मेरी पड़ोसन शबनम







नमस्कार, अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है. आशा है आप सभी लोगों को   पसंद आयेगी. यह कहानी थोड़ी धीमी गति से चलेगी, आशा है आप सब लोग सब्र से मेरा साथ देंगे. काफी वक़्त हो गया जबसे उसने कुछ नहीं किया था. ऐसा नहीं था उसको अपने पति से प्यार नहीं था या वो उनसे नफरत करती थी. लेकिन जैसा ज्यादातर शादीशुदा लोगों के साथ होता है, विवाह के इतने वक़्त के बाद, उनकी ज़िन्दगी में से जैसा कुछ खो सा गया था. या शायद इतना ज्यादा एक दूसरे की आदत पड़ गयी थी कि अब वो तीव्रता नहीं रह गयी थी. उसको अब भी वो दिन याद आते हैं, जब वो एक दूसरे की आँखों में देर तक देखा करते थे, एक दूसरे को बांहों में जकड़े हुए और उन भावनाओं को अपने अन्दर पनपते हुए जिसकी उन दोनों को तलाश रहती थी. 45 की उम्र में भी वो उस स्पर्श की कमी महसूस करती थी. 45? सच? कभी कभी उसको खुद पर और स्वयं की कभी ना पूरी होने वाली इच्छाओं पर आश्चर्य होता था. लेकिन जो था, यही था और बहुत चाहते हुए भी वो खुद की कोई मदद नहीं कर सकती थी. 45 की उम्र में शबनम बहुत बुरी नहीं दिखती थी. हालाँकि उसका वजन कुछ बढ़ गया था लेकिन इस वजन ने केवल उसकी मादकता में बढ़ोत्तरी की थी. उसका शरीर अभी भी पुरुषों की आँखों को अपनी तरफ मोड़ने की ताक़त रखता था और उसकी खूबसूरत मादक मुस्कान का कोई तोड़ नहीं था. वो अपने एक बेटे और बेटी के साथ दिल्ली की अब अपर मिडल सोसाइटी में रहती थी. उसके जीवन में किसी तरह का कोई दुःख नहीं था. वो हमेशा खुश रहती थी और इस चीज़ ने उसकी ख़ूबसूरती में चार चाँद लगा रखे थे. जैसा हम सब के साथ होता है, ऐसे शहर में रहना जहाँ आप नए हों, हमेशा मुश्किल होता है. इस शहर में उसका कोई भी रिश्तेदार नहीं रहता था. वो हर चीज़ के लिए खुद पर निर्भर थी. पति की व्यस्तता को देखते हुए उसके दिमाग में कई बार ये विचार आये कि वो अपने पति से बाहर जाकर वो पा ले जिसकी उसको तीव्र इच्छा होती थी. लेकिन परेशानियों का अंत केवल खुद के विरोधाभास पर नहीं बल्कि इस काम के लिए किसको चुना जाए उस पर भी था. यहाँ पर ज्यादातर पुरुष जो उसके संपर्क में आते थे, उससे उम्र में काफी छोटे थे. ये सभी उसके बेटे के सहपाठी या दोस्त थे. हालाँकि उसके बेटे के बहुत सारे दोस्त थे लेकिन उनमें से उसका सबसे अभिन्न मित्र था अंकित. पिछले 8 सालों से दोनों एक दूसरे के दोस्त थे और लगभग रोज एक दूसरे के घर आते जाते थे. चूँकि वो आस पास ही रहते थे इसलिए रोज एक दूसरे के घर आने जाने में ऐसी कोई दिक्कत भी नहीं थी. 
शबनम अपनी उम्र की बाकी औरतों से थोड़ी सी अलग थी. इस उम्र में भी उसकी ख़ूबसूरती देखते ही बनती थी. 45 की उम्र में भी उसका चेहरा बिना किसी झुर्रियों के चमकता हुआ था. उसकी मुलायम त्वचा और उसकी बड़ी बड़ी आँखें किसी का भी मन मोहने के लिए काफी थी. उसकी हल्की गुलाबी त्वचा पर लम्बे काले बाल किसी भी औरत को जलने के लिए मजबूर कर सकते थे. उसने अपनी त्वचा और शरीर का पूरा पूरा ख्याल रखा हुआ था. उसके भरे पूरे शरीर पर बाकी सारे अंग एकदम अनुपात में थे. उस शरीर पर उसके वक्ष और कमर के कटाव से होते हुए, उसके नितम्बों पर कोई भी मर-मिट सकता था. शबनम ने उस दिन से पहले अंकित के बारे में कुछ भी नहीं सोचा था, जिस दिन फुटबॉल खेलने के बाद वो उसके बेटे आतिफ से मिलने घर आया था. आतिफ उस वक़्त घर पर नहीं था तो शबनम ने उसको रुक कर इंतज़ार करने के लिए बोला. उसने उसको बोला कि चूँकि आतिफ घर पर नहीं है, इसलिए अगर वो चाहे तो रुक कर इंतज़ार कर सकता है. अंकित अभी 18 साल का ही था लेकिन खेल-कूद की वजह से उसका शरीर काफी विकसित हो गया था. लेकिन अभी भी उसके चेहरे पर उम्र की मासूमियत बरक़रार थी. एक अच्छे परिवार से आने की वजह से उसके अन्दर शिष्टाचार की खूबी भी थी. दोनों लड़कों में दोस्ती की वजह से शबनम उसको अपने बेटे जैसा ही मानती थी. वो एक दूसरे से हमेशा बात करते थे और एक साथ बैठ कर बात करने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी. “ठीक है आंटी, लेकिन क्या मैं तब तक नहा लूं? मुझे लग रहा है इसकी मुझे बहुत जरूरत है.” खुद की हालत पर हँसते हुए अंकित ने पूछा. “अरे बिल्कुल! इसके लिए तुम्हें मुझसे पूछने की क्या जरूरत. 
तुम नहा लो, तब तक मैं तुम्हारे पीने के लिए कुछ बनाती हूँ.” शबनम ने मुस्कराते हुए जवाब दिया. कुछ देर के बाद जब वो बाथरूम के पास से गुजर रही थी तो उसको एक कराहने की आवाज़ आयी. उसको थोड़ा आश्चर्य हुआ. वो बाथरूम के थोड़ा और पास गयी तो उसको लगा जैसे ये आवाज़ अन्दर से ही आ रही है. उसने बाथरूम के की-होल से अन्दर झाँका तो अन्दर का दृश्य देख कर उसकी आँखें फटी रह गयी. उसने अन्दर जो देखा उससे उसकी दिल की धड़कनें रुक सी गयी. उसके बाद जब वो शुरू हुईं तो ऐसा लगा जैसे वो भाग रहीं हो. अंकित ने अपने लिंग को अपने हाथ में पकड़ रखा था और उसको रगड़ रहा था. ऐसा नहीं था कि वो अपनी ज़िन्दगी में पहली बार लिंग देख रही थी, लेकिन इस उम्र के लड़के की इतनी मजबूती और उसकी खुद की प्यास ने उसको वहां से ना हटने के लिए मजबूर कर दिया था. उसके कदम जैसे वहीं के वहीं जमे रह गए. अंकित का लिंग उसके पति से ज्यादा बेहतर था और अंकित की कम उम्र ने उसमे चार चाँद लगा दिए थे. वो जैसे जैसे अंकित के लिंग को उसके हाथों के बीच रगड़ता हुआ देख रही थी, उसको लग रहा था जैसे उसकी खुद की टांगों के बीच एक हलचल सी मच रही हो. जैसा ही उसने देखा कि अंकित का वीर्य उसके लिंग से बाहर आ रहा है, उसकी जैसे सांस रुक गयी. उसका मुंह सूख गया था. ये दृश्य उसके लिए इतना कामुक था की अनजाने में ही उसका हाथ उसकी टांगों के बीच चला गया. उसकी रीढ़ में एक सिरहन दौड़ रही थी. उसका खुद पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया था और वो लगातार वहीं देख रही थी. उसके दिमाग का एक कोना उसको ऐसा करने से रोक रहा था लेकिन उसकी शारीरिक इच्छाओं ने, उसकी नैतिकता को पीछे छोड़ दिया था. उसको समझ नहीं आ रहा था कि क्या गलत है और क्या सही. ना ही वो खुद के विचारों को रोक पा रही थी और न ही उन पर ध्यान लगा पा रही थी. उसके लिए अब सब कुछ कभी ना मिटने वाली जिस्मानी इच्छाओं पर निर्भर था. उसकी कामुकता अपने चरम पर थी और उसको अपनी टांगों के बीच में गीलेपन का एहसास हो रहा था.
 उसकी योनि खुद को अपने आप में भिगो रही थी. उस रात बिस्तर पर जाते हुए शबनम के दिमाग में केवल अंकित का ही ख्याल था. उसके लिंग और मजबूत जवान शरीर का ही दृश्य उसके दिमाग में तैर रहा था. कुछ सेकंड में ही उसकी योनि भीग गयी थी और उसकी उँगलियाँ वहां पर अपना काम कर रही थी. कुछ ही मिनटों में उसकी आँखों के आगे जैसा अँधेरा छा गया और उसके मुंह से एक लम्बी सी आह निकल गयी. केवल इस ख्याल ने कि अंकित उसकी टांगों के बीच में है, उसको वो चरमसुख दे दिया जो बहुत मेहनत के बाद भी मुश्किल से ही मिलता है. अगर वो सच में यहाँ होता, तब वो सुख कितना ज्यादा होता? ये सोचते सोचते ही उसकी आँख लग गयी. चूँकि अंकित भी उसके खुद के बेटे जैसा ही था तो आतिफ की तरह शबनम अंकित को भी अपने गले से लगाती थी. एक दिन आतिफ के बाद वो अंकित को गले लगाने के लिए आगे बढ़ी. लेकिन जैसे ही उसने उसको अपनी बांहों में घेरा, उस दिन के दृश्य उसकी आँखों के सामने आ गए. उसने अपने आलिंगन को थोड़ा और मजबूत किया और अंकित के और पास आ गयी. इस बार यह मातृत्व भरा आलिंगन नहीं था. उसने अंकित को और जोर से जकड़ा और एक लम्बी सांस ली. अंकित ने भी जवाब में अपनी बांहों से शबनम की कमर को पकड़ लिया. उसकी बांहों में शबनम को एक अलग ही सुख मिल रहा था. वो बहुत देर तक वैसी ही रही जब तक कि उसको यह अहसास नहीं हुआ कि उसका बेटा भी वहीं है, और वो बहुत देर तक उस स्थिति में नहीं रह सकती. वो अपने ख्यालों से बाहर आयी और एक मुस्कान देते हुए वो अंकित से अलग हो गयी. उस दिन के बाद वो जब भी उसके सामने आता, उसके पूरे शरीर में एक अजीब सी सिरहन दौड़ जाती थी. उसको यह तो समझ में आ रहा था कि हो क्या रहा है लेकिन यह नहीं समझ में आ रहा था कि क्या जाए. उसके सारे विचार धीमे पड़ गए थे सिवाए अंकित के … वो जब भी उसके सामने होता था वो नज़रें चुरा कर उसको देखने की कोशिश करती थी. वो उसकी तरफ कामुक निगाहों से देखती थी और उस वक़्त उसके दिमाग में केवल एक ही चीज़ होती थी कि जो भी इन कपड़ों के अन्दर है, उसकी प्यास बुझाने के लिए काफी है. शबनम के सारे विचार उसी पर केन्द्रित थे और वो जब भी मौका मिलता, अपने शरीर को उसके शरीर से रगड़ने की कोशिश करती. जब भी अंकित का शरीर उसके शरीर से छू जाता, वो महसूस करती जैसे इसी वक़्त वो उसको जोर से पकड़ ले. उसको लगता कि इन सारी चीजों की वजह से शायद अंकित को कुछ समझ में आ जाये और वो अपनी तरफ से पहल करे. वो नहीं चाहती थी कि अंकित को लगे कि वो उसको पाने के लिए तड़प रही है. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उसकी मासूमियत ने शबनम की इच्छाओं को और बढ़ा दिया था, क्योंकि ना केवल एक जवान और खूबसूरत लड़का था बल्कि उसका व्यवहार भी बाक़ी लड़कों से अलग था. शबनम के लिए हालात मुश्किल से मुश्किल होते जा रहे थे. उसके दिमाग में अंकित के जवान लिंग के अलावा और शायद ही कोई विचार आ रहे थे. उसके दिमाग में केवल यही विचार आते थे कि कैसे अंकित उसके शरीर के ऊपर आकर उससे प्यार कर रहा था. अपने पूरे शरीर को उसके शरीर के ऊपर ले जाकर शबनम को सुख के चरम पर ले जा रहा है. वो लगातार खुद से लड़ रही थी अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखने के लिए. लेकिन वो अपने विचार से अलग नहीं हो पा रही थी, उसको पूरी तरह अपना बनाने की चाहत से, उसकी उँगलियों को खुद के पूरे शरीर पर रेंगने के ख्याल से. उसके ख्याल में अक्सर ये रहता था कि अंकित के हाथ उसके पूरे शरीर पर जा रहे हैं, उसके हर अंग को छूते हुए अपनी उँगलियों से, हाथों से, होंठों से. उसके पैर, टांग, गर्दन, कमर और कहाँ नहीं. वो यही सोचती कि काश इस बेचारे को पता होता कि वो क्या सोच रही है. कहानी सुनें एक दिन सुबह नहाने के बाद, वो शीशे के सामने बिना कपड़े पहने खड़ी थी. अपने खुद के शरीर को देखते हुए और पूरे शरीर पर हाथ फिराते हुए उसके दिमाग में केवल अंकित का ही ख्याल आ रहे थे. उसके होंठों पर एक मुस्कान आ गयी ये सोचते हुए की अगर यही सब अंकित उसके साथ कर रहा होता. उसने खुद से कहा- बहुत हुआ अब! अब मुझे ही कुछ करना पड़ेगा. ये शायद उतना बुरा नहीं होगा जितना मुझे लग रहा है. अंकित का लगातार उसके घर में रहना उसकी कल्पनाओं को और बढ़ावा दे रहा था. उसकी निगाहें वो अपने पूरे शरीर पर महसूस करती थी. वो उसको पाना चाहती थी, लेकिन बिना उसको अहसास दिलाये. उसको कभी कभी खुद पर शक होता कि जो इतना वक़्त वो इस चीज़ में लगा रही है, वो किसी काम का होगा या नहीं. क्या वो कभी उसको आकर्षित कर पायेगी? दो दिन बाद उसके घर की घंटी बजी तो वो दरवाज़ा खोलने गयी. दरवाज़ा खोलने पर उसने देखा कि वहां अंकित खड़ा था मुस्कराता हुआ.
 उसने दरवाज़े के अन्दर कदम रखा और शबनम आगे झुकी उसको गले लगाने के लिए जैसा वो हर बार करती है. लेकिन इस बार ये थोड़ा सा अलग था. उसकी छातियाँ बाहर को आ गयी थी और अंकित के सीने से छू रही थी. इसमें हालाँकि ऐसा कुछ अलग नहीं था, लेकिन फिर भी उसको महसूस हो रहा था. इस बार उसके गाल पर एक हल्के चुम्बन के बजाये, उसने अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया कुछ सेकंड्स के लिए. अंकित ने उसकी तरफ असमंजस में देखा और मुस्कराते हुए चुम्बन का जवाब देने के लिए उसकी तरफ बढ़ा. उसने उसके होंठों पर हल्का सा चुम्बन दिया. शबनम ने एक कामुकता भरी मुस्कान से उसकी तरफ देखा और अपने होंठों पर जबान फेर दी. अपने आप को सँभालते हुए, उसने कहा- अन्दर आ जाओ अंकित! अपने आप पर किसी तरह काबू पाते हुए उसने कहा. वो दोनों लिविंग रूम में गए और सोफे पर एक दूसरे के बगल में बैठ गए. उस वक़्त घर पर कोई नहीं था और वो दोनों ऐसे ही एक दूसरे से बात करने लगे. बातों के बीच में उसने कहा- अंकित आज घर में बहुत सारा काम था, मेरे पैर इतना ज्यादा दर्द कर रहे हैं. “ओह आंटी! लाइये मैं आपके पैरों की मसाज कर देता हूँ.” “थैंक यू!” शबनम ने मुस्कराते हुए अंकित से बोला. अंकित नीचे बैठ गया और शबनम के पैरों को अपने हाथों में ले लिया. उसने धीरे धीरे पैरों को दबाना शुरू कर दिया और उँगलियों को और पोरों को हल्के हल्के सहलाना शुरू कर दिया. शबनम को हल्का हल्का अहसास होना शुरू हुआ. उसको लगने लगा कि शायद आज वह वो पाने में सफल होगी, जिसकी उसको इतने दिनों से इच्छा हो रही थी. वो इस स्पर्श के लिए इतने दिनों से तड़प रही थी. वो सोच रही थी कि क्या वो समझ पा रहा है वो क्या चाहती है? इतने दिनों से उसके दिमाग में जो ख्याल चल रहे हैं, क्या उसको अंदाज़ा हो गया है? उसने अपने पैरों को और ज्यादा फैलाकर उसकी गोद में रख दिया और एक चैन भरी सांस ली. “आपके पैर बहुत खूबसूरत हैं!” अंकित ने उसकी तारीफ करते हुए कहा. अपनी आँखों में भूख और होंठों पर मुस्कान लिए शबनम ने उसकी तरफ देखा- थैंक्स! उसके दिल की धड़कन रुक सी गयी जब उसने उसकी सलवार को थोड़ा सा ऊपर किया और थोड़ा ऊपर मसाज करने लगा.
 बढ़ी हुई धड़कनों के साथ उसने पूछा- ये क्या कर रहे हो बेटा? “आप थकी हुई हैं आंटी! आपको आराम मिले इसलिए ये कर रहा हूँ.” शबनम को पता था कि अंकित की ये हरकतें उसको आराम पहुँचाने के बजाय उसकी परेशानियों को और बढ़ाएंगी ही. उसको और ज्यादा चाहिए था, इससे कहीं ज्यादा. “मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि ये सच में हो रहा है.” अंकित ने कहा. उसको महसूस हुआ जैसे अंकित उसके शब्दों को बोल रहा है. “क्या विश्वास नहीं हो रहा?” “कि मैं सच में आपके पैरों को छू रहा हूँ और महसूस कर रहा हूँ.” उसने जवाब दिया. वो शबनम की तरफ असमंजस भरी निगाहों से देख रहा था. जैसे कुछ पूछने से पहले भांप रहा हो. उसके ये बोलने पर वो हल्के से हँसी और उसका साथ देने के लिए अंकित भी मुस्करा दिया. “दरअसल मैं बहुत दिनों से आपसे कुछ कहना चाह रहा था.” “क्या?” “मुझे समझ में नहीं आ रहा कि कैसे कहूँ और कहाँ से शुरू करूँ?” “क्या हुआ अंकित क्या तुम्हें पैसों की जरूरत? अगर ऐसी बात है तो बोलो.” “नहीं नहीं आंटी पैसे या ऐसी कोई बात नहीं है.” “अच्छा! फिर क्या है बताओ?” उसने उसकी तरफ देखा फिर अपनी नज़रों को नीचा करते हुए कहा- आंटी आप बहुत खूबसूरत हैं, और मैं आपको पसंद करता हूँ. “थैंक्स अंकित … लेकिन इसमें इतना घबराने वाली क्या बात थी. मैं भी तुम्हें पसंद करती हूँ. और कौन तुम्हें पसंद नहीं करेगा.” उसने मुस्कराते हुए जवाब दिया. वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका क्या मतलब है. उसका दिल भी दौड़ रहा था और उसे लग रहा था जैसे उसका सपना सच हो रहा है. वह इससे कुछ ही कदम दूर है. 
वह अपने अन्दर वासना और जुनून का विस्फोट महसूस कर रही थी. वह उसके लिए पूरी तरह से तैयार थी. उसने फैसला किया कि अगर ऐसा होना है तो यह सही समय और अवसर है. वह इस मौके को गंवा नहीं सकती थी. वह जानती थी कि अगर वह ऐसे ही शर्माती रही तो वह इस मौके से चूक सकती है. और कौन जानता है कि यह दोबारा कब आएगा. उसे इस अवसर को पूरी तरह से भुनाना है. वह उसके पास पहुंची और उसके हाथों को अपने हाथों में लेकर उंगलियों को उलझा दिया. शबनम का दिल तेज़ी से धड़क रहा था मानो कोई अंदर से उसे सहला रहा हो. वह अपने बेटे के सबसे अच्छे दोस्त का हाथ पकड़ रही थी, जो उसकी उम्र का आधा था और वह जानती थी कि यह कहां खत्म होने वाला है. अंकित की मासूमियत और उम्र ने उसकी भावनाओं को बढ़ा दिया. उसके साथ उसका यौन आकर्षण चरम पर था और नैतिकता, उम्र के अंतर और उसके व्यवहार को शामिल करने वाले सभी कारण उसकी उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे. जैसे-जैसे वह खुद से लड़ने की कोशिश कर रही थी, उसके पूरे शरीर में एक सनसनी दौड़ रही थी. वह अपनी जाँघों के बीच एक ज्वालामुखी को महसूस कर सकती थी जो उसे एक नम गर्म अहसास दे रही थी. वह जानती थी कि खुद को संतुष्ट करने का अंकित की एकमात्र तरीका है. वह उसे जाने देने का जोखिम नहीं उठा सकती थी. अंकित शर्म के मारे नीचे फर्श पर नीचे देख रहा था. वह उसके बगल में फर्श पर चली गई और उसकी ओर और अधिक झुक गई. शबनम को लगा कि अंकित नर्वस है और अब आगे खुद से पहल नहीं करेगा. वह उसके बगल में फर्श पर चली गई और उसकी ओर और अधिक झुक गई. उसके कानों में फुसफुसायी- मैं तुम्हें बहुत पसंद करती हूं अंकित … और मुझे पता है कि तुम भी मुझे चाहते हो. है ना? शबनम अब तक मुस्कुरा रही थी. वह अपनी भावनाओं को रोक नहीं पा रही थी और लगातार भारी सांस ले रही थी। वह उसकी ओर अपने शरीर को धकेलता हुआ ले गया और कहा- हम्म आंटी! वो अभी भी घबराया था और शर्मा रहा था. अचानक उसने सोचा कि अंकित को थोड़ा और तडपाया जाये. वो नहीं चाहती थी कि अंकित को लगे कि जैसे वो उसके लिए तैयार ही बैठी थी. उसने उसे थोड़ा धक्का दिया और उससे दूर चली गई- अंकित, मैं थक गयी हूँ और मैं सोने जा रहा हूँ. बाद में मिलती हूँ तुमसे. उसके उठते ही अंकित के चेहरे पर निराशा का भाव आ गया. अपने पूरे दिल से वह चाहती थी कि वह उसे रोके लेकिन वह अपनी भावनाओं को छुपा रही थी. उसके साथ, वह भी उठ गया और उसका हाथ पकड़ लिया. उसको कसकर गले लगा लिया और कहा- आंटी प्लीज रुक जाइये. हताशा के साथ-साथ वह उसकी आवाज़ में उदासी भी महसूस कर सकती थी. अंदर ही अन्दर वह मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसे लगा कि वह अभी भी अपने बेटे की उम्र के लड़के को रिझा सकती है. “अंकित, प्लीज ऐसा न करो. मुझे छोड़ दो.” उसने बहुत शांत लहजे में कहा. “आंटी प्लीज!” उसने उसे अपने चंगुल से मुक्त करने के लिए धक्का दिया और कहा- हम सीमा को पार कर जाएंगे और मैं ऐसा नहीं चाहती. “अगर आप ऐसा महसूस कर रहीं हैं, तो मैं कभी भी यहाँ नहीं आऊँगा लेकिन मैं आपको सच में चाहता हूँ.” “मुझे पता है कि यह मेरी ओर से गलत है क्योंकि आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त की माँ हैं लेकिन आप मेरे लिए उससे कहीं बढ़कर हैं. और ऐसा सोचने से मैं खुद को नहीं रोक सकता.” “जब भी मैं आपकी ओर देखता हूं, मुझे कुछ और ही दुनिया लगती है. मैं अक्सर आतिफ से मिलने के लिए नहीं बल्कि आपको देखने के लिए इस घर में आता हूं. हर बार जब आप मुझे गले लगाती हैं या मैं आपको छूता हूं, तो मुझे एक अलग ही भावना महसूस होती है. मैं आपको अपने दिल से चाहता हूँ.” “नहीं अंकित, मेरा मतलब यह नहीं था. लेकिन मुझे डर लगता है कि अगर कोई हमें देख ले तो क्या होगा. तुम जानते हो कि यह हम दोनों के जीवन को बर्बाद कर देगा.” अंकित को समझ नहीं आ रहा था की शबनम को कैसे रोका जाए.
चोटिसी दुकान पर मिली ट्रेनिंग देने वाली आंटी - अक्तूबर 31, 2020
निराशा में अंकित ने अपने सिर को नीचे कर लिया और कहा- कोई हमें कैसे देख सकता है. इसका सिर्फ एक ही मतलब है कि आप मुझे पसंद नहीं करती. उसकी आँखों में आँसू भरे हुए थे जैसे कि उसके बचपन का सपना टुकड़ों में बिखर गया हो. अब वह इसके लिए दोषी महसूस कर रही थी. लेकिन यह उसे और अधिक उत्तेजित कर रहा था. “नहीं ऐसा नहीं है. मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करती हूं.” यह कहते हुए वह उसकी ओर बढ़ी और उसका चेहरा अपने हाथों में पकड़ लिया. यह कहते हुए वह उसकी आँसू भरी आँखों में देख रही थी. उसकी मुस्कुराहट अंकित को थोड़ा आराम देती है लेकिन फिर भी बहुत विश्वास के साथ नहीं. उसने अंकित का चेहरा पकड़ कर थोड़ा सा ऊपर उठा लिया और उसकी आँखों में देखने लगी। उसने उसके बालों को कान के पीछे ले जाकर माथे को सहलाया- मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ लेकिन क्या तुम मुझसे कह रहे हो कि तुम मुझे चाहते हो? जैसे कि पूरी तरह से? उसने उसे छिपे शब्दों में संकेत दिया। वह अब भी तीन जादुई शब्दों को नहीं कहना चाहती थी। वह चाहती थी कि अंकित खुल कर उसके सामने आये. “हाँ आंटी! मैं आपको बहुत चाहता हूँ और आपको पाना चाहता हूँ. न केवल अब बल्कि हमेशा के लिए. मैं आपके सिवा कुछ सोच भी नहीं सकता.” वह इस लड़के की मासूमियत पर मरी जा रही थी। इतने सालों बाद वह अपने पेट में तितलियों को महसूस कर रही थी. उसकी पैंटी पहले से ही योनिरस लथपथ थी और वह और ज्यादा सहन नहीं कर सकती थी। वह उसके लिए सब कुछ उतार देना चाहती थी.आंटी, हालांकि आतिफ मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, लेकिन क्या हम केवल वहीं तक सीमित रहेंगे? क्या हम इसके अलावा कुछ नहीं हो सकते?” शबनम को लगा कि जैसे वह कुछ भी कहेगी उसको रोकने के लिए, वह टूट जाएगा और रोना शुरू कर देगा. उसने अपनी बाँहें उसके चारों ओर लपेट लीं और अपने सारे शरीर को उसकी ओर धकेलते हुए गले लगा लिया. अंकित ने अपने हाथों को उसकी कमर पर ले जाकर उसे अपनी ओर बढ़ाया. वे एक-दूसरे में खो से गए धीरे-धीरे सहलाते हुए. शबनम की आँखें बंद थीं. शबनम ने अंकित के कंधे से अपना चेहरा हटाया और उसके सामने आ गई. उसने आधे खुले होंठों के साथ अंकित की आँखों में गहराई से देखा. उसकी आँखें इच्छाओं की आग से जल रही थीं. अंकित को पाने की इच्छा. इस बार और हर बार पूरी होने की इच्छा. अंकित ने अपने होंठ धीरे से उसकी ओर बढ़ाए. उसने प्रतीक्षा नहीं की और बीच में उनको पकड़ लिया. 
अंकित ने पहले धीरे से चूमा लेकिन संकोच के साथ. शबनम ने उसका निचला होंठ अपने मुँह के बीच ले लिया और उसे चूसना शुरू कर दिया. वह आश्वस्त हो गया और पूरी तरह से साथ देने लगा. “आपसे बहुत अच्छी खुशबू आ रही है.” उसने उसे और अधिक कसकर अपने आलिंगन में खींचते हुए कहा. वह सीधे उसकी आँखों में देख रहा था जब वह अपनी लंबी पतली उंगलियों से उसके बालों को सहला रही थी. उसने उसे प्यार से देखा और फिर उसका चेहरा अपनी हथेलियों के बीच ले लिया. वह अपने होंठ उसकी ओर लायी और उसने उसे स्वीकार करने के लिए अपना मुँह खोला. वह उसे उसी तरीके से चूमता है, जिसके बारे में वह लंबे समय से सपने देख रही थी. शबनम ने अपनी जबान उसके मुंह के अन्दर घुसा दी और अंकित ने उसको चूसना शुरू कर दिया. उनके होंठों ने एक दूसरे को छूना शुरू कर दिया और उसे लगा जैसे हजारों तितलियाँ उसके पेट के अंदर जाने लगी हैं. शबनम ने उसे जोश से चूम लिया और उसके निचले होंठ को धीरे से काट लिया. अपनी जीभ की नोक से अंकित ने शबनम के होंठों को महसूस किया और उसे थोड़ा धक्का दिया. शबनम ने अपना मुँह खोला और धीरे से ले अंकित की जबान को अन्दर ले लिया. शबनम अंकित की जीभ को चूसते हुए, उसकी मिठास को चखते हुए, उसके निचले होंठ को चूसती रही. शबनम का पूरा शरीर खुशी में कांप रहा था और यह चुम्बन अधिक से अधिक उत्तेजित होता जा रहा था. जैसे ही अंकित के हाथ शबनम के पूरे शरीर पर घूमने लगे, वह कमजोर महसूस करने लगी. उसका मन कर रहा था जैसे यहीं अंकित उसके सारे कपड़े उतार कर और वो सब कुछ उसके साथ करे जिसकी इतने दिनों से वो कल्पना कर रही है. वह उसके धड़कते हुए लंड को महसूस कर सकती थी क्योंकि यह उसके पेट में धक्के मार रहा था. वे अभी भी अपने चुम्बन से अलग नहीं हुए थे. शबनम ने अपने कूल्हों को आगे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया था. अंकित के हाथ उसकी पीठ से होते हुए उसके कूल्हों तक पहुँच गए थे और धीरे धीरे सहला रहे थे. शबनम ने एक गहरी सांस ली और महसूस किया कि अंकित के हाथ उसके सारे अंगों तक एक एक करके पहुँच रहे थे. उसने अपना मुंह उसके कानों के पास ले जाकर कहा- चलो बेडरूम में चलते हैं. वहां आराम से जो मन होगा वो करना. यह बोलकर उसने उसके कानों को हल्का सा काटकर उसके पूरे शरीर में एक सनसनी सी फैला दी. वो उठी और अंकित उसके पीछे जल्दबाजी में उठा. अंकित का हाथ पकड़ कर बेडरूम की तरफ बढ़ गयी. वह अपने बिस्तर पर लेट गई और उसे अपने शरीर के ऊपर खींच लिया. एक हल्की हंसी के साथ शबनम ने अंकित से कहा- मैं बहुत दिनों से ये कल्पना कर रही थी कि तुम मेरे साथ ये सब कर रहे हो. और तुम भी जानते थे कि तुम ऐसा कुछ ना कुछ करोगे. है ना? अंकित ने अपने शरीर को शबनम के ऊपर इस तरह से रखा कि उसका खड़ा लंड उसकी चूत के ऊपर रहे. कपड़ों के ऊपर से ही धीरे धीरे रगड़ते हुए उसने कहा- मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ आंटी. अपने बहुत तड़पाया है मुझे, अब जब हम यहाँ तक आ गए हैं, तो आपको लगता है कि आपको ऐसे ही जाने दूंगा? “बिलकुल नहीं … ऐसा मुझे नहीं लगता.” एक पल रुक कर उसने फिर कहा- लेकिन अगर तुम ऐसा करोगे, तो शायद अब मैं सह नहीं पाऊँगी. यह कहकर उसने अंकित को अपने ऊपर खींच लिया. उनके मुंह दुबारा एक दूसरे में जुड़ गए और एक दूसरे में खो गए. यह कहना मुश्किल था कि किसके हाथ किस समय कहाँ पर हैं. उनके हाथ एक दूसरे के शरीर में इस तरह से खोये हुए थे जैसे किसी खजाने की खोज कर रहे हों. और ये काफी हद तक सही भी था. खजाने से बड़ी कोई चीज़ वहां पर छुपी हुई थी. और उन दोनों को खजाने से ज्यादा उसकी जरूरत थी. चुम्बनों के बीच में वो थोड़ा सा खिसकी और अंकित के हाथों को अपने हाथों में लेकर अपनी कमर से लेकर ऊपर गले तक रगड़ती हुई ले गयी और वापस लायी. अपने होंठों को चुम्बन से आज़ाद करते हुए शबनम ने अंकित के चेहरे को अपने हाथों में लेते हुए कहा- आई लव यू! “आई लव यू टू!” अंकित ने जवाब में कहा. शबनम ने मुस्करा कर अंकित के दोनों हाथों को अपनी छातियों पर रख कर कहा- यही चाहते थे ना तुम! लो जी भर कर खेलो इनसे. पहले लेकिन थोड़ा आराम से. उसके बाद तुम्हारी जो मर्ज़ी वो करना. अंकित को और किसी भी निर्देश की जरूरत नहीं थी. शबनम के गले को सहलाते हुए उसका एक हाथ शबनम के कुरते के अन्दर चला गया. उसने उसकी एक चूची को पकड़ कर और निप्पल को हल्के से दबा दिया. उसने अपने होंठों को दूसरे निप्पल के ऊपर रखा और कपड़ों के ऊपर से ही चूसने की कोशिश करने लगा. शबनम की चूत में आग लग गयी थी. अपनी पूरी ज़िन्दगी में वो कभी इतनी उत्तेजित नहीं हुई थी. अंकित के स्पर्श से उसकी चूत में बाढ़ आ गयी थी. उसने अपना हाथ नीचे किया और अंकित के फड़कते हुए लंड को अपने हाथों में ले लिया. वो लोहे जितना कड़ा था. उसने पूरे लंड की लम्बाई को पहले अपनी उँगलियों से महसूस किया और फिर उसको अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया. अंकित लगातार उसके निप्पल से खेल रहा था. चूँकि ये उसके पूरे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा था, उसकी उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी. ये सब कुछ उसको किसी अलग ही दुनिया में भेज रहा था. उससे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था. उसने अंकित को धीरे से धकेल दिया और एक शर्मीले लेकिन वासनापूर्ण तरीके से अपना कुर्ता पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचने लगी. उसके बड़े स्तन ब्रा में बमुश्किल ही समाये हुए थे. अंकित ने मुश्किल से सांस ली, जब उसने अपने पूरे जीवन का सबसे कामुक दृश्य देखा. अब उसके और इस शानदार चीज़ के बीच में केवल एक ही वस्त्र था. अंत में उसने अपना हाथ पीछे ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दिया. शबनम के स्तन अभी भी बहुत खूबसूरत थे और एक हॉर्मोन से भरे लड़के को काबू में करने के लिए बहुत थे. शबनम के स्तन सच में बिना किसी कमी के बहुत ही खूबसूरत कसे और चमकते हुए स्तनों को देख कर अंकित का मुंह खुला रह गया. उसके निप्पल एकदम सही आकर के थे और रेड वाइन के रंग के थे. वो जैसे अपने आप में न्योता दे रहे थे. अंकित को लगा कि जैसे वो कोई दिवास्वप्न देख रहा हो. वो भूखी नज़रों से उनकी तरफ एकटक देखे जा रहा था. उसका लंड उसकी पैंट के अन्दर तड़प रहा था. शबनम ने अपने स्तनों को अपने हाथों में लिया और उनको अंकित की तरफ करते हुए एक मुस्कान के साथ कहा- जैसा सोचते थे वैसे ही हैं या अलग? “आंटी जितना सोचा था … उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत!” उसने एक भूखे की तरह उसके स्तनों की तरफ देखते हुए कहा. अंकित की बात सुनकर शबनम एक नयी नवेली दुल्हन की तरह शर्मा गयी, वो केवल यही कह पाई- ये तुम्हारे लिए हैं. शबनम के निप्पल बड़े और कड़े हो गए थे. वो जैसे खुद को चूसने, चबाने और काटने का न्यौता दे रहे थे. अंकित ने अपने सर को नीचा कर के पहले स्तनों पर चुम्बन लिया और फिर अपनी जबान निकल कर दोनों निप्पलों को एक एक करके चाटने लगा. उसके बाद उसने एक निप्पल अपने मुंह में लिया और उसको चूसने लगा. “ओह आंटी! कितने स्वादिष्ट हैं ये.” अंकित के मुंह से ये आवाज़ आई. शबनम खुद को संभल नहीं पा रही थी. वो इस समय नौवें आसमान पर थी- इनको चूसो अंकित … इनके साथ जो करना है, करो। अब से ये सब तुम्हारा है। वह अपनी सिसकती आवाज में अंकित से कह रही थी. उसने उसे अपनी ओर और ज्यादा खींच लिया और इसके साथ शबनम के हाथ अंकित की गांड तक पहुँच गए. उसने अपने निचले आधे हिस्से को उसके ऊपर धकेल दिया और ऐसा महसूस किया जैसे उसके कपड़ों के ऊपर से कुछ अंदर चला गया हो. “उम्म्म!” शबनम के मुंह से केवल यही आवाज़ निकल पाई. अंकित शबनम के स्तनों के साथ इस तरह से खेल रहा था जैसे की एक बच्चा बॉल के साथ खेलता हो. शबनम के दिमाग से ये नहीं निकल पा रहा था की ये रिश्ता उसके लिए वर्जित है, लेकिन ये उसे और अधिक उत्तेजना दे रहा था. वह एक निप्पल चूस रहा था और उसकी उँगलियाँ दूसरे स्तन के नरम मांस को सहला रही थीं. उसने एक निप्पल पर चुटकी ली और स्तन को सहलाते हुए हाथों से पकड़ लिया. वह इसी तरह करे जा रहा था, अपने होठों को एक निप्पल से दूसरे को निप्पल तक, चूमता रहा, चाटता रहा, चूसता रहा, चुटकी लेता रहा, पकड़ता रहा और जोर-जोर से सहलाता रहा। “हाँ अंकित, अपनी जबान से करो बेटा.” उसने बेदम होकर कहा. अंकित ने अपने जीभ की नोक से उसके निप्पल को जोर जोर से चाटा तो उसे लगा जैसे उसकी चूत के अंदर तूफान आ गया हो. शबनम ने उसे और जोर से पकड़ लिया और उसके पूरे शरीर को अपने अन्दर धकेलने की कोशिश करने लगी. यह सब शबनम के लिए असहनीय था. अंकित उसके दोनों स्तनों को एकसमान रूप से बिना एक भी इंच छोड़े, चूस रहा था. जैसे-जैसे अंकित उसे चूस रहा था, चाट रहा था, और बीच-बीच में उन्हें काट भी रहा था, शबनम का सारा शरीर हिल रहा था. “आह अंकित! ऐसे ही बेटा.” उसके मुंह से यही आवाज़ निकल रही थी.अंकित की इन सारी हरकतों ने उसके पूरे शरीर में आग लगा दी थी. वह पूरी तरह से गीली थी … वो बस अंकित को अपने अन्दर महसूस करना चाहती थी. वो अब और इंतज़ार नहीं कर सकती थी. उसने अपने आपको अलग किया और अंकित ने उसको ऐसे देखा जैसे उसकी दावत छिन गयी हो. उसने उसकी पैंट को पकड़ कर और उसकी बेल्ट को खोलना शुरू कर दिया. उसने जैसे बेल्ट को तोड़ते हुए पैंट के बटन और ज़िप को खोला और उसके लंड को निकल कर भूखी नज़रों से उसको देखने लगी. हालाँकि अंकित को किसी निर्देश की जरूरत नहीं थी लेकिन उसने फिर भी कहा- इसको निकालो! और बर्दाश्त नहीं होता अब. बाकी चीजें हम बाद में करेंगे. उसके लिए हमारे पास बहुत वक़्त है. लेकिन सबसे पहले मैं तुम्हें अन्दर महसूस करना चाहती हूँ. ये सब कहते हुए उसने उसकी पैंट और अंडरवियर को एक ही झटके में निकाल दिया. अंकित की मांसल टांगें और जांघें शबनम की आँखों के सामने थी. शबनम की आँखें उसकी टांगों के बीच के अंग से अलग ही नहीं हट रही थी. अंकित ने अपने कपड़े नीचे फर्श पर फ़ेंक दिए. शबनम के दिमाग में ये भी चल रहा था की अगर कोई आ गया तो क्या होगा. इसलिए वो सब कुछ जल्द से जल्द जल्द करना चाहती थी. वह उसके सामने नंगा खड़ा था. शबनम ने उसकी तरफ प्यासी निगाहों से देखा. उसकी सारी कल्पनायें सच हो रही थी. अंकित का लंड शबनम के चेहरे से कुछ इंच की दूसरी पर ही गर्व से खड़ा था. उसने अपना हाथ उसके लंड पर रख दिया और उसकी उभरी हुई नसों को अपनी उँगलियों के पोरों से महसूस करने लगी. उसको जी भरकर देखने के बाद उसने उसको धीरे से चूमा और फिर लंड के अगले हिस्से को अपनी जबान निकल कर चाट लिया. इसके स्वाद को महसूस करने के बाद उसके दिमाग में यही ख्याल आ रहे थे कि ये उसके मुंह और चूत में कैसा लगेगा. शबनम ने अंकित की तरफ मुस्कराते हुए देख कर यही सोचा. उसने अपना हाथ उसके पूरे लंड पर फिराते हुए धीरे से अपने मुंह के अन्दर ले लिया. उसको हल्के से चाटने के बाद उसने बाहर निकाला और उसकी तरफ देख कर कहा- अंकित! अब और इंतज़ार नहीं होता बेटा. उसको यह चिंता हो रही थी कि अगर कोई आ गया तो क्या होगा. उसके दिमाग में एक चीज़ के सिवाए और कुछ भी नहीं था. शबनम ने अंकित के हाथों को अपने हाथ में लेकर अपनी टांगों के बीच में रख दिया. उसने अपना सर उठा कर शबनम की तरफ देखा. वो धीरे से फुसफुसाई- खोलो इसको. उन दोनों के हाथ सलवार के नाड़े तक गए और आखिरी गांठों को खोल दिया. उसने अपनी टांगों से ही सलवार को दूर फ़ेंक दिया. अब वो केवल अपनी पूरी तरह से भीगी हुई अंडरवियर में थी. बिना एक भी सेकंड गंवाए उसकी उँगलियाँ इलास्टिक को नीचे खिसका रही थी. पूरी तरह से पैंटी को निकालने से पहले अंकित अपने चेहरे को नीचे ले गया और एक लम्बी सांस ली. वो इस खुशबू से पागल हो गया. ये कुछ ऐसा था जो उसने पूरी ज़िन्दगी में पहले कभी नहीं महसूस नहीं किया था. उसने अपनी जीभ से एक बार में उसकी पूरी चूत को चाटा और ना चाहते हुए भी शबनम के मुंह से एक लम्बी आह निकल गयी- आह! शबनम के मुंह से एक चीख सी निकली. अंकित ने शबनम की पैंटी को बिना कोई वक़्त गँवाए निकाल दिया और उसकी टांगों के बीच बसे उस गीले गर्म स्वर्ग को देखने लगा जिसमें वो कुछ ही देर में डुबकी लगाने वाला था. शबनम ने अंकित के भेड़िये जैसी भूखी शक्ल को देखा. वो पूरी तरह से अंकित के प्यार में थी. वो अब अगर चाहती भी तब भी खुद को रोक नहीं सकती थी. ना ही अब और ना कभी और. वो बेड पर थोड़ा पीछे खिसकी और अपनी उँगलियों से अपनी चूत के होंठों को खोलते हुए अंकित से कहा- आओ बेटा! डाल दो अब इसको अन्दर! और इंतज़ार नहीं होता! अपने बेस्ट फ्रेंड की माँ की चुदाई करना चाहते थे ना. आओ करो. ये सोच कर करो जैसे ये तुम्हारी ही माँ हों. डालो अन्दर इससे पहले की और देर हो जाए. अचानक वह उलझन में पड़ गया कि क्या करना है और क्या नहीं. उसे नहीं पता था कि उससे क्या उम्मीद की जा रही थी. उसकी झिझक को भांपते हुए उन्होंने कहा- घबराओ मत … बस मेरे पास आओ. बाकी सब मैं सिखा दूंगी. वह जानती थी कि उसे बहुत कुछ सिखाना है लेकिन अभी उसको उस लंड की उसके अन्दर जरूरत थी, वो और ज्यादा इंतजार नहीं कर सकती थी। अंकित से जैसा कहा गया उसने वैसा ही किया। अंकित ने अपने शरीर को नीचे सरका लिया। शबनम ने उसे अपने पैरों के बीच खींच लिया जहाँ उसकी फूली और गीली चूत उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। शबनम ने अंकित के दोनों होंठों को अपने मुँह में लिया और चूसते हुए उसके लंड को अपने हाथ में लिया और उसे ऊपर- नीचे अपनी चूत पर रगड़ने लगी. हर बार जब लंड उसकी चूत के दाने पर रगड़ रही थी उसकी सांस जैसे रुक सी जा रही थी. शबनम का सारा शरीर जैसे ऐंठ रहा था. पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ती हुई महसूस हो रही थी शबनम को. अंकित के लंड ने उसके पूरे शरीर में आग लगा रखी थी. अंकित के लंड के आगे का हिस्सा शबनम की चूत के इतना ज्यादा नज़दीक था कि वो अब उसकी उँगलियों की पकड़ में नहीं आ रहा था. इंतज़ार हद से ज्यादा बढ़ रहा था. शबनम ने और वक़्त ना लगाते हुए अंकित के लंड के सुपारे को अपनी चूत पर रखा और बोला- अब अन्दर धक्का दो बेटा! शबनम ने अपनी उँगलियों से ही लंड को थोड़ा सा अन्दर धक्का दिया और जवाब में अंकित ने एक तेज़ झटका दिया और उसका पूरा लंड शबनम की गीली चूत के अन्दर समा गया जैसे एक गर्म चाकू मक्खन को काट रहा हो. उत्तेजना में शबनम इतनी ज्यादा गीली थी की अंकित का लंड बिना किसी परेशानी के पूरा का पूरा अन्दर उतर गया. अंकित ने नीचे झाँक कर देखा तो तो उसका पूरा का पूरा लंड शबनम की चूत के अन्दर था और चूत के मुहाने पर केवल उसकी गेंदें दिख रही थी. उसका लंड लोहे जैसा कड़ा और मजबूत था. शबनम को महसूस हो रहा था जैसे कि उसकी चूत ने और ज्यादा फ़ैल कर इस लंड को अन्दर लिया था. उसको याद नहीं था कि कब उसकी चूत ने इस तरह से महसूस किया था. दर्द और आनन्द से उसके मुंह से एक लम्बी आह निकल गयी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… एक लम्बी चीख शबनम के मुंह से निकली. आज तक उसने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था. “आप ठीक हैं आंटी?” अंकित की आवाज़ में शबनम के लिए चिंता थी. शबनम को लगा कि अंकित सच में उससे प्यार करता है और उसकी परवाह करता है. वो केवल उसके शरीर के लिए उसके साथ नहीं है. उसे अपने ऊपर थोड़ा ग्लानि भी हुई. उसका दिल प्यार से भर गया. लेकिन उसने खुद को सँभालते हुए अंकित के होंठों पर एक गहरा चुम्बन देते हुए कहा- मैं बिलकुल ठीक हूँ बेटा. उसने मुस्कराते हुए जवाब दिया. शबनम की सांसें काबू से बाहर थी- अब इसको बाहर निकालो और फिर अन्दर डालो. ऐसे ही धक्के मारो बेटा. शबनम ने अंकित को समझाते हुए कहा. अंकित ने अपना लंड पीछे खींचा और फिर एक ही धक्के में फिर से अन्दर डाल दिया. एक बार फिर शबनम के मुंह से चीख निकल गयी- आह बेटा. कितना बड़ा है तुम्हारा. बहुत अच्छा लग रहा है. जवान लड़के ने पहले धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये लेकिन कुछ ही वक़्त में उसने रफ़्तार पकड़ ली. शबनम के हाथ अंकित के पीछे थे और वो लगातार उसी से अंकित को काबू में रखने की असफल कोशिश कर रही थी. वो बहुत तेज़ी से अपने लंड को अन्दर बाहर कर रहा था. शबनम को लगा कि अगर वो इतनी तेज़ी से करता रहा तो थोड़ी ही देर में काम तमाम हो जायेगा. शबनम ने अंकित के पिछवाड़े हाथ रखा और उसको अपने शरीर की तरफ खींचा. उसके होंठों पर एक गहरा चुम्बन देकर थोड़ा शांत किया. इस तरह से धीमे धीमे करने पर वो दोनों ज्यादा देर एक दूसरे का आनंद ले पाएंगे. अंकित के दिमाग में इस समय केवल शबनम को खुश करने का ख्याल था. अंकित कुछ ही देर में जीरो से सौ की स्पीड पर पहुँच गया था. हर बार जब अंकित धक्का मारता था जवाब में शबनम नीचे से अपने कूल्हों को उछाल कर उसका साथ दे रही थी. उन दोनों के पेट आपस में हर बार लड़ रहे थे और अंकित के गोले शबनम की जांघों पर चोट कर रहे थे. “ओह हाँ बेटा. ऐसे ही करते रहो. कितना बड़ा है तुम्हारा.” शबनम के स्तन हर धक्के के साथ उछल रहे थे. हर धक्के के साथ वो जोर से कराह रही थी. शबनम ने अपनी टांगों को और फैला लिया और अंकित की पीठ पर उसको रख दिया. शबनम ने अंकित को पकड़ कर और ज्यादा अपने अन्दर खींच लिया. अंकित का लंड अन्दर बाहर आ जा रहा था और उसकी निगाहें शबनम के उछलते हुए स्तनों पर थी. अंकित के कूल्हे पूरी ताक़त के साथ आगे पीछे हो रहे थे. वो शबनम के अन्दर की पूरी गहराई नाप रहा था और शबनम उसको वहां तक पहुँचने दे रही थी जहाँ तक आज तक कोई भी नहीं पहुंचा था. वो दोनों एक दूसरे को गहन वासना के साथ चोद रहे थे. कुछ ही धक्कों के बाद शबनम का पानी निकलने वाला था- ओह हां! जोर से कराहते हुए शबनम ने अपने कूल्हों को आगे की तरफ धकेला और अंकित के कूल्हों को पकड़ कर वहीं का वहीं रोक दिया. “आंटी मुझे अहसास नहीं था कि ये ऐसा होगा. मैंने जितना सोचा था, आपकी चूत उससे भी कहीं ज्यादा गर्म है.” अंकित को अहसास भी नहीं था कि उसने अभी अभी शबनम को क्या सुख दिया है. उन दोनों के बीच जितनी भी जगह बची थी, अंकित उसी में धक्के लगाये जा रहा था. “आह बेटा! कितना मजा आ रहा है.” शबनम ने अंकित को थोड़ा सा आज़ाद करते हुए बोला. वो नहीं चाहती थी कि अंकित रुके. वो चाहती थी कि अंकित इसी तरह करता रहे. शबनम की भावनाएं अपने चरम स्तर पर थी. शबनम ने जितनी कल्पना करी थी, अंकित उससे कहीं बढ़ कर था. शबनम को बिलकुल भी आश्चर्य नहीं हुआ कि उसका पानी पहले निकल गया. हालाँकि इससे पहले वो कभी भी इतनी जल्दी नहीं झड़ी थी. “आह अंकित! मुझे याद भी नहीं की आखिरी बार मुझे कब ऐसा महसूस हुआ था.” अंकित के धक्कों के बीच किसी तरह वो ये कह पायी. उसके मासूम चेहरे की तरफ देखते हुए शबनम ने कहा- इतना बड़ा है तुम्हारा. मुझे विश्वास भी नहीं हो रहा कि तुम मेरे कितना अन्दर तक जा रहे हो. “ये सब आपका है आंटी.” अंकित ने शबनम के कान में फुसफुसाते हुए उसके कान को अपने मुंह में रख कर चूस लिया. शबनम को लगा कि वो अपने आप को ज्यादा देर रोक नहीं पायेगी. अगर इसी तरह होता रहा तो ज्यादा देर नहीं जब उसकी चूत एक बार और पानी छोड़ देगी. अंकित ने अपने लंड को शबनम की चूत के अन्दर हिलाते हुए धक्के मारने चालू रखे. शबनम ने अपनी चूत को अंकित के लंड के इर्द-गिर्द थोड़ा अलग तरीके से हिलाते हुए कुछ ऐसा किया कि अंकित को लगा कि जैसे उसके लंड को चूसा जा रहा है. “और ये तुम्हारे लिए है बेटा!” शबनम ने अपना अनुभव दिखाते हुए अंकित को हैरत में डाल दिया था. “आज तक किसी ने मुझे ऐसा नहीं महसूस कराया बेटा!” शबनम ने अंकित की आँखों में देखते हुए उसको एक गहरा चुम्बन देते हुए कहा. शबनम को खुद पर हैरत हो रही थी कि वो अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ कैसा व्यवहार कर रही थी. हो सकता है कि ये अंकित है जिसकी वजह से वो उसके साथ इस तरह से पेश आ रही है. “हाँ बेटा! और जोर से धक्के मारो. ऐसे ही करते रहो.” वो अब जैसे चिल्ला रही थी. “कैसा लग रहा है आंटी आपको?” अंकित ने शबनम के कान में फुसफुसाते हुए कहा और शबनम की गर्दन पर गर्म गर्म सांसें छोड़ते हुए चूमने लगा. “उम्म!! मुझे ऐसा लग रहा है जैसे ज़िन्दगी में पहली बार किसी असली मर्द के साथ हूँ मैं बेटा.” शबनम ने किसी तरह फुसफुसाते हुए कहा. शबनम के कूल्हे लगातार अंकित के धक्कों का साथ दे रहे थे. शबनम ने अंकित के बाल पकड़ कर उसको अपने स्तनों की तरफ धकेल दिया. अंकित ने अपने होंठ खोल कर निप्पल को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा. अंकित ने जैसे ही शबनम के निप्पल को काटा, उसको लगा जैसे उसके शरीर में एक सनसनी सी दौड़ गयी हो. शबनम पूरी तरह से अंकित के कब्जे में थी. वो अंकित के धक्कों के जवाब में लगातार अपने कूल्हों को उछाल उछाल कर किसी तरह उसका साथ दे रही थी. वो लगातार आवाजें निकाल रही थी और अंकित उसके होंठों को चूस कर किसी तरह रोकने की कोशिश कर रहा था. उनके धक्कों से पूरा बेड हिल रहा था. अंकित किसी जानवर की तरह शबनम को चोदे जा रहा था और शबनम को उससे कोई भी शिकायत नहीं थी. शबनम को लग रहा था जैसे वो फिर से जवान हो गयी हो. शबनम ने अंकित के कूल्हों पर अपनी उँगलियाँ चुभा दी और अपनी टांगों से अंकित को और पास खींच लिया. वो चाहती थी कि वो पिघल कर उसके अन्दर समा जाए. वो अंकित का हिस्सा बन जाना चाहती थी या उसको अपना हिस्सा बना लेना चाहती थी. अंकित उसको कुछ ऐसा दे रहा था जो आज तक उसको किसी ने नहीं दिया था. शबनम के चूत से लगातार पानी निकल रहा था और जिससे अंकित का लंड और आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था. अंकित के हर धक्के शबनम को और जोर से चीखने के लिए मजबूर कर रहे थे- ओह अंकित!! आह बेटा!! ऐसे ही. रुकना मत बेटा. अपनी आंटी को सब कुछ दे दो. और फिर वो चीखने लगी- चोदो बेटा! और जोर से चोदो! सोचो जैसे तुम्हारी खुद की अम्मी यहाँ लेटी हुई है. सोचो की जैसे तुम सुमन(अंकित की माँ) की टांगों के बीच हो. सोचो कि तुम सुमन की गीली गर्म चूत में अपना लंड अन्दर बाहर कर रहे हो. और जोर से चोदो बेटा अपनी माँ को. मादरचोद!! और जोर से चोद अपनी माँ को. अंकित शबनम के शब्दों और व्यवहार पर हैरान था. हालाँकि वह उसको गालियां दे रही थी और उसकी माँ के बारे में बोल रही थी जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था. लेकिन शबनम की बातें उसको और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी और जैसे उसका लंड शबनम की बातों से चूत के अन्दर ही बढ़ रहा था. शबनम के शब्दों ने अंकित की उत्तेजना को कई गुना बढ़ा दिया था. उसने शबनम के कूल्हों को जोर से पकड़ा और और उसकी चूत पर लंड को रगड़ते हुए और जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए. शबनम ने ध्यान दिया कि उसके शब्दों ने अंकित पर जादू कर दिया है, उसके दिमाग में अब शरारत सूझ रही थी, उसने मुस्कुराते हुए कहा- आह! तो तुम अपनी माँ के साथ भी ये करना चाहते हो. मैंने सुमन का नाम लिया तो तुम्हारा लंड और ज्यादा कड़ा हो गया ना. तुम केवल मुझसे संतुष्ट नहीं होगे ना मेरी जान. यह कहकर शबनम ने अंकित के सर को पकड़ और उसके होंठों को लगभग चबाते हुए चूसने लगी. ये सारी बातें अंकित को और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी- आंटी, मेरे अन्दर कुछ हो रहा है. मुझे लग रहा है मैं खुद को और नहीं रोक पाऊँगा. क्या करूँ मैं? “आह अंकित! रुकना मत बेटा. ऐसे ही करते रहो. अपनी आंटी की प्यासी चूत में सारा रस डाल दो. आंटी की चूत बहुत प्यासी है बेटा.” वह कामुक आवाज़ में बोलते हुए अपने कूल्हों से और जोर से धक्के मारने लगी. वह कोशिश कर रही थी कि उसकी चूत का दाना अंकित के लंड के ऊपर के हिस्से से रगड़ता रहे. ये सब कुछ उसे किसी और ही दुनिया में भेज रहा था. अंकित अपने लंड को और ज्यादा से ज्यादा अन्दर डालने की कोशिश कर रहा था. वो लगातार अपने कूल्हों की सारी ताक़त लगाकर अन्दर धक्के मार रहा था. शबनम को लगा कि जैसे अंकित के साथ आज इतनी बार उसका पानी निकला है जितना पिछले 20 सालों में उसके शौहर के साथ नहीं निकला. अंकित ने शबनम के कूल्हों को पकड़ा और एक जोर का धक्का दिया- आह आंटी! उसके मुँह से एक अजीब सी आवाज़ आई और इसके साथ ही उसने अपने वीर्य की धार शबनम की चूत के अन्दर छोड़नी शुरू कर दी. जब शबनम को महसूस हुआ कि अंकित का वीर्य उसकी चूत के अन्दर गिर रहा है तो उसने अपनी तरफ से और धक्का देकर लंड को अपने ले लिया. अंकित कराहने की आवाज़ के साथ धीरे से शबनम के स्तनों की तरफ बढ़ गया और उसके निप्पल को चूसने लगा. शबनम पहले से ही मुहाने पर थी और इस हरकत ने सारे बाँध तोड़ दिए. शबनम की चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया और इसी के साथ उसने अंकित के लंड से उसके वीर्य को निचोड़ना शुरू कर दिया. वो चाहती थी कि वो अंकित को इसी जगह कैद कर ले और ये वक़्त यहीं पर थम जाए. जब अंकित का सारा वीर्य निकल गया तो वो थक कर शबनम के स्तनों पर हांफता हुआ गिर गया. उसका लंड अभी भी शबनम की चूत के अन्दर था. शबनम ने अंकित को गले लगा लिया और अपने हाथ से उसकी पीठ को सहलाने लगी. शबनम ने प्यार से अंकित की आँखों में गहराई से देखा और प्यार के साथ उसके दोनों गालों को चूमने लगी. अंकित को ऐसा लग रहा था जैसे उसके अन्दर कोई ताक़त ही नहीं बची है. शबनम ने खुद को धीरे से अलग करते हुए अंकित को हल्का सा धक्का देते हुए अपने बगल में गिरा दिया. उसके बाद उसने अंकित के चेहरे को पकड़ कर एक लम्बा गहरा चुम्बन उसके होंठों पर दे दिया. वो दोनों एक दूसरे की तरफ मुँह कर के लेटे हुए थे. शबनम ने अपनी एक टांग उठा कर अंकित के ऊपर रख दी और उसके और पास खिसक कर अपनी चूत को हल्के हल्के रगड़ने लगी. इसके साथ ही वो अंकित को लगातार चूमे जा रही थी. कुछ देर बाद जब उनकी सांसें काबू में आयी तो उसने कहा- ओह बेटा! क्या हो तुम … आज तक मैंने ऐसा महसूस नहीं किया किसी के साथ. आई लव यू सो मच. काश हम बहुत पहले ये कर लेते. “तो क्या आप बहुत दिनों से ये चाहती थी?” अंकित के सवाल पर शबनम थोड़ा शर्मा गयी और हल्की हंसी के साथ बोला- जिस दिन से मैंने तुम्हें बाथरूम में मास्टरबेट करते देखा था जब तुम आतिफ का इंतज़ार कर रहे थे. “सच में?” अंकित ने आश्चर्य के साथ शबनम की तरफ देखा. “हाँ … उस दिन के बाद से मैं तुम्हारे बारे में सोचना बंद ही नहीं कर पायी. लेकिन तुमने ही इतने दिन लगा दिए.” “तो आपने खुद ही मुझसे क्यूँ नहीं पूछा या कोई कदम नहीं उठाये?” अंकित ने हँसते हुए पूछा. “मुझमे शायद इतनी हिम्मत नहीं था. और मुझे लगा कि अगर तुम मना कर दोगे तो तुम्हारे मन में मेरे लिए जो इज्ज़त है वो भी ख़त्म हो जाएगी.” “काश आपने कर लिया होता.” “हाँ! तो ये वक़्त बर्बाद ना होता.” शबनम ने एक कामुक मुस्कान के साथ अंकित की तरफ देखते हुए कहा. “हाँ वो तो है.” अंकित ने एक अंगड़ाई के साथ कहा और शबनम को अपनी तरफ खींचते हुए उसके होंठों को देर तक चूमता रहा. “हायल्लाह! ये तो फिर से खड़ा हो गया.” शबनम ने हँसते हुए अंकित के लंड पर हाथ फेरते हुए बोला. अंकित पूरी तरह से शर्म के मारे लाल हो गया- क्या करूँ आंटी. आप हैं ही इतनी खूबसूरत. मुझसे रुका ही नहीं गया. “सच में?” शबनम ख़ुशी और शर्म के मिले-जुले स्वर में बोली. अंकित के चुम्बनों का जवाब देते हुए वो बोली- लेकिन अब मेरे अन्दर हिम्मत नहीं बची बेटा. तुमने मुझे पूरी तरह से सुजा दिया है नीचे. मैं चाहूँ तब भी नहीं कर पाऊँगी. “लेकिन अपने प्यारे बेटे को निराश तो नहीं कर सकती ना मैं!”

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