एक कपड़े से उनका मुँह बंद दिया. अब उनकी आवाज अन्दर ही रुकने लगी. हिना धीमी आवाज में- आआआह … मैंने करीब 50 बार चाबुक से उन्हें मारा. फिर मैंने उन्हें खोल दिया. आंटी तो अब खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं. मैंने ही उन्हें सहारा देकर बेड पे सुलाया और फिर से लॉक करने लगा. हिना- और कितना करेगा … मार ही देगा क्या. प्लीज मुझे छोड़ दे. मेरी अभी कोई वासना बाकी नहीं बची है … छोड़ दे मुझे. मैं- ऐसे कैसे छोड़ दूँ. मेरी वासना तो अभी पूरी नहीं हुई है. मैंने आंटी गाल पर ज़ोर से चांटा मारा, वो चुपचाप रह गईं. मेरी नजर अब उनकी 38 साइज़ की चूचियों पर थी. मैं ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और ज़ोर ज़ोर से काट रहा था. निप्पलों को भी काट रहा था. मुझे मज़ा आने लगा. वहां आंटी का हाल बेहाल हो गया था- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आंटी अब तक दो बार झड़ चुकी थीं, तो अब चुत मारने का फायदा नहीं था. इसलिए मैंने उनकी गांड मारने को सोचा. मैंने उनके मुँह से कपड़ा निकाल दिया और लॉक भी निकाल दिया. मैं- बहुत दर्द सह लिया है आपने, अब मज़े ले लो. हिना- नहीं होगा … बेटा मुझे छोड़ दे, नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं- तुम्हें ये मौका दिया है … इसका फायदा उठाओ. मैंने उन्हें कुतिया बनाया और डिल्डो भी हाथ में ले लिया. मैंने लंड से एक जोरदार झटका दिया … मेरा आधा लंड अन्दर चला गया. आंटी की चीख तो रुकने वाली थी ही नहीं. मैं हाथ में जो डिल्डो था, जो मैंने उनकी चुत में डाल दिया. आंटी का बदन कांप उठा- आआआह … इसे बेहतर तू मुझे जान से मार दे … मेरी गलती थी, मैंने तुझको ऑफर दिया और तुम्हें इतना मारा. मुझे माफ कर दो और मुझे छोड़ दो प्लीज. मैं- अब तो कुछ नहीं होने वाला, बस मजे ले लो. मैं धक्के पे धक्के मार रहा था. साथ ही मैंने नीचे हिना आंटी की चुत में डिल्डो डाल दिया था. आंटी के दोनों छेद भरे हुए थे. आंटी की चीख तो रुकने वाली ही नहीं थी. हिना- आह और कितनी देर करेगा, मैं तो झड़ भी चुकी. मेरा भी होने वाला था मैं और ज़ोर ज़ोर धक्के देने लगा. जब माल निकलने वाला था, मैंने तुरंत लंड बाहर निकाल कर उनके मुँह में रस छोड़ दिया. अब हिना आंटी हाथ जोड़कर मुझसे बोलने लगीं- मैंने गलत लड़के से पंगा ले लिया. अब से ऐसे कोई नए हसरत नहीं रखूंगी. माफ कर दे. मैंने हंस कर आंटी को चूम लिया. आंटी भी मुझसे चिपक गईं. ऐसे आंटी की हसरत पूरी हुई. मैं- अब प्यार से चुदाई होना कैसी रहेगी, मैं आपको दिखाऊंगा, बस आप संडे तैयार रहना. हम सब फार्म हाउस जाएंगे. हिना- मुझे मारेगा तो नहीं ना? मैं- आप अपनी दोनों बहनों से पूछ लें कि मैं औरत का कितना ख्याल रखता हूं. ये सब भोसड़पन आपने शुरू किया, इसीलिए हो गया. हिना- हां यार गलती तो मेरी थी. मैं संडे तैयार रहूंगी. मैं- वो डिल्डो, वाइब्रेटर और वो हैंड कफ्स भी रख लेना. हिना- तू उन सबसे क्या करेगा. मैं- इन सबको बिना दर्द हुए यूज कर सकते हैं. मैं आपको ये सिखाऊंगा. बस आप लेकर आ जाना और साथ में आलिया दीदी के कुछ अच्छे अच्छे ड्रेस लेकर आना. आंटी ने हां कह दिया. मेरा भी तो हाल बुरा था. बड़ी मुश्किल से गाड़ी चला पाया. इस घटना से खुद को फिर से सही सलामत करने के लिए मेरे पास 5 दिन थे. मैं 5 दिन भी फार्म हाउस पर ही रहा. मेरा छोटा भाई खाना लेकर आता था. मैं उधर की ताज़ी हवा में खूब खाना और सोना करता था और स्विमिंग करता था. चार दिन गुज़र गए. एक ही दिन बचा था. मैं वो विदेशी दवाई को निकालने लगा, उसको कैसे यूज़ करते हैं, ये सब पढ़ रहा था. रात को पापा से बोल कर कार मंगवा ली. सुबह भाई ने कार लाकर दे दी. मैं कार में पहले चाची के घर गया. घर के आगे जाकर हॉर्न बजाने लगा. चाची- इतना जल्दी मत करो, अभी सब सामान इकट्ठा करना है. मैं ही अन्दर गया और सब सामान ठीक करने लगा. चाची मौका ढूंढकर मुझे चूमने लगीं. मैं- अभी नहीं … सब वहां मज़े करेंगे. चाची ने सफ़ेद साड़ी पहनी थी, बालों में फूल लगाए हुए थीं. उस फूल की खुशबू मुझे मूड में ला रही थी. मैं कंट्रोल कर रहा था. सब सामान कार में रख दिया. चाची सब लॉक करके कार में आगे वाली सीट पर बैठ गईं. फिर हम परवीन आंटी के घर गए. वहीं पे परवीन आंटी और हिना आंटी दोनों थीं. तीनों बहनें वहीं पे बातचीत शुरू करने में लग गईं. मैं- इन सबके लिए समय नहीं है. सब लोग जल्दी चलो. दोनों आंटियां अपना सामान कार में रखने लगीं. वो दोनों पीछे बैठ गईं. मैं कार स्टार्ट करने लगा. हिना- रेशमा, ये सब तेरी गलती है. तेरी वजह से इतना सब हुआ. चाची- हां … मेरी वजह से ही तो तुम्हें इतना अच्छा लंड मिला. मेरा मिठाई बेटू. चाची मुझे किस करने लगीं. हिना- तुम्हें पता है इसने मेरे साथ क्या क्या किया? परवीन- तुमने उसके साथ क्या क्या किया था, ये भी बता! हिना आंटी अपने पेट के ऊपर मेरे दांतों के निशाने दिखाने लगीं और बोलने लगीं- इसने मेरी गांड मार दी. परवीन- उसने तो मेरी भी गांड मारी है. चाची- तुम दोनों की इतनी बड़ी गांड इसने मारी है. मैंने तो अभी तक गांड मरवाई ही नहीं थी, तब भी इसने गांड मार दी. हिना- इसने मुझे खूब मारा, चाबुक से मारा. मेरा बदन पूरा इसके निशान रह गए हैं. मेरे पति के साथ मैं नाइटी में चुद रही हूं. अगर पूरी नंगी हो गई, तो उसके होश उड़ जाएंगे. परवीन- गलती तेरी ही तो है. तेरी चूतियापने की हसरत से उसकी वासना जग गई. मैं उस दिन सब विंडो में देख रही थी. हिना- उस दिन का छोड़ो. जब वो घर आया, तब तो मुझे बहुत मारा. अपना पेशाब मेरे मुँह में छोड़ दिया. क्या क्या बताऊं. ये बहुत हरामी है. परवीन- याल्लाह … इतना सब किया. जीशान क्यों किया ऐसा? मैं- आपको पता है कि मैं औरत का कितना सम्मान करता हूं और उसकी खुशी का ख्याल रखता हूँ. परवीन- इसीलिए तो मैं तुम्हें इतना चाहने लगी हूं. मैं- तो फिर आप ही सोच लो कि क्या हुआ होगा … इस रंडी ने भी तो मुझे चाबुक से मारा था, मेरा बदन पूरा काट दिया था. अपनी चुत का पानी भी पिला दिया. मैं क्या क्या बताऊं … आंटी ने मेरे साथ क्या नहीं किया था … आप दोनों को ये सब मैं वहां बताऊंगा. परवीन- तुम दोनों क्या क्या कर दिया. ऐसा कोई करता है. मैं- टेंशन मत लो, अब आंटी की हसरत के सब कीड़े शांत हो गए हैं. हैं ना आंटी? हिना- हां बेटा हां … अब कोई हसरत नहीं है. चाची और परवीन आंटी हंसने लगे. हिना- अगर उसने जो भी किया, ये सब तुम्हारे साथ करता, तो तुम दोनों मर जातीं. मगर है बड़ा प्यारा, जिस वजह से मैं 5 दिन में ठीक होकर फिर इसके साथ चुदने आ गयी. परवीन आंटी झट से हिना आंटी को किस करने लगी. वो दोनों मुँह से मुँह लगा कर मस्त मजे करने लगे. चाची उनको देख कर बेचैन हो गयी और चाची भी पीछे चली गईं. वो दोनों के मम्मों को सहलाने लगीं. मैं- अरे 5 मिनट रुको, हम पहुंच गए … मुझे भी मज़े लेना है. हिना- मेरे बदन का सर्वनाश कर दिया और क्या चाहिए तुझे. मैं- जो भी आपने मेरे साथ किया है, अगर वो आप अपने पति के साथ करतीं, तो वो आपको तलाक दे देता. आप चुप बैठो अभी. अब परवीन आंटी चाची को चूमने लगीं. वो अपने जीभ से लड़ा रही थीं. चाची- तुम दोनों के जितने बड़े मेरे मम्मे भी हो जाएंगे … मेरे बेटे की वजह से. परवीन- जब तेरे बड़े हो रहे हैं, तो हमारे भी तो हो जाएंगे. हिना- जीशान अकेला हम तीनों को कैसे खुश करेगा? मैं- आ गयी है मेरी दवाई. जिससे 10 बार भी चोद सकता हूँ. हिना- वाह 10 बार … तो हम सबको तीन तीन बार लंड मिलेगा. परवीन- मुझसे 3 बार नहीं होगा. दो बार खुशी से कर लेंगे. चाची- हां यार … 3 बार तो मुझसे भी नहीं होगा. हिना- मैं ले सकती हूं 3 बार. मैं- देखते है, दवाई कैसे काम करेगी. इतने में हम सभी फार्म हाउस पहुंच गए. मैंने कार को अन्दर लगा दिया. उधर एक ही काम वाली वहां रहती थी. उसको मैंने 200 रुपये दे दिए और वो खुश होकर चली गई. हिना- कितना ठंडा है यहां. यहीं पे रह जाने का मन कर रहा है. मैं- बहुत जल्द ही गर्म हो जाओगी आप. चाची- यहां पे देखने वाली चीज बहुत ज़्यादा है. हम अन्दर गए. सब लगेज अन्दर रखने लगे. चाची सबके लिए जूस लेकर आईं. हम सबने पी लिया. मैं- हिना आंटी सबके लिए कपड़े लाई हो? हिना- हां हैं, सबके लिए टी-शर्ट्स लायी हूं. उनके बैग में 3 टी-शर्ट थीं, वाइट, ब्लैक और रेड. मैं सबको चूमने लगा … तीनों बहनों ने मुझे घेर लिया था. मैं चाची को चूम रहा था. परवीन आंटी मुझे पीछे से चूम रही थीं और हिना आंटी मेरे लंड को सहला रही थीं. मैंने सबको कपड़े उतारने को बोला और टी- शर्ट्स पहनने को कहा. वे तीनों बहनें मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पैंटी में आ गई थीं. क्या गरम नज़ारा था. पहले चाची 36 साइज़ के मम्मों वाली, फिर दूसरी हिना आंटी 38 वाली, फिर तीसरी मेरी परवीन आंटी 40 साइज़ के मम्मों वाली. उन तीनों की गांड की साइज़ भी कुछ ऐसी ही थी. चाची की गांड पहली बार गांड चुदाई के बाद आज थोड़ी ज्यादा मोटी दिख रही थी. चाची की 38 वाली गांड, फिर हिना आंटी की 40 वाली गांड, फिर सबसे बड़ी परवीन आंटी की 42 वाली बड़ी गांड. मेरे आगे एकदम तीन देसी आंटियां थीं … जो अब मेरे लंड का शिकार थीं. मैं उन्हें एक एक करके सहलाने लगा, कभी गांड सहलाता, तो कभी चूचे. फिर एक एक करके सबको टी-शर्ट्स पहना दीं. चाची के लिए वाइट, हिना आंटी के लिए रेड और परवीन आंटी के लिए काली. तीनों बहनें दूध जैसे गोरी थीं. चाची- हम तीनों हमेशा साथ में खेलते थे. तुम दोनों ने मुझसे बड़े होने के बावजूद भी मुझे तुम्हारे साथ खेलने का मौका दिया. अब मैं तुम्हें मेरे बेटे का मूसल जैसा लंड देकर शुक्रिया अदा कर दूंगी. हिना- अपनी छोटी बहन को भी अच्छा लंड मिला होगा. चाची की फैमिली में 4 बहनें थे. परवीन हिना रेशमा और जस्मीन. मुझे जस्मीन उतना पसंद नहीं थी. क्योंकि उनके मम्मे काफी छोटे थे केवल 28 इंच के और वो बहुत खुद भी बारीक फिगर की थीं. साथ ही थोड़ी सांवली भी थी. गांड कुछ ख़ास नहीं थी, बस 30 की थी. मैं- मुझे जस्मीन जैसी छोटी गांड वाली औरत पसंद नहीं आती है. मुझे तो तुम तीनों की बड़ी बड़ी गांड चाहिए. इतना कहते हुए मैंने हिना को चूम लिया और समय बिना गंवाए हम पूरा सामान लेकर पूल की ओर बढ़ने लगे. चाची ने खाने की कैरिज पकड़ी हुई थी. परवीन आंटी बिस्तर बिछाने के लिए दरी चारपाई सब पकड़े हुए थीं. हिना आंटी टॉवेल्स वगैरह सब लिए थीं. मैं, चाची जो सामान लायी थीं … हनी चॉकलेट सीरप वगैरह और हिना आंटी के सामान डिल्डो, हैंड कैप्स ब्लाइंड फोल्ड … वो सब एक बैग में डालकर हाथ में पकड़े आ रहा था. पूल के पास एक बड़ा आम का पेड़ था. उसके नीचे हम सब साफ किया और नीचे दरी आदि बिछाने लगे. फिर पूल की तरफ बढ़ने लगे. दोस्तो, अब ग्रुप सेक्स का किस्सा बड़ा ही मजेदार होने वाला है. इसके अगले 2 भाग सबसे मजेदार होने वाले हैं. आंटियों और भभियों की हालत खराब हो जाएगी. सब मर्दों के लंड कहानी पढ़ते पढ़ते दो तीन बार झड़ जाएंगे.हिना आंटी की हसरतों की माँ चोदते हुए मैंने उन्हें शांत कर दिया था. वे मुझसे हार गई थीं और उन्होंने कसम खा ली थी कि आगे से इस तरह की हसरतों से तौबा कर लेंगी. इसके बाद हम सभी का पहले से तय कार्यक्रम मेरे फार्म हाउस पर चुदाई का मेला लगाने का था. सो हम सभी तयशुदा दिन पर फार्म हाउस के लिए निकल आए. उधर चुदाई के लिए पूल के पास हम सबने व्यवस्था जमा ली थी. अब आगे: हम सब पूल की ओर बढ़ रहे थे. मैं तीनों की गांड बजा रहा था. पैंटी के ऊपर से उनकी गांड पर हाथ से मारने लगा. उनकी खिलखिलाती सिसकारियां ‘आआह आअह आओआह…’ के मजे आ रहे थे. हम सभी पूल के पास आ गए. पूल में हमेशा हाफ पानी रहता था. मैंने पंप को ऑन कर दिया. फिर मैंने चाची को अपनी बांहों में उठा लिया और पूल में गिरा दिया. पूल का पानी ठंडा था. चाची- आआआह ज़ीशान ये क्या कर दिया … बाप रे इतना ठंडा पानी. वहीं पूल के स्टेप्स पर परवीन आंटी और हिना आंटी भी खड़ी थीं. मैंने उन दोनों को भी पूल में धकेल दिया. हिना- आआआह कितना ठंडा है ये पानी. परवीन- यहां पर काफी पेड़ हैं ना, इसकी वजह से इधर का मौसम ठंडा है. मैं उनके बीच में कूद गया और तीनों बहनों को पानी में डुबोने लगा. चाची- अरे छोड़ दे. हिना- आआआह … मैं सांस ले नहीं पा रही हूँ. परवीन- छोड़ दे बेटा … यहां पर इसलिए नहीं आए हैं हम. मैं मेरी प्यारी चाची को चूमने लगा. उनकी सफेद रंग की टी-शर्ट में सब साफ दिख रहा था. अन्दर पहनी हुई रेड ब्रा भी ठीक से दिख रही थी. मैं चाची के मम्मों को सहलाने लगा. इतने में हिना आंटी ने मुझे खींच लिया और मुझे चूमने लगीं. मैंने उनके मम्मों को ज़ोर से दबा दिया और उनकी टी-शर्ट को उनके जिस्म से अलग कर दिया. हिना आंटी के 38 के चूचे, उसके ऊपर काले रंग की ब्रा बड़ी मस्त थी. इतने मेरी नज़र परवीन आंटी पर गयी. मैं उनके करीब जाकर उन्हें प्यार से चूमने लगा. परवीन आंटी की 44 की उम्र थी, वो काफी मोटी थीं. मैं उनके बड़े बड़े मम्मों को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा. उनकी टी-शर्ट को भी निकाल कर फेंक दिया. उनका नीले रंग की ब्रा थी. चाची मुझे पीछे से खींच लिया और मेरे लंड पर हाथ रखने लगीं. तभी मुझे याद आया कि पहले दवाई खाना था. मैंने चाची की वाइट टी-शर्ट को निकाल दिया और अन्दर उनकी रेड ब्रा के ऊपर से मम्मों को ज़ोर से दबा दिया. मैं पूल से निकलने लगा. चाची- कहां जा रहे हो जीशान? मैं- वो दवाई खानी है. मैं दवाई की टेबलेट्स ले रहा था और वो तीनों पूल में खेल रही थीं. एक दूसरे को चूम रही थीं, मम्मों को मसल रही थीं. परवीन आंटी ने तो अपनी ब्रा को भी खोल दिया था. मैं पूल के स्टेप्स के ऊपर आया और परवीन आंटी को ऊपर बुलाया क्योंकि वो नंगी थीं, मतलब ब्रा निकाल दी थी. मैंने उन्हें ज़ोर ज़ोर से चूमा और नीचे लेटा दिया. मैंने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिए, सिर्फ अंडरवियर में रह गया था. मैं बहुत प्यार से उनके मम्मे दबा रहा था. कितने बड़े थे यार. क्या बताऊं मैं … उनके 40 के मम्मों का आप अंदाज़ लगा सकते हो. फिर मैंने उन्हें चूसना शुरू किया. परवीन आंटी सिसकारियां लेने लगीं- आआआह ऊम्म्म. उनकी चुदासी आवाजें सुनकर हिना आंटी और चाची अपनी ब्रा निकाल कर ऊपर आ गईं. मेरे मुँह में परवीन आंटी के चूचे थे, तो चाची ने अपने मम्मों को परवीन आंटी के मुँह में रख दिया. हिना आंटी ने अपने बूब्स चाची के मुँह में लगा दिए. फिर सबने मिल कर मुझे नीचे डाल दिया और तीनों मेरे ऊपर आ गईं. वे तीनों अपने चूचे मेरे शरीर के ऊपर रगड़ने लगीं … गालों पर, होंठों पर निप्पल फिराने लगीं. क्या मस्त नज़ारा था यार. मेरे मुँह के ऊपर 6 चूचे थे. मेरा मन कर रहा था कि इन सबको एक साथ चबा लूँ. मैं भी उत्तेजित हो गया था, मैं उनके निप्पलों को काटने लगा था. हिना- उम्म्ह… अहह… हय… याह… चाची- हहह आआआय्य … परवीन- ऊऊम्म … मादरचोद काट मत. करीब 15 मिनट हम एक दूसरे को चूसते चूमते रहे. तभी हिना आंटी ने मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और फट से मेरा अंडरवियर नीचे खींच दिया. मैं कुछ समझ पाता कि हिना आंटी ने मेरे लंड को झट से अपने मुँह में ले लिया. मेरे मुँह से ‘आआआह’ निकल गई. चाची ने नीचे से ये देख लिया कि हिना आंटी मेरा लंड चूस रही थीं. चाची- सब मज़ा तुम अकेले ही ले लोगी दीदी, हमें भी तो दे दो. हिना आंटी उठ गयीं और मेरा लंड चूसने के लिए चाची आ गईं. मैं मन ही मन हंस रहा था कि पहले तो चाची को तो लंड चूसना बिल्कुल पसंद नहीं था. लेकिन आज वो मूड में थीं. चाची आज मेरे लंड को अन्दर गले तक लेने लगी थीं. वे इस वक्त बिल्कुल एक पोर्न स्टार के जैसे लग रही थीं. मैं- आआआह … मजा आ रहा है … और ज़ोर से करो चाची. इतने में परवीन आंटी उठ गईं- मैं सबसे बड़ी हूँ … तुम हटो, इसके लंड को ठीक से पहले मैं चूसूँगी. परवीन आंटी लंड के करीब आ गईं और अन्दर तक लंड लेकर गले के अन्दर लंड को हिलाने लगीं. मेरी ‘आआआह..’ की आवाज निरंतर बढ़ रही थी. कोई 15 मिनट सबके चूसने के बाद मैं झड़ने वाला हो गया था. मैंने परवीन आंटी को हटा दिया. मैं अपने वीर्य को ऐसे बर्बाद नहीं करने वाला था. परवीन- चलो इसको अच्छे से नहलाते हैं. पूल में पम्प से पानी गिर रहा था, आंटी लोग मुझे मोटी धार के नीचे ले गए. मैं बिल्कुल नंगा था. मुझे तीनों औरतें ठीक से नहलाने लगीं. सब जगह से मुझे साफ करने लगीं. हिना आंटी मेरी गांड, लंड सब जगह चाट चाट कर साफ कर रही थीं. मेरा लंड एकदम तना हुआ था. मैं कंट्रोल कर नहीं पाया. मैंने सबको आम के पेड़ के पास आने के लिए बोला. सब लोग चुदाई के लिए छेड़खानी करते हुए चलने लगे. रास्ते में मैंने सबकी पैंटी निकाल दीं. अब हम सब लोग एकदम नंगे थे. बगीचा एकदम सुनसान था. हमारी सांसों के साथ साथ खिलखिलाने और मीठी सिसकारियों की आवाजें आने लगीं. हम पेड़ के नीचे पहुंच गए. मैंने चाची को पिछले 10 दिनों से चोदा नहीं था, तो मैं पहले चाची को अपने पास खींच लिया. मैंने उन्हें आम के पेड़ के पास खड़ा कर दिया और हिना आंटी को इशारे करने लगा कि हैंड कफ्स कहां हैं? हिना आंटी मेरे इशारे को समझ गईं और हैंड कफ्स लेकर आ गईं. मैं बोला- चाची के दोनों हाथों को पेड़ की शाखाओं से बाँध दीजिए. चाची- ये क्या कर रहा है? मैं- चाची, आप बस मज़े लो. चाची बिल्कुल सीधी खड़ी थीं. उनके दोनों हाथ ऊपर की तरफ शाखाओं से बंधे हुए थे. मैं चाची को बिना देर किए ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था. मैंने चाची को मेरे हाथों में ऊपर उठा लिया और उनके पैरों से मुझे जकड़ने को कह दिया. चाची- ये क्या कर रहा है तू? मैं गिर जाऊँगी यार. मैं- कुछ नहीं होगा. बस आप अपने पैरों से मुझे ज़ोर से जकड़ लो. चाची ने मुझे ज़ोर से पैरों से जकड़ लिया था. ये सब दोनों आंटी लोग देख रही थीं. परवीन आंटी तो चौंक ही गईं- और कितनी कलाएं हैं तेरे पास? मैं धीरे से अपना लंड चाची के चुत में घुसेड़ने लगा. चाची- आआआह धीरे से.. मैं लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. चाची की कामुक सिसकारियां ज़ोर ज़ोर से निकलने लगीं ‘आआआह ऊऊम्म्म ओहह हहह..’ चाची की इन कामुक सिसकारियों को सुनकर वो दोनों आंटी भी मूड में आ गईं. वे दोनों 69 की पोजीशन में होकर एक दूसरे को चाटने लगीं. अब तीनों औरतों की मादक सिसकारियां मुझे और अधिक उत्तेजित कर रही थीं. मेरे इर्द गिर्द बस कामुक और चुदासी आवाजों का शोर था. ‘आआआह … हिना और अन्दर तक चाट..’ ‘ऊउफ … ऊऊम्म्म्म. … आआआह..’ रेशमा चाची की आवाज तो मेरे कानों में गूँज रही थी- आह … उम्म … ओहह.. मुझे अब दवाई का असर दिखने लगा था. इस दवाई की वजह से लंड और लंबा सा होने लगा था. मुझे ऐसा लग रहा था कि लंड फटने वाला है. लंड के हर रग में खून तेज़ दौड़ रहा था. इसी वजह से मैं चाची की चुत ज़ोर ज़ोर से मार रहा था. चाची ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी थीं- धीरे बेटा प्लीज … आआआह.. मगर धीरे मुझसे हो ही नहीं रहा था. मेरा लंड रुकने वाला नहीं था. परवीन आंटी और हिना आंटी मेरी स्पीड को देखती रह गईं. चाची- आह बहुत दर्द हो रहा है … धीरे करो ना प्लीज.. मैं- मुझसे नहीं हो रहा है … ये दवाई का असर है चाची.. मैं ज़ोर ज़ोर से चाची की चूत में लंड पेल रहा था. चाची चीख रही थीं- वो मैं झड़ गई … आआआह … ऊऊऊउफ… इतनी ज़ोर की चुदाई में चाची झड़ गईं. मैं चाची को अपने हाथों से ऊपर उठा कर पकड़े हुए था. इस कारण चाची की चुत में से पानी नीचे पैरों पर भी आ रहा था. चाची ने तो बहुत मजे ले लिए थे और उनसे अब कुछ भी नहीं होने वाला था. वो बहुत दर्द भी झेल चुकी थीं. चाची- अब मुझसे नहीं होगा … प्लीज़ छोड़ दे मुझे … और ये हाथ खोल दे. चाची बहुत थक गई थीं. उनकी 15 मिनट तक जोरदार चुदाई चली थी. मैं- जिसको लंड चाहिए … यहां आ जाओ. दोनों आंटी लपक कर आ गईं. मैंने चाची का लॉक निकालने का बोला. परवीन आंटी खोलने लगीं.मैं पीछे से परवीन आंटी के चूतड़ बजाने लगा … उनसे फट फट की आवाज आ रही थी- आआआह ऊऊम्म्म्म.. मैं उन्हें अपनी बांहों में लेकर चूमने लगा. उनके बड़े बड़े मम्मों को दबाने लगा और उन्हें चूसने भी लगा. मैं एक उंगली उनकी चुत में डालकर हिला रहा था. परवीन- आआआह उउहह … अब डाल भी दे भोसड़ी के.. मैंने लंड को चुत पर निशाना रखते हुए एक जोरदार झटका दिया. एक ही झटके से पूरा लंड अन्दर चला गया. आंटी की चूत काफी बड़ी थी. क्योंकि उन्हें अभी तक 4 बच्चे हो चुके हैं. इस कारण दो लंड भी अन्दर डाले जा सकते थे. परवीन- आआआह … ऊऊम्म्म … मज़ा आ गया. मैं- मुझे पता है कि आंटी आपकी चूत काफी बड़ी है. इसमें तो दो लंड भी जा सकते हैं. परवीन- हां … 4 बार जो डिलीवरी हुई है. मैं क्या करूँ? और अब दूसरा लंड की ज़रूरत नहीं है … तेरा जो मूसल है. वो मेरी पूरी चुत में फैल गया है … आह एकदम टाइट जा रहा है. मैं- आंटी दूसरे लंड को भी डालते हैं … आपको और भी मज़ा आएगा. परवीन- अब तूने किसको बुलाया है? मैंने हिना आंटी को डिल्डो लाने को इशारा किया. आंटी मेरे हाथ में डिल्डो लाकर दिया. मैं परवीन आंटी को डिल्डो दिखाने लगा. परवीन- याल्लाह … ये क्या है? इतना बड़ा. … अगर ये है तो कोई लंड की ज़रूरत ही नहीं है. मैं- अब इसको भी साथ में ले लो. मैं धीरे धीरे डिल्डो को भी आंटी की चुत में घुसाने कोशिश करने लगा. परवीन- आआआह आई … मर गई … रुक जा … प्लीज. मैंने कुछ नहीं सुना … बस ज़ोर से उसको अन्दर कर दिया. आधा डिल्डो चूत में अन्दर चला गया. परवीन- आआआह मैं मर गई … ऊउफ निकाल दे बेटा प्लीज … आआआह.. मैं- मजा आएगा. मैं एक और बार ज़ोर से अन्दर डाल दिया, पूरा डिल्डो अन्दर घुस चुका था. मेरा लंड भी अन्दर था. चुत का तो ट्रेन के जनरल डिब्बे जैसा हाल हो गया था. परवीन- आआआह … क्या कर दिया तूने … निकाल भोसड़ी के इसको.. उन्हें दर्द होने लगा था. मैं धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करने लगा. परवीन- आआआह … ऊऊऊ ऊऊउफ ओहह … मैं मर गयी प्लीज जीशान. मैं अब झटके ज़ोर से देने लगा … लंड ज़ोर ज़ोर से पेलने लगा. परवीन- मेरी चुत को तूने भोसड़ा बना दिया मादरचोद. मैं- चुपचाप मजे ले साली रंडी. मैं ज़ोर ज़ोर धक्के मारने लगा … आंटी की चीख मज़ा में बदलने लगी. फिर मैं एकदम से रुक गया. आंटी ज़ोर से सांस लेने लगीं. तभी मैंने ज़ोर से एक धक्का दिया. परवीन- आआआ आएय … ऊऊऊऊफ … भैन के लंड … जान ही लेगा साला. फिर मैं दो सेकंड रुका और फिर एक और ज़ोर का धक्का दे दिया. उनके मुँह से अब ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां आने लगीं. अब उनको भी मज़ा आने लगा. परवीन- आआआह … चोद मादरचोद.. मैं ऐसे ही हर 2 सेकंड में रुक कर एक एक झटका ज़ोर ज़ोर से देने लगा. इसके कारण लंड आंटी की चूत की जड़ तक जाने लगा. कोई 5 मिनट बाद फिर मैं सामान्य तरीके से चुदाई करने लगा. अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था. परवीन- आआहह … आएय … और ज़ोर से और ज़ोर से … मेरी चुत को भोसड़ा बना दिया मादरचोद … आआआह.. मैं और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. आंटी और उत्तेजित होने लगीं. हम दोनों मज़ेदार चुदाई का मजा लेने लगे. मैं अभी तक दवाई के कारण झड़ा नहीं था, जबकि आंटी झड़ने वाली थीं. परवीन- आआहह … मेरा हो गया. मैं और ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा. आंटी मुझे रोकने लगीं- रुक जा बेटा … अब मुझसे नहीं होगा … मैं तो पानी छोड़ चुकी हूँ. मैं- मेरा भी होने वाला है … बस 2 मिनट. परवीन- मुझसे नहीं होगा … मैं मुँह में ले लूंगी. आंटी ने तुरंत मेरे लंड को चुत से निकाला और मुँह में लेने लगीं. वे बड़ी नजाकत और प्यार से लंड चूस रही थीं. लेकिन इस समय मुझे वो नहीं चाहिए था. मैं उनका मुँह पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. मेरा लंड उनके गले के अन्दर तक जाने लगा. आंटी की चीख अन्दर ही रुकने लगीं ‘आआआह … गूं गूं … गल्प..’ मैं अब झड़ने वाला था. मैंने लंड उनके मुँह से निकाला और उनके मम्मों के ऊपर सारा माल डाल दिया. मेरा लंड तो झड़ने के बाद भी दवाई के कारण खड़ा ही था. ये करीब 40 मिनट से खड़ा था. हिना आंटी की मासूम निगाहें मुझ पर थीं. उनको अभी तक लंड नहीं मिला था. वो लंड का इंतज़ार करने लगीं.सबसे पहले रेशमा चाची को पेड़ से बाँध कर चोदा था. उनके बाद परवीन आंटी की चूत में एक असली और एक नकली लंड एक साथ पेल कर उनकी चूत का भोसड़ा बना दिया था. इसके बाद हम सभी फार्म हाउस के रूम के ऊपर की छत पर आगे की चुदाई का इंतजाम करने लगे थे. अब आगे: हम सब लोग छत पर ठंडी हवा और रात की चांदनी का आनन्द ले रहे थे. सब लोग एक दूसरे को ऊपर से मसल रहे थे. कभी मैं परवीन आंटी के मम्मों को मसलता, कभी चाची के मम्मों को चूसता, कभी हिना आंटी के मम्मों को पकड़ कर मसल देता. तीनों बहनें अप्सरा जैसी दिख रही थीं. मुझे ऐसा लग रहा था मानो मैं जन्नत में था. मेरे साथ रंभा उर्वशी मेनका जैसी तीन तीन अप्सराएं चुदने को खड़ी थीं. वैसे भी मुझे हमेशा से लड़कियों से ज्यादा आंटियों से ही प्यार रहा था. अभी छत पर हिना आंटी चुदास से तड़प रही थीं. क्योंकि अभी तक उनको लंड नहीं मिला था. मैं भी समय लेने लगा, क्योंकि दूसरा राउंड ज़्यादा समय तक टिकना चाहता था. मैंने एक और गोली ले ली. गोली लेने के तुरंत हिना आंटी के ऊपर आ गया. उनको प्यार भरे चुम्मा देने लगा. आंटी मुझे ऐसे चूम रही थीं, जैसे वो मुझे बहुत प्यार करती हैं. वो मेरे बाल सहलाने लगीं. मेरे मुँह में अन्दर तक जीभ डाल कर मुँह में पूरा घुमाने लगीं. मैं उनके मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. एक हाथ से उनकी चूत में उंगली करने लगा. हिना- आआह … डाल दे मादरचोद … बहुत तड़पाया है तूने … प्लीज अब मत तड़पा. जितना करना है कर ले, जो करना है कर ले. बस पहले अन्दर डाल दे … मेरे अन्दर आग लगी है. मैं नीचे आ गया और उसकी चुत चाटने लगा. हिना आंटी की तो हालत खराब हो गयी थी. हिना- आआहह … ऊऊऊम्म्. उनकी सिसकारियों में बड़ा दम था, वो एकदम ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगीं. मैं उनकी चूत को अन्दर तक चाटने लगा. इसी के साथ मैंने रेशमा चाची को बगल में बुला लिया और उनकी चुत में उंगली डालने लगा. हिना- प्लीज लंड अन्दर डाल दे ज़ीशान. तुझे जो चाहिए, वो दे दूँगी. चुदाई के वक़्त ऐसे तड़पाया मत कर. मैं चुत के ऊपर लंड को रगड़ने लगा. मैं- मुझे आलिया चाहिए. हिना- वो सब बाद में देखेंगे, अभी लंड अन्दर डाल दे. मैं- अभी बोलो, हेल्प करोगी. हिना- उसकी अभी शादी भी नहीं हुई है. मैं- इसीलिए तो पूछ रहा हूँ. मैंने अभी तक किसी की सील नहीं तोड़ी है. हिना आंटी गुस्सा हो गईं और वो अपने आप मेरे लंड पर बैठ गईं. मेरा पूरा लंड चुत में चला गया. मैं- आआआह… हिना- साला नखरे कर रहा है तब से. आलिया का बाद में देख लेना, पहली उसकी माँ को तो चोद ले भोसड़ी के! हिना आंटी लंड के ऊपर नीचे बैठने लगीं. तीनों के तीनों सांडनियों जैसी थीं. अच्छे मोटी ताजी चुदक्कड़ औरतें थीं. इधर मैं केवल 50 किलो का था. आंटी के साथ बाकी की दोनों भी मेरे ऊपर आने लगीं. चाची मेरे मुँह के ऊपर बैठ गईं और चुत को मेरे मुँह में रख दिया. परवीन आंटी मेरा बदन चूमने लगीं और मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चुत में लगा दिया. मैं तीनों चुत को एक बार खुश करने लगा. लेकिन इन तीनों के बीच मुझे सांस लेना भी मुश्किल हो गया था. मैं ऊपर उठ नहीं पा रहा था. तभी इतने में हिना आंटी झड़ गयी थीं, उन्होंने एक ज़ोर से चीख मार दी- आहह. … उउहह. … मैं गई. वो झड़ने के बाद भी मेरे ऊपर से उठ नहीं रही थीं. मुझे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मैं पूरी ताकत इकट्ठा करके जोर से ऊपर उठ गया. सब लोग नीचे गिर गए. मेरे लंड को भी थोड़ा चोट लग गई. मुझे गुस्सा आ रहा था, मैंने सबके चूतड़ों पर चाबुक मार मार के लाल कर दिए. मैं अभी तक झड़ा नहीं था. मुझे दवाई का असर होने लगा था. इस दवाई का असर काफी लंबा समय तक रहता था. मैंने चाची को खींच लिया और उन्हें घोड़ी बना लिया. मैं पीछे से उनकी गांड के छेद में लंड डालने की कोशिश करने लगा. चाची- गांड क्यों, मैं तो आगे भी तैयार हूं … चुत में डाल दे. मैं गांड को ही मारने वाला था. उनकी गांड पर मैंने एक जोर का झटका मारा, मेरा आधा लंड अन्दर चला गया. चाची दर्द से तड़पने लगीं. वो मुझसे दूर जाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन जा नहीं पाईं. मैं फिर से ज़ोर का एक और झटका लगा दिया. अब मेरा पूरा लंड उनके छेद में चला गया था. चाची- आआई…मर गई … एक बार गांड मरवाक़े चल नहीं पा रही थी मैं … अब अल्लाह जाने क्या होगा. तेरा इतना बड़ा मूसल जो है … आह गांड परपरा रही है कमीने … मैं- अब कुछ नहीं होगा. दर्द सिर्फ पहली बार होता है. चाची- मेरी चुत का क्या करोगे … आआआह. मैंने डिल्डो एक हाथ में लिया और उनकी चुत में डाल कर ज़ोर से झटका मार दिया. अब मेरा लंड गांड में और चुत में डिल्डो घुसा था. चाची की तो समझो जान चली गई थी. चाची- आहह … मादरचोद अब मेरी गांड का भी भोसड़ा बनाएगा … आआआह… मैं एक हाथ से डिल्डो को अन्दर डाल नहीं पा रहा था … तो मैंने हिना आंटी को इशारे किया. वो चाची के नीचे आ गईं और चाची की चुत सहलाने लगीं. उन्होंने डिल्डो चाची की चूत में पेला और उसको अन्दर बाहर करने लगीं. नीचे हिना आंटी, ऊपर चाची घोड़ी बनी हुई थीं और चाची के ऊपर मैं चढ़ा था. परवीन आंटी ये सब देख रही थीं और मज़े ले रही थीं. मैं ज़ोर ज़ोर से चाची की गांड मार रहा था और नीचे से हिना आंटी डिल्डो को चाची की चूत में अन्दर तक डालने में लगी थीं. ये डिल्डो तो मेरे लंड से भी बड़ा था. चाची- दोनों मुझे मार दोगे … छोड़ दो मुझे … दीदी निकाल दो उसको. मैं- चुत को भी शांत करना है ना. मैं और ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था. चाची की चुत पानी छोड़ने लगा. लेकिन मैं अभी झड़ा नहीं था. चाची एकदम थक गई थीं. ठीक से बात भी नहीं कर पा रही थीं. चाची- अब मुझसे नहीं होगा जीशु … नहीं होगा … अब उतर जा. इतने में परवीन आंटी घोड़ी बनकर मुझे आने के इशारे करने लगीं- आ जा मेरे राजा … मेरी गांड तेरे लिए इन्तजार कर रही है. मैं तुरंत चाची के गांड से लंड निकाला और आंटी की गांड के ऊपर चढ़ गया- मुझे खुश करने वाली गांड सिर्फ तुम्हारी है आंटी. हिना- तो हम क्या तुझे खुश नहीं करते. चाची- अगर मैं नहीं होती, तो दीदी तुझे कहां से मिलती. मैं- अब थोड़ा हमारी चुदाई भी देख लो, पता चलेगा कि क्यों आंटी मुझे ज़्यादा खुश करती हैं. रेडी हो ना आंटी. परवीन- हाँ बेटा. मैं तुरंत लंड को उनकी गांड पर रगड़ा और आंटी गांड को फाड़ कर अपने हाथों से पकड़ ली. अगले शॉट में मैंने सीधे लंड को गांड के अन्दर डाल दिया. मेरा पूरा लंड एकदम से उनकी गांड में घुस गया. गांड की दीवारें फाड़ते फाड़ते अन्दर चला गया. परवीन आंटी के मुँह से प्यारी चीख निकली- आआह … उस चीख से मेरा पूरा बदन खिल उठा. परवीन- आआआह … तू आराम से कर लेना बेटा, आज मैं तेरी हूँ. मैं- तुम हमेशा मेरी रहोगी, मैं जब चाहूँ तब तक. परवीन- हाँ बाबा. मैंने फिर ज़ोर से एक धक्का दिया, लंड अन्दर तक चला गया. मैं जोरदार धक्के दे रहा था और आंटी चीख रही थीं. उनकी चीख में थोड़ा दर्द थोड़ा प्यार था, वो मनमोहक था. हम दोनों की चुदाई देख कर वहां चाची और हिना आंटी मज़े ले रही थीं. वो दोनों एक दूसरे को चूम रही थीं. कोई 15 मिनट जोरदार चुदाई के बाद मैं झड़ गया था और थक गया था. हम चारों लोग वहीं सो गए … कब नींद लग गयी, पता ही नहीं चला. हम सब छत पर नंगे ही लिपट कर सो गए थे. अभी भी हिना आंटी की वासना पूरी नहीं हुई थी. क्योंकि परवीन आंटी और चाची को दो बार हो गया था लेकिन हिना आंटी का सिर्फ एक बार हुआ था. रात में वो मेरा लंड चूस रही थीं. मैं अब कुछ भी करने के मूड में नहीं था. मैंने उनको सो जाने के लिए बोला. सुबह निकलने से पहले मैंने उन्हें चोदने का आश्वासन दिया … तो वो सो गईं. सुबह 11 बज गए थे. तब मेरी आँखें खुली. परवीन आंटी उठ गई थीं और ब्रा और पैंटी पहन रही थीं. चाची भी उठ गई थीं, लेकिन उन्होंने अभी कपड़े नहीं पहने थे. मैं- चलो सब मिलकर एक साथ नहाते हैं. बाथरूम में तीनों नंगी औरतों के बीच मैं एक नन्हा सा चोदू बचा था … उधर शावर नहीं था, तो हम बाल्टी मग्गे से नहाने लगे. हम सभी एक दूसरे को साबुन लगा रहे थे. मैं मम्मों का दीवाना था, कभी परवीन आंटी के, कभी चाची के, कभी हिना आंटी के मम्मों को मसल रहा था. मुझे मज़ा आ रहा था. इतने में हिना आंटी मेरे पास आ गईं और लंड को हाथ में पकड़ने लगीं. हिना- ये लंड हम तीन बहनों का सहारा हो गया और तू हमारा सहारा हो गया है. मैं- मैं हमेशा तीनों के लिए हाजिर रहूंगा. चाची- दस दिन में तो तू बैंगलोर चला जाएगा. हमारी भूख कौन मिटाएगा. तू तो उधर बैंगलोर में उधर वाली आंटियों को चोदता रहेगा. मैं- हफ्ते में एक बार आ जाउंगा ना. बैंगलोर तो सिर्फ 100 किलोमीटर ही दूर है. हिना- तूने मुझे कल दूसरी बार नहीं चोदा. अब प्लीज एक लास्ट टाइम चोद दे. मैं अपनी बात निभा रहा था. हिना आंटी को दीवार के बल खड़ा किया और एक पैर हाथ में पकड़ लिया. मैं एक हाथ से लंड को उनके चुत में रगड़ रहा था. हिना- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैंने ज़ोर से लंड अन्दर डाल दिया. आंटी ने एकदम से आंखें बंद कर लीं और ज़ोर से सांस लेने लगीं. मैं जोरदार धक्के मारने लगा. हिना आंटी के सिसकारियों से बाथरूम गूँजने लगा. अब हिना आंटी के सिसकारियों में फर्क था. वो भी अब परवीन आंटी की तरह मज़ेदार सिस्कारियां देने लगी थीं. कोई 15 मिनट जोरदार चुदाई चली. जब मैं झड़ने वाला था, मैंने हिना आंटी को एकदम से ऊपर उठा लिया. अब हिना आंटी के दोनों पैर मेरे हाथों में थे और उनको दीवार के बल टिकाया हुआ था. इसके बाद मैं स्पीड बढ़ाने लगा. हिना- आआआह … आआ … वाओ … कितना मस्त चोदते हो यार … मजा गया. ये सबसे मजेदार सेक्स था. उनका होने के दो मिनट बाद मेरा भी हो गया. हम चारों ने नहा धोकर कपड़े पहन लिए और नाश्ता करके वहां से निकलने लगे. किसी को जाने का मन नहीं था, लेकिन मजबूरी में हमें जाना पड़ा. अब मैं रात को इनके बिना कैसे सोऊं. उन सभी का हाल भी यही था. मैं सबको उन उनके घर छोड़ कर आया. सबने मुझे प्यार से चुम्मा दिए. मैं उदास चेहरे से साथ वहां से निकल गया. जब ये कहानी घटी थी, तब से अब तक भी हम जब भी मिलते हैं, खूब चुदाई करते हैं. परवीन आंटी और हिना आंटी से कम मिलता हूँ, लेकिन चाची से तो महीने में 2 बार मिल ही लेता हूं. मैं उदास होकर बैंगलोर के लिए निकला, लेकिन वहां और मज़ेदार चीज़ मिलने लगी. मेरे 4 साल का इंजीनियरिंग का समय रंगीन आंटियों और लड़कियों के बीच चला. चाची के परिवार में आशना को कैसे अपनी बनाया और कैसे आलिया की सील तोड़ी, मैं ये सब भी बताना चाहता हूँ. आपके इमले मुझे ये सब लिखने के लिए प्रोत्साहित करेंगे. ये कहानी निजी कहानी है. ये कहानी में सौ फीसदी सच्ची चुदाई की कहानी है. बस इसमें पाठकों को उत्तेजित करने के लिए कुछ मसाला डाला है.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आदिवासी

चाची को नहाते हुए देखा