मकान मालिक की पत्नी रज्जो


मुझे बड़ी उमर की औरतें बहुत पसंद हैं। अक्सर ऐसी औरतें आसानी से नही मिलती।मैं नागपुर गया तो एक बंगले में पेईंग गेस्ट बनकर रहता था। घर के मालिक काफ़ी अच्छे थे और उनकी पत्नी हमेशा अकेली और मायूस रहती थी। उसका नाम रंजना था। जैसा नाम वैसे ही रूप।उपर वाले ने फ़ुर्सत में उसको बनाया था। बला की ख़ूबसूरती थी उसमें। उमर कोई 35/40 होगी। फ़िर भी चेहरे से मदमस्त मदमाती नशीली लगती थी जो कि रस से भरी हुई हो और उनके अंग-अंग से रस छलकता था।उसके बूब्स मानो ब्लाउज मेसे बाहर आने को किया करते थे।उसके पति को उनमें कोई रूचि नहीं थी, ऐसा मुझे अक्सर लगता था। एक दिन रज्जो ने मुझे रात के खाने के लिए आमंत्रित किया। मैंने अपने बिज़ी होने का नाटक किया फिर भी आग्रह करने पर मैं मान गया। दूसरे दिन शाम को मैं जल्दी ही ऑफिस से आ गया और मौक़े का इंतज़ार करने लगा।


रात के करीब साढ़े दस बजे रज्जो ने मुझे खाने के लिए आवाज़ दी। मैंने कहा कि १घंटे में आता हूँ।मैंने रज्जो के लिए एक विस्की का बंफर लेकर उसके पास गया। वहाँ पहुँचते ही मैंने पूछा कि अंकल किधर हैं। इस बात पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं समझ गया कि अब सबकुछ मुझ पर मेहरबान है। उन्होंने मुझे डिनर टेबल की तरफ इशारा कर बैठने को कहा तो मेने विस्कि का बमफर वहा रख दिया।उसने उसे देखते ही। ख़ुद दूसरे कमरे में चली गईं। एक ग्लास लेकर आई और कहने लगी सिर्फ आपके लिए।में समज गया कि रज्जो पिती नहीं।डिनर टेबल कई अलग किसम के पकवानों से सज़ा रखा था। पर दोस्तों मुझे तो कोई और पकवान चाहिए था। मे वो एक पारदर्शी गाउन पहन कर बाहर आए और मेरे सामने की कुर्सी पर बैठ गई।मेने दो पेक पी लिए।और रज्जो को देखता रह गया।
उनको देखकर मेरा पप्पू सलामी के लिए अचानक खड़ा हो गया। अचानक लण्ड खड़ा होने से मुझे बैठने मे दिक्कत होने लगी। ऐसा देखकर रज्जो ने पूछा कि क्या है।
मैंने कहा- कुछ नहीं !

और फिर वो मुस्कुराने लगी और मेरे पीछे आकर खड़ी हो गई और मेरे सिर पर हाथ फेरने लगी, तब उसके बूब्स मेरे पीठ पर चिपक गए। ऐसा करने पर मेरी साँसें तेज हो गईं। मेने भी अपने हाथ बूब्स पर रख दिए। ओर सहलाने लगा ओ मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए उसने अचानक मेरे कानों को भी छू लिया। उसी समय मैंने उसके नाज़ुक हाथों को पकड़ लिया और उन हाथों को अपने होंठों से चूम लिया। ऐसा करते ही उसकी साँसें तेज़ हो गईं, थोड़ी देर में ही कुर्सी से उठा और उसको अपनी बाहों मे भर लिया।

वो भी मुझसे कस कर चिपक गई और फिर मैंने अपने होंठ उनके नर्म होंठों पर रख दिए। उसने मुझे और मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया। मेरे हाथ उनके कबूतरों की तरफ बढ़ गए जो कि सदियों से किसी चाहने वाले के लिए बेताब थे।मैंने जल्दी से उनको आज़ाद किया और मेरे हाथ उनसे खेलने लगे। उसने भी अपने हाथ मेरे पप्पू की तरफ बढ़ाए। मैंने अपने पैंट की ज़िप ओपन कर दिया। ऐसा करते ही मेरा पप्पू उसको सलामी देने के लिए अचानक खड़ा हो गया क्योंकि मैंने अंडरवीयर नहीं पहन रखी थी।उसने मेरे पप्पू की सलामी ली और उसको नीचे झुक कर अपने हाथ में ले लिया और ऐसे चूसने लगी जैसे वो जन्मों की प्यासी हो। मैं भी उनके कबूतरों को दाना खिलाने लगा। थोड़ी ही वक्त में उन्होंने मेरी पैंट नीचे खींच दी और मेरे बदन से पैंट को अलग कर दिया।

अब पप्पू पूरी आज़ाद हुआ उन होंठों का गुलाम हो गया। वह धीरे-धीरे मेरे पप्पू के चमड़े को हिलाने लगी। थोड़ी देर में मुझे ऐसा लगा कि मैं किसी स्वर्ग का आनन्द ले रहा हूं।मेरा पप्पू उसके मुख का स्वाद ले रहा था, अचानक उसने मुझसे कहा कि बेडरूम में चलो।
मुझे भी यही चाहिए था। वहाँ पहुँचते ही मैंने उसके गाउन को उतार दिया और उसके मख़मली शरीर का दीदार करने लगा।

ऐसा करते देख कर उसने मुझसे कहा कि बुद्धू ऐसे ही देखते रहोगे या मुझे कुछ करोगे भी।अब मैं तुम्हारी हूँ और मुझे आत्मा शांत करो।

मैंने उसे अपनी बाँहों में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया और फिर दोनों 69 के आंकड़े मे आ कर एक दूसरे के अंगोको चाटने लगे। मैंने मेरी पूरी जीभ उनकी प्यारी सी पप्पी मे घुसा दी जिससे पूरा शरीर सिहर उठा और उसने मेरे पप्पू को अपने मुख से अलग कर दिया और अजीब क़िस्म की आवाज़ें निकालने लगी। इसके बाद मैं और तेज़ी से उसके पप्पी की पूजा करने लगा।

इसी दौरान वो दो बार झड़ गई और मैंने उसका सारा रस पी लिया। फिर भी रस रिस-रिस कर पप्पी से बाहर आ रहा था। वो मुझे ज़ोर-ज़ोर से गालियाँ देने लगी और कहने लगी की मुझे तृप्त कर।

अब समय आ गया था कि मैं उसकी चेद का मिलन अपने लंड से करवा दूँ। पप्पू को मैंने पप्पी के मुख पर रखने से पहले मेनका के मुख-चोदन का आनंद लिया और फिर पप्पी के मुख पर रख कर धीरे से एक हल्का धक्का दिया ऐसा करने से लुंड थोड़ा अंदर गया चु त टाइट थी, इस वजह से रज्जो दर्द से तिलमिला उठी।

उसी समय मैंने अपने हाथों से रज्जो के कबूतरों को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया और लंड को भी धक्का देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे लंड चू त में समा गया। पूरा अन्दर जाने के बाद रज्जो ने अपनी चिकनी चूतड़ उठा-उठा कर मिलन की खुशियाँ मनाने लगी।

आधे घण्टे तक ऐसा करते रहने के बाद मेरा लंड अपनी मलाई निकालने की तैयारी करने लगा तो मैंने रज्जो को पूछा की वो लुंड की मलाई चू त को खिलाएगी या खुद खाएगी। उसने कहा कि उनको लंड की मलाई खानी है, फिर मैंने मेरे लंड को रज्जो के मुख में डाल दिया और सारी मलाई उनके मुख में आ गई और उसने सारी मलाई एक ही झटके मे चट कर ली।

कुछ समय तक मैं और रज्जो नंगे बदन बिस्तर पर लेटे रहे और आधे घंटे बाद बाथरूम में जाकर साथ मे नहाया और उस दौरान हम साथ में एक दूसरे को चिपक कर सोते रहे। बाद मे साफ हो कर हमने साथ में खाना खाया और फिर साथ में बेडरूम मे चले गये। 

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