दोस्त की अम्मी जुबेदा




 मेरा एक दोस्त है राशिद। कॉलेज के जमाने में मेरा उसके घर आना जाना बहुत ज्यादा हुआ करता था। उसके घर में वह उसकी एक छोटी बहन उसकी अम्मी और उसके अब्बू रहते थे। उसकी अम्मी तो कमाल की चीज थी यार चलती थी तो गजब ढाती थी। वह मुझे पहले से ही बहुत पसंद थी क्योंकि वह शरारती बहुत थी। वह मुझे गले भी लगा लेती थी उनके यहां ऐसा करना सामान्य है। मैंने जबसे होश संभाला है तबसे राशिद की अम्मी आबिदा के बदन को देखकर मुठ मारी है। वो लोग बहुत अमीर है। राशिद मेरे साथ फार्मेसी कॉलेज में भी आ गया था जूनियर कॉलेज के बाद… लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर था और बाप के पैसों पर ऐश करते घूमता था। मैं उसके घर जाता था साथ में पढ़ाई करने। वैसे मैं भी घर से अच्छा हूँ लेकिन मुझे कोई फालतू शौक नहीं है मैं उसूलों के आधार पर अपनी जिंदगी जीता हूँ। खैर बात कुछ 3 साल पहले की है जब हमारे रिजल्ट आये थे। राशिद इस बार भी फेल हुआ था, मेरा रिजल्ट बहुत अच्छा था। मैं उसके घर मिठाई लेकर गया था। मई महीना था, उसकी बहन और उसके अब्बू आऊट ऑफ़ टाऊन उसके दादी के घर गए थे। घर में बस उसकी अम्मी आबिदा थी। राशिद सुबह से घर नहीं आया था उसे फोन करने पर पता चला कि वह दोस्तों के साथ कहीं घूमने गया था और तीसरे दिन सुबह आने वाला था। मैं जब उसके घर गया तो आबिदा आंटी ने दरवाजा खोला। वह तब ही नहा कर बाहर आई थी शायद क्योंकि उनके कपड़े और बाल गीले थे। क्या गजब की माल लग रही थी वह मेरा शेर तुरंत खड़ा हो गया था, उन्होंने शायद देख लिया था। वैसे वह हमेशा मझे देखकर मजाक में कमेंट्स देती रहती थी जैसे ‘कितना हैंडसम दिख रहा है आज तू जुबैर और तेरी तो बहुत सी गर्ल फ्रेंड्स होंगी!’ तो घर में कोई नहीं था, उन्होंने मुझे अंदर बुलाया। मैंने राशिद के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा- वह दोस्तों के साथ कहीं बाहर घूमने गया है। मैंने उन्हें बताया- फाइनल रिजल्ट आ चुका है और मेरे 79% आये हैं। वे सुन कर बहुत खुश हुई। मैंने उनके सामने मिठाई का डिब्बा खोला। उन्होंने कहा- राशिद ने तो कुछ बताया ही नहीं रिजल्ट के बारे में? शायद राशिद को भी पता नहीं होगा। आबिदा आंटी ने राशिद को कॉल किया तो उसने रिजल्ट की बात की ही नहीं और बताया कि वह महाबलेश्वर में है और दो दिन बाद आएगा और नेटवर्क का बहाना बनाकर फोन काट दिया। आंटी थोड़ी उदास तो हुई बेटे के लिए लेकिन फिर मुझे देख कर मेरी खुशी में लीन हो गई। वह खड़ी थी और जब मिठाई लेने आगे झुकी तो उसके मम्मे बिलकुल मेरे चेहरे के सामने आ गए। मैं हॉल में दीवान पर बैठा था। उन्होंने दुपट्टा नहीं ओढ़ा था घर में वे ऐसे ही रहती थी। मेरा जी ललचाया और थोड़ी सी हिम्मत करके मैंने अपना मुँह उसके चूचियों के और करीब कर दिया। वे शायद समझ गई और कुछ नहीं कहा उन्होंने बल्कि ऐसी ही पोजिशन में उन्होंने प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरना चालू कर दिया। उनकी इस हरकत से मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो गया क्योंकि यह मेरा पहली बार था जब कोई मस्त औरत मेरे इतने पास आकर मेरे साथ ऐसी हरकत कर रही हो। मुझे उनके जिस्म की खुशबू आने लगी। सच कहता हूँ मैं इतना मदहोश पहले कभी नहीं हुआ था। आंटी को मैंने कसके पकड़ लिया और उसके दूध पर अपना मुँह लगा दिया। वे तो एकदम से चौंक गई और मुझे डांटने जैसे स्वर में बोली- ये तू क्या कर रहा है? मैं तेरे दोस्त की अम्मी हूँ। राशिद को पता लग गया तो बहुत तमाशे हो जाएंगे। मैंने सोचा अगर उनकी तरफ से ना होता तो वह मुझे तुरंत थप्पड़ जड़ देती, चीखती चिल्लाती लेकिन उन्होंने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया बल्कि उनकी आवाज भी ऐसी थी जैसे गुस्सा लाना चाह रहीं हो लेकिन उन्हें असली गुस्सा आ नहीं रहा था, यह मैं समझ चुका था। मन में मैंने सोचा ‘बेटा जुबैर, यही चांस है, तू धावा बोल दे।’ इतने में मेरे तने हुए खड़े लंड से उठी हुई मेरी पैंट में देखकर उन्हें हंसी आ गई और वे चिढ़ाते हुई मुझे बोली- ओह! तो ये बात है! अपने दोस्त की अम्मी के बारे में ऐसा सोचता है तू? यह सुनकर तो मेरी और भी हिम्मत बढ़ गई। इसके पहले कि मैं कुछ करता उन्होंने मुझे दीवान पर पीछे धकेल कर लिटा दिया और कहने लगी- दूध पीना ही है तुझे मेरा तो फिर बीच में ये फौरमैलिटी क्यों? और यह कहते हुए उन्होंने अपना कमीज उतार फेंका अब वह सिर्फ ब्रा और शलवार में थी। ऐसे दूध पहले मैंने कभी किसी के नहीं देखे थे। मैं दंग रह गया बस घूर घूर कर देखने लगा तो उन्होंने ब्रा भी उतार फेंकी। इतना देखना था कि मैंने उनको खींच कर अपने नीचे ले कर उनके मम्मों पर टूट पड़ा। ऐसे चूस रहा था मैं उनके दूध कि मानो फिर कभी जिंदगी में नहीं मिलने वाले मुझे। उनकी चूचियों पर अपनी जीभ घुमा घुमाकर चाटता था, चूसता था और कभी कभी काट भी लेता था मैं… वे सिहर उठती थी। फिर मैं उनको चूमते हुए नीचे बढ़ा उनका पेट और नाभि में जीभ डाल कर चाटने लगा। वे मजे ले लेकर चिल्लाने लगी, सिसकारियां लेने लगी। मैंने उनकी शलवार नीचे खिसकानी चाही लेकिन मुझसे उतरी नहीं तो उन्होंने खुद ही अपनी शलवार का नाड़ा खोला और शलवार नीचे खिसका दी। मैं अब आंटी के पूरे बदन को चाटने लगा था, उनके होंठों पर अपना मुँह लगा कर चूमने चाटने लगा था मैं! वे आंखें बंद किए सिसकारियां ले रही थी बस। मैंने अब उनकी पैंटी नीचे खींची तो वो तो गीली हो चुकी थी। मैंने तब पहली बार किसी औरत की चूत असल में देखी थी। क्या लग रही थी यार… एकदम चिकनी मोटी उभरी हुई चमकती हुई गीली चूत। मैं अपना चेहरा उसके पास ले गया तो उसमें से भीनी भीनी खुशबू आने लगी थी। मैंने उसकी फाँकें फैलाई और चूत में अपना मुँह लगा कर अंदर जीभ डाल कर चाटने लगा। आंटी मेरे सिर को दबाने लगी थी और कहने लगी थी- आह जुबैर आह आआहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… उम्म और चाटो जुबैर… आआम आहा… और जोर से चाटो! मेरे शौहर तो अब चोदते भी नहीं, वो क्या खाक चाटेंगे! मैं खूब चाटने लगा आंटी की चूत… अपनी मोटी मोटी उंगलियां उनकी चूत में घुसेड़ कर अंदर बाहर करने लगा। वे मचलती जा रही थी। मैं चाटता रहा, चूसता रहा उनकी चूत। फिर बीच बीच में उनके मुँह तक जाकर उनके मुँह में अपने होंठ दे देता, वे मेरी गीली जीभ पर अपनी जीभ से चूमती चाटती जबकि मेरी जीभ तो उनीकी चूत के रस से भीगी हुई थी। इतना मजा आ रहा था कि क्या बताऊं अब। हम दोनों एक दूसरे के मुंह में मुँह डालकर एक दूसरे का थूक भी चाट रहे थे… उम्मम उम्म आम्म उम्मम… मजा आ रहा था इतनी सब गंदी हरकतें करते हुए भी। कभी मैं उनके पेट पर उनकी नाभि में जीभ डाल कर चाटने लगता तो कभी उनकी चूत की फांकों को अपने दांतों से नोच लेता। आंटी का बदन मानो अब भट्टी की तरह जलने लगा। मुझे लगा जैसे वे आग उगल रही हैं, तभी वे एकदम से सिहर उठीं और मेरे सिर को जोर से अपनी चूत पर दबाने लगी और इतना पानी छोड़ी उन्होंने जैसे मूत रही हो। मैं उनका पूरा रस चाटने लगा। मेरा चेहरा उनके चूत के पानी से गंदा हो गया था। आंटी उठीं और मेरे गंदे चेहरे को चाटने लगी। चाटते हुए उन्होंने मेरा शर्ट निकाल फेंका और मेरे सीने को चूमने चाटने लगी। उन्हें बड़ा मजा आ रहा था, वे मुझसे कहने लगी- आज से तू राशिद का बाप और मेरा शौहर है। उनके मुँह से ऐसी बातें सुनकर मैं और ज्यादा रोमांचित हो उठा। मेरा मस्त हजरत लंड पैंट में इधर उधर झूलने लगा। उन्होंने मुझे धक्का देकर हॉल में दीवान पर ही लिटा दिया और मेरी पैंट खींचकर निकाल ली। चड्डी में से मेरा 3.5″ मोटा और 8″ इंच का लंबा असली लंड साफ नज़र आ रहा था। उन्होंने पहले उस पर हाथ फेरा और चड्डी के ऊपर से ही चाटा दो तीन बार और फिर मेरी अंडर विअर खींच कर उतार ली। जैसे ही चड्डी उतरी मेरा लंबा चिकना चिकना मोटा सांवला लंड फनफनाते हुए बाहर कूद पड़ा, उसे देखकर आंटी कहने लगी- हाय कितना लंबा और मोटा लंड है तेरा जुबैर! इतना मोटा ऊपर का सुपारा इस्ससऽऽऽ हाय मैं मर जांवा। ऐसे लंड ही पसंद आते हैं हम जैसी गर्म औरतों को… साले चोदने को आलवेज रेडी! वे कहने लगी कि अब वे मेरी रखैल बन चुकी हैं और फिर उन्होंने मेरे लंबे मोटे चिकने लंड पर थूका और अपने चेहरे पर मलने लगी, फिर मुँह खोल कर मेरा लंड मुँह में ले चाटने लगी, चूसने लगी। मुझे तो बड़ा मजा आ रहा था। मैंने पहले पॉर्न मूवी में देखा था लेकिन अब तो यह मेरे साथ रियल में हो रहा था। मैंने पॉर्न मूवी की तरह ही उनके बाल अपनी मुठ्ठी में समेटे और उनके गले में अंदर हलक तक घुसेड़ दिया अपना मस्त हजरत लंड। वे खांसने लगी और इशारे से बताया कि बाहर निकाल। मैंने सुना नहीं और फिर और ज्यादा अंदर पेल दिया। उनकी आँखों में आँसू देखकर मैंने उनको ‘सॉरी आबिदा आंटी’ कहा। थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे लंड को फिर से चूसना शुरू कर दिया। वह मेरे नीचे के बॉल्स भी चाट रही थी जोर जोर से आवाजें करते हुए। मैं एक्ससाईटेड हो गया और उनके बाल पकड़ कर खींच खींचकर उनके मुँह के अंदर जोर जोर से झटके मारने लगा। मुझे अब भी याद है उनका चेहरा पूरा लाल हो गया था। मैं ने उनका मुँह ही इतनी जोर से चोद दिया कि वह रोने चिल्लाने लगी। चोदते चोदते कब मैं उफान पर पहुंचा पता ही न चला और फिर मैंने ढेर सारा गाढ़ा गाढ़ा सफेद रस उनके मुँह में और चेहरे पर ही छोड़ दिया। उन्होंने मजे से मेरी गाढ़ी मलाई चाटी और हाँफते हुए हम दोनों वहीं लेट गए। लेटे लेटे वे मुझे बताने लगी कि उनके शौहर उनको संतुष्ट नहीं कर पाते हैं। जबसे शादी हुई तब से ही वे सेक्स में फिसड्डी रहे हैं। राशिद तो एक दरवेश की औलाद है किसी दरगाह वाले फकीर ने अपना चमत्कार बता दिया था। आंटी कहने लगी कि मैं उन्हें पहले से पसंद था लेकिन वे पहल करने डरती थी कि कहीं कोई ऊंच नीच हो गई तो उनकी बदनामी हो जाएंगी। मैं समझ रहा था उनकी बात को और उनको अपनी बांहों में भर कर प्यार करने लगा. मैंने उनसे कहा- अब से आपको चुदाई की फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं। मैं आपको इतना प्यार दूंगा आबिदा आंटी कि आपको ऐसा लगेगा कि इतने साल प्यासी रहने पर ऊपर वाले ने तुम्हें ऐसे मजे देने वाला साथी दे दिया कि अब तुम पहले के बारे में सोचोगी भी नहीं। उनको अपनी प्यारी बातों से लगातार चुम्मा चाटी करते हुए मैंने उन्हें फिर गर्म कर दिया था। दस मिनट के अंदर ही उन्होंने फिर से मेरा लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, उस पर वे थूक टपकाती और मजे ले लेकर चूसती और कहती कि ‘लंड हो तो ऐसा!’ फिर आंटी बेड पर लेट गई और अपनी टांगें फैला कर मुझे कहने लगी- आजा मेरे राजा, तेरी प्रॉपर्टी पर अपना हक जमा ले। मैं उनके ऊपर चढ़ गया, आंटी की चूत फैलाई और फिर से चाटने लगा। जब वे पूरी गर्म हो गई तो कहने लगी- अब और मत तड़पा रे मेरे बेटे राजा। वे खुद के होंठ काटने लगी। मैंने देखा कि ‘लोहा गर्म है हथौड़ा मार दिया जाए।’ तो मैंने उनकी चूत फैला कर उसमें इतनी जोर से अपना लंड घुसेड़ा कि उन्होंने ऐसे चिल्लाना शुरु कर दिया कि मुझे तो लगा कि साली मर न जाए कहीं। मैंने उनकी कमर मजबूती से पकड़ कर और ऐसा एक जोरदार झटका मारा अंदर कि इस बार पूरा अंदर घुस गया। आंटी रोने लगी, छटपटाने लगी। मैंने कहा- आंटी आप कुँवारी तो हैं नहीं? फिर क्यों इतना छटपटा रही हो? तो वे कहने लगी- साले कमीने… मैं कई सालों बाद चुद रही हूँ और तेरा लंड है या लोहे का कोई खंबा? मैं अब तेरे जैसे मूसल जैसे लंड से कभी नहीं चुदूंगी. मैंने उनको तसल्ली दी- कुछ नहीं होगा जानेमन… बरदाश्त करो थोड़ा… बाद में आदत हो जायेगी। मैं उनके निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा, उनके होंठ काटता… किस करने लगा बहुत… उनको अपना थूक चटवाने लगा उनके चेहरे पर थूक कर। फिर मैं उनके कान की लोलियाँ काटने लगा, उनकी चूचियों को मसलने लगा जैसे अगर चूचियाँ कोई जानदार चीज होती तो उसका गला घोंट कर मार डालूँगा। अब वे फिर से मचलने लगी तो मैंने अपना अंदर ठूंसा हुआ खड़ा मोटा जालिम खूँखार लंड अंदर बाहर करना चालू कर दिया। आंटी को मजा आने लगा तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। घपाघप अंदर बाहर हो रहा था मेरा मोटा लंड आंटी की चूत में और वे जोर जोर से चिल्लाये जा रही थी अब, कहने लगी- आआह आआ आह उम उम्मम मम उम्म उम्म आआह चोद साले दरिंदे और चोद अपनी रखैल को ऐसे ही! बीच बीच में मैं उनके होंठों को अपने मुँह में लेकर चूसता, हम दोनों आपस में एक दूसरे की जीभ से जीभ लगा कर चूमा चाटी करते। उम्म… बड़ा मजा आ रहा था यार ऐसे एक दूसरे का थूक पीकर। मैं उनके मम्मे मसलता जोर जोर से… उनके निप्पल काटता और फिर उसके दूध पकड़ कर जोर जोर से झटके मारने लगा था उनकी चूत में। अब तो ऐसे स्पीड से सटासट अंदर बाहर हो रहा था मेरा जालिम लंड कि अब उनकी चीखों से पूरा कमरा गूंज उठा था। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि उसका बदन इतनी हीट से कहीं जल न उठें और कहीं वे बीमार न पड़ जायें। मानो उसकी चूत नहीं बल्कि कोई भट्टी हो और जैसे मैंने माइक्रोवेव ओवन में अपना लंड डालकर भूनना चालू कर दिया हो। फिर तो कुछ जोरदार झटके मारने के बाद उन्होंने मेरे मुँह में अपना मुँह डाल दिया और उनकी चूत से रस की धारा बहने लगी। आंटी ऐसी आवाजें निकाल रहीं थी जैसे पहली बार बहुत ज्यादा पीकर नशे में धुत्त हों। चूत से रस बहाता हुआ और वह आवाजें करता हुआ चेहरा मुझे आज भी याद है। मैंने उन्हें झड़ने के बाद भी चोदा और फिर मेरे लंड की मलाई आबिदा आंटी की चूत में ही गिरा कर उसके पास लेट गया। अब मैंने आंटी को पूछा- कैसा लगा मेरे साथ सेक्स करके आपको? तो वे सच में यह बोली थी- जुबैर तेरा रिजल्ट है बेहतरीन तो होगा ही न! इस तरह मैंने आबिदा आंटी को उस दिन पहली बार चोदा था। इस कहानी में तो मैंने एक ही बार का वर्णन किया है। उसके बाद तो मैंने आंटी को किचन, बेडरूम और बाथरूम में भी चोदा था। और उसके बाद ऐसे ही मैंने उन्हें कई बार और चोदा, जब भी आंटी घर में अकेली होती थी तो मुझे बुला लेती थी

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