दोस्त की सौतेली मां




आज की कहानी मेरे दोस्त की सौतेली माँ और आपके राज की कहानी है। संजय साहनी नाम था उसका, देहरादून का रहने वाला था, उम्र उसकी कोई बाईस या तेईस साल, मेरी ही कंपनी में मेरा जूनियर था वो। थोड़े ही दिन में वो मेरा बढ़िया दोस्त बन गया था। उसी ने मुझे देहरादून में रहने के लिए कमरा दिलवाया। मेरे हर काम में मेरी मदद करने के लिए तैयार रहता था वो। एक दिन शाम को पेग लगाने का मन हुआ तो मैंने संजय को बुला लिया। इससे पहले हम कम से कम दारू पीने के लिए तो कभी साथ नहीं बैठे थे। मुझे तो ये भी नहीं पता था कि संजय पीता भी है या नहीं। संजय आया तो बड़ा परेशान सा नजर आ रहा था। मैंने वजह पूछी तो पहले तो वो टाल गया पर फिर अचानक रोने लगा तो मुझे बड़ा अजीब सा लगा। मैंने एक पेग बना कर उसको दिया तो वो बिना पानी डाले ही गटक गया और जोर जोर से खाँसने लगा। मामला कुछ संगीन लग रहा था। मैंने संजय को किसी तरह शांत किया और उसको वजह बताने को कहा तो उसने बताना शुरू किया: संजय की माँ चार साल पहले मर चुकी थी। बाप ने इसी गम में शराब पीनी शुरू कर दी थी। घर में सिर्फ बाप बेटा ही थे पर शराब के चक्कर में संजय का बाप दीनदयाल अक्सर घर नहीं आता था। संजय इन्तजार करके खा पी के सो जाता। कभी कभी तो यह भी होता कि तीन-तीन चार-चार दिन दीनदयाल का कोई अता-पता नहीं होता था। फिर एक दिन संजय के ताऊ और चाचा घर पर आये तो संजय ने सब हाल सुना दिया। ताऊ और चाचा ने दीनदयाल को समझाया और संजय की शादी कर देने की सलाह दी। 
संजय वैसे तो उम्र में अभी छोटा था पर पहाड़ी लोग कम उम्र में भी शादी कर देते हैं। अपनी शादी की बात सुन संजय के मन में लड्डू फूटा। पर दीनदयाल के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। एक हफ्ते बाद ही दीनदयाल एक तीस बत्तीस साल की लड़की के साथ घर आया और संजय को बोला- बेटा, आज से ये तुम्हारी नई माँ है। कहाँ तो संजय अपनी शादी के सपने बुन रहा था पर उसके बाप ने उसके सपनो तो तोड़ा सो तोड़ा … उल्टा खुद शादी करके संजय पर वज्रपात कर दिया था। टूट सा गया था संजय … अपने बाप से नफरत सी हो गई थी उसको। इस बात को लगभग छ: महीने होने को आये थे पर वो अपने बाप की करतूत को भूल नहीं पा रहा था। मैंने संजय को समझाया कि जो हो गया उसको भूल जाओ और अपने भविष्य का सोचो और अपने काम में दिल लगाने की कोशिश करो। दो पेग और लगाने के बाद उस दिन संजय मेरे कमरे पर ही सो गया। अगले चार पाँच दिन संजय अपने घर नहीं गया और हर रात मेरे कमरे पर ही आ जाता। मुझे संजय के लिए बहुत बुरा लग रहा था कि उसके बाप ने सच में उसके साथ ज्यादती की है। छठे दिन मैंने संजय को घर जाने के लिए समझाया पर वो जाने के लिए तैयार नहीं हो रहा था तो मैंने कहा- चलो मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ और तुम्हारे बाप से बात करता हूँ। मेरे कहने से वो तैयार हो गया। असल में मैं भी चाहता था कि संजय अपने घर चला जाए क्योंकि उसके मेरे साथ रहने से मेरी प्राइवेसी खत्म होती जा रही थी। उसके होते ना तो मैं कहीं जा पा रहा था और ना ही खुल कर रहने का आनन्द ले पा रहा था। शाम को करीब सात बजे मेरी गाड़ी से संजय और मैं उसके घर पहुँचे। दरवाजा संजय की नई माँ पूजा ने खोला। बेशक वो तीस बतीस साल की होगी पर एकदम पतली सी कमसिन सी बीस साल की लड़की लग रही थी। कद भी पाँच फीट से कम ही था उसका। मैं तो हैरान हो गया की इस लड़की के माँ बाप ने कैसे एक 48 साल के आदमी से अपनी लड़की ब्याह दी।
 संजय गुस्से में अन्दर चला गया। मैं कुछ देर तो दरवाजे पर खड़ा सोचता रहा कि संजय मुझे बिना अन्दर बुलाये ही चला गया। मैं जैसे ही वापिस जाने के लिए मुड़ा तो पूजा (संजय की सौतेली माँ) की मधुर सी आवाज कानों में पड़ी- प्लीज अन्दर आ जाईये … चाय पी कर जाना! मन तो संजय के व्यव्हार से थोड़ा खराब हो गया था पर ना जाने क्यों … फिर भी पूजा को ना नहीं कर पाया और उसके साथ अन्दर चला गया। संजय अपने कमरे में जा चुका था, मैं ड्राइंग रूम में बैठा इधर उधर देख रहा था, ड्राइंग रूम से रसोई सामने ही नजर आ रही थी, रसोई में पूजा चाय बना रही थी। जब कुछ और नजर नहीं आया तो मेरी नजर पूजा पर चिपक गई। चिपकती भी क्यों ना … मैं ठहरा चूत का रसिया। मन में घूमने लगा कि दीनदयाल किस्मत का कितना धनी है जो ऐसा मस्त माल मिला है उसको और वो भी इस उम्र में। तब तक पूजा चाय लेकर आ गई। मैंने उसके चेहरे पर नजर डाली। पूजा खूबबसूरत तो थी पर ना जाने क्यों उसका चेहरा कुछ मुरझाया हुआ सा लगा। वो चाय देकर जाने लगी तो मैंने उसको भी बैठने के लिए कहा तो वो चुपचाप मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गई। कहते है ना कमीने लोगों की नजर में ही एक्सरे होता है।
मकान मालिक की पत्नी रज्जो - अक्तूबर 31, 2020
मेरी नजर पूजा के अंग अंग पर घूम गई। पूजा पतली सी थी। चुचियाँ शरीर के हिसाब से मस्त थी। पतली कमर, कूल्हे थोड़े उठे हुए थे गोल गोल। “क्या बात आप कुछ परेशान सी लग रही हैं?” मैंने बातचीत चालू करने के मकसद से पूछा। “नहीं … ऐसी कोई बात नहीं है … बस …” “बस …” पूजा के बात अधूरा छोड़ने पर मैंने उससे पूछा। “बस संजय को लेकर थोड़ा परेशान रहती हूँ … वो ना तो मुझसे बात करता है और ना ही मुझे पसंद करता है। मुझे ये सब बुरा लगता है।” “आप परेशान ना हों … मैं समझाऊंगा संजय को …” “आप सोचिये … इसके अलावा अब मेरा है ही कौन … इसके पापा का तो आपको पता ही है …” मुझे समझते देर नहीं लगी कि पूजा की अपने पति को पसंद नहीं करती और संजय उससे नफरत करता है तो वो परेशान है। पहली मुलाक़ात थी तो मैंने ज्यादा बात करना ठीक नहीं समझा और चाय पी कर दुबारा आने और संजय को समझाने की कह कर वापिस कमरे पर आ गया। उस रात बार बार पूजा का ख्याल आता रहा। वैसे भी देहरादून आये बहुत दिन हो गए थे और कोई परमानेंट चुत का जुगाड़ नहीं हुआ था। कमीने दिमाग में घूम गया कि क्यों न पूजा को ही पटा कर चोदा जाए। बस ख्याल आया तो रात को सपनों में पूजा की जम कर चुदाई की। 
अगले दिन से ही सोचने लगा कि कैसे पूजा की चुत का मजा लिया जाए। वो तो संजय हरदम मेरे साथ या आसपास रहता था तो प्लान पर काम करने का मौका नहीं मिल रहा था। एक हफ्ते बाद कंपनी की मीटिंग थी दिल्ली में। उसमें देहरादून ब्रांच से भी किसी एक को जाना था। सीनियर होने के नाते मुझे ही जाना था पर मैंने गेम खेली और बहाना बना कर अपनी जगह संजय का नाम मीटिंग के लिए भेज दिया। संजय को भी समझा दिया कि तीन दिन की मीटिंग है तो दिल्ली जा आओ। मीटिंग भी अटेंड कर लेना और तीन दिन घूमना फिरना भी हो जाएगा तो मन बहल जाएगा। संजय मान गया। मीटिंग बारे सब कुछ समझा कर मैंने एक दिन पहले ही रात को संजय को भेजने का प्रबंध कर दिया। उस रात करीब दस बजे मैं संजय को लेने के लिए उसके घर गया तो उस दिन भी दरवाजा पूजा ने ही खोला। अन्दर गया तो देखा दीनदयाल सोफे पर ही नशे में धुत लुढ़का हुआ था। पूजा ने बताया- ये तो इनका हर रोज का काम है। पूजा ने संजय को आवाज दी तो संजय अपना बैग लेकर आ गया और बिना पूजा से बात किये बाहर आकर गाड़ी में बैठ गया। “पूजा जी, संजय तीन चार दिन बाद आएगा अगर आपको किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे याद कर लीजियेगा.” मैंने अपना विजिटिंग कार्ड उसको देते हुए कहा। वो कुछ नहीं बोली बस कार्ड को ले लिया। रात को करीब ग्यारह बजे संजय को दिल्ली की वॉल्वो में बैठा कर मैं वापिस अपने कमरे की तरफ चल पड़ा। पर अचानक पता नहीं दिमाग में क्या सूझी मैंने गाड़ी संजय के घर की तरफ मोड़ दी। संजय के घर पहुँच कर मैंने जैसे ही बेल बजाई, करीब दो मिनट बाद पूजा ने आकर दरवाजा खोला। वो अपने कपड़े बदल चुकी थी और अब एक ढीली सी मेक्सी पहने हुए थे। मुझे दरवाजे पर देख वो हैरान हुई। मैं गाड़ी में बैठा बैठा ही सोच चुका था कि क्या कहना है और क्या करना है। “पूजा जी … वो संजय शायद अपनी फाइल भूल गया है … आप उसके कमरे में देख कर बता दीजिये।” मैंने पूजा को कहा। दीनदयाल अब भी सोफे पर ही था बस उसके ऊपर अब कम्बल आ गया था जो पूजा ने ही उसके ऊपर डाला होगा। पूजा मुझे वहीं छोड़ संजय के कमरे में गई और कुछ देर बाद ही वापिस आ गई और बोली- उसके कमरे में तो कोई फाइल नहीं है। “ओह्ह … फिर शायद संजय को भूल लग गई होगी … हो सकता है वो फाइल उसके बैग में ही हो.” “जी!” पूजा ने इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा। मैंने चलने को कहा तो और जैसे ही दरवाजे की तरफ चला तो पूजा की मीठी सी आवाज कानों में पड़ी- प्लीज आप थक गए होंगे … चाय पी कर जाइये. मैंने एक बार पूजा की तरफ देखा और एक बार दीनदयाल की तरफ। शायद वो मेरी मनोभावना समझ गई थी। “ये अब सुबह से पहले नहीं उठने वाले!” “ये हर रोज पीते है क्या …” “जी … हर रोज नहीं, हर समय नशे में ही रहते हैं …” “एक बात पूछ सकता हूँ … अगर बुरा ना मानें तो?” “पूछिये … बुरा क्यों मानूँगी!” “फिर भी … आपकी पर्सनल लाइफ से सम्बंधित प्रश्न है तो!” “बेझिझक पूछिये!” “आप इतनी खूबसूरत हैं … जवान हैं … फिर आपने इस बूढ़े से शादी क्यों कर ली?” “बस … किस्मत का खेल ही कह सकते हैं.” “फिर भी अगर आप बताना पसंद करें तो मैं जानना चाहूँगा?” “मेरे पिता जी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी … तो उन्होंने इनसे कुछ कर्जा ले लिया था. दूसरे मांगलिक होने के कारण मेरी शादी नहीं हो पाई थी, उम्र भी तीस से ज्यादा हो गई थी तो अब रिश्ता होने के चान्स भी कम ही रह गये थे. बस उसी का फायदा उठा इन्होंने मेरे बाप से मेरा हाथ मांग लिया. वो लाचार बेचारा क्या करता … बाँध दिया मुझे इस खूंटे से!” कहते कहते पूजा की आँखों से आँसू टपक पड़े। “ओह्ह … बहुत बुरा हुआ … आपके खुद के भी सपने होंगे … उनका क्या?” “गरीब के भी कभी सपने होते हैं भला …” कह कर पूजा सुबकने लगी। मैं उसके चुप करवाने के इरादे से उसके पास गया और उसके आँसू पौंछते हुए उसको चुप होने के लिए बोला। पूजा उठ कर रसोई में चली गई। दो मिनट बाद वो अपना मुँह धोकर वापिस आई और मुझ से पूछा- आप चाय लेंगे या कॉफ़ी बना दूँ? “कुछ भी बना लीजिये … जिसमे आप मेरा साथ दे सकें।” पूजा कॉफ़ी बनाने लगी। कॉफ़ी बन कर आई और हम दोनों ने साथ में बैठ कर पी। कॉफ़ी पीने के बाद मैं उठा और अपने कमरे पर जाने के लिए खड़ा हुआ तो पूजा की प्यास उसकी जुबान पर आ ही गई- रात बहुत हो गई है … अगर आप यही रुक जाएँ तो! “रुक तो जाऊं पर कोई हक़ से रोके तो …” “मतलब?” “मतलब ये …” “बोलिए ना?” “पूजा जी … आपको देखकर और आपकी बातें सुनकर मेरा भी दिल नहीं कर रहा जाने का … पर मेरे रुकने से आपकी बदनामी या आपके जीवन में कोई परेशानी ना हो इसीलिए मुझे जाना होगा.” “तो रुक जाइए ना … मैं भी अकेले सोते सोते परेशान हो चुकी हूँ … आज आपके साथ जागने से शायद मेरी रात का अकेलापन भी दूर हो जाये …” पूजा की तरफ से खुला न्यौता मिल चुका था तो अब भला मैं चुत का रसिया कैसे आपने आप को रोकता। मैंने बिना देर किये पूजा को अपनी बाँहों में ले लिया और उसके चेहरे को ऊपर कर अपने होंठ पूजा के होंठों से मिला दिए। पूजा के होंठ कांप रहे थे, पूजा के हाथ भी मेरी कमर से लिपट गए। “बेडरूम कहाँ है …” मैंने पूछा तो पूजा ने हाथ के इशारे से बताया।“पूजा जी … आपको देखकर और आपकी बातें सुनकर मेरा भी दिल नहीं कर रहा जाने का … पर मेरे रुकने से आपकी बदनामी या आपके जीवन में कोई परेशानी ना हो इसीलिए मुझे जाना होगा.” “तो रुक जाइए ना … मैं भी अकेले सोते सोते परेशान हो चुकी हूँ … आज आपके साथ जागने से शायद मेरी रात का अकेलापन भी दूर हो जाये …” पूजा की तरफ से खुला न्यौता मिल चुका था तो अब भला मैं चुत का रसिया कैसे आपने आप को रोकता। मैंने बिना देर किये पूजा को अपनी बाँहों में ले लिया और उसके चेहरे को ऊपर कर अपने होंठ पूजा के होंठों से मिला दिए। पूजा के होंठ कांप रहे थे, पूजा के हाथ भी मेरी कमर से लिपट गए। “बेडरूम कहाँ है …” मैंने पूछा तो पूजा ने हाथ के इशारे से बताया। अब आगे: मैंने पूजा को गोदी में उठाया और बेडरूम की तरफ ले चला। पूजा का बदन फूल सा हल्का था। आज एक कोमल कली का रसपान करने का मौका हाथ लगा था तो मैं पूरा मजा उठाने के मूड में आ गया था। कमरे में जाते ही मैंने पूजा को बेड पर बैठाया और दरवाजा बंद कर पूजा से लिपट गया। कुछ देर दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करते रहे फिर दोनों ही एक दूसरे के कपड़े कम करने में व्यस्त हो गए। कुछ पल बाद ही हम दोनों कमरे में बिल्कुल नंगे थे और पूजा मेरी गोद में बैठी हुई थी। उसकी चुचियाँ तन चुकी थी। मेरे हाथ उसकी चुचियों और जांघों पर घुमने लगे थे। छोटी छोटी झांटों के बीच छोटी सी चुत … आज सच में बहुत मजा आने वाला था।
 कुछ देर मैंने पूजा की चुचियों को मसला और पूजा के हाथ भी अब मेरे लंड को सहला रहे थे। मैंने पूजा को बेड पर लेटाया और उसकी तन कर खड़ी चुचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। पूजा की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगी थी। उसके हाथ अब भी मेरे लंड पर ही थे। अपने कोमल कोमल हाथों से वो मेरे आठ इंच लम्बे और तीन इंच मोटे लंड को मस्ती में सहला और मसल रही थी। मैं अब उसकी चुचियों को छोड़ नीचे की तरफ बढ़ने लगा और और उसके पेट और नाभि को चुमते हुए मेरे होंठ उसकी झांटों से होते हुए उसकी चुत पर जाकर रुके और मैंने जीभ निकाल कर उसकी चुत चाटना शुरू किया तो पूजा मचल उठी और मेरे सर को अपनी चुत पर दबाने लगी। उसकी चुत पानी पानी हो रही थी। जवान चुत का स्वादिष्ट नमकीन पानी मेरी जीभ से होते हुए मुँह में घुलने लगा। पाँच मिनट की चुत चटाई में ही पूजा उत्तेजित होकर अकड़ने लगी और फिर बिना देर किये उसकी चुत ने ढेर सारा कामरस मेरे मुँह पर छोड़ दिया। झड़ने के बाद पूजा थोड़ा सुस्त हुई तो मैंने उठ कर अपने लंड का सुपारा उसके होंठों से लगा दिया। एक क्षण के लिए पूजा ने मेरे लंड को देखा और बोली- राज जी … आपका ये तो बहुत बड़ा और मोटा है! लंड ने टुनक कर तारीफ के लिए शुक्रिया बोला। पूजा पहले तो जीभ निकाल कर सुपारा चाटती रही, फिर धीरे से उसे अपने होंठों में दबा लिया। लंड पूजा के मुँह के हिसाब से भी थोड़ा मोटा था और मुँह में लेने के लिए पूजा को पूरा मुँह खोलना पड़ा। मुँह में लेने के बाद पूजा जितना अन्दर ले सकती थी उतना ही लंड चूसने लगी। लंड पर पूजा के कोमल होंठों के अहसास से मेरे बदन में भी झुरझरी सी होने लगी और मुँह से ‘आह …’ फूट पड़ी। सच में बहुत मजा आ रहा था। लंड को पूजा के मुंह में दिए दिए ही मैं पूजा पर झुक कर उसकी चुत को चाटने लगा और फिर ये सिलसिला थोड़ी देर और चला। कुछ देर बाद पूजा ने लंड को मुंह से निकाला और बोली- राज जी … अब और नही चूस सकती … नीचे आग लगी हुई है जल्दी से मेरी आग बुझा दो … बहुत प्यासी हूँ मैं! मैं तो पहले से ही तैयार था, मैंने पास पड़ी एक क्रीम उठाकर अपने लंड और पूजा की चुत पर लगाई और अपने लंड को पूजा की चुत की सैर करवाने के लिए तैयार हो गया। “जो हुक्म मेरी रानी …” कहकर मैंने पूजा को बेड पर सीधा लेटाया और एक तकिया उसकी गांड के नीचे रख चुत को ऊपर की तरफ उभार अपना लंड का सुपारा उसकी चुत के दरवाजे पर टिका दिया। चुत भट्टी की तरफ सुलग रही थी। चुत का दरवाजा इतना छोटा सा था कि लग ही नहीं रहा था कि इस चुत ने पहले कभी लंड लिया होगा। मैंने लंड पकड़ कर पूजा की चुत पर रगड़ना शुरू किया तो वो चहक उठी और अपनी गांड उठा उठा कर लंड को अन्दर लेने के लिए तड़पने लगी। मैं भी अब ज्यादा देर करने के मूड में नहीं था। मैंने लंड से चुत पर दबाव बनाना शुरू किया तो अहसास हुआ कि पूजा की चुत कुँवारी लड़की की तरह बहुत टाइट थी। सावधानी जरूरी थी, नहीं तो चुत के फटने के पूरे चांस थे। मैंने धीरे धीरे लंड चुत में सरकाना शुरू किया। लंड का सुपारा चुत को फैलाता हुआ अन्दर घुसने लगा और जैसे जैसे चुत फैलती गई पूजा को दर्द का अहसास होने लगा। वो अपने हाथ नीचे लेकर लंड को चुत से हटाना चाहती थी पर चुत के रसिया ने आज तक कमसिन से कमसिन लड़की को भी अपने लंड के नीचे आने के बाद बिना चुदाई के नीचे से निकलने नहीं दिया था। मैंने एक लम्बी सांस ली और बिना पूजा को मौका दिए एक जोरदार धक्का लगा दिया। पूजा दर्द के मारे बिलबिला उठी, उसकी कमसिन सी चुत से खून टपकने लगा। शायद चुत किनारे से फट गई थी। पूजा मेरे नीचे से निकलने के लिए छटपटाई पर मैंने पूजा को कस कर पकड़े रखा और एक और धक्का लगा कर कम से कम चार इंच लंड उसकी चुत में उतार दिया। “राज … छोड़ … दो … राज … मैं मर जाऊँगी … बहुत दर्द हो रहा है राज …” पूजा की आँखों से आँसू टपकने लगे थे और वो जोर जोर से रोने लगी थी। जितना लंड अन्दर घुसा था मैं उतना ही लंड डाले हुए रुक गया और पूजा की चूची को मुंह में लेकर चूसने चाटने लगा- पूजा … तुम्हारी चुत बहुत मस्त है मेरी जान … “राज … उम्म्ह… अहह… हय… याह… दर्द हो रहा है … प्लीज एक बार निकाल लो …” “बस मेरी रानी ये पहली बार का दर्द है … इसके बाद मजा ही मजा आने वाला है … बस थोड़ा सा और बर्दाश्त कर लो!” मैंने थोड़ी देर उसके होंठ और चूची को चुसा तो पूजा भी थोड़ा आराम महसूस करने लगी पर अभी तो आधा लंड बाहर था। मैंने जितना लंड अन्दर था उसी को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया। हर बार लंड थोड़ा जोर लगा कर अंदर की तरफ सरका देता। पूजा भी हर धक्के के साथ एक दर्द भरी आह भरती। पंद्रह बीस धक्के लगाने के बाद भी सिर्फ आधा इंच ही लंड और अन्दर जा पाया था। सच में बहुत टाइट चुत थी पूजा की। मैंने महसूस किया कि अगर मैं ऐसे ही करता रहा तो कहीं पूरी चुदाई से पहले ही मेरा काम तमाम ना हो जाए। मन पक्का किया और अपने होंठ पूजा के होंठों पर लगा कर मैंने दो तीन जबरदस्त धक्के लगा कर पूरा लंड चुत में उतार दिया। पूजा दर्द के मारे सिहर उठी पर नाजुक सी पूजा मेरे हट्टे कट्टे बदन के नीचे दबी होने के कारण हिल भी नहीं पा रही थी। पूरा लंड डालने के बाद मैं रुका। पूजा की आँखों से आँसुओं की अविरल धारा बह रही थी। मेरा लंड किसी संकरी दरार में फंसा हुआ महसूस हो रहा था। ऐसा लग रहा था किसी शिकंजे में जकड़ा हुआ हो लंड। मैं पाँच मिनट ऐसे ही लेटा रहा। मेरे रुक जाने से पूजा का दर्द भी कुछ कम हुआ। “राज … तुम बहुत गंदे हो … कोई इतना दर्द भी देता है किसी को …” पूजा रोते रोते ही बोली। “मेरी जान … जिस दर्द के कारण अब मैं तुम्हें गन्दा लग रहा हूँ थोड़ी देर बाद उसी दर्द के लिए शुक्रिया बोलोगी … बस थोड़ा सहन करो और सब्र रखो … असली मजा तो अभी आना बाकी है।” “तब तक चाहे मेरी जान ही क्यों ना निकल जाए …” “चिंता ना करो … तुम बिल्कुल सही बन्दे के साथ हो … मरने तो क्या तुम्हें अब कोई दुःख नहीं होने देगा ये राज … विश्वास करो!” ऐसे ही पूजा को बातों में लगा कर मैंने उसका थोड़ा ध्यान बदला और धीरे धीरे लंड को भी अन्दर बाहर करने लगा। अभी लंड चुत में बहुत कसा कसा जा रहा था। मैं भी खुल कर अच्छे से चुदाई नहीं कर पा रहा था। क्रीम की चिकनाई से भी काम नहीं बन रहा था। मैंने लंड बाहर निकाला तो देखा मेरा लंड खून से लाल हो गया था और पूजा की चुत किनारों से फट गई थी। मैंने देशी तरीका अपनाते हुए ढेर सारा थूक पूजा की चुत पर डाल कर दुबारा से लंड का सुपारा टिका दिया पूजा की चुत पर। इस बार दो धक्को में ही पूरा लंड पूजा की चुत के अन्दर था। पूजा कसमसाई पर अब मैं रुका नहीं और धीरे धीरे धक्कों की शुरुआत की और फिर स्पीड बढ़ती चली गई। ज्यों ज्यों धक्कों की स्पीड बढ़ रही थी, वैसे वैसे पूजा को भी अब दर्द के साथ साथ मजा आने लगा था। पाँच मिनट की चुदाई के बाद जब लंड थोड़ा आराम से चुत में अन्दर बाहर होने लगा तो पूजा ने भी अपनी गांड उठा उठा कर लंड का अपनी चुत में स्वागत करना शुरू कर दिया- आह्ह … …आह्ह्ह्ह … आह्ह … राज अब अच्छा लग रहा है … उईई माँ … अब मजा आ रहा है … ऐसे ही करते रहो मेरे राजा … ओह्ह्ह … उम्मम्म … आह्ह्ह … चोदो … उम्म्म … चोदो … जोर से चोदो …” पूजा अब मस्ती में बड़बड़ा रही थी। कसी हुई चुत को चोद कर मेरा लंड भी निहाल हो रहा था। तीस बत्तीस की पूजा की चुत किसी पंद्रह सोलह साल की कमसिन लड़की की चुत का अहसास करवा रही थी। तभी तो मैं भी खुद को जन्नत में महसूस कर रहा था। मेरी भी सिसकारियां आहें निकल जाती थी बीच बीच में। पूजा की दोनों चुचियों को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़े हुए मैं सधे हुए धक्के लगा रहा था. उधर पूजा अपनी गांड उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब देते हुए ताल से ताल मिला रही थी। कमरे में थप थप की मधुर आवाज गूंज रही थी। थोड़ी ही देर में जब पूजा की चुत ने पानी छोड़ा तो थप थप के साथ फच्च फच्च की आवाजों का मिश्रण शुरू हो गया। पूजा की चुत में लंड ने अब अपनी जगह बना ली थी और पानी निकलने से पूजा की चुत भी अब चिकनी हो गई थी जिस कारण अब चुदाई का असली मजा आने लगा था हम दोनों को। दस मिनट की चुदाई के बाद पूजा जोरदार ढंग से झड़ गई। पर मेरा अभी नहीं हुआ था तो मैं धक्के लगाता रहा। एक मिनट सुस्त होने के बाद पूजा फिर से रंग में आ गई। मैंने पूजा को पलटी मारते हुए अपने ऊपर ले लिया। पहले तो पूजा के समझ में नहीं आया कि उसे क्या करना है पर जब मैंने उसको ऊपर नीचे होने को कहा तो वो अपनी चुत को मेरे लंड पर मारते हुए ऊपर नीचे होकर चुदने लगी। पोज बदलने से उसको थोड़ा दर्द हुआ पर फिर भी वो लगी रही। क्यूंकि दर्द पर मस्ती भारी थी। कुछ देर ऐसे ही चुदाई चली फिर मैंने उसको घोड़ी बना लंड पीछे से उसकी चुत में डाल कर चुदाई शुरू की तो पूजा मस्ती भरी सिसकारियां भरते हुए चुदने लगी। कुछ मिनट बाद ही मुझे लगा कि अब मेरा होने को है तो मैंने चुदाई थोड़ी तेज कर दी। मेरी तेज चुदाई से पूजा भी झड़ने के लिए मचल उठी- चोद मेरे राजा … फाड़ दे … चोद जोर से चोद … चोद अपनी प्यासी पूजा को … चुदते हुए पूजा मस्त हो गई थी। फिर अचानक पूजा का बदन अकड़ने लगा जो इस बात का सूचक था कि अब पूजा झड़ने को है। उधर मेरा लंड भी लावा उगलने को तैयार था। कुछ ही धक्के और लगे थे कि पहले पूजा और साथ ही मैं भी जोरदार ढंग से झड़ने लगे। पूजा की चुत से निकला रस मुझे मेरे लंड पर निकलता महसूस हो रहा था और दूसरी तरफ मेरा लंड गर्म गर्म वीर्य पूजा की चुत में भरता जा रहा था। झड़ने के बाद मैंने पूजा को अपने ऊपर ले लिया और पूजा ऐसे ही लंड को अपनी चुत में लिए लिए ही मेरे सीने पर सर रख कर सो गई। पूजा थक गई थी और सच कहूँ तो इतनी कसी हुई कड़क चुत चोद कर मुझे भी थकावट हो रही थी। पूजा के फूल सा बदन को बाँहों में लिए लिए ही मुझे भी नीद सी आने लगी थी। लगभग आधा घंटा हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे। जब थोड़ा रिलेक्स हुए तो पूजा उठी। उसके उठते ही मेरा लंड पट की आवाज के साथ उसकी चुत से निकला और साथ ही निकला ढेर सारा वीर्य और पूजा के कामरस का मिश्रण जिसमें पूजा की चुत के उद्घाटन की लाली भी मिली हुई थी। पूजा उठ कर कमरे के साथ में बने बाथरूम में चली गई। मैं बेड पर पड़ा उसका इंतजार कर रहा था। कुछ देर बाद पूजा अपनी चुत अच्छे से साफ करके वापिस आई और अपने साथ लाये गीले तौलिये से उसने मेरा लंड भी अच्छे से साफ किया। पूजा का हाथ लगते ही लंड फिर से औकात में आने लगा और दुबारा से तन कर खड़ा हो गया। लंड को खड़े होते देख पूजा मुस्कुरा दी। “बड़ा शैतान है आपका ये … देखो तो अभी अभी मेहनत करके हटा है और अब फिर से खड़ा होने लगा … बहुत जालिम है ये … दर्द भी देता है और मजा भी … मेरी तो सूज गई इसकी मार से” पूजा ने अपनी सूज कर डबल रोटी हुई चुत दिखाते हुए कहा। “जानेमन … इसका कसूर नहीं है … तुम जैसी खूबसूरत लड़की के हाथ का असर है … जब तक ये तुम्हारे हाथ में है ये थकने वाला नहीं …” “अच्छा जी …” कहकर पूजा लंड पर झुक गई और अपने होंठों में सुपारे को दबा चूसने लगी। पूजा के कोमल होंठों के स्पर्श से लंड फिर से अकड़ कर लोहे की रॉड सा कड़ा हो गया। मेरे हाथ भी पूजा के नंगे बदन पर घुमने लगे। कभी पूजा की गोल गोल चुचियों को मसलने लगते तो कभी पूजा की जाँघों को। पूजा उठ कर मेरे पास लेट गई और अपने हाथ से अपनी एक चूची मेरे मुँह में दे दी। मैं भी जीभ घुमा घुमा कर पूजा की चूची चूसने और चाटने लगा। पूजा की सिसकारियां एक बार फिर कमरे में गूंजने लगी। कुछ देर चूमा-चाटी का दौर चला और फिर पूजा लंड लेने के लिए मचलने लगी तो मैंने भी बिना देर किये धीरे धीरे पूरा लंड पूजा की चुत में उतार दिया और एक बार फिर से लम्बी चुदाई का दौर चला। अलग अलग आसन में मैंने लगभग आधा घंटा पूजा की चुदाई की। पूजा तीन बार झड़ी इस बार। चुदाई के बाद हम दोनों सो गए। सुबह जब आँख खुली तो पूजा मेरे पास नहीं थी। घड़ी देखी तो नौ बज रहे थे। घड़ी देखते ही मुझे होश आया और याद आया रात का नजारा। मैं बेचैन हो गया कि बाहर कैसे जाया जाए क्योंकि बाहर दीनदयाल बैठा होगा। अभी सोच विचार कर ही रहा था कि पूजा चाय का कप लेकर कमरे में आई। “यार बहुत देर हो गई … तुमने मुझे समय से क्यों नहीं उठाया … अब मैं बाहर कैसे जाऊँगा?” “तो ना जाइये ना … आज यहीं रुक जाइये” “पागल हो क्या … बाहर वो बुड्ढा दीनदयाल बैठा होगा.” “उनकी चिंता आप ना करें … वो तो कब के उठ कर ठेके पर दारू पीने चले गए.” “अरे तो वो वापिस भी तो आएगा … और फिर अडोस पड़ोस भी तो है … और मुझे ऑफिस भी तो जाना होगा ना …” पूजा मुझे रोक कर दिन में चुदाई का आनंद लेना चाहती थी पर मुझे ऑफिस जाना था। दिल्ली में होने वाली मीटिंग बाबत कभी भी फ़ोन आ सकता था। संजय को कुछ बताना भी पड़ सकता था। पूजा मुझे जाने नहीं देना चाहती थी तो मैंने भी उसकी तड़प देखते हुए एक राउंड और चुदाई का मारने का मन बना लिया और फिर कमरे में एक बार फिर से घपाघप शुरू हो गई। दस बजे तक चुदाई के मजे लेने के बाद मैंने पूजा को शाम को दुबारा आने का वादा किया और जल्दी से अपने कमरे पर पहुँचा। तैयार हो ऑफिस गया और फिर सारा दिन काम में व्यस्त रहा। उधर पूजा रात की चुदाई के बाद मेरी दीवानी हो गई थी। दिन में उसने कम से कम बीस बार मुझे फ़ोन किया और आई लव यु बोला। शाम को ऑफिस का काम आठ बजे तक ख़त्म हुआ। मैं ऑफिस से निकल पहले अपने कमरे पर गया। पूजा का फ़ोन बार बार आ रहा था कि उसने मेरे लिए खाना बनाया हुआ है और मैं जल्दी से उसके घर आ जाऊं पर फिर भी पूजा के घर जाने में मुझे साढ़े नौ बज गए।
 आज मैं गाड़ी की जगह बाइक लेकर गया था। पूजा मुझे दरवाजे पर ही खड़ी मिली और घर के अंदर आते ही वो मुझ से लिपट गई। दीनदयाल आज भी उसी सोफे पर नशे में धुत पड़ा था। मैं पूजा को गोदी में उठा कर सीधा उसके बेडरूम में ले गया। आज बिस्तर बड़े अच्छे से सजाया हुआ था। कुछ फूल भी बिखरे हुए थे। पूजा चुदाई के मजा लेने के लिए एकदम तैयार थी। थोड़ी देर चूमा-चाटी का दौर चला और फिर वो मेरे लिए खाना लेने रसोई में चली गई। पूजा ने बहुत बढ़िया खाना बनाया हुआ था जिसे हम दोनों ने एक साथ बैठ कर खाया। खाना खाने के बाद पूजा बर्तन लेकर रसोई में चली गई और तब तक मैं उसका इंतज़ार करते हुए अपने लंड को सहला कर खड़ा करने लगा ताकि आते ही सीधा पूजा की चुत में उतार दूँ। कुछ देर बाद पूजा दूध का गिलास लेकर आई और हम दोनों ने एक ही गिलास में सिप करके पिया। उसके तुरंत बाद कपड़े उतार हम दोनों चुदाई में व्यस्त हो गए। पहले दौर की चुदाई बीस मिनट से ज्यादा चली। चुदाई के बाद हम दोनों थक कर लेट गए। पूजा मेरे कंधे पर सर रख कर लेटी हुई थी। “पूजा … कल तुमने पहली बार लंड का मजा लिया था ना … जबकि तुम्हारी शादी को छ: महीने होने को आये … दीनदयाल ने अभी तक कुछ नहीं किया तुम्हारे साथ?” “वो नामर्द भला क्या कर सकता है … शराब ने उसका जिस्म खोखला कर दिया है … सुहागरात पर उसने कोशिश तो बहुत की पर मेरी चुत चोदने लायक दम नहीं है उसके लंड में … वैसे तो लंड लम्बा भी है और मोटा भी पर चुत पर लगते ही झड़ जाता है साला!” मैं चुपचाप पड़ा सुन रहा था और पूजा बोलती रही- जानते हो राज … बहुत तड़पी हूँ मैं … क्यूंकि ये कमीना तो मेरे अन्दर आग लगा कर सो जाता था और मैं सारी सारी रात जलती रहती थी इस आग में … मेरे माँ बाप ने ऐसे संस्कार नहीं दिए है मुझे कि मैं कहीं बाहर मुँह मारती … सच कहूँ पर तुम संजय को मत कह देना … कभी कभी जब आग कुछ ज्यादा भड़क जाती थी तो मेरा मन होता था कि मैं जाकर संजय से ही चुदवा लूँ … पर लोकलाज के मारे कि कैसे मैं अपने बेटे से चुदवा सकती हूँ रोक लेती थी अपने आप को … और फिर संजय भी तो मुझसे बात तक नहीं करता … कल भी तुम्हारे आने से पहले बूढ़े ने मेरी आग भड़का दी थी और फिर तुम्हें देख कर मैं अपने आप को रोक नहीं पाई … और मैंने अपना कौमार्य तुम्हारे सुपुर्द कर दिया. पूजा की बात सुन बूढ़े पर गुस्सा आ रहा था। पर मुझे क्या … मुझे तो चुत से मतलब था और वो भी इतनी मस्त करारी चुत … उसके बाद तो तीन दिन दिल खोल कर चुदाई का खेल चला। पूजा मुझसे चुद कर बहुत खुश थी। संजय के आने के बाद भी बहुत बार पूजा मुझे दिन में फ़ोन करके बुला लेती और मैं भी ऑफिस की जिम्मेदारी संजय को दे उसके घर पहुँच जाता उसकी सौतेली माँ की चुदाई करने। जब तक मेरी पोस्टिंग देहरादून रही ये चुदाई का सिलसिला चलता रहा। उसके बाद तो कभी देहरादून गए तो मुलाक़ात हुई और मौका मिला तो चुदाई भी हुई. पर अब पूजा खुश है क्यूंकि संजय से उसकी दोस्ती हो गई है … कौन सी दोस्ती हुई ये मुझे नहीं पता पर अब वो खुश है.
no 1 mother - नवंबर 01, 2020 

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