दोस्त की हॉट मॉम






मैं मेरी मॉम के बारे में बता दूँ कि मेरी मॉम का नाम निशा है और उनकी उम्र अभी 41 साल है. वो बहुत शानदार माल लगती हैं. मैं जब 11वीं क्लास में था, तब मैंने उनके नाम की पहली बार मुठ मारी थी. उनकी शादी 19 साल में हो गयी थी और उनका फिगर 34-32-36 का है. वे एकदम दूध की तरह गोरी हैं. अभी पिछले दो साल से वे मेरे पापा से अलग हो गई हैं. इसका कारण उनकी आपसे अनबन थी. अब चलिए सेक्स कहानी के सफर में मजा लेने चलते हैं. मैं हर रोज मॉम को चोदने के सपने देखता था. एक दिन मेरी एक लड़के नामित से दोस्ती हुई, वो बंगाली था.. पर हिंदी बहुत अच्छे से जानता था. वो कोलकाता से था. जब वो मुझे ठीक लगा तो उसके साथ मेरी दोस्ती हो गई. एक बार उसने अपनी मुझे मॉम नेहा की फ़ोटो दिखाई. उसकी मॉम नेहा भी बहुत सेक्सी थीं. उसने अपनी मॉम की चुदाई के बारे में मुझे बताया कि वो अपनी मॉम को चोद चुका है. उसकी इस बात को सुनकर मुझे अपनी मॉम का ख्याल आने लगा और मैंने उससे इस बारे में कुछ चर्चा की, तो उसने मुझे दिलासा दिया कि ठीक है वो कुछ करेगा. इसके बाद से वो मेरे घर आने लगा और उसने मेरी मॉम से काफी नजदीकी बना ली. उसी ने मुझे बताया कि मेरी मॉम उससे काफी खुल गई हैं और जल्द ही उनके साथ सेक्स की स्थिति बन जाएगी. मैं बड़ा खुश हुआ और जल्द ही पूरा प्लान बन गया. उसने अपनी मॉम को हमारा साथ देने के लिए मना लिया था. हमने उसके घर कोलकाता जाना था, मैंने अपनी मॉम के साथ कोलकाता जाने का तय कर लिया, मॉम भी कोलकाता घूमने के किये वहां जाने को तैयार हो गई थीं. उसके बाद में अपनी मॉम को लेकर सीधे कोलकाता पहुंचा. नामित हमें लेने वहां स्टेशन आया था. हम उसकी कार में सीधे उसके घर पहुंच गए. मैं उसके घर में जाकर ड्राइंग रूम में बैठा और उसकी मॉम को देखा. सच में उसकी मॉम भी एक गजब माल लग रही थीं. नामित की मॉम नेहा ने हमें पानी आदि दिया फिर वो हमारे लिए जूस ले आईं. उसकी मॉम नेहा ने मेरी मॉम के जूस में पहले ही सेक्स बढ़ाने वाली दवा को डाल दिया था और वो भी डबल डोज़ डाला था. उसके बाद मैं मॉम को वहीं छोड़ कर अपने दोस्त के घर के लिए कुछ मिठाई लेने के बहाने घर से निकल आया. फिर नेहा आंटी ने मेरी मॉम को नहाने का बोला और सीधे बाथरूम ले गईं. वहां वो उनको नल चालू करके फंक्शन बता ही रही थीं कि तभी अचानक शावर चालू हो गया और मॉम भीग गईं. उनको भीगा देख कर नेहा आंटी ने कहा- अब तुम भीग तो गई ही हो, तो चलो तुम पहले अच्छे से नहा ही लो. मैं जाती हूँ. यह कह कर आंटी बाथरूम से बाहर निकल गईं. अब मॉम ने नहाना शुरू कर दिया लेकिन तभी उनको कपड़ों की याद आई. उनको नहाने के बाद कपड़े चाहिए थे तो उन्होंने नेहा आंटी को आवाज़ दी. नेहा आंटी ने कहा- कपड़े का बैग गाड़ी में है.. जो विराट ले गया है. अभी आप मेरे कपड़े पहन लो. इस तरह नेहा आंटी ने मॉम को एक टी-शर्ट दे दी, जो खाली घुटनों तक ही उनके शरीर को ढक पा रही थी. फिर मॉम ने उसे ही पहना और इस समय उन्होंने ब्रा पैंटी भी नहीं पहनी थी. जब वो कपड़े पहन कर अन्दर बेडरूम में गईं, तो वहां मेरा दोस्त नामित पहले ही अपना लंड निकाल कर टीवी पर पोर्न चालू करके देख रहा था. मेरी मॉम को तो वैसे ही दवा के कारण सेक्स चढ़ रहा था.. और पोर्न देखने से वे और भी ज्यादा गरमा गईं. तभी अचानक नंगा नामित पीछे को मुड़ गया और मॉम उसका लम्बा लंड देखते रह गईं. नामित का 8 इंच का लम्बा खड़ा लंड फनफना रहा था.
 उस वक्त मॉम की चूत से पानी टपक रहा था, जो नामित ने देख लिया था. अब नामित ने अपने लंड को हिलाते हुए मुठ मारी और फुल जोश में माल निकाल दिया.. जो सीधे मॉम के चेहरे पर जाकर पड़ा. मॉम ने अपने चेहरे से बड़ी कामुकता से अपने चेहरे से नामित के वीर्य को उंगली से उठाया और चाट लिया. ये देख कर नामित ने आगे बढ़ कर मॉम की चूची मसल दी. अब उन दोनों में सेक्स का खुमार चलने लगा था. मॉम ने बैठते हुए उसका लौड़ा पकड़ कर अपने मुँह में भरा और चूसने लगीं. मेरी मॉम को सेक्स चढ़ चुका था, दो मिनट लंड चुसवाने के बाद नामित ने उन्हें अपनी बांहों में उठा लिया और सीधे ले जा कर बेड पर पटक दिया. अब उसने मॉम को एक ही झटके में उनकी टी-शर्ट खींचते हुए पूरी नंगी कर दिया. इसके आगे की कहानी आप मेरी मॉम की जुबानी सुनिएगा. मैं (निशा) अब अपनी कन्ट्रोल से बाहर हो चुकी थी. नामित मुझे बहुत मजे दे रहा था. उसने मेरी टांगों को खोला और मेरी गर्म गीली चूत में सीधे अपनी जीभ डाल दी. उसकी लपलपाती जीभ को जैसे ही मैंने अपनी चूत पर महसूस किया, मैं एकदम से सिहर उठी. मेरे मुँह से सीत्कार निकलने लगी- आआहहह… उफ़्फ़.. चूत चूसने के साथ ही वो मेरे मम्मों को अपने दोनों हाथों को ऊपर करके मसल रहा था. नीचे जीभ से मेरी चूत को चूसे जा रहा था. मैं अपने हाथ से चादर को भींच रही थी और अब 20 मिनट की घमासान चूत चटाई के बाद मेरी चूत का बाँध टूट गया.. चूत बहने लगी. नामित मेरा सारा माल पी गया. अब तक उसका लंड पूरा खड़ा हो चुका था और उसने तुरंत उसे मेरे मुँह में पेल दिया. मैं मजे से उसके लंड को चूसने लगी. लंड चूसते समय मेरे मुँह से ‘गुप्प.. ग्प्प्प.. छप्प..’ की आवाज आ रही थी. लंड चूसते समय मैं उसके आंडों को भी चाट रही थी. उसने भी मेरे मुँह को चूत समझ कर चोदना शुरू कर दिया था. वो अपने लंड से मेरे मुँह में धक्के पर धक्के मारे जा रहा था और साथ ही मेरे मम्मों को बड़ी बेदर्दी से मसले जा रहा था. लेकिन दवा के गहरे असर के कारण मुझे इस वक्त उसका यूं मम्मों को भींचना बड़ा सुकून दे रहा था. करीब दस मिनट उसने अपने लंड से लंबी धार छोड़ते हुए अपना पूरा माल मेरे मुँह में ही छोड़ दिया. 
एक एक बार हम दोनों का माल निकल जाने से मैं और वो निढाल पड़े थे. मैंने उसे बताया कि मैंने पूरे दो साल बाद इतने अच्छे से पानी निकला है. पर अभी भी मेरे ऊपर से दवा के असर के कारण चुदास कम नहीं हुई थी. दवाई के असर के साथ ही दो साल बाद की मेरी प्यास भी अपनी अंगड़ाई लेने लगी थी, मैंने नामित से बोला- अब मुझे पूरा तृप्त करो. उसने बोला- बाहर विराट आ गया होगा और मेरी मॉम भी सोच रही होगी कि मैं कहां हूँ तो अभी रुक जाओ.. रात को चुदाई का मजा करेंगे. इतना कह कर वह बाथरूम में घुस गया. कुछ देर बाद हम दोनों बाहर आ गए, तब विराट बाहर टीवी देख रहा था. उसने बताया कि अभी अभी नेहा आंटी अपने रूम में सोने गयी हैं. अब मैं बैठ कर टीवी देखने लगी. तभी नामित आ गया.. वो भी बैठ गया. कुछ देर बाद विराट बोला- चलो, कहीं घूम कर आते हैं. मैं बोली- मुझे मन नहीं है, तुम और नामित चले जाओ. तो नामित बोला- चल भाई, आते हैं.. और वह उसके साथ चल दिया. उसके बाद मैं नामित को याद करते करते नेहा के रूम में ही सो गई. फिर रात को 9 बजे मुझे नेहा ने जगाया और बोला- चलो खाना खा लेते हैं, नामित और विराट भी आ गए हैं. हम सब खाना खाने बैठ गए. इस वक्त मैं नामित को और वो मुझे वासना भरी निगाहों से घूरे जा रहे थे. तभी नामित ने अपनी जेब से दो गोलियां निकाली और मेरे पानी के गिलास में डाल दीं. मैं समझ गई कि ये कामवासना बढ़ाने वाली दवा डाली गई है. मुझे इस वक्त चुदाई के सिवाए कुछ नहीं सूझ रहा था. मैं नामित के सामने ही पानी का गिलास पूरा पी गई. जिसमें वो दवा भी घुल चुकी थी. खाना खाने के बाद नामित बोला- चल भाई विराट, बाहर बैठते हैं. वो दोनों हॉल में बैठ गए और मैंने और नेहा ने सब बर्तन साफ किये और रसोई का काम निपटाया. फिर नेहा बोली- तुम भी जाओ.. वहां बैठो उनके पास, मैं आती हूँ. मैं भी उन दोनों के पास जा बैठी. वे लोग वहीं बैठे शराब पी रहे थे और टीवी देख रहे थे. थोड़ी देर बाद विराट बोला- यार, मैं तो थक गया, मुझे नींद आ रही है और शराब भी चढ़ गई है. नामित उससे बोला- तू ऊपर मेरे रूम चला जा और वहीं सो जा. 
वो चला गया और कमरे में जाकर सो गया. मैंने नामित के सामने अपने दूध मसलते हुए से पूछा- मेरा काम कब करोगे.. जल्दी करो न. तो उसने बोला- रुक जा मेरी जानेमन … अभी एक खेल दिखाता हूँ. उसने अपनी मॉम नेहा को बुलाया और बोला- मॉम, आंटी को आपकी वो सफेद वाली नाइटी दे दो. वो मुझे ले गयी और उसने मुझे नाइटी दे दी. ये नाइटी एक नेट वाली थी. मैंने नाइटी को पहना तो इसमें से मेरी बॉडी पूरी झलक रही थी. नाइटी पहनते वक्त मैंने ब्रा पैंटी भी नहीं पहनी थी, उसके चलते मेरा पूरा शरीर लगभग नंगा दिख रहा था. नेहा ने मेरे बदन को निहारा और मुस्कुरा कर बोली- चलो यार, मैं भी थक गई हूं, मैं तो सोने जा रही.. अब तुम भी गेस्टरूम में जाकर सो जाओ. यह रूम उसके कमरे के बगल में ही था. मैंने उसकी तरफ देखा तो बोली- यार मुझे रात में जरा फैल कर सोने की आदत है.. तुम्हें दिक्कत न हो इसलिए कहा है. उसकी बात सुनकर मैं बाहर आ गई. वहां इस नाइटी में देख कर नामित मुझे देखता ही रह गया. उसके मुँह से लार टपक रही थी. मैंने उसे एक धीरे से गाल में प्यार से चपत मारी और कहा- चलो अब क्या देखते ही रहोगे. उसने मुझे फिर से अपने हाथों में उठा लिया और रूम में ले गया. वह रूम देखकर मैं चौंक गयी. वो पूरा गेस्ट रूम सुहागरात वाली स्टाइल में सजा हुआ था. उसने मुझे बेड पर लिटाया और चूमते हुए बोला- आज रात तुझे पूरी तरह तृप्त करूँगा मेरी जान. यह कहते हुए वह तुरंत नंगा हो गया और उसने मेरी नाइटी भी उतार कर फेंक दी. अब वो मेरे ऊपर चढ़ गया और मुझे किस करने लगा. “ऊऊम्म्म.. मआआह…” उसने जबरदस्त तरीके से चूमना शुरू कर दिया था. वो मेरे होंठों को तो लगभग खाए ही जा रहा था. मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी. मेरी दवाई अब और असर करने लगी और मेरे अन्दर क्या मस्त चुदास की आग भड़क गई थी. मैं उसी वक़्त नामित के पास बैठते हुए उसका लंड सीधे अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. दो मिनट में ही नामित का लंड एकदम कड़क हो गया था. उधर वो भी मेरे मम्मों को मसल रहा था. मैंने उससे कहा- अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा.. मेरी चूत में अपना लौड़ा डाल जल्दी से. तो उसने बोला इतनी जल्दी नहीं जानेमन.. अभी तो तेरे को तड़पाऊंगा और पूरा मजा दूंगा. उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में घुसेड़ दीं. मैं सिहर उठी- आआ उम्म्ह… अहह… हय… याह… आ हहह.. वो मेरी चूत में उंगलियों को बड़ी तेजी से अन्दर बाहर कर रहा था. लेकिन अब मुझे लंड चाहिए था, मैंने कहा- नामित बेटा.. प्लीज मुझे लौड़ा का मजा दो. तो उसने कहा- ठीक है.. चलो आप घोड़ी बन जाओ. मैं चुदास से बावली हुई जा रही थी तो झट से घोड़ी बन गयी. अब वो खड़ा हुआ और मेरे पीछे आ गया. मैं तैयार थी, पर उसने अपना 8 इंच का लौड़ा सीधे मेरी चूत की जगह गांड में पेल दिया. मेरी चीख निकल गयी- आआह.. आह.. मैं मर गयी.. इससे पहले मेरी गांड 10 साल पहले चुदी थी.. तो मेरी गांड का छेद एकदम सिकुड़ गया था. मैं तो मर ही गयी, मुझे ऐसा लगा कि आज पहली बार मेरी गांड मरी. “आ ह आ हहहहहह…” मैं दर्द से कलपती रही और वो मेरी गांड मारता रहा. मैं चीखती रही- ऊउफ़्फ़.. आह.. ऊउफ़्फ़.. फिर 20 मिनट बाद वो रुका और बोला- चल अब लेट जा.. और अपनी एक टांग मेरे कंधे में डाल दे. मैंने वैसा ही किया और अब मेरी चूत एक बार पानी छोड़ चुकी थी तो पूरी तरह गीली थी. उसने अपना लौड़ा चूत की फांकों में लगाया और एक धक्का मारा. इस पहले धक्के में उसका सिर्फ सुपारा ही अन्दर गया. साले का बहुत मोटा सुपारा था.. किसी आंवले जैसा था. मुझे दर्द हुआ, तो मैं फिर से चीखी. उसने बोला- इतनी टाइट चूत.. बिल्कुल कुंवारी सी लगती है. मैंने बोला- बेटा, मैं दो साल से नहीं चुदी हूँ. उसने यह सुनकर एक जबरदस्त झटका मारा और उसका आधा लौड़ा घुस गया. “उफ़्फ़..” मेरी सिसकारियां तेज हो गईं.. और मेरी खुशी सातवें आसमान में पहुंच गयी. दो साल बाद इतना मस्त लौड़ा मेरी चूत में गया था. इस मस्त चुदाई से मैं निहाल हो चली थी. जबकि दो साल से चुदाई न होने पर मैंने तो यही सोच लिया था कि अब मेरी चुदाई कभी नहीं होगी, पर इतने अच्छे लौड़े से चुद कर तो मुझे मानो जन्नत मिल गई थी. अब मैं चिल्लाई- आआह.. आह.. बेटा लगा जोर से.. आह.. फाड़ दे चूत मेरी आज.. नामित ठोकर मारते हुए बोला- अभी देख जानेमन.. चूत का भोसड़ा बना कर ही दम लूँगा. अब मेरा जोश और बढ़ गया. तभी उसने एक और करारे धक्के में पूरा लंड अन्दर घुसा दिया और लंड सीधे बच्चेदानी में टच हो गया. “उफ़्फ़ उफ़ आआआ हहहह.. और जोर से बेटा आआह…” नामित ने अपनी स्पीड बढ़ा दी, मैं और चीखने लगी और सिसकारियां लेने लगी ‘ऊऊऊ हहहह अअअअ हहहह…’ मुझे बहुत मजा आने लगा था. नामित के लगातार 60-70 धक्के के बाद मेरा बांध टूटा और मैं झड़ गयी. तभी नामित भी मेरे साथ ही झड़ गया और उसने अपना पूरा माल मेरी चुत में ही छोड़ दिया. वो मेरे ऊपर ही लेट गया और बोला- आंटी, तुम बहुत गजब की माल हो इस उम्र में भी … जानेमन मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ..अब आप मेरे से सुनिए कि मैं और नेहा आंटी क्या कर रहे थे. जब नामित और मॉम रूम में मदमस्त चुदाई का खेल खेल रहे थे, तब मैं और नेहा आंटी खिड़की से उनकी हर हरकत देख कर अपनी हवस की आग में भड़क रहे थे. मैं आप सबको बात दूँ कि मेरी मॉम बहुत ही सीधी और संस्कारी औरत हैं. उन्होंने अब तक केवल मेरे पापा से ही अपनी आग मिटाई थी और उन्हें सेक्स का असली मजा मिला ही नहीं था. अब उन्हें इस टाइप के मजे के लिए तैयार करना बहुत ही कठिन था. वो तो नेहा आंटी ही थीं, जो ये सब कर रही थीं. नेहा आंटी की वो सेक्स के लिए उत्तेजित करने वाली दवाई ने अपना कमाल दिखा दिया था. अब नेहा आंटी ने जब देखा कि मॉम इतने गंदे तरीके से चुद रही हैं, तो उन्होंने तुरंत मेरा लंड हाथ में ले लिया और हिलाने लग गईं. मैं तो पहले ही नंगा हो चुका था और मॉम को देखकर इतना उत्तेजित था कि जैसे ही नेहा आंटी ने मेरा लंड पकड़ा, मैंने तुरंत उनको भी नंगी कर दिया और सीधे उनके बूब्स चूसने लगा ‘उम्म उम्म उम्म ….’ नेहा आंटी के बूब्स बहुत ही टाइट और मजेदार थे, उनके निप्पल भी बहुत बड़े थे. मैं उनके दोनों निप्पलों को बारी बारी से अपने मुँह में गपागप चूसे जा रहा था.
पड़ोसन आंटी के साथ मज़ा आने लगा पहेली बार - अक्तूबर 31, 2020
उधर नेहा आंटी निशा को अपने बेटे के साथ देखकर और उत्तेजित हो रही थीं. मैंने देखते ही देखते अपनी एक उंगली नेहा आंटी की चूत में घुसेड़ दी, वो चीखने वाली ही थीं कि मैंने उनके रसीले होंठों को अपने होंठों में लगाकर चूस डाला. ‘अहहहह आह … उम्म …’ इसके बाद मैं अपनी उंगली अन्दर बाहर कर रहा था कि नेहा आंटी झड़ गईं. मैं भी झड़ने वाला था … तो मैंने नेहा आंटी की गर्दन पकड़ कर बोला- चल अब मेरा लंड चूस. नेहा आंटी झट से वहीं नीचे जमीन में बैठ कर मेरा लंड चूसने लगीं और मैं उनके बूब्स मसलने लगा. मुझे लंड चुसवाते समय उनके मम्मों को मसलने में बहुत मजा आ रहा था. वो इतने मजे से मेरे लंड को चूस रही थीं और सामने मॉम की ऐसी चुदाई देखकर तो मेरा लंड एकदम से गरम हो गया. मेरा तो क्या, सामने ऐसा सीन देख कर किसी का भी लंड सिर्फ हाथ से ही झड़ जाए, यहां तो नेहा आंटी इतनी सेक्सी मदमस्त तरीके से लंड अपने मुँह से चूस रही थीं. लंड के मुँह से चुसाई का आनन्द मिल रहा था … साथ ही उनकी मादक आवाज़ ‘गुप् हूप जीप उम्म अअअअ मुहां … अह उउम्म …’ इतनी अधिक कामुकता बरस रही थी कि मैं उसी पल आंटी के मुँह में ही झड़ गया. नेहा आंटी ने भी मेरे लंड का सारा माल पी लिया. उन्होंने मुझे लंड बाहर निकालने ही नहीं दिया. हमारी चुदाई के बाद जब हमने वापस अन्दर देखा तो हम तो फिर से उत्तेजित होने ही वाले थे क्योंकि अन्दर मॉम अपने पेट के बल लेटी थीं और नामित उनकी दोनों टांगें फैला कर अपनी जीभ से उनकी गांड के छेद को चाट रहा था. ‘हहहह आह …’ अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था. मॉम के इतना गोरे और उभरे हुए चूतड़ देखकर मैं और नेहा आंटी एक दूसरे को देखते रहे. फिर उनको नामित से चुदते देखते हुए मैं इधर नेहा आंटी की गेंदें दबा रहा था. नेहा आंटी मेरे लंड को मसल रही थीं. अन्दर नामित ने मेरी मॉम की पूरी गांड चाटी और मॉम की वैसे ही पोजीशन में अपना लौड़ा उनकी गांड के दरार में पेल दिया. अब तो मॉम को शायद पता भी नहीं चल रहा था, वो इतनी थक चुकी थीं. उधर नामित लगातार उनकी गांड मार रहा था. अब तक मॉम पर से सेक्स की दवा का असर भी खत्म हो चुका था क्योंकि सुबह के 4 बज चुके थे. फिर मैंने नेहा आंटी को वहीं सोफे पर लेटाया और उनकी चूत को चाटने लगा. 
नेहा आंटी भी चुदाई देख कर बहुत उत्तेजित हो गई थीं. उन्होंने तुरंत मेरा लंड पकड़ कर अपने चूत के छेद में टिका लिया और बोलीं- डाल दे बेटा … अब ज्यादा मत तड़पा … अन्दर तेरी मॉम की प्यास तो मेरा बेटा बुझा रहा है. तू मेरी चुदास शांत कर दे. मैंने लंड लगाया और नेहा आंटी को घपाघप धकाधक चोदने लगा. नेहा आंटी भी चीख रही थीं ‘आआह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊउफ़्फ़ … उम्म्म …’ मैंने उनकी गांड को अपने हाथ से उठा लिया और उनकी चूत में और जोर से धक्के मारने लगा. साथ ही मैं उनकी गांड के दोनों पहाड़ मस्ती से मसल रहा था. वैसे तो चूत में धक्के मारते टाइम बूब्स ही मसलते हैं … किंतु मैं थोड़े अलग अंदाज में उनकी गांड मसल रहा था. काफी देर की चुदाई के बाद अब हम दोनों चरम पर आ गए थे और एक दूसरे को होंठों में किस करते हुए बस अपने जोश का मजा ले रहे थे. ‘ऊम्म्म्म … आआह …’ मैंने और जोर से धक्के मारते हुए नेहा आंटी की चूत में ही अपना माल छोड़ दिया. झड़ने के बाद हम दोनों चिपक कर अपनी सांसों को नियंत्रित करते रहे. चुदाई के बाद कुछ देर रुक कर वहां से उठ कर ऊपर रूम में जा कर सो गया. अगली सुबह मुझे मॉम ने उठाया, तो दोपहर हो गयी थी. क्योंकि कल भोर तक चुदाई के बाद ही तो हम सभी सोये थे. मैंने देखा कि मॉम ने कट वाली नइटी पहनी हुई थी, जो घुटनों तक ही आती थी. साफ दिख रहा था कि उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी है. मेरा लंड तो वैसे भी सोकर उठो, तो खड़ा ही रहता है. मॉम को यूं देखकर तो मेरा लंड सीधे फुंफकार मारने लगा था. पर मैंने कुछ नहीं किया. नीचे जा कर देखा तो नामित नहीं था और नेहा आंटी लंच बना रही थीं. ये देख कर मॉम भी उनके साथ किचन में घुस गईं. थोड़ी देर में मैं नहा कर रेडी हुआ. फिर हम तीनों ने लंच किया. मॉम बोलीं- मुझे तो नींद आ रही है. वे ये कह कर सोने चली गईं … क्योंकि कल रात की उनकी नींद बाकी थी और आज रात भी उन्हें मजे करने थे. मैं और नेहा आंटी हाल में बात कर रहे थे. नेहा आंटी भी गजब माल लग रही थीं उन्होंने टी-शर्ट और टाइट लैगीज पहनी हुई थी. उन्होंने भी ब्रा पैंटी नहीं पहनी थी. हम दोनों बैठ कर बात करने लगे. आंटी ने बताया कि उन्होंने मॉम को अभी के खाने में फिर से उत्तेजित करने वाली दवा दे दी है. तो अब 2 घंटे बाद उसका असर शुरू हो जाएगा. उतने में नामित आ गया. उसने मुझे बताया कि यार तेरी मॉम बहुत सेक्सी और हॉट हैं. मैंने उन दोनों को बताया कि मैं मॉम को रंडी बनाने के बाद चोदना चाहता हूँ. उसने बोला- किस टाइप की रंडी? मैंने बताया- जो सेक्स की भूखी हो और किसी का भी लंड ले ले और सब पोजीशन में चुदाई के मजे करे. नामित ने बोला- तू खुल कर बता कि क्या करना चाहता है. तो मैंने बोला- बस तुम लोग मेरा साथ दो. नेहा आंटी बोलीं- हम तो साथ ही हैं तेरे … बेटा, बस तू बोल. देख मेरे तगड़े बेटे ने पहले ही दिन तेरी मॉम की चूत खोल दी … अब तो तू आगे बोल. मैंने उन्हें प्लान समझा दिया और अब प्लान के मुताबिक घर पर सिर्फ मॉम और नामित ही रह गए. मॉम उठ चुकी थीं. मैं और नेहा कुछ कुछ प्लान बना कर एक बार घर से निकल गए. इससे निशा मॉम को लगा कि घर में कोई नहीं, केवल वो और नामित हैं. जबकि हम दोनों ऊपर बालकनी से इन दोनों को देख रहे थे. उसी वक्त मॉम उठ कर बाहर आईं और देखा कि घर में मैं और नेहा नहीं हैं. तो उन्होंने नामित से पूछा- ये दोनों कहां हैं? नामित बोला- विराट तो रेडी होकर निकल गया, उसे कोई काम था, वो कह गया है कि रात में लेट आएगा और मेरी मॉम एक सहेली के यहां गयी हैं. इस प्लानिंग में आगे की कहानी मेरी निशा मॉम की ज़ुबानी सुनिए. नामित ने यह सब बताते हुए ही मुझे कसकर अपनी बांहों में पकड़ लिया और मेरे होंठों को चूसने लगा. मैं भी अब तक दवा के असर से गरम हो चुकी थी. थकान भी दूर हो गई थी, सोकर जो उठी थी. तो मैं भी उसका साथ देने लगी. ‘ऊऊम्म्म … मम्म आआह … उम्म …’ उसने मेरे चूतड़ दबाना शुरू कर दिए. मैं और गरम होती जा रही थी और नामित मेरे मजे लिए जा रहा था. मैं उसे रोकते हुए बोली- नहीं यहां नहीं, केवल रूम में करना … और ऐसे नहीं करना. तब भी नामित मेरी नहीं सुन रहा था उसने वहीं सोफे पर मुझे लिटाया और मेरी चूत में अपनी जीभ घुसेड़ दी. मैं अपनी चूत में उसकी जीभ का अहसास पाते ही तिलमिला उठी. मेरे अन्दर करेंट दौड़ पड़ा और मैंने नामित के सिर को जोर से पकड़ लिया. वो लगातार अपनी जीभ मेरे अन्दर बाहर कर रहा था. मैं कामुक सिसकारियां ले रही थी- अअअअह आहह … बेटा ऊफ़्फ़ … नहीं बेटा यहां नहीं करो! किन्तु यह कहते हुए मैं भी अन्दर से जल रही थी और मेरा कन्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था. उसने और अच्छे से मेरी चूत के बगल में अपनी उंगली घुमानी शुरू कर दी. साथ ही उसकी जीभ बहुत अन्दर से मेरी चूत को साफ कर रही थी. मैं बस स्वर्ग के आनन्द में डूबकर केवल उसके बाल पकड़े हुए मादक सिसकारियां ले रही थी ‘ऊउफ़्फ़ बेटा … अअअहह … ऊऊम्म्म … नहीं! दस मिनट की धुआंधार चूत चटाई के बाद ही मेरा पहली बार माल निकल गया और मैं वहीं सोफे पे आंख बंद करके पड़ी थी. नामित भी उठ कर कहीं चला गया.

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